आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के त्रिशंकु परिणामों ने से सियासी समीकरण और ज्यादा उलझ गए हैं। भले ही भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आती दिख रही है लेकिन बहुमत के जादुई आंकडे से पीछे हैं। वहीं कांग्रेस और जेडीएस क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर है, लेकिन इस बीच कांग्रेस ने किंगमेकर की भूमिका में आई जेडीएस को सरकार बनाने का ऑफर देकर समर्थन देने की घोषणा कर दी है।
पंरपरा के मुताबिक राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं ऐसे में राज्यपाल वजूभाई वाला की स्थिति काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। वजूभाई वाला को पीएम मोदी का काफी करीबी माना जाता है। वजूभाई वाला गुजरात विधानसभा के स्पीकर रहने के साथ-साथ राज्य सरकार में वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। 2002 में उन्होंने पीएम मोदी के लिए राजकोट (पश्चिम) की सीट छोड़ दी थी।
नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अब राज्यपाल होने के नाते वजूभाई वाला किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। आपको याद दिला दें कि गोवा और मणिपुर में कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी लेकिन बावजूद इसके राज्यपाल ने वहां उन्हें सरकार बनाने का मौका नहीं दिया था। अब करीब-करीब ऐसी ही स्थिति कर्नाटक में है।
वजूभाई वाला के राजनैतिक करियर पर नजर डालें तो पता चलता है कि 79 साल के वजूभाई 1971 में जनसंघ के सदस्य बने। 80 के दशक में वो राजकोट के मेयर भी रहे जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे वो उन्हें कुछ समय के लिए गुजरात का स्पीकर भी बनाया गया। वो गुजरात भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। जब गुजरात में आनंदीबेन पटेल की जगह मुख्यमंत्री पद के विकल्पों पर विचार किया जा रहा था तो उनका नाम भी सामने आया था।
भाजपा ने पेश किया दावा
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के अधिकतर रुझान आ चुके हैं। भाजपा भले ही 105 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आ रही है लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 112 से अभी वह दूर है। इन सबके बीच भाजपा ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश भी कर दिया है। मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि चूंकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है इसलिए उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया है और वो सदन में बहुमत पेश करेंगे।
इसी बीच कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने का प्रस्ताव सामने रखा है जिसके बार जेडीएस के एचडी कुमारास्वामी भी राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंचे हैं। उन्होंने भी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राज्यपाल से मुलाकात करने से पहले येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस जनमत का अपमान कर रही है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस के पांच साल से कुशासन को नकार दिया है। चामुंडेश्वरी से सिद्धारमैया चुनाव हार चुके हैं। लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया है। हम कांग्रेस की आलोचना करते हैं। अमित शाह और मोदी जी के नेतृत्व में लोगों ने कांग्रेस मुक्त भारत के लिए मतदान किया है।
अवलोकन करें:--
त्रिशंकु विधान सभा
कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के ज्यादातर सीटों पर बीजेपी, कांग्रेस से काफी आगे निकल गई है। हालांकि बीजेपी बहुमत से दूर है। 12 मई को राज्य की 224 विधानसभा सीटों में से 222 सीटों पर 72.13 फीसदी वोटिंग हुई थी। बेंगलुरू की राज राजेश्वरी नगर सीट के लिए मतदान स्थगित कर दिया गया, जो अब 28 मई को होगा, जबकि जयनगर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के निधन के चलते मतदान टाल दिया गया था।
बीजेपी के बहुमत से दूर रहने पर कांग्रेस और जेडीएस को संभावनाएं दिख गई है। दोनों के बीच बातचीत पूरी हो गई है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिलती दिख रही हैं। कांग्रेस ने जेडीएस के सामने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे जेडीएस ने स्वीकार कर लिया। इस बीच अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कर्नाटक की स्थिति की जानकारी दी है।
एचडी कुमारस्वामी ने राज्यपाल से मांगा मिलने का समय। उन्होंने लिखा कि हमने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के समर्थन को स्वीकार कर लिया है।
येदियुरप्पा बोले- मैं भारतीय जनता पार्टी को यह जनादेश देने के लिए कर्नाटक के लोगों का धन्यवाद करता हूं। कांग्रेस पीछे के दरवाजे से सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
जनता दल के कद्दावर नेता रहे और प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे एचडी देवगौड़ा ने साल 1999 में जनता दल से अलग होकर जनता दल (सेक्यूलर) की नींव रखी थी. बता दें कि साल 1996 में कांग्रेस के समर्थन से ही देवगौड़ा 10 महीने के लिए देश के प्रधानमंत्री बने थे.
