आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर जारी
विवाद अभी भारत में थमा नहीं है लेकिन लाहौर पहुंचे कांग्रेस के निलंबित नेता मणिशंकर अय्यर अपने बयानों से इसे और तूल देते नजर आ रहे हैं। अय्यर ने मई 7 को मोहम्मद अली जिन्ना की तुलना महात्मा गांधी से की। अय्यर इसके पहले लाहौर में एक कार्यक्रम के दौरान जिन्ना की प्रशंसा करते हुए उन्हें कायदे आजम कहा।
अय्यर ने कथित रूप से कहा कि 'सरकार के गुंडों ने कायदे आजम जिन्ना की तस्वीर एएमयू के हॉल से उतरवा दिया।' अपने इस बयान के बाद अय्यर विवादों में आ गए। बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के हॉल में जिन्ना की तस्वीर मिलने पर विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, मामला तूल पकड़ने पर एएमयू प्रशासन ने जिन्ना की तस्वीर वहां से हटा ली।
भारत में अभी यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा है कि अय्यर पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना पर बयान देकर राजनीतिक विवाद पैदा करने से नहीं चूक रहे। अय्यर ने लाहौर में कहा, 'मैंने जिन्ना को कायदे आजम के नाम से बुलाया। मेरे ऐसा कहने पर भारत के टीवी एंकर्स यह पूछ रहे हैं कि एक भारतीय पाकिस्तान जाकर जिन्ना के बारे में ऐसा कैसे कह सकता है। मैं ऐसे कई पाकिस्तानियों को जानता हूं जो एमके गांधी को महात्मा गांधी बुलाते हैं। क्या उनका ऐसा कहना पाकिस्तान में उन्हें देशद्रोही बनाता है।'
I referred to Jinnah as the Quaid e Azam & the hysterical Indian TV anchors are demanding to know how an Indian can go to Pakistan and say this. I know many Pakistanis who called MK Gandhi as Mahatma Gandhi, does that make them unpatriotic Pakistanis?: M S Aiyar in Lahore
Present situation in India is an aberration, In 1923 a man called VD Savarkar invented a word which doesn't exist in any religious text, 'Hindutva'. So first proponent of the two nation theory was ideological guru of those who are currently in power in India: MA Aiyar in Lahore
एक कहावत है कि आयु वृद्धि के साथ व्यक्ति या तो बुद्धिमान बन अपने अनुजों के साथ अपने अनुभव एवं ज्ञान साझा करता है या फिर उसकी अक्ल सठिया जाती है। लगता है, अय्यर द्वारा पाकिस्तान जाकर भारत विरोधी बातें सुन लगता है, बढ़ती आयु के साथ इनकी अक्ल सठिया रही है। समझ में नहीं आता कि भारत विरोधी अभियान चलाने के लिए अय्यर को पाकिस्तान ही क्यों जाना पड़ता है? फिर हिन्दू ब्राह्मण होकर हिन्दुओं के ही विरुद्ध विष उगलना, कुछ सन्देह उत्पन्न करता है। कभी मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए पाकिस्तान से सहायता करने को कहते हैं और अब वीर सावरकर पर हिन्दू-मुस्लिम विवाद मंढ मुस्लिम लीग को साफ बचा गए। अय्यर साहब अब इतना भी बता दीजिए कि आप और सावरकर पैदा हुए थे, क्या था दोनों का धर्म?
फिर कश्मीरी नेता सुशील पंडित ने ठीक ही कहा था कि "पाक की सबसे ताकत है भारत में मौजूद करोड़ों पाकिस्तानी और सैकड़ों मिनी पाकिस्तान", जो यह भी सिद्ध करता है कि भारत मुगलों का गुलाम इन्हीं जयचंदियों के कारण बना था। लेकिन जयचन्दी यह भूल गए कि अपने स्वार्थ के लिए हिन्दू सम्राटों से गद्दारी कर जो मुग़ल शासकों को गुप्त समर्थन देने से सबसे अधिक दुर्गति इन्हीं जयचन्दों की हुई थी।
इसी सन्दर्भ में अवलोकन करें:--
अय्यर द्वारा पाकिस्तान जाकर भारत विरोधी अभियान चलने पर स्मरण आता है, रामजन्मभूमि मन्दिर विवाद को समाप्त करने जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री वी.पी.सिंह द्वारा सर्वदलीय समिति गठित कर अयोध्या भेज, शायद एक सप्ताह में अपनी रपट देने को कहा था, उस समिति में सम्मिलित समस्त हिन्दू, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई सभी ने पूजा अर्चना की, सिवाए सयैद शहाबुद्दीन और मणिशंकर अय्यर के। और वह रपट भी एक सप्ताह की बजाए तीन/चार सप्ताह बीत जाने के बाद प्रधानमंत्री सिंह को सुपुर्द की। क्योकि गिराए गए ढांचे को देख कोई मंदबुद्धि भी उसे मंदिर नहीं कह सकने का साहस कर सकता था। खम्बों पर घड़ियाल यानि घण्टे केवल मन्दिरों में ही होते हैं, मस्जिद में नहीं।
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