उत्तर प्रदेश में मिली हार पर हर व्यक्ति अपनी राय रख रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर निम्न विचार वास्तव में गोरखपुर जनता के लिए बहुत ही शर्मसार करने वाली है:--
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर मिली हार को लेकर कहा कि राजनीतिक सौदेबाजी के कारण ऐसा हुआ। सीएम योगी ने बीजेपी की हार के चार मुख्य कारण बताए हैं। उन्होंने राजनीतिक सौदेबाजी, लोकल मुद्दे, कम मतदान और अति आत्मविश्वास को मुख्य कारण बताया है। उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक सौदेबाजी के कारण बीजेपी हार गई। हमें इसका तोड़ खोजना होगा। मुझे विश्वास है कि प्रदेश के अंदर जो बेमेल राजनीतिक सौदेबाजी होना शुरू हुई है, जनता इसे जरूर समझेगी।’
यूपी सीएम ने आगे कहा, ‘देश के अंदर पीएम मोदी के नेतृत्व में जो भी कल्याण के कार्य हुए हैं, जो एक विश्वास जगा है, यह राष्ट्रीय मुद्दों में महत्वपूर्ण होंगे। उपचुनाव में लोकल मुद्दे ज्यादा हावी होते हैं, लेकिन समीक्षा करना आवश्यक है, जिससे भविष्य में हम लोग बेहतर प्रदर्शन कर सकें।’ इसके अलावा उन्होंने कहा कि अति आत्मविश्वास नहीं होना चाहिए और बीजेपी इसकी वजह से ही हारी है। इसके अलावा यूपी सीएम ने कहा कि दोनों ही सीटों पर मतदान भी कम ही हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कई वोटर्स वोट देने की नहीं गए थे। वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा है कि इस हार का विश्लेषण करना जरूरी है। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी की जीत पर हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में बीएसपी के वोटर्स सपा को वोट देंगे।
#फूलपुर का तो कुछ नहीं कहूँगा लेकिन #गोरखपुर के वोटरों को शर्म आनी ही चाहिए कौन बोलेगा आपके लिए बाबा से अधिक ?? बाबा सांसद थे तब से लेकर अब तक हर बात संसद में रखी है हिंदुओं की !
पूरा जीवन समर्पित कर दिया हिंदुत्व को कितनी जगह क्या क्या आरोप और बेज्जती न झेली , पत्थर चाक़ू हर चीज़ से वार ऊपर से केश अलग, बाबा को हमने टूटकर रोते देखा है हमारे लिए ,ख़ैर इसी लिए कोई तुम्हारे लिए नहीं बोलता तुम हो ही इसी लायक हिंदुओं डूब मरो
तुम कल्याण सिंह के न हुए बाबा के क्या होगे
#गोरखपुर के वोटरों को समर्पित||
यूपी सीएम ने आगे कहा, ‘देश के अंदर पीएम मोदी के नेतृत्व में जो भी कल्याण के कार्य हुए हैं, जो एक विश्वास जगा है, यह राष्ट्रीय मुद्दों में महत्वपूर्ण होंगे। उपचुनाव में लोकल मुद्दे ज्यादा हावी होते हैं, लेकिन समीक्षा करना आवश्यक है, जिससे भविष्य में हम लोग बेहतर प्रदर्शन कर सकें।’ इसके अलावा उन्होंने कहा कि अति आत्मविश्वास नहीं होना चाहिए और बीजेपी इसकी वजह से ही हारी है। इसके अलावा यूपी सीएम ने कहा कि दोनों ही सीटों पर मतदान भी कम ही हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कई वोटर्स वोट देने की नहीं गए थे। वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा है कि इस हार का विश्लेषण करना जरूरी है। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी की जीत पर हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में बीएसपी के वोटर्स सपा को वोट देंगे।
लोकसभा की तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में खासकर उत्तर प्रदेश की दो सीटों गोरखपुर और फूलपुर पर लोगों की उत्सुकता ज्यादा थी. गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीजेपी के पक्ष में बचाये रखने में पूरी तरह नाकामयाब रहे. बीजेपी के उपेन्द्रदत्त शुक्ल, सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार प्रवीण निषाद से 21961 मतों से हार गए. वहीं फूलपुर में भी बीजेपी को जबरदस्त झटका लगा. उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या फूलपुर लोकसभा सीट पर कमल फूल खिलाने में नाकामयाब रहे. सपा के उम्मीदवार नागेंद पटेल ने बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 59613 वोट से हराकर फूलपुर सीट छीन लिया. बहरहाल, यूपी में मुख्यमंत्री योगी और उप मुख्यमंत्री मौर्या दोनों ही नही खिला पाये कमल फूल. गौरतलब है कि बीजेपी को यह जबरदस्त झटका सरकार के एक साल पूरा होने के चार दिन पहले लगा है. जबकि 19 मार्च को जश्न मनाने की तैयारी जोर शोर से काफी पहले से चल रही है.
