कर्नाटक में हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा जारी है। इस बीच बड़ी खबर ये है कि सुबह 9 बजे(मई 17) बी एस येदियुरप्पा मुख्यमन्त्री पद की शपथ लेंगे।
देर शाम सामने आए घटनाक्रम में राज्यपाल की ओर से बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का मौका देने की बात सामने आई। उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 21 मई तक का समय दिया गया है।
उधर, इस मामले पर कर्नाटक में मौजूद पार्टी के सीनियर नेता अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल पर बीजेपी अध्यक्ष और पीएम का दबाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला दबाव में काम कर रहे हैं। गहलोत ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में राज्य सभा चुनाव में मिली हार का बदला लेने की भावना से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुमत कांग्रेस के साथ है तो इस लिहाज से उन्हें ही सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।
कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिदंबरम ने कहा कि राज्यपाल को कानूनसम्मत कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुमत होने के बावजूद हमें सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया। हमने राज्यपाल से मिलकर उन्हें विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी सौंपी थी। हमने इसके साथ ही उन्होंने गोवा के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की कॉपी भी दी थी, जो कि कानून भी है। हमें उम्मीद है कि कानून को नहीं बदला जाएगा।
कांग्रेसी नेता विवेक तन्खा ने कहा कि मुझे लगता है कि बीजेपी को पोचिंग का मौका मिल रहा है। राज्यपाल को सिद्धांतों के आधार पर फैसला करना चाहिए। इस दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि मन की बात अब धन की बात हो गई है। संविधान का इतना पतन पहले कभी नहीं हुआ। कर्नाटक का नाटक, इसका एक छोटा सा प्रतीक है।
उधर कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जहां करीब साढ़े तीन घंटे तक चली ऐतिहासिक मिडनाइट सुनवाई के बाद दोनों को झटका लगा है। कर्नाटक में सरकार बनाने की रेस में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी को राहत देते हुए बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में सरकार के शपथ ग्रहण समारोह करने की इजाजत दे दी है. कांग्रेस और जेडीएस खेमे की ओर से बुधवार देर रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद विशेष तौर से कोर्ट खुलवाया गया. तीन जजों की बेंच में पूरी रात बहस हुई, जिसके बाद सुबह करीब 5.30 कोर्ट ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है कि वह राज्यपाल के फैसले पर रोक लगा दें. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी से कहा है कि वह गुरुवार को अपने विधायकों की लिस्ट कोर्ट में पेश करें. शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे दोबारा सुनवाई करेगी. कोर्ट ने साफ कर दिया कि वो आज सुबह नौ बजे होने वाले बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण को नहीं रोकेगा।
उधर, इस मामले पर कर्नाटक में मौजूद पार्टी के सीनियर नेता अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यपाल पर बीजेपी अध्यक्ष और पीएम का दबाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला दबाव में काम कर रहे हैं। गहलोत ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में राज्य सभा चुनाव में मिली हार का बदला लेने की भावना से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुमत कांग्रेस के साथ है तो इस लिहाज से उन्हें ही सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।
कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिदंबरम ने कहा कि राज्यपाल को कानूनसम्मत कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुमत होने के बावजूद हमें सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया। हमने राज्यपाल से मिलकर उन्हें विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी सौंपी थी। हमने इसके साथ ही उन्होंने गोवा के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की कॉपी भी दी थी, जो कि कानून भी है। हमें उम्मीद है कि कानून को नहीं बदला जाएगा।
कांग्रेसी नेता विवेक तन्खा ने कहा कि मुझे लगता है कि बीजेपी को पोचिंग का मौका मिल रहा है। राज्यपाल को सिद्धांतों के आधार पर फैसला करना चाहिए। इस दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि मन की बात अब धन की बात हो गई है। संविधान का इतना पतन पहले कभी नहीं हुआ। कर्नाटक का नाटक, इसका एक छोटा सा प्रतीक है।
