
वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किये गये बजट की भले ही पीएम मोदी तारीफ कर रहे हों, लेकिन चुनावी साल एक वर्ष पहले के इस अहम बजट को आरएसएस से जुड़ी एक संस्था ने खारिज कर दिया है। भारत के सबसे बड़े मजदूर संगठनों में से एक भारतीय मजदूर संघ ने इस बजट को निराशाजनक कहा है।
यह आरएसएस से जुड़ी संस्था है। इससे पहले भी मजदूर संघ स्वदेशी और खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध कर चुकी है। भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि सरकार ने इस बजट में मजदूरों के हित में कोई घोषणा नहीं की है जिससे उनका संगठन निराश है।
उन्होंने कहा कि इस बजट को वेतन भोगियों के लिए भी अच्छा नहीं कहा जा सकता है। मजदूर संघ ने बजट के खिलाफ 2 फरवरी को देश भर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि इस बजट को वेतन भोगियों के लिए भी अच्छा नहीं कहा जा सकता है। मजदूर संघ ने बजट के खिलाफ 2 फरवरी को देश भर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि केन्द्र ने बजट में किसानों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कई घोषणा तो की है लेकिन मजदूरों के बारे में कुछ भी नहीं है। मजदूर संघ का कहना है कि वेतन भोगियों के लिए भी बजट में कोई राहत नहीं दिखाई देता है।
संगठन का कहना है कि नौकरी पेशा वर्ग के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की घोषणा तो की गई है लेकिन यह एक दिखावा है। संगठन का कहना है कि शिक्षा पर सेस बढ़ा दिया गया है जिसका भार सैलरीड वर्ग पर पड़ेगा।
इधर केन्द्र में बीजेपी की सहयोगी टीडीपी ने भी बजट से असंतुष्टि जाहिर की है। आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री यनमाला राम कृष्णाडू ने कहा कि राज्य सरकार बजट से खुश नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमने आंध्र प्रदेश के लिए जो कुछ भी मांग रखी थी उसे पूरा नहीं किया गया है।’
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 2018-19 के बजट में व्यक्तिगत आय कर की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि उन्होंने नौकरी पेशा और पेंशनभोगियों को 40,000 रुपये की मानक कटौती देने की जरूर घोषणा की है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इससे आम नौकरी पेशा लोगों को मामूली राहत ही मिलेगी। यह मानक कटौती नौकरी पेशा लोगों के कर छूट प्राप्त परिवहन भत्ते और सामान्य चिकित्सा व्यय के एवज में दी गई है। मानक कटौती की व्यवस्था निर्धारण वर्ष 2006- 07 से बंद कर दी गई थी।
देश के नौकरीपेशा लोगों को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को बजट पेश करते हुए निराश किया। उम्मीद जताई जा रही थी कि चुनावों वाले इस साल में सरकार टैक्स स्लैब में बदलाव कर कुछ राहत दे सकती है। हालांकि, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, स्टैंडर्ड डिडक्शन स्कीम को दोबारा लाया गया है। इस स्कीम के मुताबिक, नौकरीपेशा लोगों को ट्रांसपोर्ट और मेडिकल खर्च के मद में ग्रॉस सैलरी से 40 हजार रुपये घटाकर उस आमदनी पर टैक्स देना होगा। सरकार ने इनकम टैक्स पर सेस बढ़ाने का भी प्रावधान किया है। वहीं, बुर्जुगों को 80 डी के तहत मिलने वाली मेडिकल क्लेम की सीमा को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। इसके अलावा, सीनियर सिटीजंस को बैंक डिपॉजिट पर ब्याज पर छूट की सीमा को भी बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया।
विशेषज्ञों की मानें तो इस छूट से वास्तव में नौकरी पेशा लोगों की करयोग्य आय में 5,800 रुपये का ही लाभ मिलने का अनुमान है। क्योंकि उन्हें 19,200 रुपये सालाना का कर मुक्त ट्रांसपोर्ट अलाउंस (परिवहन भत्ता) और 15 हजार रुपये का मेडिकल आलाउंस (सामान्य चिकित्सा भत्ता) दिया जाता है। यह राशि 34,200 रुपये बैठती है, इसके स्थान पर अब उन्हें 40,000 रुपये की मानक कटौती उपलब्ध होगी।
जेटली ने बजट में कहा, 'वेतनभोगी करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिये मैं परिवहन भत्ता के संबंध में मौजूदा छूट तथा विविध चिकित्सीय व्यय की प्रतिपूर्ति के बदले 40,000 रुपये तक की मानक कटौती देने का प्रस्ताव करता हूं।'
जेटली ने कहा, 'मानक कटौती का लाभ पेंशनभोगियों को भी मिलेगा जिन्हें परिवहन तथा चिकित्सा व्यय के मद में कोई छूट प्राप्त नहीं होती। तथापि दिब्यांग व्यक्तियों को वर्धित दर पर परिवहन भत्ता देना जारी रखा जायेगा। इसके अतिरिक्त सभी कर्मचारियों के संबंध में अस्पताल में भर्ती होने के दौरान कराये गये उपचार आदि पर अन्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति लाभ भी जारी रहेंगे।'
मानक कटौती लागू होने से सरकार के राजस्व पर 8,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। इस निर्णय से लाभान्वित होने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों की कुल संख्या लगभग 2.5 करोड़ है।
हालांकि वित्त मंत्री ने इसके साथ ही तीन प्रतिशत शिक्षा उपकर के स्थान पर चार प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर भी लगा दिया। इसका मतलब है कि आयकर दाताओं पर कर बोझ एक प्रतिशत बढ़ जायेगा।
वरिष्ठ नागरिकों के लिये तीन लाख रुपये और 80 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों के मामले में पांच लाख रुपये तक की आय कर मुक्त है। इसके अलावा पिछले साल के बजट में लगाये गये 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये की आय पर 10 प्रतिशत तथा एक करोड़ रुपये से अधिक की आय पर 15 प्रतिशत का अधिभार भी ज्यों-का-त्यों रखा गया है।
वित्त मंत्री के अनुसार निर्धारण वर्ष 2016-17 के दौरान 1.89 करोड़ वेतनभोगी व्यक्तियों ने इनकम टैक्स रिटर्न जमा किया और कुल मिलाकर 1.44 लाख करोड़ रुपये का कर भुगतान किया। इस लिहाज से प्रत्येक नौकरीपेशा व्यक्ति ने इस दौरान 76,306 रुपये का आयकर सरकारी खजाने में दिया।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में आम बजट पेश किया। उन्होंने 8 राज्यों में चुनाव के मद्देनजर गरीबों-किसानों के लिए बड़ा एलान किया। 2022 तक सरकार ने देश के हर गरीब को घर देने का टारगेट रखा है। वहीं, 8 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने की बात कही है। जहां एक तरफ अरुण जेटली लोकसभा में बजट पेश कर रहे थे वहीं दूसरी ओर ट्विटर पर बजट को लेकर कई तरह के फनी कमेंट्स किए जा रहे थे।
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