कर्नाटक में चुनाव नतीजों के बाद सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी सबसे ज्यादा 104 सीटें लेकर सरकार बनाने का दावा ठोंक रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने बिना देर किए जिस तरह से जेडीएस को समर्थन का ऐलान किया, इससे पूरा सियासी गणित ही बदल गया। कांग्रेस के इस दांव ने कर्नाटक की सियासत में नया मोड़ ला दिया। कांग्रेस ने जिस तरह से ये दांव चला सभी के मन में एक ही सवाल उठा कि आखिर इस रणनीति का असली सूत्रधार कौन है? सत्ता के गलियारों में मायावती के नाम के साथ-साथ प्रियंका गाँधी का भी नाम लेकर, शायद प्रियंका समर्थक, उनको राजनीति के अखाड़े में लाने की भूमिका निभा रहे हों। जैसाकि, कर्नाटक चुनाव घोषित होने से पूर्व ही त्रिशंकु विधान सभा की कल्पना की जा रही थी, परिणाम आने पर वही कल्पना वास्तविकता में परिवर्तित हो गयी।
आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन कांग्रेस के जेडीएस को समर्थन देने का पूरा प्लान ना तो कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का है और ना ही कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी का। जानिए, आखिर किसने दिया जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी को सीएम पद का ऑफर देने का आइडिया।
अवलोकन करिये:--
कर्नाटक चुनाव के दौरान जहां कांग्रेस ने जेडीएस को बीजेपी की 'बी' टीम करार दिया था, वहीं चुनाव नतीजे आते ही कांग्रेस ने तुरंत जेडीएस को बिना शर्त समर्थन का ऐलान कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नहीं चाहते थे कि कांग्रेस इस तरह से जेडीएस के साथ जाए, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बहन प्रियंका गांधी वाड्रा ने ये सलाह राहुल गांधी को दी। प्रियंका गांधी की ये सलाह वाकई जबरदस्त रही और उनके इस अकेले दांव ने कर्नाटक का पूरा सियासी समीकरण ही बदल कर रख दिया।
जैसाकि सर्वविदित है कि प्रियंका ने कभी अमेठी और राय बरेली से बाहर कहीं पार्टी के लिए प्रचार किया। इसलिए इस समाचार पर संशय होता है। संभव है कि प्रियंका के समर्थकों ने मायावती के प्रयास को प्रियंका के नाम कर, राहुल का उत्तरदायी तैयार करने का भी प्रयत्न हो सकता है।
प्रियंका गांधी ने सबसे पहले दी जेडीएस की सपोर्ट करने की सलाह
जानकारी के मुताबिक प्रियंका गांधी ने ही सलाह दी की कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में जेडीएस का समर्थन करे। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी आइडिया दिया की मुख्यमंत्री का पद एचडी कुमारस्वामी को ऑफर किया जाए। हालांकि कांग्रेस के रणनीतिकारों का प्लान कुछ और ही था। कांग्रेस की योजना थी कि अगर पार्टी 100 सीटों के पार जाएगी तो आगे की पूरी रणनीति सिद्धारमैया बनाएंगे। ये ऊपर छोड़ दिया जाएगा कि आखिर वो क्या कदम उठाएंगे। वहीं अगर पार्टी 100 सीटों से कम पर रह जाती है तो कांग्रेस आलाकमान इस मुद्दे पर आखिरी फैसला लेगा।
राहुल नहीं थे जेडीएस को समर्थन करने के पक्ष में
गोवा और मणिपुर में हुए चुनाव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस इस बार कोई गलती नहीं करना चाहती थी। यही वजह है कि आलाकमान ने पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत को पहले ही कर्नाटक भेज दिया था। जैसे ही नतीजे आने पर कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर नजर आई, कांग्रेस नेताओं में बातचीत का दौर शुरू हो गया।
प्रियंका गांधी के दांव ने बदल दिया कर्नाटक का सियासी गणित
जानकारी के मुताबिक कर्नाटक में जेडीएस को समर्थन देने के लिए सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मनाया गया। इसके बाद सोनिया गांधी ने तुरंत ही एचडी देवगौड़ा और एचडी कुमारस्वामी से फोन पर संपर्क किया। देवगौड़ा की एक ही मांग थी कि उनका बेटा मुख्यमंत्री बने। उनकी इस मांग को कांग्रेस की ओर से मान लिया गया। इसके बाद कांग्रेस-जेडीएस नेताओं की बैठक का दौर शुरू हुआ। कुमारस्वामी की ओर से राज्यपाल को पत्र दिया गया, जिसमें उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया।

Comments