आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
अभी कर्नाटक में संपन्न हुए विधान सभा चुनावों में अपने सभी 28 उम्मीदवारों की जमानत जब्त करवाने उपरान्त राजस्थान में होने वाले विधान सभा चुनावों पर गिद्द की नज़र रखे हुए हैं। इन 28 उम्मीदवारों को लगभग 21 हज़ार वोट मिले। केजरीवाल पार्टी ने समझा जैसे दिल्ली में बिल्ली भागों छीका टूटा वाली युक्ति हर प्रदेश में काम आएगी? दिल्ली से बाहर केजरीवाल पार्टी को जो भी वोट मिलते हैं, वह पार्टी को नहीं, बल्कि उम्मीदवार के व्यक्तिगत प्रभाव पर मिलते हैं।
खैर, राजस्थान विधानसभा चुनाव निकट आते देख आम आदमी पार्टी ने भी प्रदेश में सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए अगले दो माह में अर्थात 15 जुलाई तक मतदान केंद्रों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति कर देगी। इसके बाद मतदान केन्द्रों के प्रभारियों को अपनी टीम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
अभी कर्नाटक में संपन्न हुए विधान सभा चुनावों में अपने सभी 28 उम्मीदवारों की जमानत जब्त करवाने उपरान्त राजस्थान में होने वाले विधान सभा चुनावों पर गिद्द की नज़र रखे हुए हैं। इन 28 उम्मीदवारों को लगभग 21 हज़ार वोट मिले। केजरीवाल पार्टी ने समझा जैसे दिल्ली में बिल्ली भागों छीका टूटा वाली युक्ति हर प्रदेश में काम आएगी? दिल्ली से बाहर केजरीवाल पार्टी को जो भी वोट मिलते हैं, वह पार्टी को नहीं, बल्कि उम्मीदवार के व्यक्तिगत प्रभाव पर मिलते हैं।
खैर, राजस्थान विधानसभा चुनाव निकट आते देख आम आदमी पार्टी ने भी प्रदेश में सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए अगले दो माह में अर्थात 15 जुलाई तक मतदान केंद्रों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति कर देगी। इसके बाद मतदान केन्द्रों के प्रभारियों को अपनी टीम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
मतदाताओं को मतदान केन्द्र तक लाकर पार्टी के पक्ष में मतदान कराने का काम प्रभारियों का होगा। इसके साथ ही पार्टी के अग्रिम संगठन (छात्र युवा संघर्ष समिति ) सीवाईएसएस को चुनाव के दौरान सोशल मीडिया की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। चुनावी तैयारियों को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्रियों और पार्टी के नेताओं के मई के अंतिम सप्ताह से नियमित दौरे होंगे।
अवलोकन करें:--
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चुनाव की तैयारियों के तहत ही दिल्ली सरकार के मंत्री एवं आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रदेशाध्यक्ष गोपाल राय ने अलवर में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अगामी चुनाव के लिए जीत के मंत्र दिए। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गोपाल राय ने कहा कि जीत के लिए पैसा नहीं जुनून चाहिए, उन्होंने कहा कि हम पैसा से जीतना में काँग्रेस और बीजेपी से नहीं जीत सकते। क्यों कि हमारे पास लूट का पैसा नहीं है। हम कार्यकर्ता से पैसे से चुनाव लड़ते हैं।लेकिन हम चुनाव संकल्प से लड़ेंगे और दुनिया की कोई ताकत हमें हरा नहीं सकती। गोपाल राय ने कहा कि चुनावों के लिए मात्र 6 महीने शेष रह गए हैं। हमें दो महीनो के भीतर अपनी ताकत दस गुना बढ़ानी होगी ।
स्वराज इंडिया भी कुछ ऐसा ही रहा हाल
29 सीटों में से पार्टी ने बेंगलूरू में 18 सीटों पर और राज्य के अन्य हिस्सों में 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। योगेन्द्र यादव की अगुवाई वाली स्वराज इंडिया भी राज्य में 11 सीटों पर मैदान में थी। इसके प्रत्याशी दर्शन पुत्तन्नैयाह को मेलुकोटे सीट पर 73,779 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।
