
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक पत्रकार पर हमले का एक सनसनीखेज वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में चार-पांच बदमाश आबिद अली नाम के पत्रकार को पीट रहे हैं, पर बदमाशों को जवाब देने के लिए पत्रकार की पत्नी ने गजब का हौसला दिखाया। उन्होंने अपने घर रिवाल्वर निकाला और बदमाशों पर फायरिंग शुरू कर दी। गोलियां चलते ही बदमाशों की हेकड़ी निकल गई और वे लोग वहां से फरार हो गये। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वीडियो लखनऊ के काकोरी इलाके का है। वीडियो देखने से पता चलता है कि यह सुबह-सुबह की घटना है। एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में दिख रहा है कि एक शख्स पत्रकार आबिद अली के घर के बाहर खड़ा है। इस शख्स के हाथ में कुछ कागज है। आबिद अली पहले इस शख्स से गेट के अंदर से ही बात करते हैं। उसके बाद घर के अंदर से चाबी लाकर दरवाजे का ताला खोलते हैं। इसके बाद इन दोनों के बीच कुछ बात होती है। यहां तक तो आबिद अली और उनके आगे खड़ा शख्स सामान्य दिखता है। वीडियो देखने से नहीं पता चलता है कि उन्हें अपने ऊपर हमले का तनिक भी अंदेशा था।
कुछ ही देर में चार लोग वहां पहुंचते हैं और अचानक से आबिद अली पर हमला कर देते हैं। ये लोग आबिद अली को खींचकर बाहर ले जाते हैं और उनपर लात मुक्कों की बरसात कर देते हैं। इस बीच एक शख्स एक मोटा डंडा लेकर आता है और आबिद अली को पीटने लगता है। इस पर आबिद अली शोर मचाते हैं। कुछ ही सेकेंड में हंगामे को सुनकर एक महिला घर से बाहर निकलती है। महिला के हाथ में एक रिवाल्वर होता है। यह महिला बदमाशों को छोड़ देने की अपील करती है, लेकिन बदमाश आबिद अली पर हमला करते रहते हैं। इसके बाद यह महिला बदमाशों पर फायरिंग शुरू कर देती है। महिला द्वारा फायरिंग करने पर बदमाशों में हड़कंप मच जाता है। महिला बाहर निकल कर गोलियां चलाती हैं। इसके बाद कुछ ही सेकेंड में बदमाश फरार हो जाते हैं। इसके बाद महिला आबिद अली को रिवाल्वर दे देती है। तुरंत ही महिला मोबाइल भी लाकर आबिद अली को देती है। इसके बाद बदमाश फरार हो जाते हैं। पुलिस ने इस मामले में नामजद मुकदमा दर्ज किया है, और मामले की जांच कर रही है।
सीसीटीवी में क्या दिखाई दिया?
सीसीटीवी में एक शख्स आबिद के घर की डोरबेल बजाता है। आबिद आकर अपने घर का दरवाजा खोलते हैं। इसी बीच 8 नकाबपोश आते हैं और आबिद पर हमला कर देते हैं। एक शख्स ने डंडे से भी आबिद पर कई वार किए।
इसी बीच आबिद की पत्नी रिवॉल्वर लेकर आती हैं और एक फायर करती हैं। हमलावर तुरंत वहां से भाग जाते हैं। इसके बाद आबिद पत्नी से रिवॉल्वर लेकर एक फायर करते हैं।
पीड़ित ने क्या कहा?
आबिद अली ने बताया, "मेरे घर के बाहर एक शख्स आया, मैं उससे बात कर रहा था। इसी दौरान 8 नकाबपोश लोग आए और लाठी-डंडों से मुझपर हमला कर दिया। हंगामे की आवाज सुनते ही मेरी पत्नी बाहर आई और लाइसेंसी रिवॉल्वर से एक राउंड फायर किया, जिसके बाद बदमाश धमकी देते हुए भाग गए।"
हमलावर पक्ष ने क्या कहा?