2014 चुनाव का दोनों सीटों का लेखा जोखा
25 साल तक राज्य राजनीति की मुख्यधारा में रहने के बाद मुश्किल का सामना कर रही बीएसपी और एसपी ने गठजोड़ कर बीजेपी को चुनौती देने का फैसला किया. वजह, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने सूबे में 73 सीटें जीतकर एक तरह से क्लीन स्वीप कर दिया था. एसपी को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं, जबकि बीएसपी का तो खाता भी नहीं खुल सका था. ऐसे में 2019 लोकसभा चुनाव से पहले एसपी और बीएसपी ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए साथ आने का फैसला लिया. गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर से मैदान में थे, तब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा संभाल रहे मौर्य को चुनाव में 5,03,564 वोट मिल थे. वहीं, एसपी और बीएसपी के कैंडिडेट को मिलाकर 358970 वोट मिले थे. साफ है कि दोनों को मिलाकर भी अंतर 144594 वोटों का था, वोट प्रतिशत के लिहाज से भी दोनों दल मिलकर भी बीजेपी से पीछे थे. बीजेपी को यहां 52 फीसदी वोट मिले थे, जबकि एसपी और बीएसपी के वोट प्रतिशत को मिला दें तो यह आंकड़ा 47 पर्सेंट का ही था. कांग्रेस इस दफे भी साथ नहीं थी ऐसे में एक नजर उसके प्रदर्शन पर डालते हैं. कांग्रेस के मोहम्मद कैफ को 58127 मत मिला था. दूसरी तरफ गोरखपुर से 5 बार लगातार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद खाली हुई इस सीट को परंपरागत रूप से बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा था. 2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में 5,39,127 वोट हासिल किए थे. एसपी कैंडिडेट राजमति निषाद को उन्होंने 312783 के बड़े अंतर से मात दी थी और बीएसपी कैंडिडेट को यहां 1,76,412 वोट मिले थे. इस तरह दोनों के वोटों को मिला दिया जाए, तब भी बीजेपी कैंडिडेट को चुनौती मिलना मुश्किल था. कांग्रेस साथ नहीं थी ऐसे में एक नजर उसके 2014 के प्रदर्शन पर डालते हैं. कांग्रेस के अष्टभुज प्रसाद त्रिपाठी को 45719 वोट मिला था.
क्या योगी हुए कमजोर
इस हार से खुद योगी की जमीन कमजोर हुई है. यूपी के सीएम बनने के बाद योगी का कद काफी बढ़ गया था. यहां तक कि उनके तमाम समर्थक पीएम मोदी के बाद 2024 में उन्हें पीएम पद तक पहुंचाने का सपना देखने लगे थे. योगी की लोकप्रियता का आलम यह था कि उन्हें गुजरात, त्रिपुरा से लेकर कर्नाटक तक हर जगह चुनाव प्रचार के लिए भेजा जाने लगा था. यहां तक दावा किया गया कि त्रिपुरा में योगी और नाथ संप्रदाय के उनके अनुयायियों की वजह से बीजेपी के वोटों में काफी बढ़त हुई है.
ऐसा माना जाता रहा है कि योगी को आरएसएस का साथ मिलता रहा है और एक लोकप्रिय युवा नेता होने की वजह से आरएसएस उन्हें काफी आगे तक ले जाना चाहता है. लेकिन अब यूपी में मिली करारी हार के बाद यह देखना होगा कि आरएसएस योगी पर दांव लगाता है या नहीं.
