कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने पार्टी लाइन से हटकर एक बार फिर विवादास्पद बयान दिया है। दरअसल, खुर्शीद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वार्षिक उत्सव में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां एक छात्र ने उनसे अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाने पर सवाल पूछा। इस पर खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस के दामन पर मुस्लिमों के खून के धब्बे हैं। ये आप (छात्रों) पर ना लगें इसके लिए उन्हें सीख लेनी चाहिए।

कहते हैं, "सुबह का भुला अगर शाम होते घर लौट आए, तो उसे भुला नहीं कहते।" जब सेवानिर्वित होने उपरान्त एक पाक्षिक को सम्पादित करते तत्कालीन भारतीय जनसंघ, वर्तमान भारतीय जनता पार्टी से कहीं अधिक कांग्रेस को मुसलमानों का दुश्मन बताते लेखन पर मुझे भाजपा समर्थित, साम्प्रदायिक आदि नामों से अलंकृत किया जाता था। लेकिन आज स्वयं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद के ऐसे बयान मेरे लेखो को सत्यापित कर, मुझे बदनाम कर रहे थे, उन सभी के मुँह पर करारा थप्पड़ मारा है। यह भी सम्भव हो सकता है, रामजन्मभूमि और अन्य मन्दिरों को विवादित बनाए पर भी जल्द ही कांग्रेस के किसी अन्य नेता का बयान आ सकता है।
अवलोकन करिये:--·
खुर्शीद ने कहा- मेरे दामन पर भी खून के दाग
खुर्शीद से एएमयू के एक पूर्व छात्र ने पूछा,AMU के डॉ. बीआर आंबेडकर हॉल में आयोजित वार्षिकोत्सव में पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने छात्रों से सीधे संवाद किया। इसी दौरान एएमयू के निलंबित छात्र आमिर मिंटोई ने सलमान खुर्शीद से पूछा, '1947 में देश की आजादी के बाद ही 1948 में एएमयू एक्ट में पहेल संशोधन, 1950 प्रेसिडेंशल ऑर्डर जिस में मुस्लिम दलितों से एसटी/एससी आरक्षण का हक छिना गया. उस के बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, भागलपुर, अलीगढ़ आदि में मुसलमानों के नरसंहार उसके अलावा बाबरी मस्जिद के दरवाजे खुलना, और फिर बाबरी मस्जिद की शहादत कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में हुआ. इन सारी घटनाओं का हवाला देते हुए मिंटोई ने खुर्शीद से पूछा कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो इतने सारे धब्बे हैं, इनको आप किन अल्फाजों से धोना चाहेंगे?
इस पर खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस के दामन पर मुस्लिमों के खून के धब्बे हैं। खुर्शीद यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि चूंकि मैं कांग्रेस का नेता हूं इसलिए मुस्लिमों के खून के दाग मेरे दामन में भी हैं, लेकिन ये आप पर ना लगें इसलिए आप इन घटनाओं से सीखें।
चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाने के फैसले में शामिल नहीं थे खुर्शीद
बता दें कि पिछले कुछ दिनों में खुर्शीद कांग्रेस से हटकर राय रख रहे हैं। गत अप्रैल 20 को जब पार्टी ने उपराष्ट्रपति को चीफ जस्टिस के महाभियोग का नोटिस दिया था तब खुर्शीद ने कहा था कि वे इस फैसले में शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के फैसले या नजरिए से असहमत होने की वजह से बिना सोचे-समझे महाभियोग नहीं लाया जा सकता है।
महाभियोग को गंभीर मुद्दा बताते हुए खुर्शीद ने खुद को प्रस्ताव से अलग कर लिया था। उन्होंने दूसरी पार्टियों की कांग्रेस के साथ हुई चर्चा की जानकारी होने से भी इनकार किया था।
सलमान खुर्शीद के इस बयान पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि ये तो पहले से तय था. सलमान खुर्शीद ने ऐसी बात कहने के लिए सही जगह को चुना है. उन्होंने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस नेताओं की ओर से इस तरह के बयान आते रहेंगे।

कहते हैं, "सुबह का भुला अगर शाम होते घर लौट आए, तो उसे भुला नहीं कहते।" जब सेवानिर्वित होने उपरान्त एक पाक्षिक को सम्पादित करते तत्कालीन भारतीय जनसंघ, वर्तमान भारतीय जनता पार्टी से कहीं अधिक कांग्रेस को मुसलमानों का दुश्मन बताते लेखन पर मुझे भाजपा समर्थित, साम्प्रदायिक आदि नामों से अलंकृत किया जाता था। लेकिन आज स्वयं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद के ऐसे बयान मेरे लेखो को सत्यापित कर, मुझे बदनाम कर रहे थे, उन सभी के मुँह पर करारा थप्पड़ मारा है। यह भी सम्भव हो सकता है, रामजन्मभूमि और अन्य मन्दिरों को विवादित बनाए पर भी जल्द ही कांग्रेस के किसी अन्य नेता का बयान आ सकता है। अवलोकन करिये:--·
खुर्शीद ने कहा- मेरे दामन पर भी खून के दाग
खुर्शीद से एएमयू के एक पूर्व छात्र ने पूछा,AMU के डॉ. बीआर आंबेडकर हॉल में आयोजित वार्षिकोत्सव में पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने छात्रों से सीधे संवाद किया। इसी दौरान एएमयू के निलंबित छात्र आमिर मिंटोई ने सलमान खुर्शीद से पूछा, '1947 में देश की आजादी के बाद ही 1948 में एएमयू एक्ट में पहेल संशोधन, 1950 प्रेसिडेंशल ऑर्डर जिस में मुस्लिम दलितों से एसटी/एससी आरक्षण का हक छिना गया. उस के बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, भागलपुर, अलीगढ़ आदि में मुसलमानों के नरसंहार उसके अलावा बाबरी मस्जिद के दरवाजे खुलना, और फिर बाबरी मस्जिद की शहादत कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में हुआ. इन सारी घटनाओं का हवाला देते हुए मिंटोई ने खुर्शीद से पूछा कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो इतने सारे धब्बे हैं, इनको आप किन अल्फाजों से धोना चाहेंगे?
इस पर खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस के दामन पर मुस्लिमों के खून के धब्बे हैं। खुर्शीद यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि चूंकि मैं कांग्रेस का नेता हूं इसलिए मुस्लिमों के खून के दाग मेरे दामन में भी हैं, लेकिन ये आप पर ना लगें इसलिए आप इन घटनाओं से सीखें।
चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाने के फैसले में शामिल नहीं थे खुर्शीद
बता दें कि पिछले कुछ दिनों में खुर्शीद कांग्रेस से हटकर राय रख रहे हैं। गत अप्रैल 20 को जब पार्टी ने उपराष्ट्रपति को चीफ जस्टिस के महाभियोग का नोटिस दिया था तब खुर्शीद ने कहा था कि वे इस फैसले में शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के फैसले या नजरिए से असहमत होने की वजह से बिना सोचे-समझे महाभियोग नहीं लाया जा सकता है।
महाभियोग को गंभीर मुद्दा बताते हुए खुर्शीद ने खुद को प्रस्ताव से अलग कर लिया था। उन्होंने दूसरी पार्टियों की कांग्रेस के साथ हुई चर्चा की जानकारी होने से भी इनकार किया था।
सलमान खुर्शीद के इस बयान पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि ये तो पहले से तय था. सलमान खुर्शीद ने ऐसी बात कहने के लिए सही जगह को चुना है. उन्होंने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस नेताओं की ओर से इस तरह के बयान आते रहेंगे।


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