आर..बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिंगापुर में कहा है कि उन्होंने और उनकी बहन प्रियंका ने अपने पिता के हत्यारों को अब पूरी तरह माफ कर दिया है।
अब राहुल के इस बयान को राजनीतिक बयान कहा जाए या कुछ और। तमिलनाडु में होने वाले चुनावों को मद्देनज़र रख दिए इस बयान में राहुल किसी गुप्त बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। क्योकि विश्व में शायद ही कोई ऐसी संतान होगी जो अपने पिता के हत्यारों को माफ़ कर दे। लेकिन राहुल और प्रियंका द्वारा अपने पिता के हत्यारों को माफ़ करने की पीछे किसी अदृश्य षड्यंत्र का संकेत दे रहा है, न कि तमिलनाडु में निकट भविष्य में होने वाले चुनावों में अपने पिता राजीव गाँधी की हत्या को भुनाकर सहानुभूति बटोर अपनी सरकार बनाने का स्वप्न।
अब प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि "जब राहुल और प्रियंका अपने पिता के हत्यारों को क्षमा कर सकते हैं, तो उनकी दादी की हत्या होने पर निर्दोष सिखों को मारे जाने पर उनके बर्बाद हुए परिवारों की भरपाई क्यों नहीं? किस कारण निर्दोष सिखों का कत्लेआम किया गया था?"
जहाँ तक राजीव और इन्दिरा गाँधी की हत्या के मालूम होने की बात है, इस घटना का तो नॉस्त्रेदमस ने 1555 में की अपनी भविष्वाणी में बता चुके हैं। नॉस्त्रेदमस ने तो यहाँ तक लिखा है कि "1991 में मानव बम से मरने वाला महिला प्रधानमंत्री का पुत्र इस परिवार से अन्तिम शासक होगा।" आदि आदि।
सिंगापुर में आईआईएम एल्युमिनाई के साथ बातचीत में राहुल ने बताया, "पिता की हत्या के बाद कई साल मैं और मेरी बहन गुस्से में रहे। लेकिन अब हमने उन्हें माफ कर दिया है।" राहुल मलेशिया-सिंगापुर के 5 दिन के दौरे पर हैं।
जब ये घटनाएं हुईं, वो इतिहास का हिस्सा
न्यूज एजेंसी के मुताबिक राहुल ने कहा, "जब ये घटनाएं हुईं, वो इतिहास का हिस्सा हैं। तब विचारों, बाहरी बलों और कंफ्यूजन को लेकर टकराहट थी। मुझे याद है जब मैंने प्रभाकरण (लिट्टे का पूर्व प्रमुख) को टीवी पर मृत देखा। तब मुझे दो अहसास हुए। एक- इस शख्स को इस तरह क्यों किया गया? दूसरा- मुझे प्रभाकरण और उसके बच्चों को लेकर दुख हुआ। इसकी वजह ये थी कि मैं उस दुख को समझ सकता था।"
"मैंने हिंसा देखी थी। लेकिन ये भी जाना कि वह भी एक इंसान था। उसका भी एक परिवार था। उसके जाने के बाद बच्चे रो रहे थे। मुझे ये सब सोचकर बहुत दुख हुआ। मैंने पाया कि लोगों से नफरत करना काफी कठिन है। मेरी बहन ने भी ऐसा ही किया।"
अवलोकन करें:--
बता दें कि 21 मई, 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरम्बुदूर में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। हत्या लिट्टे की एक सुसाइड बॉम्बर ने की थी।
मुझे पिता की हत्या का पता था
राहुल ने कहा, "मैं जानता था कि मेरे पिता की मौत हो सकती थी। मैं जानता था कि मेरी दादी की हत्या हो सकती थी। राजनीति में अगर आप गलत ताकतों को दबाना चाहते हैं, आप किसी के साथ खड़े होते हैं तो आपको मरना पड़ेगा।"
प्रधानमंत्रियों के परिवार से जुड़े होने का क्या फायदा मिला, इस पर राहुल ने कहा, "ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप सिक्के के कौन से पहलू हैं। हां, ये सच है कि जहां मैं हूं वहां कई तरह की सुविधाएं हैं। लेकिन ये नहीं कहा जा सकता है कि मैं मुश्किल राहों से नहीं गुजरा।" मैं जब प्रभाकरण के शव को टीवी पर देखता हूं तो मेरे अंदर दो भावनाएं आती हैं. पहली ये कि ये लोग इस व्यक्ति को इस तरह अपमानित क्यों कर रहे हैं. और फिर मुझे उसके बच्चों और परिवार पर तरस आने लगता है.'
कुछ सालों तक हम काफी परेशान थे और चोट भी लगीं थी लेकिन किसी तरह हमने पिता के हत्यारों को पूरी तरफ से माफ कर दिया है।
'दादी ने मुझे कहा था वो मरने वाली हैं'
'मेरी दादी ने मुझे बताया था कि वो मरने वाली हैं और मेरे पिता... उनसे मैंने कहा था कि वे मारे जाएंगे. राजनीति में हम बड़ी ताकतों से मुकाबला करते हैं, जो आमतौर पर नजर नहीं आतीं. आप ऐसे व्यवस्था से लड़ते हैं जो काफी ताकतवर है. वे दिखाई नहीं देते लेकिन आपको काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं.'
"जब 14 साल का था, तब दादी की हत्या हो गई। जिन्होंने मेरी दादी को गोली मारी, मैं उनके साथ बैडमिंटन खेलता था। इसके बाद मेरे पिता की हत्या कर दी गई।"
"आप एक खास तरह के माहौल में रह रहे होते हैं...सुबह से लेकर रात तक आप 15 लोगों से घिरे होते हैं। मुझे नहीं लगता कि ये सुविधाएं हैं। इन सबसे सामंजस्य बैठाने में मुश्किल आती है।"

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