फूलपुर सीट पर सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पटेल ने बीजेपी प्रत्याशी कौशलेंद्र सिंह पटेल पर 59,613 वोटों से जीत हासिल की है। फूलपुर में जीत हासिल करने के बाद सपा के नागेंद्र सिंह ने बीएसपी प्रमुख मायावती को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ‘बहनजी का बहुत आशीर्वाद था। एक विचारधारा की सभी पार्टियां एक हुईं और हमारी जीत हुई। जीत का श्रेय अखिलेश जी, मायावती जी और फूलपुर की जनता को देता हूं।’
सीट- विजयी उम्मीदवार- पार्टी
गोरखपुर – प्रवीण निषाद, समाजवादी पार्टी
फूलपुर – नागेंद्र सिंह पटेल, समाजवादी पार्टी
अररिया – सरफराज आलम, राष्ट्रीय जनता दल
भभुआ – रिंकी पांडे – भाजपा
जहानाबाद – सुदय यादव – राष्ट्रीय जनता दल
भाजपा ने 2014 में राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर जीत हासिल की थी। उसके सहयोगियों ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा ने पांच सीटें अपने नाम की थी जबकि कांग्रेस को मात्र 2 और बसपा अपना खाता खोलने में नाकाम रही थीं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'राजनीतिक सौदेबाजी करने का दौर शुरू हुआ है और यह बात प्रदेश की जनता की समझ में आ जाएगी। हमारी हार की एक वजह कम मतदान का होना भी है। उप चुनाव में स्थानीय मुद्दे काम करते हैं जबकि आम चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं।' इस बीच उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, 'हमने नहीं सोचा था कि बसपा का वोट इस तरह एसपी को ट्रांसफर हो जाएगा। हम भविष्य में बसपा, कांग्रेस और सपा के साथ आने की स्थिति के लिए तैयार रहेंगे और 2019 के चुनाव जीतने के लिए रणनीति बनाएंगे।'
यूपी उपचुनाव में बीजेपी फूलपुर चुनाव हार गई है। सपा के नागेंद्र सिंह पटेल ने 59,613 वोटों से जीत दर्ज की। नागेन्द्र को 3,42,796 वोट जबकि बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 2,83,183 वोट मिले।
'हाथ' नहीं 'हाथी' बना अखिलेश का साथी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीट रही फूलपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मात देकर उसने दोनों सीटों पर कब्जा जमा लिया। इस उपचुनाव में अखिलेश के लिए 'हाथ' नहीं 'हाथी' उनका साथी बना है जिसके बिना शायद वह इतनी बड़ी कामयाबी हासिल नहीं कर पाते। भाजपा की इन दोनों प्रतिष्ठित सीटों पर मिली जीत समाजवादी पार्टी के लिए संजीवनी का काम करेगी। कांग्रेस को छोड़कर उप चुनाव में अकेले जाने और फिर बसपा का समर्थन मिलने का फायदा सपा को हुआ है। अब आगामी आम चुनावों के लिए सपा और बसपा अपनी भविष्य की राजनीति का ताना-बाना बुन सकती हैं।
अखिलेश यादव ने कुछ दिनों पहले कहा था कि गुजरात विधानसभा में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद कांग्रेस के रुख में बदलाव आ गया। सपा अध्यक्ष के बयान से संदेश निकला कि वह उपचुनाव में भी कांग्रेस का साथ चाहते थे लेकिन कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए जिससे उनकी मंशा पूरी नहीं हो पाई। खैर, बसपा के समर्थन से ही सही, इस जीत ने अखिलेश और समाजवादी पार्टी को बहुत बड़ी राहत दी है। लोकसभा के बाद विधानसभा चुनावों में बड़ी हार का सामना करने वाली सपा में यह जीत एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगी। लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी में सपा अब दोगुने उत्साह से जुट जाएगी। गोरखपुर में योगी को मात देकर उसने बहुत बढ़ी कामयाबी हासिल की है। योगी आदित्यनाथ पिछले पांच बार से गोरखपुर से सांसद रह चुके हैं। खुद मुख्यमंत्री रहते हुए उनका काफी समय गोरखपुर में बीता है, ऐसे में योगी को उनके गढ़ में मात देकर अखिलेश ने अपना राजनीतिक रसूख भी बढ़ा लिया है।
