आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक
बॉलीवुड मैं बहुत कम मात्रा में देश से जुड़ी फिल्में बनाई जाती हैं जो बनाई जाती हैं वह बिल्कुल भी चलती नहीं है, पैसे कमाने के मामले में उल्ट-सल्ट फिल्म में हजारों करोड़ों रुपए कमा कर ले जाती हैं वर्तमान का ही उदाहरण लेते हैं वीरे दी वेडिंग नाम की एक मूवी आई थी उस फिल्म में कुछ नहीं था। एक चीज थी जो कि लोग अंदर से बहुत पसंद करते हैं वह अश्लीलता के फैन ऐसी पिक्चरों को हजारों करोड़ रुपए कमवा देते हैं, देश से देश भक्ति से जुड़े पिक्चरें लटकी रह जाती है।
एक समय था, जब भारत में निर्मित होने वाली फिल्मों को तीन श्रेणिओं, A, Bऔर C में विभाजित किया जाता था। A श्रेणी में पारिवारिक, B में देशभक्ति, पौराणिक और C में मारधार की फिल्में आदि। पारिवारिक फिल्में निर्मित करने में राजश्री, avm, जेमिनी, प्रसाद प्रोडक्शन्स, और सामाजिक फिल्में बनाने में वी.शान्ताराम, बी. आर. चोपड़ा, रामानन्द सागर, गुलज़ार, राजकपूर, मनोज कुमार आदि के नाम विशेष रूप से लिए जा सकते हैं। समय परिवर्तन के साथ फिल्म निर्माण में भी परिवर्तन आया। पारिवारिक फिल्मों का युग शायद समाप्त ही हो गया है। आज मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता परोसी जा रही है। नारी(नायिका) को कम वस्त्रों में दिखाया जा रहा है। जबकि पूर्व में नायिका को सभ्यता के साथ प्रस्तुत किया जाता था। यह भी सच है कि फिल्मों से ही फैशन जनजीवन में आता है।
इंटरनेट पर मास कैंपेन चलाए जाने के कारण भी देश भक्ति से जुड़ी फिल्मों का चलना नामुमकिन सा हो जाता है, हालांकि कुछ वर्ग के लोगों को यह फिल्में ही पसंद आती हैं और यह इन फिल्मों को अपने लेवल पर खूब अच्छे से प्रमोट भी कर देते हैं। बॉलीवुड से निकली प्रियंका चोपड़ा जब देश से बाहर विदेशों में काम करने गई तब देशवासियों ने उनकी मेहनत व लगन की बहुत प्रशंसा की व हर कदम पर प्रियंका चोपड़ा का साथ दिया।
वर्तमान में प्रियंका चोपड़ा देश से निकलकर विदेश की ही होकर रह गई है, वह एक भी मौका ऐसा नहीं छोड़ती हैं जिसमें वह देश की आलोचना न कर सके, हाल ही में उनके एक विदेशी टीवी सीरीज में उन्होंने भारत देश की आलोचना की है, समझ आता है पैसों के लिए विदेशी जो भी करने को कहेंगे यह ना करना पड़ेगा.. किसी भी इंडस्ट्री में करना पड़ता है
हद तो तब हो गई जब प्रियंका चोपड़ा की एक वीडियो क्लिप सामने आई जिसमें वह किसी आतंकवादी को पकड़ने में मदद करती हैं, उस आतंकवादी को भारतीय घोषित करती हैं वह पाकिस्तान को क्लीन चिट दे देती हैं साथ ही साथ कहती हैं कि भारतीय ऐसे काम पाकिस्तानियों को फसाने के लिए करते हैं, इस सीन ने देश में गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।