अब प्रश्न यह है कि आखिर दिल्ली विधान सभा में आम आदमी पार्टी के समर्थन न माँगने पर भी कांग्रेस ने बिन माँगे अपना समर्थन देने की तर्ज़ पर कर्नाटक में भी वही किया,भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए?
इतना ही नहीं, कांग्रेस में इस कदर डर बढ़ गया है कि अपने विजयी विधायकों को कर्नाटक से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर रखने की योजना बना रही है, क्योकि तीसरे नम्बर वाली पार्टी को बिन माँगे समर्थन देने पर लिंगायत समाज से विजयी कांग्रेस विधायक कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध शुरू कर दिया हैं।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के त्रिशंकु परिणामों ने से सियासी समीकरण और ज्यादा उलझ गए हैं। भले ही भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आती दिख रही है लेकिन बहुमत के जादुई आंकडे से पीछे हैं। वहीं कांग्रेस और जेडीएस क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर है, लेकिन इस बीच कांग्रेस ने किंगमेकर की भूमिका में आई जेडीएस को सरकार बनाने का ऑफर देकर समर्थन देने की घोषणा कर दी है।
पंरपरा के मुताबिक राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं ऐसे में राज्यपाल वजूभाई वाला की स्थिति काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। वजूभाई वाला को पीएम मोदी का काफी करीबी माना जाता है। वजूभाई वाला गुजरात विधानसभा के स्पीकर रहने के साथ-साथ राज्य सरकार में वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। 2002 में उन्होंने पीएम मोदी के लिए राजकोट (पश्चिम) की सीट छोड़ दी थी।
नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अब राज्यपाल होने के नाते वजूभाई वाला किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। आपको याद दिला दें कि गोवा और मणिपुर में कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी लेकिन बावजूद इसके राज्यपाल ने वहां उन्हें सरकार बनाने का मौका नहीं दिया था। अब करीब-करीब ऐसी ही स्थिति कर्नाटक में है।
वजूभाई वाला के राजनैतिक करियर पर नजर डालें तो पता चलता है कि 79 साल के वजूभाई 1971 में जनसंघ के सदस्य बने। 80 के दशक में वो राजकोट के मेयर भी रहे जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे वो उन्हें कुछ समय के लिए गुजरात का स्पीकर भी बनाया गया। वो गुजरात भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। जब गुजरात में आनंदीबेन पटेल की जगह मुख्यमंत्री पद के विकल्पों पर विचार किया जा रहा था तो उनका नाम भी सामने आया था।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के अधिकतर रुझान आ चुके हैं। भाजपा भले ही 105 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आ रही है लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 112 से अभी वह दूर है। इन सबके बीच भाजपा ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश भी कर दिया है। मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि चूंकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है इसलिए उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया है और वो सदन में बहुमत पेश करेंगे।
राज्य में कुल सीटें 224 हैं। 2 सीटों पर मतदान बाकी है। बहुमत के लिए 113 जरूरी।
| पार्टी | 2018 के रुझान | 2013 | अंतर |
| कांग्रेस | 78 | 122 | - 44 |
| भाजपा | 104 | 40 | +64 |
| जेडीएस | 38 | 40 | -2 |
| अन्य | 02 | 22 | -18 |
उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस के पांच साल से कुशासन को नकार दिया है। चामुंडेश्वरी से सिद्धारमैया चुनाव हार चुके हैं। लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया है। हम कांग्रेस की आलोचना करते हैं। अमित शाह और मोदी जी के नेतृत्व में लोगों ने कांग्रेस मुक्त भारत के लिए मतदान किया है।
अवलोकन करें:--
त्रिशंकु विधान सभा
कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के ज्यादातर सीटों पर बीजेपी, कांग्रेस से काफी आगे निकल गई है। हालांकि बीजेपी बहुमत से दूर है। 12 मई को राज्य की 224 विधानसभा सीटों में से 222 सीटों पर 72.13 फीसदी वोटिंग हुई थी। बेंगलुरू की राज राजेश्वरी नगर सीट के लिए मतदान स्थगित कर दिया गया, जो अब 28 मई को होगा, जबकि जयनगर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के निधन के चलते मतदान टाल दिया गया था।
बीजेपी के बहुमत से दूर रहने पर कांग्रेस और जेडीएस को संभावनाएं दिख गई है। दोनों के बीच बातचीत पूरी हो गई है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिलती दिख रही हैं। कांग्रेस ने जेडीएस के सामने कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे जेडीएस ने स्वीकार कर लिया। इस बीच अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कर्नाटक की स्थिति की जानकारी दी है।
एचडी कुमारस्वामी ने राज्यपाल से मांगा मिलने का समय। उन्होंने लिखा कि हमने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के समर्थन को स्वीकार कर लिया है।
JD(S)'s HD Kumaraswamy seeks appointment from the Governor of #Karnataka this evening, writes we have accepted Congress's support to form the Government. #KarnatakaElections2018
जनता दल के कद्दावर नेता रहे और प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे एचडी देवगौड़ा ने साल 1999 में जनता दल से अलग होकर जनता दल (सेक्यूलर) की नींव रखी थी. बता दें कि साल 1996 में कांग्रेस के समर्थन से ही देवगौड़ा 10 महीने के लिए देश के प्रधानमंत्री बने थे.
भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट शेयर में बढ़ोत्तरी हुई। कांग्रेस के वोट शेयर में 1.3% के इजाफा के बाद भी सीटें 122 से घटकर करीब आधी रह गईंं।
| पार्टी | 2018 में वोट शेयर | 2013 में वोट शेयर | अंतर |
| कांग्रेस | 37.9% | 36.6% | + 1.3% |
| भाजपा | 36.2% | 19.9% | +16.3% |
| जेडीएस | 18.4% | 20.2% | -1.8% |
| अन्य | 7.5% | 23.3% | -15.8% |
बीजेपी की मदद से सीएम बने थे कुमारस्वामी
दूसरी तरफ देखें तो देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी बीजेपी के करीब रहे हैं. साल 2004 में कांग्रेस के साथ सरकार बना चुकी जेडीएस ने साल 2006 में कांग्रेस का साथ छोड़ बीजेपी से हाथ मिला लिया. इसके पीछे कुमारस्वामी के मन में सीएम पद की कुर्सी थी. बीजेपी से समझौते के तहत जेडीएस और बीजेपी का 20-20 महीने का सीएम तह हुआ. कुमारस्वामी जनवरी 2006 में कर्नाटक के सीएम की कुर्सी पर पहुंच गए.बीजेपी को दे चुके हैं झटका
कूमारस्वामी राजनीति करने से यहीं नहीं रुके. साल 2007 में सत्ता बीजेपी को सौंपने की जगह उन्होंने इस्तीफा दे दिया. ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. एक के बाद एक बदले समीकरण में जेडीएस ने एक बार फिर बीजेपी को समर्थन दे दिया. लेकिन 7 दिन में ही ये गठबंधन टूट गया.सेक्यूलर राजनीति के लिए बनाया गठबंधन
जेडीएस अभी बसपा, लेफ्ट फ्रंट और ओवैसी के साथ गठबंधन के साथ चल रही है. इससे पहले भी साल 2015 में जेडीएस ने सपा, इनेलो, जेडीयू, आरजेडी और सजपा के साथ मिलकर बीजेपी विरोध में एक मोर्चा बनाया था. हालांकि बाद में आरजेडी-जेडीयू अलग हो गए और ये गठबंधन चल नहीं पाया. जनता दल से पीएम बने देवगौड़ा ने जेडीएस को देश के अन्य हिस्सों में भी फैला रखा है. केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट का हिस्सा है।अब प्रश्न यह है कि आखिर दिल्ली विधान सभा में आम आदमी पार्टी के समर्थन न माँगने पर भी कांग्रेस ने बिन माँगे अपना समर्थन देने की तर्ज़ पर कर्नाटक में भी वही किया,भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए?
इतना ही नहीं, कांग्रेस में इस कदर डर बढ़ गया है कि अपने विजयी विधायकों को कर्नाटक से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर रखने की योजना बना रही है, क्योकि तीसरे नम्बर वाली पार्टी को बिन माँगे समर्थन देने पर लिंगायत समाज से विजयी कांग्रेस विधायक कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध शुरू कर दिया हैं।
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