सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राम मंदिर विवाद की सुनवाई की। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन सदस्यों की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में भावनात्मक एवं राजनीतिक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अब तक 5024 कलाकृतियां, 504 दस्तावेज, रामायण एवं गीता सहित 20 पुस्तकें सौंपी जा चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च मुकर्रर की है। शीर्ष न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को इस दौरान दस्तावेजों का अनुवाद कराने के आदेश दिया है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच में पहले दस्तावेजों के बारे में चर्चा हुई. बेंच ने कहा कि पहले मुख्य पक्षकारों को ही सुना जाएगा. वहीं, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि इस मामले को सिर्फ भूमि विवाद की तरह ही देखा जाए. याचिकाकर्ता ने कहा कि यह 100 करोड़ हिंदूओं की भावओं का मामला है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, ये भावनात्मक मुद्दा नहीं, भूमि विवाद है. मामले की सुनवाई से पहले सभी पक्षों ने कोर्ट में दस्तावेज सौंप दिए थे. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि राजनीतिक और भावनात्मक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी. यूपी सरकार ने कहा है कि हमने 504 दस्तावेज जमा किए हैं.
शिवसेना बोली- राम मंदिर पर कोर्ट कहां से आ गयाअयोध्या मामले की सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई पर शिव सेना नेता संजय राउत ने कहा, 'कोर्ट को पूछकर हमने आंदोलन शुरू नहीं किया था और न ही कोर्ट से पूछकर हमने बाबरी का ढांचा गिराया था। हमने और आडवाणी जी ने मिलकर आंदोलन शुरू किया था। मैं भी वहां था और हमने कोर्ट से पूछा नहीं था कि हमें यहां मंदिर बनाना है इसलिए हम बाबरी का ढांचा तोड़ रहे हैं। अभी कोर्ट का मामला कहां से आ गया।
मसले का हल होने से आपसी विवाद खत्म होगा- आचार्य सतेन्द्र दास
अयोध्या श्री रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेन्द्र दास का कहना है कि अयोध्या मसले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में निरंतर होती रहे, जिससे जल्दी से जल्द विवाद का निपटारा हो सके. अयोध्या मसले का हल होने से आपसी विवाद खत्म होगा और देश का विकास होगा. वहीं, महंत कमलनयन दास ने कहा कि मंदिर अयोध्या में ही बनेगा.
अयोध्या श्री रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेन्द्र दास का कहना है कि अयोध्या मसले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में निरंतर होती रहे, जिससे जल्दी से जल्द विवाद का निपटारा हो सके. अयोध्या मसले का हल होने से आपसी विवाद खत्म होगा और देश का विकास होगा. वहीं, महंत कमलनयन दास ने कहा कि मंदिर अयोध्या में ही बनेगा.
बेहद महत्वूपर्ण है यह सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा अन्य की इस दलील को खारिज किया था कि याचिकाओं पर अगले आम चुनावों के बाद सुनवाई हो. इस पीठ ने पिछले साल पांच दिसंबर को स्पष्ट किया था कि वह आठ फरवरी से इन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगी और उसने पक्षों से इस बीच जरूरी संबंधित कानूनी कागजात सौंपने को कहा.
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा अन्य की इस दलील को खारिज किया था कि याचिकाओं पर अगले आम चुनावों के बाद सुनवाई हो. इस पीठ ने पिछले साल पांच दिसंबर को स्पष्ट किया था कि वह आठ फरवरी से इन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगी और उसने पक्षों से इस बीच जरूरी संबंधित कानूनी कागजात सौंपने को कहा.
दीवानी अपीलों को या तो 5 या 7 न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा जाए- वकील वकीलों की दलील
वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने कहा था कि दीवानी अपीलों को या तो पांच या सात न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा जाए या इसे इसकी संवेदनशील प्रकृति तथा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और राजतंत्र पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए 2019 के लिए रखा जाए. शीर्ष अदालत ने भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ 14 दीवानी अपीलों से जुड़े एडवोकेट आन रिकार्ड से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी जरूरी दस्तावेजों को शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को सौंपा जाए.
वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने कहा था कि दीवानी अपीलों को या तो पांच या सात न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा जाए या इसे इसकी संवेदनशील प्रकृति तथा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और राजतंत्र पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए 2019 के लिए रखा जाए. शीर्ष अदालत ने भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ 14 दीवानी अपीलों से जुड़े एडवोकेट आन रिकार्ड से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी जरूरी दस्तावेजों को शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को सौंपा जाए.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद अपील
30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाइ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों के ढ़ांचे में बीच का गुंबद हिंदुओं का है.इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन हिस्सों में विभक्त करके इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बांटने की व्यवस्था दी थी. इसके बाद हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. दूसरी तरफ सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी. अन्य पक्षकारों ने भी अपनी याचिकाएं दायर की थीं. याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था.
30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाइ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों के ढ़ांचे में बीच का गुंबद हिंदुओं का है.इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन हिस्सों में विभक्त करके इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बांटने की व्यवस्था दी थी. इसके बाद हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. दूसरी तरफ सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी. अन्य पक्षकारों ने भी अपनी याचिकाएं दायर की थीं. याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था.
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