पैसों के लिए इंसान कितना ज्यादा गिर सकता है यह प्रियंका चोपड़ा ने आज बता दिया, काश प्रियंका चोपड़ा ISIS की आलोचना करती, दाऊद इब्राहिम की आलोचना करती, पाकिस्तान द्वारा मारे जा रहे हमारे जवानों की आलोचना करती, लेकिन उन्होंने क्या किया? आतंकवादी के गले में रुद्राक्ष पहना दिया। और रुद्राक्ष खींच कर बोली कि यह भारतीय पाकिस्तानियों को फसाने के लिए यह सब करते हैं।
प्रियंका को यह भी नहीं भूलना चाहिए था कि मुंबई हमले में जिन्दा पकडे गए आतंकवादी कसाब के हाथ में भी कलावा बंधा था, जो केवल हिन्दू ही बांधते हैं, कभी कोई मुस्लिम कलावा नहीं बांधता। प्रियंका के इस संवाद और इस पर अभिनय कर उन लोगों की मनोकामना पूरी है, जो इस्लामिक आतंकवाद को हिन्दू आतंकवाद का नाम देने में दिन-रात एक किये हुए हैं।
लेकिन अब सुनने में आ रहा है, कि प्रियंका ने अपने इस अभिनय के लिए माफ़ी है। प्रश्न यह है कि "क्या फिल्म में से इस आपत्तिजनक अंश को निकालने के लिए फिल्म निर्माता को कहेंगी? आपत्तिजनक अंश केवल प्रदर्शित रील से नहीं, अपितु मूल फिल्म से भी निकलना होगा। यदि नहीं फिर माफ़ी किस काम की?
विशुद्ध भारतीय नैन-नक्श, अमेरिकी एक्सेंट वाली अंग्रेज़ी की वजह से गलत जवाब देने के बावजूद प्रियंका चोपड़ा मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने में कामयाब हो गईं। सारा आकाश अब उनका था। दर्जनों फिल्में साइन हुईं। फिल्में सफल भी होने लगीं। पुराने पुरुष मित्र पुराने होने लगे। शाहिद कपूर जैसे नए लोग ज़िन्दगी में आये तो यह भी हुआ कि प्रियंका चोपड़ा के परिचित जब घर आते तो शाहिद कपूर दरवाज़ा खोल कर वेलकम बोला करते थे। बोल्ड-बिंदास हैं अपनी प्रियंका। अपने तन पर ज़्यादा कपड़ों का भी बोझ नहीं लादतीं। 15 साल पहले एक भाजपाई ने प्रियंका की बोल्ड-बिंदास जीवन शैली पर कमेंट कर दिया तो उन्हें राष्ट्रवाद और हिंदुओं से मानो नफरत ही हो गई। वैसे भी शाहरुख कैंप की मेंबरशिप के लिए आपका हिंदू धर्म और राष्ट्रवाद को गाली देना जरूरी होता है। प्रियंका ने यह पॉलिसी समझने में देरी नहीं की।
अमेरिकी टीवी शो क्वांटिको में हिंदुओं के खिलाफ प्रियंका का एपिसोड भी इसी बात का जीता-जागता प्रमाण है। सिर्फ हिंदुओं ही नहीं, उन्होंने अपने देश को भी कलंकित करने में शर्म महसूस नहीं की। उन्हें यह जानकर कुछ भी बुरा नहीं लगा कि जिस कहानी में वो एक्टिंग कर रही हैं, उसमें बताया गया है कि रुद्राक्ष की माला पहनने वाला एक राष्ट्रवादी हिंदू अमेरिका में परमाणु बम से हमला करने की साजिश रच रहा है। वो भी सिर्फ इसलिए ताकि पाकिस्तान और मुसलमानों को बदनाम किया जा सके। इस साजिश के बारे में भारत की सरकार को सबकुछ पता है और वो एक तरह से साजिश की मास्टरमाइंड है। लेकिन प्रियंका ने अपनी बहादुरी से पूरे अमेरिका को बचा लिया। शो में प्रियंका चोपड़ा ने एक डायलॉग भी बोला है, जिसमें वो आतंकवादी की पहचान करते हुए कहती हैं “ये पाकिस्तानी नहीं है। इसने गले में रुद्राक्ष पहना है। ये पाकिस्तानी मुसलमान के गले में नहीं हो सकता। यह भारतीय राष्ट्रवादी है और पाकिस्तान को फंसाने की कोशिश कर रहा है।”
