आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
मेघालय का गठन 1972 में हुआ था. तब ऑल पार्टी हिल लीडर्स कांफ्रेंस को पूर्ण बहुमत मिला था। उसे 32 सीटें मिली थी, बहुमत से एक ज्यादा। 1972 के बाद मेघालय में जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला।1978 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा 20 सीटें मिली।अगले विधानसभा चुनाव 1983 में हुए, इसमें भी किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। हालांकि कांग्रेस 25 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। 1988 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, उसे 22 सीटें मिली। अगले विधानसभा चुनाव 1993 में हुए, इस चुनाव में भी कांग्रेस 24 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। 1998 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस 25 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। अगले विधानसभा चुनाव 2003 में हुए, इस चुनाव में भी कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली। कांग्रेस 22 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी. 2008 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, उसे 25 सीटें मिली। 2013 के विधानसभा चुनाव में भी किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली। हालांकि कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।
कांग्रेस मेघालय में 2013 में भी पूर्ण बहुमत नहीं पाई थी। जादुई आंकड़ा 31 से 2 कम 29 सीट पाकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। 2018 के चुनाव में भी बहुमत नहीं मिला है, जादुई आंकड़ा 31 से 10 कम 21 सीट पाकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। वैसे देर रात कांग्रेस ने राज्यपाल को चिट्ठी भेजकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। गौरतलब है मतगणना जब चल ही रहा था तभी दिल्ली से अहमद पटेल और कमलनाथ शिलांग पहुंच गए। दूसरी तरफ भाजपा नेता हिमांता बिस्वाशर्मा देर शाम अगरतला से शिलांग पहुंचे। इनके मुताबिक मेघालय में भाजपा अकेले दम पर सरकार नहीं बना सकती, भाजपा के पास वोटों की पर्याप्त संख्या नहीं है, इसलिए उसे क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को साथ लाना होगा। हिमांता ने कहा कि मेरा मानना है कि पार्टियां गैर-कांग्रेस सरकार बनाने के लिए एक साथ आएंगी।
मेघालय विधानसभा की मौजूदा तस्वीर
मेघालय में कांग्रेस 21 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) को 19 सीटें हासिल हुई है। राज्य में 47 सीटों पर लड़ने वाली भाजपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। अन्य के खाते में 17 सीटें गई हैं जिनमें यूडीपी की छह, पीडीएफ की चार और एचएसपीडीपी को दो सीटें शामिल है। भाजपा ने किसी पार्टी के साथ तालमेल नहीं किया था लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एनपीपी उसकी अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है। भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और अलफोंसो को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
सियासी उठापटक का खेल शुरू
कांग्रेस इस समय मेघालय में सत्तारूढ़ है, ऐसे में मेघालय की सत्ता को लेकर कांग्रेस किसी तरह की सुस्ती नहीं दिखाना चाहती है। मेघालय में पिछले 9 सालों से कांग्रेस की ही सरकार है। ऐसे में इस किला को बचाने के लिए कांग्रेस हरसंभव जतन कर रही है। कांग्रेस की पूर्व में इस बात को लेकर आलोचना हो चुकी है कि पार्टी दो राज्यों गोवा एवं मणिपुर में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद शुरुआत में निष्क्रिय रही और वहां सरकारों के गठन में नाकाम रही। ऐसे में मेघालय की सत्ता को लेकर कांग्रेस इस तरह की सुस्ती नहीं दिखाना चाहती है और पार्टी की तरफ से मेघालय में सरकार गठन के सभी मापदंडों पर विचार करने और अन्य पार्टियों के साथ समझौता करने के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अहमद पटेल और कमलनाथ को भेजा गया है। दूसरी तरफ मेघालय में पहली बार कमल खिलाने की कोशिश कर रही भाजपा भी दबे पांव चाल चल रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा मेघालय में दिवंगत पीए संगमा की पार्टी नैशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) से बातचीत कर रही है। ऐसे में अभी से ही वहां सियासी उठापटक का खेल शुरू हो गया है। भाजपा, कांग्रेस और एनपीपी के नेताओं ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
मेघालय के मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस उम्मीदवार मुकुल संगमा अम्पति और सोंगसाक दोनों विधानसभा सीटों से जीत गए। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक 2010 से राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आसीन संगमा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार बकुल सी हजोंग को 6,000 से ज्यादा वोटों से हराकर अम्पति सीट बरकरार रखी। वह सोंगसाक सीट पर भी जीत गए जहां उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनपीएफ (नेशनल पीपुल्स पार्टी) उम्मीदवार एन डी शिरा को 1,300 से ज्यादा वोटों से हराया। भाजपा तीसरे स्थान पर रही।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री की पत्नी दिक्कांची डी शिरा भी महेंद्रगंज सीट से जीत गयी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार प्रेमानंद कोच को 6,000 से ज्यादा वोटों से हराया। 60 सदस्यीय विधानसभा की 59 सीटों के लिए गत 27 फरवरी को चुनाव हुए थे।
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