
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
बिहार में स्टेडियम बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है।
जिस तरह कुछ वर्षों से देश में घोटालों की बाढ़ सी आई हुई है, उन्हें देख लगता है, कि मुगलों और अंग्रेजों से कहीं अधिक लूटपाट तो हमारे जनहितैषी नेताओं ने ही की है। जनसेवा के नाम पर जनता को पागल बनाकर अपनी तिजोरियाँ भरने में अधिक व्यस्त हैं। सदन के सदस्य रहते, सुविधाओं के नाम पर कितना धन बर्बाद करते है। इन घोटालेबाज़ों ने जनसेवा को व्यापार बनाकर बदनाम कर दिया है। क्या ये घोटालेबाज़ या इनके परिवार या इनकी पार्टी वोट के हक़दार हैं? क्यों दें ऐसे लुटेरों को वोट, और जनता है कि पागलों की तरह सुबह से ही लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े, इन्हे वोट देने जाते हैं।
हैरानी इस बात से होती है कि जब इन घोटालेबाज़ नेताओं की मौत होती है, तो इनकी जनसेवाओं की एक लम्बी सूची प्रस्तुत कर, मरने के बाद भी एक घोटालेबाज़ दूसरे घोटालेबाज़ की तारीफों के ऊँचे-ऊँचे पहाड़ बनाकर जनता को मुर्ख बनाते हैं।
एक प्रसिद्ध समाचार चैनल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि बिहार के अलग-अलग हिस्सों में कागजों पर करोड़ों रुपए के स्टेडियम तो बन गए लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं है।
बिहार में खेल के स्तर को बढ़ाने और खिलाड़ियों को सुविधा देने के लिए 2008 -09 वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री खेल विकास योजना बनाई गई थी। इस योजना के तहत हर अनुमंडल और प्रखंड स्तर प्रर आउटडोर स्टेडियम बनाने का फैसला हुआ था। 2008-09 से 2013-14 तक स्टेडियम बनाने के लिए 69 करोड़ 57 लाख 66 हजार रुपए मंजूर हुए।
समाचार चैनल न्यूज 18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग द्वारा मिली सूचना के अनुसार, अभी तक कुल 287 स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति मिली है। 2017 तक 114 स्टेडियम तैयार भी कर लिया गया जबकि 66 स्टेडियम अभी निर्माणाधीन है और बाकी पर प्रक्रिया चल रही है। यहां तक की बिहार के मंत्री भी 100 से ज्यादा स्टेडियम तैयार होने का दावा कर रहे हैं।
चैनल के मुताबिक, बिहार के कला संस्कृति मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि कहते हैं कि मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि बिहार में 100 से ज्यादा स्टेडियम तैयार है और जल्द ही 534 प्रखंडों में स्टेडियम बना लिया जाएगा। जब मंत्री जी से पूछा गया कि क्या आपने देखा है कि वो स्टेडियम है भी या नहीं तो इस पर मंत्री जी कुछ भी नहीं बोल पाए।
चैनल के मुताबिक, जब इन स्टेडियमों का हाल देखने उनकी टीम अलग-अलग इलाकों में कई तो वहां के हालात कुछ और ही थे। बक्सर के ब्रह्मपुर बीएन उच्च विद्यालय में सरकारी दावों के अनुसार 45 लाख रुपये खर्च कर स्टेडियम बनाये जाने की बात कही गयी, लेकिन यहां स्टेडियम का नामो निशान नहीं था। स्टेडियम के नाम पर बस 20 फीट लंबी 5 सीढ़ियां थी, जिसका निर्माण आदित्य कंस्ट्रक्शन ने किया था।
इसी तरह भोजपुर के बिहिया प्रखंड में +2 उच्च विद्यालय जादोपुर का नजारा भी हैरान करने वाला था। सरकारी दावों के अनुसार यहां पर 28 लाख रुपये खर्च कर फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण कराया गया था, लेकिन यहां स्टेडियम के नाम पर यहां चारों तरफ जंगल के झाड़ थे और एक कोने में यहां भी पांच सीढ़ियां बनायी गयी थी। इसी तरह बक्सर, कैमूर और नालंदा में भी देखने को मिली। टीवी चैनल का दावा है कि धरातल पर तलाशने जाएंगे तो 100 से ज्यादा स्टेडियमों के लिए पैसा तो बंट गया लेकिन वहां स्टेडियम के नाम पर बंजर जमीन या फिर कुछ सीढ़ियां ही बनी हैं।
चैनल के मुताबिक, पैसे के इस बंदरबांट से सभी विभाग अच्छी तरह वाकिफ हैं। ऐसा नहीं कि इसके खिलाफ आवाज न उठाई गई हो। इस मामले में पूर्व कला संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम ने बकायदा इसके लिए जांच भी बैठाई, पर हकीकत ये है कि ना तो अधिकारियों ने कोई जांच की और ना ही मामले को सामने आने दिया। इस बारे में शिवचंद्र राम ने न्यूज 18 से कहा कि हमने तो पहले ही जांच की बात थी लेकिन वर्तमान सरकार ने इसको लेकर कुछ नहीं किया।


Comments