8 सिविल लाइन्स पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, राजस्थान द्वारा आयोजित क्षत्राणी शपथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद क्षत्राणियों ने समाज सेवा की शपथ ली। घूंघट में रहने वाली क्षत्राणियों का आज क्रांतिकारी रूप देखकर मैं कहना चाहूंगी कि यह सभी समाजों के लिए प्रेरणा लेने का अच्छा उदाहरण है और हमारे लिए गौरव का अवसर है। अगर महिलाएं घर से बाहर निकलकर समाज को बदलने की ठान लें तो फिर उन्हें बदलाव लाने से कोई नहीं रोक सकता।प्रदेश का कण-कण इस बात का साक्षी है कि क्षत्रियों पर जब भी विपत्ति आई है तब क्षत्राणियों ने संकट से मुक्त होने के लिए न केवल उनका साथ दिया बल्कि आगे होकर मार्ग दर्शन भी किया है। देश-प्रदेश के इतिहास और संस्कृति के निर्माण में क्षत्राणियों का अनूठा व शौर्यपूर्ण योगदान रहा है जिसे कोई नकार नहीं सकता। आमतौर पर क्षत्राणियां घर से बाहर नहीं निकलती थीं, लेकिन वर्तमान में मौजूद कुरीतियों को दूर करने के लिए उनका बाहर निकालना काफी जरूरी है। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को देखकर मैं कह सकती हूं कि आज एक नये युग की शुरूआत हुई है। महिलाएं घर को संवारने के साथ-साथ समाज, देश और प्रदेश को भी एक सूत्र में पिरोने का काम करती हैं।
मैं इस अवसर पर बताना चाहूंगी कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया जी ने सदैव क्षत्राणी धर्म का पालन करते हुए समाज हित में काम किया। राजमाता ने क्षत्राणियों को आगे बढ़ाने का जो छोटा सा पौधा उस समय लगाया था वो आज वट वृक्ष के रूप में बन चुका है। राजमाता जी की मेहनत का ही नतीजा है कि आज इतनी बड़ी संख्या में क्षत्राणियां समाज व प्रदेश के विकास की जिम्मेदारी को निभाने के लिए आगे आई हैं। जब मैं छोटी थी तब से उन्हें समाज के प्रति समर्पित भाव से काम करते हुए देखा है। समाज के प्रति सच्ची निष्ठा को देखकर मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। वहीं पूर्व उपराष्ट्रपति आदरणीय भैरोंसिंह शेखावत जी से मुझे राजनीति में बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उनका हमेशा से कहना था कि राजनीति में सेवा भाव सर्वोपरि होना चाहिए और आज मैं उन्हीं के बताए मार्ग पर निरंतर अग्रसर हूं।
मैं सभी क्षत्राणियों से अपील करती हूं कि वे अपने समाज को मजबूत बनाए रखने के साथ ही अन्य समाजों को भी सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। 36 की 36 कौमों का कल्याण करने के लिए हम सभी को कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा। क्षत्राणियों को शिक्षित बनकर अपने पैरों पर खड़ा होने की जरूरत है ताकि प्रदेश के विकास को गति मिल सके। साथ ही वे अपने बच्चों को भी पढ़ा-लिखाकर सुयोग्य बनाएं ताकि वे अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े हो सकें। तभी हम एक सशक्त समाज और एक सशक्त प्रदेश का निर्माण कर पायेंगे।
आपने मुझे जो चुनरी ओढ़ाई है वो भले ही वजह में हल्की है, लेकिन इससे एक बड़ी जिम्मेदारी का अहसास होता है। आप सभी को विश्वास दिलाना चाहती हूं कि मैं कभी भी आपके विश्वास को डगमगाने नहीं दूंगी। साथ ही मैं समाज के सभी बड़े-बुजुर्गों से भी अपील करती हूं कि वे समाज सेवा के इस संकल्प में अपनी बहू-बेटियों का सहयोग करें और उनके स्वाभिमान व इज्जत की रक्षा में सदैव डटकर खड़े रहें।प्रदेश में मौजूद 60 साल की समस्याओं को 5 साल में दूर नहीं किया जा सकता है, लेकिन हमारी सरकार ने इतने कम समय में ही दिन-रात काम कर प्रदेश की दशा और दिशा बदली है। वित्तीय संकट होने के बावजूद भी प्रदेश के विकास में हमने कोई कसर नहीं छोड़ी है। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहती हूं कि आपका प्यार और आशीर्वाद इसी तरह मिलता रहा तो विकास का यह सफर यूं ही जारी रहेगा और हम ऊंचाईयों को छूते हुए विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे।
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