नाबालिग से बलात्कार के आरोप में सज़ा पाने वाले विवादित धर्म गुरु आसाराम को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। खास तौर पर कांग्रेस पार्टी और उसके समर्थक एक पुरानी तस्वीर को वायरल करवा रहे हैं जिसमें तब के गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी एक प्रवचन में आसाराम के मंच पर पहुंचे थे। इतना ही नहीं कुछ लोग आसाराम को पीएम मोदी का गुरु तक बता रहे हैं। लेकिन गुजरात के धार्मिक समीकरणों पर नजर रखने वाले जानते हैं कि पीएम मोदी और आसाराम के संबंध कभी सहज नहीं रहे। एक धर्म गुरु के तौर पर वो उसके कार्यक्रम में सिर्फ एक बार गए थे, जिसका वीडियो और तस्वीर फैलाई जा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि 2008 में आसाराम ने सार्वजनिक मंच से नरेंद्र मोदी को श्राप दिया था और कहा था कि वो भस्म हो जाएंगे।
आश्रम पर कार्रवाई से भड़का आसाराम
2008 में आसाराम ने अपने मंच से उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को श्राप दिया था। आसाराम की नाराजगी अपने आश्रम के खिलाफ कार्रवाई को लेकर थी। 5 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में आसाराम के मोटेरा आश्रम के बाहर साबरमती नदी के सूखे तल में 10 साल के बच्चे अभिषेक वाघेला और 11 साल के बच्चे दीपेश वाघेला के अधजले शरीर बरामद हुए थे। इस बच्चों का दाखिला कुछ ही दिन पहले आसाराम के ‘गुरुकुल’ नामक स्कूल में करवाया गया था। बच्चों के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया था कि उनकी मौत आसाराम के आश्रम में तांत्रिक क्रियाओं के कारण हुई थी। उस वक्त यह मामला काफी उछला था। मामला सामने आते ही मोदी सरकार ने जस्टिस डीके त्रिवेदी की अगुवाई में आयोग बनाकर मामले की जांच के आदेश दे दिए। मोदी सरकार के इस कदम पर आसाराम भड़क उठा। उसने अपने प्रवचन में कहा कि “अगर हमें दबाया गया तो मोदी भस्म हो जाएगा। मेरा शाप है तुझे।” इसके कुछ दिन बाद ही आसाराम और उसका बेटा नारायण साईं एक हेलिकॉप्टर हादसे में बाल-बाल बचे थे। तब भी आसाराम ने मोदी पर हमला बोला। उसने कहा था कि “अगर दबाने की कोशिश होगी तो मोदी को सत्ता से उखाड़कर फेंक देंगे। जिस तरह से गुजरात पुलिस हमसे बर्ताव कर रही है वैसे तो रावण की भी पुलिस किसी से बर्ताव नहीं करती होगी।” आसाराम की तमाम बातों के बावजूद 2012 में नरेंद्र मोदी फिर जीते और गुजरात के मुख्यमंत्री बने।
आसाराम को पसंद नहीं करते थे मोदी
गुजरात में सीएम पद पर रहने से पहले ही नरेंद्र मोदी कई हिंदू धर्मगुरुओं के संपर्क में रहे हैं। इनमें बेलूर के रामकृष्ण मठ के स्वामी आत्मास्थानंद और स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख स्वामी जी के नाम सबसे ऊपर थे। इसके अलावा वो मोरारी बाबू के प्रवचनों में भी नियमित रूप से आते-जाते थे। हिंदू धर्म में अपनी आस्था के कारण ही वो आसाराम के एक प्रवचन में भी गए थे, लेकिन उसके बाद वो कभी दोबारा आसाराम के साथ नहीं दिखे। माना जाता है कि मोदी ने यह भांप लिया था कि वो सही धर्मगुरु नहीं हैं। ये वो समय था जब आसाराम का इतना रसूख हुआ करता था कि सभी पार्टियों के बड़े-बड़े नेता और ब्यूरोक्रेट उसके आगे मत्था टेकने आते थे। लेकिन मोदी ने आसाराम को दोबारा कभी भाव नहीं दिया। इससे वो बहुत भड़का हुआ था।
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अब मोदी ने बोला आसाराम पर परोक्ष हमला
नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Aug 30, 2013, 10:36PM IST
| मोदी भी खुल कर आ गए आसाराम के खिलाफ |
नई दिल्ली ।। गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी राष्ट्रीय चुनाव अभियान समिति के प्रमुख नरेंद्र मोदीआखिरकार रेप आरोपों का सामना कर रहे आसाराम बापू के खिलाफ सामने आ ही गए। शुक्रवार को उन्होंने एक कार्यक्रम में आसाराम का नाम तो नहीं लिया लेकिन इशारों में उन पर हमला जरूर बोला।
