आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
ज्योतिषशास्त्र और कई पुराण हमेशा से कहते आए हैं कि आपकी सेहत और सुख संपत्ति में भोजन और बर्तन का बड़ा महत्व है। कुछ महीनों में खास पत्तों पर भी भोजन करने की बात कही गई है।
वर्तमान में विज्ञान भी अपने आधार पर कहने लगा है कि खाने के बर्तनों से आपको गंभीर रोग हो सकता है और धन का नुकसान। इसलिए खाने से पहले अपने बर्तनों के बारे में जान लीजिए कि वह आपको बीमार और गरीब तो नहीं बना रहा है।
गैस पर सिकी रोटी हानिकारक
जब से देश में रसोई गैस प्रचलन में आई है, यह चूल्हे से निकलने वाली गैस से कहीं अधिक घातक है। रोटी में जो हल्कापन और स्वाद चूल्हे या अंगीठी पर कोयले की आँच में सिकी रोटी में होता था, आज गैस पर सिकी रोटी में नहीं। गैस पर रोटी हमेशा तवे पर ही पकानी चाहिए, न कि तवे को हटाकर सीधे गैस की लपटों पर। गैस की लपटों पर सिकी रोटी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
कैंसर होने की आशंका
गैस प्रचलन होने पर गैस की बचत के लिए हमेशा गैस पर हल्के ही बर्तन को प्रयोग करने की सलाह दी जाती है, जिस कारण लगभग हर घर में ऐल्मूनियम बर्तनों का प्रयोग हो रहा है। जबकि ऐल्युमिनियम का बर्तन राहु के प्रभाव में आता है। इसमें भोजन बनाने और खाने से कैंसर रोग की आशंका रहती है।
गैस प्रचलन होने पर गैस की बचत के लिए हमेशा गैस पर हल्के ही बर्तन को प्रयोग करने की सलाह दी जाती है, जिस कारण लगभग हर घर में ऐल्मूनियम बर्तनों का प्रयोग हो रहा है। जबकि ऐल्युमिनियम का बर्तन राहु के प्रभाव में आता है। इसमें भोजन बनाने और खाने से कैंसर रोग की आशंका रहती है।
ऐल्युमिनियम फॉइल का राहु से संबंध
रोटी अथवा अन्य पदार्थ को गर्म रखने के लिए ऐल्युमिनियम फॉइल का प्रचलन भी इन दिनों काफी बढ गया है। ज्योतिष की तरह विज्ञान भी कहता है यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे भूलने की बीमारी का खतरा रहता है। राहु को ज्योतिष में बुद्धि को भ्रमित करने वाला माना गया है।
रोटी अथवा अन्य पदार्थ को गर्म रखने के लिए ऐल्युमिनियम फॉइल का प्रचलन भी इन दिनों काफी बढ गया है। ज्योतिष की तरह विज्ञान भी कहता है यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे भूलने की बीमारी का खतरा रहता है। राहु को ज्योतिष में बुद्धि को भ्रमित करने वाला माना गया है।
टूटे बर्तन घर में न रखें
बुजुर्गों कहते थे, कि कभी फटा कपडा, और जबरदस्ती पानी नहीं बहाना चाहिए एवं नल टपकता नहीं रहना चाहिए, जिस घर में इस तरह के काम होंगे, वह स्वयं दरिद्री को निमन्त्रण देते हैं। कपडा फट गया है,तो सिलकर ही पहनना चाहिए। ठीक उसी तरह टूटे हुए बर्तन को घर में नहीं रखना चाहिए। इसका इस्तेमाल सेहत और धन दोनों के लिए हानिकारक माना गया है। ऐसा करने से भयंकर दुर्भाग्य के स्थिति बन सकती है।
बुजुर्गों कहते थे, कि कभी फटा कपडा, और जबरदस्ती पानी नहीं बहाना चाहिए एवं नल टपकता नहीं रहना चाहिए, जिस घर में इस तरह के काम होंगे, वह स्वयं दरिद्री को निमन्त्रण देते हैं। कपडा फट गया है,तो सिलकर ही पहनना चाहिए। ठीक उसी तरह टूटे हुए बर्तन को घर में नहीं रखना चाहिए। इसका इस्तेमाल सेहत और धन दोनों के लिए हानिकारक माना गया है। ऐसा करने से भयंकर दुर्भाग्य के स्थिति बन सकती है।
फाइबर के प्लेट्स न करें इस्तेमाल
फाइबर के प्लेट्स और बर्तन का इस्तेमाल करते हैं तो क्रैक का निशान आते ही इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए। ज्योतिष ही नहीं विज्ञान की दृष्टि से भी यह खतरनाक है।
फाइबर के प्लेट्स और बर्तन का इस्तेमाल करते हैं तो क्रैक का निशान आते ही इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए। ज्योतिष ही नहीं विज्ञान की दृष्टि से भी यह खतरनाक है।
भोजन से पहले थाली को धो लें
खाने की थाली धुली होने पर भी भोजन से पहले अच्छी तरह एक बार और धो लेना चाहिए। हमेशा चमकीले और साफ बर्तन में भोजन करना चाहिए इससे शरीर में चन्द्रमा, शुक्र, मंगल, और गुरु की अनुकूलता बढ़ती है जो सेहत और धन के लिए शुभ रहता है।
खाने की थाली धुली होने पर भी भोजन से पहले अच्छी तरह एक बार और धो लेना चाहिए। हमेशा चमकीले और साफ बर्तन में भोजन करना चाहिए इससे शरीर में चन्द्रमा, शुक्र, मंगल, और गुरु की अनुकूलता बढ़ती है जो सेहत और धन के लिए शुभ रहता है।
भोजन के समय इनका करें ध्यान
भोजन से पहले ईश्वर का ध्यान सूर्य को अनुकूल बनाता है। गीता में कहा गया है कि जो बिना ईश्वर को ध्यान किए भोजन करता है वह वास्तव में चोर है। सूर्य अन्न को उत्पन्न करने वाले हैं और विष्णु स्वरूप माने गए हैं इसलिए भोजन से पहले इनका ध्यान करना चाहिए।
भोजन से पहले ईश्वर का ध्यान सूर्य को अनुकूल बनाता है। गीता में कहा गया है कि जो बिना ईश्वर को ध्यान किए भोजन करता है वह वास्तव में चोर है। सूर्य अन्न को उत्पन्न करने वाले हैं और विष्णु स्वरूप माने गए हैं इसलिए भोजन से पहले इनका ध्यान करना चाहिए।
लोहे के बर्तन में पकाएं भोजन लोहे के बर्तन में भोजन पकाना शुभ माना गया है इससे शरीर में रक्त की कमी दूर होती है। शनि और मंगल भी शुभ प्रभाव देते हैं।
पहले के समय में लोहे और कलाई किये पीतल एवं ताँबे के बर्तनों का चलन था, लेकिन समय परिवर्तन के साथ-साथ इनका प्रयोग लगभग शून्य ही हो गया है। उन दिनों बिना कलाई हुए पीतल अथवा ताँबे के बर्तन में दूध अथवा खट्टे पदार्थों के सेवन करने पर पाबंदी थी, क्योकि ऐसे बर्तन में दूध अथवा खट्टा पदार्थ विष का रूप ले लेता है। लेकिन कलाई किया बर्तन प्रयोग करने से शरीर में कलाई जाने से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता था, जबकि आज मिलावट के इस दौर में कलाई के नाम पर सिक्के का प्रयोग हो रहा है। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है।


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