इसी बीच कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस अपने-अपने विधायकों के साथ बैठक करने में लगी हुई है। बेंगलुरु के एक पांच सितारा होटल में जेडीएस विधायक दल की बैठक मे पार्टी के दो विधायक राजा वेंकटप्पा नायक और वेंकट राव नाडागौड़ा नदारद नजर आ रहे। अहम बैठकों से विधायकों के नदारद होने के बाद राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
इसी तरह कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी 78 में से 66 विधायक ही पहुंचे हैं। बैठक से 12 विधायक नदारद हैं, जिसके बाद आशंका जताई जा रही वह किसी अन्य पार्टी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि पार्टी के एमबी पाटिल का कहना है कि कांग्रेस के विधायक उनके साथ हैं।
खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस और जेडीएस विधायकों की नाराजगी का दौर शुरू हो गया है। हालांकि सत्ता को हासिल करने में जुटी कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और और सिद्धारमैया ने कहा कि सभी विधायक जेडीएस के साथ हैं और उनका पार्टी पर भरोसा कायम है। उन्होंने इस बात का भी दावा किया है कि जेडीएस पूरी तरह से कांग्रेस के साथ खड़ी है.
कांग्रेस नेता रामालिंगा रेड्डी ने कहा कि हमें हमारे सभी विधायकों पर भरोसा है. बीजेपी हमारे विधायकों को पाने की पूरी कोशिश में लगी है. उन्हें लोकतंत्र में विश्वास नहीं है, बीजेपी बस सत्ता को हासिल करने में लगी हुई है.
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कांग्रेस बेशक से दावे कर रही हो, लेकिन सूत्रों का कहना है कि कुमारस्वामी को सीएम बनाए जाने का कुछ लिंगायत विधायक विरोध कर रहे है. सूत्रों का कहना है कि विधायक पार्टी ना छोड़ दे इसके लिए सोनिया गांधी उनसे बात करने में लगी हुईं हैं.
चुनाव से पहले कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन नहीं था और अब हो गया, जिससे कुछ नेता नाराज हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि जेडीएस के कुछ नेता बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो स्थितियां बदलेंगी।
देखा जाये तो जेडीएस और कांग्रेस के इस अनैतिक भरत-मिलाप ने दोनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं को मझधार में छोड़ दिया है। खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर, हर हाल में मरण खरबूजे का है। ठीक वही स्थिति कांग्रेस की होती दिख रही है और भाजपा का रास्ता साफ हो रहा है। क्या कांग्रेस को नहीं मालूम था कि उसके कितने लिंगायत जीत कर आये हैं, और भाजपा का भावी मुख्यमंत्री भी उसी समुदाय से है?
कांग्रेस-JDS डील में पेंच: कुमारस्वामी को CM तो बड़े बेटे को डिप्टी सीएम देखना चाहते हैं देवगौड़ा!
कर्नाटक का 'नाटक' खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। सत्ता के गलियारों से खबर आ रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस अध्यक्ष एचडी देवगौड़ा अपने बड़े बेटे एचडी रावन्ना को कर्नाटक का उपमुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने आगे बढ़कर जेडीएस को ना सिर्फ समर्थन किया था, बल्कि कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद भी ऑफर किया था देवगौड़ा के इस मांग के बाद जेडीएस और कांग्रेस पार्टी के बीच पेच फंसता दिख रहा है। दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि देवगौड़ा कांग्रेस से बदला लेने के मूड में हैं कि किस तरह राजीव गाँधी ने अचानक समर्थन वापस लेकर उन्हें प्रधानमन्त्री पद से हटा दिया था। वह समय वास्तव में देवगौड़ा के लिए बहुत ही लज्जित करने वाला था। फिर रामजन्मभूमि विवाद को हमेशा के लिए समाप्त होता देख, तुरन्त तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार को गिरा दिया था। इन कटु अनुभवों को देखते हुए, उनके पुत्र द्वारा पिछली सरकार की कारगुजारी पर कार्यवाही करने पर कांग्रेस ने फिर से पार्टी को अपमानित किया, तो शायद कांग्रेस के साथ उनकी भी कर्नाटक से खटिया न खड़ी कर दी जाये।दूसरी तरफ कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी बहुमत से महज सात सीट दूर है. विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद येदियुरप्पा ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है.
इससे पहले कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर उस समय भी आई, कांग्रेस की बैठक से 25 विधायक नदारद रहे. वहीं नवनिर्वाचित एमबी पाटिल कांग्रेस की बैठक छोड़कर बाहर आ गए थे. एमबी पाटिल ने दावा किया है कि कांग्रेस के और भी छह विधायक उनके साथ हैं. जरूरत पड़ने पर वे छह विधायक भी कांग्रेस छोड़ देंगे. उधर, जेडीएस की बैठक में भी 2 नवनिर्वाचित विधायक नहीं पहुंचे हैं. जेडीएस की बैठक में नहीं पहुंचने वाले विधायकों में राजा वेकंटप्पा और वेंकट राव हैं.
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