प्रियंका चोपड़ा का रोहिंग्या कैंपों में तब जाना जब ये खबर आई कि उन्होंने सौ से ज्यादा हिंदुओं की गर्दन काटी है और सैकड़ों हिंदू महिलाओं से बलात्कार किया है, अपने आप में बहुत कुछ बताता है। उनका रोहिंग्या को आर्थिक मदद देना, पाकिस्तानियों में बहुत पॉपुलर होना, शाहरुख में प्रियंका के यकीन का एक जीता-जागता सबूत है। उनके पास अब तो अमेरिका की नागरिकता भी है। कोई भी नई हीरोइन तीनों खान कैंपों से हटकर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अपना अस्तित्व नहीं बना सकती। कोई बड़ी बात नहीं है कि प्रियंका चोपड़ा मज़हबे-इस्लाम कबूल कर चुकी हों। आखिर वो बरेली में आला हजरत में चादर जो चढ़ाती रही हैं और उन्हें मालूम है कि जिस धंधे में वो हैं उसमें मुसलमानों का दबदबा रहने वाला है।
बॉलीवुड मैं बहुत कम मात्रा में देश से जुड़ी फिल्में बनाई जाती हैं जो बनाई जाती हैं वह बिल्कुल भी चलती नहीं है, पैसे कमाने के मामले में उल्ट-सल्ट फिल्म में हजारों करोड़ों रुपए कमा कर ले जाती हैं वर्तमान का ही उदाहरण लेते हैं वीरे दी वेडिंग नाम की एक मूवी आई थी उस फिल्म में कुछ नहीं था। एक चीज थी जो कि लोग अंदर से बहुत पसंद करते हैं वह अश्लीलता के फैन ऐसी पिक्चरों को हजारों करोड़ रुपए कमवा देते हैं, देश से देश भक्ति से जुड़े पिक्चरें लटकी रह जाती है।
एक समय था, जब भारत में निर्मित होने वाली फिल्मों को तीन श्रेणिओं, A, Bऔर C में विभाजित किया जाता था। A श्रेणी में पारिवारिक, B में देशभक्ति, पौराणिक और C में मारधार की फिल्में आदि। पारिवारिक फिल्में निर्मित करने में राजश्री, avm, जेमिनी, प्रसाद प्रोडक्शन्स, और सामाजिक फिल्में बनाने में वी.शान्ताराम, बी. आर. चोपड़ा, रामानन्द सागर, गुलज़ार, राजकपूर, मनोज कुमार आदि के नाम विशेष रूप से लिए जा सकते हैं। समय परिवर्तन के साथ फिल्म निर्माण में भी परिवर्तन आया। पारिवारिक फिल्मों का युग शायद समाप्त ही हो गया है। आज मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता परोसी जा रही है। नारी(नायिका) को कम वस्त्रों में दिखाया जा रहा है। जबकि पूर्व में नायिका को सभ्यता के साथ प्रस्तुत किया जाता था। यह भी सच है कि फिल्मों से ही फैशन जनजीवन में आता है।
इंटरनेट पर मास कैंपेन चलाए जाने के कारण भी देश भक्ति से जुड़ी फिल्मों का चलना नामुमकिन सा हो जाता है, हालांकि कुछ वर्ग के लोगों को यह फिल्में ही पसंद आती हैं और यह इन फिल्मों को अपने लेवल पर खूब अच्छे से प्रमोट भी कर देते हैं। बॉलीवुड से निकली प्रियंका चोपड़ा जब देश से बाहर विदेशों में काम करने गई तब देशवासियों ने उनकी मेहनत व लगन की बहुत प्रशंसा की व हर कदम पर प्रियंका चोपड़ा का साथ दिया।