उधर कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जहां करीब साढ़े तीन घंटे तक चली ऐतिहासिक मिडनाइट सुनवाई के बाद दोनों को झटका लगा है। कर्नाटक में सरकार बनाने की रेस में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी को राहत देते हुए बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में सरकार के शपथ ग्रहण समारोह करने की इजाजत दे दी है. कांग्रेस और जेडीएस खेमे की ओर से बुधवार देर रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद विशेष तौर से कोर्ट खुलवाया गया. तीन जजों की बेंच में पूरी रात बहस हुई, जिसके बाद सुबह करीब 5.30 कोर्ट ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है कि वह राज्यपाल के फैसले पर रोक लगा दें. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी से कहा है कि वह गुरुवार को अपने विधायकों की लिस्ट कोर्ट में पेश करें. शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे दोबारा सुनवाई करेगी. कोर्ट ने साफ कर दिया कि वो आज सुबह नौ बजे होने वाले बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण को नहीं रोकेगा।
आधी रात के बाद करीब साढ़े तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कांग्रेस के खिलाफ फैसला सुनाया। इस बेंच में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस सीकरी और जस्टिस बोबडे शामिल थे।
कोर्ट ने साफ कर दिया कि वो येदियुरप्पा की शपथ को नहीं रोकेगा। हालांकि कोर्ट कल सुबह साढ़े दस बजे फिर से इस मामले पर सुनवाई करेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि सुनवाई से पहले कोर्ट के सामने दोनों पक्षों को समर्थन पत्र पेश करना होगा। बता दें कि मई 16 की रात को राज्यपाल वजुबाला भाई ने सबसे बड़ी पार्टी के नेता येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया था जिसके खिलाफ कांग्रेस और जेडीएस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आधी रात को ही सुनवाई की मांग की।
बेंगलुरु राजभवन में होगा शपथ ग्रहण
सुप्रीम कोर्ट की ओर से राहत मिलने के बाद बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में बीजेपी सरकार की बेंगुलरु स्थित राजभवन में शपथ लेगी. राज्यपाल वजुभाई वाला मुख्यमंत्री सहित मंत्रीपरिषद के सदस्यों को शपथ दिलाएंगे. तय कार्यक्रम के तहत शुक्रवार सुबह नौ से 10 बजे के बीच बीएस येदियुरप्पा और उनके मंत्री परिषद के सदस्य शपथ लेंगे. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए राजभवन को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. दरअसल, बीजेपी के सदस्य जब सरकार की शपथ लेंगे उसी दौरान कांग्रेस और जेडीस के विधायक राजभवन के बाहर धरना प्रदर्शन देंगे. धरना प्रदर्शन करने के लिए कांग्रेस के विधायक राजभवन की ओर निकल चुके हैं.
जेडीएस और कांग्रेस ने राज्यपाल को 117 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा है. इसमें 78 कांग्रेस, 37 जेडीएस, एक बसपा और एक निर्दलीय विधायक के हस्ताक्षर हैं. आपको बता दें कि कर्नाटक में 222 सीटों पर मतदान हुआ था, इस हिसाब से बहुमत के लिए 112 विधायकों का समर्थन ही चाहिए. जबकि बीजेपी के पास सिर्फ 104 विधायक हैं.
सुप्रीम कोर्ट की ओर से राहत मिलने के बाद बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में बीजेपी सरकार की बेंगुलरु स्थित राजभवन में शपथ लेगी. राज्यपाल वजुभाई वाला मुख्यमंत्री सहित मंत्रीपरिषद के सदस्यों को शपथ दिलाएंगे. तय कार्यक्रम के तहत शुक्रवार सुबह नौ से 10 बजे के बीच बीएस येदियुरप्पा और उनके मंत्री परिषद के सदस्य शपथ लेंगे. किसी भी स्थिति से निपटने के लिए राजभवन को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. दरअसल, बीजेपी के सदस्य जब सरकार की शपथ लेंगे उसी दौरान कांग्रेस और जेडीस के विधायक राजभवन के बाहर धरना प्रदर्शन देंगे. धरना प्रदर्शन करने के लिए कांग्रेस के विधायक राजभवन की ओर निकल चुके हैं.
जेडीएस और कांग्रेस ने राज्यपाल को 117 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा है. इसमें 78 कांग्रेस, 37 जेडीएस, एक बसपा और एक निर्दलीय विधायक के हस्ताक्षर हैं. आपको बता दें कि कर्नाटक में 222 सीटों पर मतदान हुआ था, इस हिसाब से बहुमत के लिए 112 विधायकों का समर्थन ही चाहिए. जबकि बीजेपी के पास सिर्फ 104 विधायक हैं.
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