हमारे सहयोगी समाचार चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक मोदी नेएक सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर संत इस तरह का काम करने लगे तो यह समाज के लिए एक बहुत बडा़ धब्बा होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि रेप जैसे मामलों में शिकायत करने वाली महिला पर दोष मढ़ना गलत है। मोदी ने कहा, यह सती-सावित्री का देश है। यहां की महिलाओं पर सवाल उठाने के बदले उन पुरुषों को अपना आचरण सुधारना चाहिए जो ऐसा काम करते हैं।
गौरतलब है कि रेप आरोप से घिरे आसराम बापू के बचाव में बीजेपी के कई नेताओं ने बयान दिया था। कांग्रेस इसे बीजेपी का दोहरा मापदंड बता रही थी कि एक तरफ तो वह रेप करने वालों को फांसी देने की मांग करती है और दूसरी तरफ अपने किसी शख्स के फंसने पर जांच होने से पहले ही उसे बेकसूर बताने लगती है। आम लोगों में भी यही संदेश जा रहा था कि वोट बैंक बचाने के लिए बीजेपी नेता आसाराम का समर्थन कर रहे हैं। गुरुवार को सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि मोदी ने पार्टी नेताओं से कहा है कि वे आसाराम का बचाव न करें। शुक्रवार को खुद मोदी ने सार्वजनिक सभा में आसाराम पर परोक्ष हमला बोलकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी किसी रेप आरोपी के पक्ष में खड़ी नहीं दिखना चाहती।
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आसाराम के खिलाफ दिया था बयान
पीएम मोदी ने आसाराम के श्राप या उसके दूसरे बयानों पर कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सिर्फ 2013 में उन्होंने एक सभा में आसाराम का नाम लिए बिना कहा था कि अगर संत इस तरह का काम करने लगें तो यह समाज के लिए एक बहुत बड़ा धब्बा होगा। समाचार चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक मोदी ने एक सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगर संत इस तरह का काम करने लगे तो यह समाज के लिए एक बहुत बडा़ धब्बा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि रेप जैसे मामलों में शिकायत करने वाली महिला पर दोष मढ़ना गलत है। मोदी ने कहा, यह सती सावित्री का देश है। यहां की महिलाओं पर सवाल उठाने के बदले उन पुरुषों को अपना आचरण सुधारना चाहिए जो ऐसे काम करते हैं।
बीजेपी नेताओं को बयानबाजी से रोका
2013 में आसाराम की गिरफ्तारी से लेकर उसे सज़ा होने तक बीजेपी के इक्का-दुक्का नेताओं को छोड़ किसी ने भी आसाराम के पक्ष में एक बार भी बयान नहीं दिया। सिर्फ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आसाराम को बेकसूरत बताते हुए उनके लिए वकालत करने का एलान किया था। लेकिन बाद में वो भी पलट गए। दूसरी उमा भारती थीं, जिन्होंने कहा था कि आसाराम को फंसाया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कोर्ट ने आसाराम को कसूरवार माना तो मैं भी कसूरवार मान लूंगी। माना जाता है कि नरेंद्र मोदी ने ही पार्टी नेताओं को आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं की घिनौनी करतूतों के बारे में बताया था। गुजरात पुलिस की जांच में आसाराम का पूरा कच्चा-चिट्ठा सामने आ चुका था और मोदी आसाराम की नस-नस से वाकिफ थे। इसके बावजूद जब आसाराम को उसकी करनी की सजा मिली है, कांग्रेस पार्टी और उसके समर्थक पीएम मोदी को लेकर भद्दी टिप्पणियों से बाज नहीं आ रहे।
कांग्रेस पार्टी की एक प्रोपोगेंडा वेबसाइट के मालिक प्रतीक सिन्हा ने पीएम मोदी पर आसाराम से करीबी के नाम पर ये भद्दा कमेंट किया है।
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