श्री रंगापटना से वेंकटेश सी एस को 1942, सी वी रमण नगर से पार्टी के उम्मीदवार मोहन दसारी को 1926 और सरवांग नगर से पृथ्वी रेड्डी 1755 पार्टी के एक हजार से अधिक वोट हासिल करने वालों में शामिल थे। धारवाड़ से एस एफ पाटिल (153), दावणगोरे साऊथ से राघवेंद्र के एल (157), बेलगाम दक्षिण से सदानंद आर मैत्री (180) और गुलबगार उत्तर से संजीव कुमार करीकल (198) तो 200 वोट हासिल करने में भी विफल रहे।
केजरीवाल के नाम पर मांगे गए वोट
कर्नाटक चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 222 सीटों में से 28 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इस चुनाव में दिल्ली के विकास मॉडल का सपना वहां की जनता को दिखाया गया था। पार्टी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम पर वोट मांगे थे।
टूट नहीं रहा ‘आप’ की हार का सिलसिला
पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केजरीवाल के नाम का खूब इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार हमारा मुख्य मुद्दा है। मगर जनता ने आम आदमी पार्टी को सिरे से नकार दिया है। इस चुनाव में सभी 28 प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 21 हजार वोट मिले हैं। वैसे केजरीवाल की लगातार हार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्वोत्तर के राज्यों में भी पार्टी की लुटिया डूबी है।
केजरीवाल की पार्टी को नकार दिया
नगालैंड और मेघालय में भी जनता ने केजरीवाल की पार्टी को नकार दिया था। इन राज्यों में इस दल को बहुत कम वोट मिले थे। पूर्व मंत्री व ‘आप’ के नाराज विधायक कपिल मिश्रा की मानें तो ‘आप’ मेघालय में केवल छह सीटों पर ही प्रत्याशी उतार सकी थी। ‘आप’ को सभी छह सीटों को मिलाकर केवल 1140 वोट मिले। इससे अधिक नोटा पर वोट पड़ गए। वहीं नगालैंड में भी ‘आप’ को कुल मिलाकर 7355 वोट मिले।
उत्तर प्रदेश में हारे
इतना ही नहीं इससे पहले 27 फरवरी को पंजाब के लुधियाना में नगर निगम के 95 वार्ड के हुए चुनाव में भी ‘आप’ बुरी तरह औंधे मुंह गिरी थी। केवल एक सीट पर ही जीत हासिल हो सकी थी। नवंबर 2017 में हुए उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव के समय भी ‘आप’ हार गई।
गुजरात में मिली हार
गुजरात में ‘आप’ को एक भी सीट नहीं मिली। इससे पहले ‘आप’ पंजाब विधानसभा चुना हार चुकी है। गोवा विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर जमानत ही जब्त हो गई थी। कपिल मिश्रा ने फिर कहा कि जब तक केजरीवाल अपनी गलतियों में सुधार नहीं करेंगे, आम आदमी पार्टी का बेड़ा गर्क होता रहेगा। केजरीवाल में सुधार होना संभव नहीं है और पार्टी का उठना भी असंभव है।
29 सीटों में से पार्टी ने बेंगलूरू में 18 सीटों पर और राज्य के अन्य हिस्सों में 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। योगेन्द्र यादव की अगुवाई वाली स्वराज इंडिया भी राज्य में 11 सीटों पर मैदान में थी। इसके प्रत्याशी दर्शन पुत्तन्नैयाह को मेलुकोटे सीट पर 73,779 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।
श्री रंगापटना से वेंकटेश सी एस को 1942, सी वी रमण नगर से पार्टी के उम्मीदवार मोहन दसारी को 1926 और सरवांग नगर से पृथ्वी रेड्डी 1755 पार्टी के एक हजार से अधिक वोट हासिल करने वालों में शामिल थे। धारवाड़ से एस एफ पाटिल (153), दावणगोरे साऊथ से राघवेंद्र के एल (157), बेलगाम दक्षिण से सदानंद आर मैत्री (180) और गुलबगार उत्तर से संजीव कुमार करीकल (198) तो 200 वोट हासिल करने में भी विफल रहे।

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