कर्नाटक की राजनीति में चल रहा सियासी तूफान बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद अब लगभग खत्म हो गया है। ढाई दिन के अंदर ही बीजेपी के सीएम बीएस येदियुरप्पा को फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा।
अब साफ हो गया है कि कांग्रेस और JDS मिलकर अब कर्नाटक में सरकार बनाएगी। कर्नाटक की इस जीत का श्रेय अगर किसी एक शख्स को दिया जाए तो वो हैं कांग्रेस के डीके शिवकुमार। डीके शिवकुमार की वजह से बीजेपी आलाकमान के सारे तिकड़म यहां फेल हो गए।
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कर्नाटक में जैसे ही त्रिशंकु सरकार के रुझान दिखे कांग्रेस ने फौरन वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद को काम पर लगा दिया। गुलाम नबी आजाद ने बिना देरी किए अपने खेमे का जायजा लिया और फिर कुमारस्वामी से बात की। इससे पहले बीजेपी को खेल खेलती गुलाम नबी आजाद ने काम कर दिया। कुमारस्वामी से पर्दे के पीछे बात हुई और दोनों पार्टियां (कांग्रेस और जेडीएस) साथ आ गईं। लेकिन इस डील में दोनों पार्टियों के बड़े नेता साथ आए थे, मामला तो विधायकों पर आकर टिक गया था। और इन्हें बचाकर रखना बेहद जरूरी था वर्ना कब इनकी ''अंतरात्मा'' जाग जाती और कांग्रेस का खेल बिगड़ जाता। इसलिए कांग्रेस ने इस मनीबैग की जिम्मदारी डीके शिवकुमार के हाथ सौंप दी गई। डीके शिवकुमार ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और 'संकटमोचक' बनकर सामने आए।
कर्नाटक के पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के लिए सबसे बड़े अस्त्र साबित हुए डीके शिवकुमार ने कांग्रेस दो विधायकों को लेकर बयान दिया। डीके शिवकुमार ने कहा कि प्रताप गौड़ा पहुंच चुके हैं और विधायक की शपथ लेंगे। शिवकुमार ने कहा कि इसके बाद वो कांग्रेस के लिए वोट करेंगे, वो कांग्रेस के साथ धोखा नहीं करेंगे। शिवकुमार ने कहा कि पाटिल और आनंद सिंह बाद में बताएंगे कि किसने उन्हें बंधक बनाया उन्होंने कहा की दोनों विधायक शपथ ग्रहण करने के बाद कांग्रेस के लिए वोट करेंगे।
डीके शिवकुमार सिद्धारमैया सरकार में ऊर्जामंत्री थे। इनका रसूख इस बात से जाना जा सकता है कि 2017 में जब गुजरात में राज्यसभा चुनाव चल रहे थे, तब अहमद पटेल की सीट खतरे में पड़ गई थी। उस समय अपने 44 विधायक बचाने के लिए कांग्रेस ने उन्हें कर्नाटक भेज दिया था। कर्नाटक में ये सारे कांग्रेसी विधायक डीके शिवकुमार के ही ईगलटन रिजॉर्ट में रुके थे, जो बेंगलुरु में है। इन्हें कांग्रेस का ‘संकटमोचक' माना जाता है।
डीके शिवकुमार ने इस बार भी कांग्रेस की सरकार बनाने में जमकर मदद की। निर्दलीय विधायकों से बातचीत करके उन्हें अपने पाले में ले आए। कांग्रेस के 78 विधायकों को इस बार भी इन्हीं के ईगलटन रिजॉर्ट में रोका गया। हालांकि, 17 मई की सुबह खबर आई कि कांग्रेस के दो विधायक रिजॉर्ट से फरार हो गए हैं। इनमें से एक विधायक प्रताप गौड़ा पाटिल हैं, जिन्होंने चुनाव से पहले अपनी संपत्ति 40 लाख रुपए बताई थी। 2013 के चुनाव में ये सबसे कम पैसे वाले कैंडिडेट थे।
डीके शिवकुमार कर्नाटक के सबसे अमीर कांग्रेसी उम्मीदवारों में से एक है। पिछले साल इन्हीं के विभिन्न ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी। इस दौरान करोड़ों रुपए नगद और लगभग उतनी ही कीमत के जेवरात बरामद हुए थे। पिछले साल अगस्त में की गई इस छापेमारी की गूंज साल के अंत तक चलती रही।
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