वर्तमान में प्रियंका चोपड़ा देश से निकलकर विदेश की ही होकर रह गई है, वह एक भी मौका ऐसा नहीं छोड़ती हैं जिसमें वह देश की आलोचना न कर सके, हाल ही में उनके एक विदेशी टीवी सीरीज में उन्होंने भारत देश की आलोचना की है, समझ आता है पैसों के लिए विदेशी जो भी करने को कहेंगे यह ना करना पड़ेगा.. किसी भी इंडस्ट्री में करना पड़ता है
हद तो तब हो गई जब प्रियंका चोपड़ा की एक वीडियो क्लिप सामने आई जिसमें वह किसी आतंकवादी को पकड़ने में मदद करती हैं, उस आतंकवादी को भारतीय घोषित करती हैं वह पाकिस्तान को क्लीन चिट दे देती हैं साथ ही साथ कहती हैं कि भारतीय ऐसे काम पाकिस्तानियों को फसाने के लिए करते हैं, इस सीन ने देश में गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।
पैसों के लिए इंसान कितना ज्यादा गिर सकता है यह प्रियंका चोपड़ा ने आज बता दिया, काश प्रियंका चोपड़ा ISIS की आलोचना करती, दाऊद इब्राहिम की आलोचना करती, पाकिस्तान द्वारा मारे जा रहे हमारे जवानों की आलोचना करती, लेकिन उन्होंने क्या किया? आतंकवादी के गले में रुद्राक्ष पहना दिया। और रुद्राक्ष खींच कर बोली कि यह भारतीय पाकिस्तानियों को फसाने के लिए यह सब करते हैं।
प्रियंका को यह भी नहीं भूलना चाहिए था कि मुंबई हमले में जिन्दा पकडे गए आतंकवादी कसाब के हाथ में भी कलावा बंधा था, जो केवल हिन्दू ही बांधते हैं, कभी कोई मुस्लिम कलावा नहीं बांधता। प्रियंका के इस संवाद और इस पर अभिनय कर उन लोगों की मनोकामना पूरी है, जो इस्लामिक आतंकवाद को हिन्दू आतंकवाद का नाम देने में दिन-रात एक किये हुए हैं।
लेकिन अब सुनने में आ रहा है, कि प्रियंका ने अपने इस अभिनय के लिए माफ़ी है। प्रश्न यह है कि "क्या फिल्म में से इस आपत्तिजनक अंश को निकालने के लिए फिल्म निर्माता को कहेंगी? आपत्तिजनक अंश केवल प्रदर्शित रील से नहीं, अपितु मूल फिल्म से भी निकलना होगा। यदि नहीं फिर माफ़ी किस काम की?
आप भी यह वीडियो देखें और फैसला करें, क्या ऐसे बेशर्म, पैसों के भूखे
कलाकारों को हमारी सराहना की जरूरत है? देश का नाम ऊंचा करने से तो गए, देश को और देश में रुद्राक्ष पहनने वाले लोगों को आतंकवादी घोषित करने में लगे हुए हैं।
क्या है प्रियंका की पृष्ठभूमि
डॉक्टर कर्नल अशोक चोपड़ा जो प्रियंका के पिता थे, आर्मी से प्री-मेच्योर रिटायर्ड थे। वो कस्तूरी अस्पताल नाम से नर्सिंग होम चलाते थे। पत्नी भी आर्मी से रिटायर डॉक्टर थीं। अस्पताल इस बात के लिए मशहूर था कि आसपास के गांवों के झोला छाप डॉक्टर अपने मरीजों का केस खराब होने पर उनके यहां ही रेफर करते थे, बदले में उन्हें मोटा कमीशन मिला करता था। पास ही कर्नल अशोक चोपड़ा, मधु चोपड़ा, प्रियंका चोपड़ा और उनके छोटे भाई का घर था। परिवार रानीखेत के पास बाबा हेड़ा खान का भक्त था। मज़े की बात यह है कि प्रियंका चोपड़ा का पोर्टफोलियो फोटो सेशन बरेली में ही हुआ था। इसे करने वाले मेरे ही मित्र थे, जो सूरी स्टूडियो चलाया करते थे। चोपड़ा निवास में आज भी एक पुराना नौकर रहता है। कस्तूरी अस्पताल बिक चुका है। प्रियंका की नानी एक ईसाई थीं, जिन्होंने एक