SO संजय पांडे ने कहा, "दोनों पक्षों की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है। आबिद ने घटना की CCTV फुटेज हमें सौंप दी है।"
CO संतोष कुमार सिंह ने बताया, "अब्दुल शकीर अंसारी ने 2016 में 11 महीने के एग्रीमेंट पर घर किराए पर दिया था। इसके बाद आबिद ना किराया दे रहे थे और ना ही मकान खाली कर रहे थे। विवाद इसी बात पर हुआ है। दोनों तरफ से केस दर्ज कराया गया है। जांच के आगे एक्शन लिया जाएगा।"
अब अगर ये आरोपी पुलिस के हाथ नहीं आते और कार्यवाही के दौरान पहचान होने पर पकड़ने के डर से भागने पर जब गोली चलाएगी, उस स्थिति में फिर उसको फर्जी एनकाउंटर कहकर शोर मचाया जाएगा।
दूसरे, प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पत्रकार जिस मकान में रह रहा है, वह किराये का है और किराये अनुबन्ध की अवधि समाप्त होने उपरान्त पत्रकारिता की अकड़ में किराया तक देना बन्द कर दिया था, और न ही मकान खाली कर रहा था। यदि यह जानकारी सत्य है, सर्वप्रथम आबिद पर कार्यवाही होनी चाहिए। और यदि प्राप्त सूचना मिथ्या तो मकानमालिक और गुंडों पर सख्ती से कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
वैसे अक्सर आयकर और पुलिस पर आरोप लगता है कि अपने पद से लोगों को ब्लैकमेल करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर पत्रकार भी पीछे नहीं। लोगों को डराने में कई लोग ऐसे पत्रकारों का भी प्रयोग करते देखा गया है। जो पत्रकारिता नियमों के विरुद्ध है। लेकिन ऐसे पत्रकारों पर कोई कार्यवाही होते नहीं सुना। अगर कोई किरायेदार मकान खाली नहीं करता, उस स्थिति में मकानमालिक पुलिस और बिकाऊ पत्रकारों का गलत इस्तेमाल करते हैं।
अब यदि प्राप्त समाचार सत्य है, उस स्थिति में इसी पत्रकार से पूछा जाए कि अनुबन्ध समाप्त होने के बावजूद मकान खाली क्यों नहीं किया? आखिर किस कानून का पालन करते किराया नहीं दे रहा था? क्या मंशा थी? लगता है, इस पत्रकार ने सोंचा होगा कि कानून की अनदेखी करो और कार्यवाही किए जाने की स्थिति में साम्प्रदायिक रंग देकर जनमानस से लेकर नेताओं की भी सहनुभूति बटोर कर एक सफल पत्रकार बन जाऊँगा? सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर गुंडों और मकानमालिक पर कार्यवाही करने के साथ-साथ पत्रकार पर भी कार्यवाही की जाए, क्योकि सर्वप्रथम कानून को हाथ में इस आबिद पत्रकार ने लिया है। न ही यह अनुबन्ध का उलंघन करता और न ही किराये को रोकता, इस तरह की नौबत नहीं आती। असली कसूरवार यही पत्रकार है। आबिद कौन-से कानून का पालन कर रहा था? जिस समाचार समूह से आबिद जुड़ा था, उसे भी आबिद के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए। क्योकि आबिद की इस हरकत से समूह भी कलंकित होता है। कानून भी तोड़ो फिर सहानुभूति बटोर वाहवाही लूटने कौन-ही पुस्तक में लिखा है?
अब अगर ये आरोपी पुलिस के हाथ नहीं आते और कार्यवाही के दौरान पहचान होने पर पकड़ने के डर से भागने पर जब गोली चलाएगी, उस स्थिति में फिर उसको फर्जी एनकाउंटर कहकर शोर मचाया जाएगा।
दूसरे, प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पत्रकार जिस मकान में रह रहा है, वह किराये का है और किराये अनुबन्ध की अवधि समाप्त होने उपरान्त पत्रकारिता की अकड़ में किराया तक देना बन्द कर दिया था, और न ही मकान खाली कर रहा था। यदि यह जानकारी सत्य है, सर्वप्रथम आबिद पर कार्यवाही होनी चाहिए। और यदि प्राप्त सूचना मिथ्या तो मकानमालिक और गुंडों पर सख्ती से कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
वैसे अक्सर आयकर और पुलिस पर आरोप लगता है कि अपने पद से लोगों को ब्लैकमेल करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर पत्रकार भी पीछे नहीं। लोगों को डराने में कई लोग ऐसे पत्रकारों का भी प्रयोग करते देखा गया है। जो पत्रकारिता नियमों के विरुद्ध है। लेकिन ऐसे पत्रकारों पर कोई कार्यवाही होते नहीं सुना। अगर कोई किरायेदार मकान खाली नहीं करता, उस स्थिति में मकानमालिक पुलिस और बिकाऊ पत्रकारों का गलत इस्तेमाल करते हैं।
अब यदि प्राप्त समाचार सत्य है, उस स्थिति में इसी पत्रकार से पूछा जाए कि अनुबन्ध समाप्त होने के बावजूद मकान खाली क्यों नहीं किया? आखिर किस कानून का पालन करते किराया नहीं दे रहा था? क्या मंशा थी? लगता है, इस पत्रकार ने सोंचा होगा कि कानून की अनदेखी करो और कार्यवाही किए जाने की स्थिति में साम्प्रदायिक रंग देकर जनमानस से लेकर नेताओं की भी सहनुभूति बटोर कर एक सफल पत्रकार बन जाऊँगा? सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर गुंडों और मकानमालिक पर कार्यवाही करने के साथ-साथ पत्रकार पर भी कार्यवाही की जाए, क्योकि सर्वप्रथम कानून को हाथ में इस आबिद पत्रकार ने लिया है। न ही यह अनुबन्ध का उलंघन करता और न ही किराये को रोकता, इस तरह की नौबत नहीं आती। असली कसूरवार यही पत्रकार है। आबिद कौन-से कानून का पालन कर रहा था? जिस समाचार समूह से आबिद जुड़ा था, उसे भी आबिद के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए। क्योकि आबिद की इस हरकत से समूह भी कलंकित होता है। कानून भी तोड़ो फिर सहानुभूति बटोर वाहवाही लूटने कौन-ही पुस्तक में लिखा है?
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