इस फीस की रकम का इस्तेमाल रेलवे स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं देने के लिए किया जाएगा। एक अधिकारी ने कहा कि 'हम एसी क्लास, चेयर कार टिकट और वो टिकट जो 500 रुपए से ज्यादा के हैं उन पर 5 से 10 रुपए चार्ज लेने की योजना बना रहे हैं। स्टेशनों को सजाया जा रहा है और वहां एस्केलेटर्स की सुविधा लाई जा रही है। इनको मेंटेंन करने के लिए हमें पैसा चाहिए।'
अधिकारियों ने कहा कि अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं किया गया है। मिंट के मुताबिक रेल मंत्रालय ने भी इस बारे में भेजे ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया है। पिछले साल सरकार ने एलान किया था कि वो 400 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण करेगी। बाद में इसको बढ़ाकर 600 स्टेशनों तक ले जाया जाएगी। ये प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे कैबिनेट की मंजूरी के 1 साल बाद भी रेल डेवलपमेंट अथॉरिटी को नियुक्त नहीं कर पाया है।
अप्रैल 2017 में कैबिनेट ने रेलवे के रेगुलेटर को बनाने की मंजूरी दे दी थी। किराया तय करने का काम इसी रेगुलेटर को दिया गया है। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि टैरिफ में बदलाव तब तक संभव नहीं है जब तक अथॉरिटी नहीं बन जाती। इसलिए संकट के समय यूजर डेवलपमेंट फीस लगाना व्यवहार्य विकल्प है। रेलवे को बजट में 1.48 लाख करोड़ रुपए का बजट दिया गया था। एक्सपर्ट के मुताबिक ये एक तरह से आय बढ़ाने के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर किराया बढ़ाना है।
आखिर रेलवे बजट पेश ही क्यों जाता है? बजट बनाने और उसके प्रकाशन पर खर्चा, क्यों किया जाता है, ये खर्चा? बजट में कोई किराया न बढ़ाकर सरकार और मन्त्री द्वारा खूब प्रशंसा बटोरी जाती है, लेकिन बाद में किसी न किसी रूप में बढ़ोतरी कर दी जाती हैं। मोदी सरकार के ही कार्यकाल में दो महीने पहले रिजर्वेशन करवाने पर यात्रा करने पर गाड़ी में वसूली की गयी। ऐसा एक बार नहीं तीन बार हुआ है।
तत्काल में इतनी सीटें बढ़ा दीं, कि यात्री अधिक तत्काल शुल्क होने के कारण मजबूरी में ही तत्काल लेते हैं। एक बार तो राजधानी में वेटिंग में 8वां नंबर, यात्रा से दो दिन पूर्व सुबह तक प्रतीक्षा नंबर 5 होते-होते शाम तक सीट कन्फर्म। हैदराबाद से यात्रा शुरू की बोगी में 5 यात्रियों के साथ और दिल्ली पहुँचते-पहुँचते यात्री रह गए केवल 2, अब प्रश्न यह होता है कि जब गाड़ी में इतनी सीटें खाली थीं, फिर वेटिंग में नंबर क्यों? यह स्थिति केवल उस बोगी की थी, जिसमे मै स्वयं यात्रा कर रहा था, यही स्थिति साथ वाली बोगियों की भी थी। दूसरे शब्दों में तीन बोगियों में लगभग 30/32 यात्री होंगे। रेल मन्त्री और मंत्रालय बताए वातानुकूलित तीन बोगियों में कुल कितनी सीटें होती हैं? और लगभग 30/32 यात्री, फिर भी वेटिंग?
संभव है, ज्यादा से ज्यादा सीटें तत्काल में रखो, रेलवे की कमाई बढ़ेगी की मंशा से ऐसा किया जा रहा हो। लेकिन यहाँ तो उल्टे नुकसान ही हो रहा है।
स्वामी विवेकानन्द का कहना था कि कभी उपदेशक पर मत जाओ, बल्कि उसके उपदेशों को अपनाओ। लालू यादव का किसी न किसी कारण लाख विरोध किया जाए, लेकिन उनकी अच्छाइयों पर चिन्तन करना भी जरुरी है। हाँ, उनके द्वारा स्लीपिंग सीटें जिस तरह से बढ़ाई गयीं, वह जरूर निंदनीय था। परन्तु लालू यादव ने रेल मंत्री रहते एक बहुत अच्छी नीति अपनाई थी, यदि प्रथम श्रेणी में सीटें खाली हैं, तो वेटिंग को उसमे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के हस्तांतरित कर दिया जाए। खाली बोगी जाने से अच्छा रेलवे को कुछ कमाई हो। लेकिन उनके पदमुक्त होने पर इस नीति को रेलवे ने भी त्याग दिया। उदहारण,दिल्ली से हैदराबाद जाते यदि मथुरा, आगरा या भोपाल तक किसी का आरक्षण नहीं है, तो वेटिंग सूची में जो इन स्थानों पर जाने वाले यात्री हैं, उनको प्रथम श्रेणी में हस्तांतरण करना। यह कोई सुनी-सुनाई बात नहीं, मेरे ही बेटे ने दो बार हैदराबाद से दिल्ली तक प्रथम श्रेणी में सफर किया है।
पहले जो भी किराया बढ़ाना होता था, बजट में ही बढ़ा दिया जाता था, लेकिन अब कुछ वर्षों से जनता को भ्रमित करने के लिए बजट पेश किया जाता है, कोई किराया न बढ़ने पर जनता खुश, सरकार ने सहानुभूति बटोर ली और बाद में कोई बहाना कर किराया बढ़ा दिया जाता है।
संभव है, ज्यादा से ज्यादा सीटें तत्काल में रखो, रेलवे की कमाई बढ़ेगी की मंशा से ऐसा किया जा रहा हो। लेकिन यहाँ तो उल्टे नुकसान ही हो रहा है।
स्वामी विवेकानन्द का कहना था कि कभी उपदेशक पर मत जाओ, बल्कि उसके उपदेशों को अपनाओ। लालू यादव का किसी न किसी कारण लाख विरोध किया जाए, लेकिन उनकी अच्छाइयों पर चिन्तन करना भी जरुरी है। हाँ, उनके द्वारा स्लीपिंग सीटें जिस तरह से बढ़ाई गयीं, वह जरूर निंदनीय था। परन्तु लालू यादव ने रेल मंत्री रहते एक बहुत अच्छी नीति अपनाई थी, यदि प्रथम श्रेणी में सीटें खाली हैं, तो वेटिंग को उसमे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के हस्तांतरित कर दिया जाए। खाली बोगी जाने से अच्छा रेलवे को कुछ कमाई हो। लेकिन उनके पदमुक्त होने पर इस नीति को रेलवे ने भी त्याग दिया। उदहारण,दिल्ली से हैदराबाद जाते यदि मथुरा, आगरा या भोपाल तक किसी का आरक्षण नहीं है, तो वेटिंग सूची में जो इन स्थानों पर जाने वाले यात्री हैं, उनको प्रथम श्रेणी में हस्तांतरण करना। यह कोई सुनी-सुनाई बात नहीं, मेरे ही बेटे ने दो बार हैदराबाद से दिल्ली तक प्रथम श्रेणी में सफर किया है।
पहले जो भी किराया बढ़ाना होता था, बजट में ही बढ़ा दिया जाता था, लेकिन अब कुछ वर्षों से जनता को भ्रमित करने के लिए बजट पेश किया जाता है, कोई किराया न बढ़ने पर जनता खुश, सरकार ने सहानुभूति बटोर ली और बाद में कोई बहाना कर किराया बढ़ा दिया जाता है।
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