भाजपा विरोधी लाख जश्न मना लें, लेकिन यह जश्न अल्प-समय के लिए है। स्थिर नहीं। अगर राज्य सभा चुनाव को ध्यान में रख कर सौदेबाज़ी जो हुई है, अगर मायावती या बसपा का उम्मीदवार राज्य सभा नहीं पहुंचा, तीसरे गठबन्धन की संभावनाएं उतनी ही कमजोर हो जाएँगी। यदि राज्य सभा चुनाव के मद्देनज़र अगर राहु केतु नहीं मिलते, भाजपा को हराना बहुत ही कठिन काम था। क्योकि बिखरने वाला वोट एक जगह पड़ने के कारण ही भाजपा को मात देने में सफल हुए।
जैसा कि मार्च 13 को सोनिया गाँधी ने 2019 में तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद शुरू की है, जिसकी संभावनाएं कम ही नज़र आ रही हैं।
बीजेपी की हार के ये हैं 7 सबसे बड़े कारण
कारण नं. 1- फूलपुर में वोटिंग परसेंटेज 2014 में 50.19% था, जबकि उपचुनाव में 38% वोटिंग हुई। इस बार 12.19% कम वोटिंग हुई। इसका मतलब वोट बंट गया। शुरूआती फर्स्ट राउंड में ही सपा कैंडिडेट आगे हो गया था। सपा को 2647 वोट मिले थे जबकि बीजेपी 2257 वोट मिले थे. इसके बाद लगातार सपा कैंडिडेट ने बढ़त बनाए रखी।
कारण नं. 2- उपचुनाव में विधानसभावार आंकड़े देखें तो रिजल्ट साफ हो जाएगा। फाफामऊ विधानसभा में 43%, सोरांव विधानसभा में 45%, फूलपुर विधानसभा में 46.32%, शहर उत्तरी विधानसभा में 21.65%, शहर पश्चिमी विधानसभा में 31% वोटिंग हुई। इसमें 3 विधानसभा ग्रामीण क्षेत्र की है, जहां ज्यादा वोटिंग हुई। जबकि शहर की 2 विधानसभा सीटों पर कम वोटिंग हुई। बीजेपी शहर की पार्टी मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी को शहर से वोट तो मिले लेकिन गठबंधन को ग्रामीण क्षेत्र से ज्यादा वोट मिले।
कारण नं. 3- फूलपुर चुनाव में दलित, पटेल और मुस्लिम निर्णायक कास्ट फैक्टर हैं। दलित जहां 22% हैं वहीं मुस्लिम 17% हैं। जबकि पटेल 17% हैं। ऐसे में इन तीनो के वोट पाने वाला ही विनर हुआ है। बीएसपी समर्थित सपा कैंडिडेट को दलित, मुस्लिम के वोट के साथ पटेल वोट भी अच्छी तादाद में मिले। जबकि निर्दलीय कैंडिडेट अतीक अहमद भी मुस्लिम वोटों पर कुछ खास असर नहीं डाल पाए। उन्हें अपने परंपरागत वोट मिले जिसका फायदा बीजेपी को नहीं मिला। वहीं बीजेपी के कैंडिडेट पटेल होने के बावजूद पटेल वोटों में ज्यादा सेंध नहीं लगा पाए। इसलिए सपा-बसपा समर्थित कैंडिडेट की जीत हुई। आपको बता दे कि फूलपुर लोकसभा में ब्राह्मण 7%, वैश्य 7%, कायस्थ 6%, यादव 6%, ठाकुर 4% और अन्य 15% हैं।
कारण नं. 4- फूलपुर सीट कभी भी बीजेपी का गढ़ नहीं रही। 1996 से 2004 तक यह सपा के खाते में रही। जबकि 2009 का चुनाव यहां से बीएसपी जीती थी। 2009 में भी लगभग 38% वोटिंग हुई थी। कम वोटिंग का फायदा बीएसपी को हुआ था, तब सपा कैंडिडेट अतीक अहमद हार गए थे। 2014 में मोदी लहर में बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य ने यह सीट निकाली। 2014 में केशव का जीतना पार्टी की जीत से ज्यादा उनकी सेल्फ जीत थी क्योंकि उनकी खुद की लोकल लेवल पर पकड़ थी।
कारण नं. 5- फूलपुर में बीजेपी संगठन सीरियस नहीं दिखाई दिया। बीजेपी ने जो कैंडिडेट उतारा उस पर बाहरी होने का ठप्पा लगा। कौशलेन्द्र पटेल वाराणसी के मेयर रह चुके हैं। पटेल होने के नाते उन्हें कैंडिडेट बनाया गया क्योंकि इस लोकसभा क्षेत्र में 17% पटेल हैं, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ता इससे निराश थे। जिससे जनसंपर्क में कमी आई और चुनाव बीजेपी हार गई। जब केशव मौर्य जीते थे, तब वह बीजेपी अध्यक्ष थे तो उन्होंने पार्टी का पूरा सिस्टम भी यूज किया होगा।