हिंदू से शादी की थी, लेकिन मरते दम तक वो ईसाई ही रहीं। विशुद्ध भारतीय नैन-नक्श, अमेरिकी एक्सेंट वाली अंग्रेज़ी की वजह से गलत जवाब देने के बावजूद प्रियंका चोपड़ा मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने में कामयाब हो गईं। सारा आकाश अब उनका था। दर्जनों फिल्में साइन हुईं। फिल्में सफल भी होने लगीं। पुराने पुरुष मित्र पुराने होने लगे। शाहिद कपूर जैसे नए लोग ज़िन्दगी में आये तो यह भी हुआ कि प्रियंका चोपड़ा के परिचित जब घर आते तो शाहिद कपूर दरवाज़ा खोल कर वेलकम बोला करते थे। बोल्ड-बिंदास हैं अपनी प्रियंका। अपने तन पर ज़्यादा कपड़ों का भी बोझ नहीं लादतीं। 15 साल पहले एक भाजपाई ने प्रियंका की बोल्ड-बिंदास जीवन शैली पर कमेंट कर दिया तो उन्हें राष्ट्रवाद और हिंदुओं से मानो नफरत ही हो गई। वैसे भी शाहरुख कैंप की मेंबरशिप के लिए आपका हिंदू धर्म और राष्ट्रवाद को गाली देना जरूरी होता है। प्रियंका ने यह पॉलिसी समझने में देरी नहीं की।
अमेरिकी टीवी शो क्वांटिको में हिंदुओं के खिलाफ प्रियंका का एपिसोड भी इसी बात का जीता-जागता प्रमाण है। सिर्फ हिंदुओं ही नहीं, उन्होंने अपने देश को भी कलंकित करने में शर्म महसूस नहीं की। उन्हें यह जानकर कुछ भी बुरा नहीं लगा कि जिस कहानी में वो एक्टिंग कर रही हैं, उसमें बताया गया है कि रुद्राक्ष की माला पहनने वाला एक राष्ट्रवादी हिंदू अमेरिका में परमाणु बम से हमला करने की साजिश रच रहा है। वो भी सिर्फ इसलिए ताकि पाकिस्तान और मुसलमानों को बदनाम किया जा सके। इस साजिश के बारे में भारत की सरकार को सबकुछ पता है और वो एक तरह से साजिश की मास्टरमाइंड है। लेकिन प्रियंका ने अपनी बहादुरी से पूरे अमेरिका को बचा लिया। शो में प्रियंका चोपड़ा ने एक डायलॉग भी बोला है, जिसमें वो आतंकवादी की पहचान करते हुए कहती हैं “ये पाकिस्तानी नहीं है। इसने गले में रुद्राक्ष पहना है। ये पाकिस्तानी मुसलमान के गले में नहीं हो सकता। यह भारतीय राष्ट्रवादी है और पाकिस्तान को फंसाने की कोशिश कर रहा है।”
प्रियंका चोपड़ा का रोहिंग्या कैंपों में तब जाना जब ये खबर आई कि उन्होंने सौ से ज्यादा हिंदुओं की गर्दन काटी है और सैकड़ों हिंदू महिलाओं से बलात्कार किया है, अपने आप में बहुत कुछ बताता है। उनका रोहिंग्या को आर्थिक मदद देना, पाकिस्तानियों में बहुत पॉपुलर होना, शाहरुख में प्रियंका के यकीन का एक जीता-जागता सबूत है। उनके पास अब तो अमेरिका की नागरिकता भी है। कोई भी नई हीरोइन तीनों खान कैंपों से हटकर मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अपना अस्तित्व नहीं बना सकती। कोई बड़ी बात नहीं है कि प्रियंका चोपड़ा मज़हबे-इस्लाम कबूल कर चुकी हों। आखिर वो बरेली में आला हजरत में चादर जो चढ़ाती रही हैं और उन्हें मालूम है कि जिस धंधे में वो हैं उसमें मुसलमानों का दबदबा रहने वाला है।
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