कारण नं. 6-आखिरी समय में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी ने मुलायम को रावण और मायावती को शूर्पनखा बताया था। इतना ही नहीं, योगी ने सपा-बसपा गठबंधन को सांप-छछूंदर बताया था। इस बयान के बाद दलित और ओबीसी एक जुट हो गए।
कारण नं 7- भाजपा का जो मूल कार्यकर्ता था उसको निराशा मिली सत्ता में आने के बाद पार्टी भूल गयी की किसके दम पर हमने सरकार बनाई।
गोरखपुर सीट
| राउंड | बीजेपी | सपा+ | कौन आगे |
| 1 | 15577 | 13911 | बीजेपी |
| 2 | 29194 | 29218 | सपा |
| 3 | 43456 | 44979 | सपा |
| 4 | 56945 | 59907 | सपा |
| 5 | 70317 | 74077 | सपा |
| 6 | 82811 | 89950 | सपा |
| 7 | 91690 | 105156 | सपा |
| 8 | 108829 | 119427 | सपा |
| 9 | 120917 | 135565 | सपा |
| 10 | 133333 | 149312 | सपा |
| 11 | 150062 | 163941 | सपा |
| 12 | 165487 | 180155 | सपा |
| 13 | 179823 | 194760 | सपा |
| 14 | 192860 | 212061 | सपा |
| 15 | 206492 | 229622 | सपा |
| 16 | 220415 | 244983 | सपा |
| 17 | 235836 | 262346 | सपा |
| 18 | 250239 | 278611 | सपा |
| 19 | 264416 | 293153 | सपा |
| 20 | 279369 | 307627 | सपा |
| 21 | 294947 | 321093 | सपा |
फूलपुर सीट
| राउंड | बीजेपी | सपा | कौन आगे |
| 1 | 9906 | 12383 | सपा |
| 2 | 21402 | 22460 | सपा |
| 3 | 30786 | 33227 | सपा |
| 4 | 39955 | 43562 | सपा |
| 5 | 47631 | 54562 | सपा |
| 6 | 57092 | 64974 | सपा |
| 7 | 67146 | 75354 | सपा |
| 8 | 77348 | 87272 | सपा |
| 9 | 87326 | 99557 | सपा |
| 10 | 97369 | 111668 | सपा |
| 11 | 106534 | 122247 | सपा |
| 12 | 116219 | 131978 | सपा |
| 13 | 125528 | 143611 | सपा |
| 14 | 134819 | 155314 | सपा |
| 15 | 144166 | 167008 | सपा |
| 16 | 152740 | 180367 | सपा |
| 17 | 160839 | 191014 | सपा |
| 18 | 171016 | 201205 | सपा |
| 19 | 179935 | 211063 | सपा |
| 20 | 189489 | 218963 | सपा |
| 21 | 198844 | 228794 | सपा |
| 22 | 208128 | 238233 | सपा |
| 23 | 217032 | 250285 | सपा |
| 24 | 225125 | 261684 | सपा |
| 25 | 233254 | 271752 | सपा |
| 26 | 241764 | 281445 | सपा |
| 27 | 248886 | 294645 | सपा |
| 28 | 257821 | 305172 | सपा |
| 29 | 267776 | 318942 | सपा |
| 30 | 275217 | 329191 | सपा |
| 31 | 280535 | 337683 | सपा |
| 32 | 283183 | 342796 | सपा की जीत |
क्यों हुए गोरखपुर-फूलपुर सीट पर चुनाव ?
गोरखपुर: योगी आदित्यनाथ यहां से लगातार 5 बार सांसद चुने गए। यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 21 सितंबर, 2017 को सीट छोड़ दी।
फूलपुर: केशव प्रसाद मौर्य यहां से सांसद थे। उनके यूपी के डिप्टी सीएम बनने के बाद यह सीट खाली हुई।
फूलपुर: केशव प्रसाद मौर्य यहां से सांसद थे। उनके यूपी के डिप्टी सीएम बनने के बाद यह सीट खाली हुई।
फूलपुर में किनके बीच हुआ मुकाबला?
बीजेपी उम्मीदवार - कौशलेंद्र सिंह पटेल, वाराणसी के मेयर रह चुके हैं।
सपा+बसपा का उम्मीदवार - नागेंद्र सिंह पटेल, सपा के मंडल अध्यक्ष हैं।
निर्दलीय- अतीक अहमद, सपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद रह चुके हैं। इस बार जेल से चुनाव लड़ रहे है।
(इनपुट एजेंसीज )
सपा+बसपा का उम्मीदवार - नागेंद्र सिंह पटेल, सपा के मंडल अध्यक्ष हैं।
निर्दलीय- अतीक अहमद, सपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद रह चुके हैं। इस बार जेल से चुनाव लड़ रहे है।
(इनपुट एजेंसीज )


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