दिल्ली में चल रही सीलिंग को लेकर फरवरी 5 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली सीलिंग पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पूरी दिल्ली में अवैध निर्माण हो रहा है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निगम से कहा कि आप लोग दिल्ली में तबाही का इंतजार कर रहे है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रशासन किसी अनहोनी घटना के घटित होने उपरान्त कुछ दिनों बाद ही फाइलों को ठंठे बस्ते में डाल देती है। जहाँ तक अवैध निर्माण की बात है, जितना अधिक अवैध निर्माण पुरानी दिल्ली की चार दीवारी में हो रहा है, शायद ही चार दीवारी से बाहर हो रहा हो। लेकिन प्रशासन केवल चार दीवारी के बाहर कार्यवाही कर कानून को धोखा दे रहे हैं। पुरानी दिल्ली में कई स्थानों पर देखा जा सकता है कि पुराने मकानों में आगे निकली बालकनी(छज्जा) को मकान में सम्मिलित कर होटल अथवा दुकान बना ली गयी है। आखिर कौन है इसका ज़िम्मेदार?
हर कोई अपनी आंखें मूंदे है
कोर्ट ने दिल्ली के स्थानीय निकाय को अपनी आंखे मूंदने और कोई हादसा होने का इंतजार करने के लिए आड़े हाथ लिया और दिल्ली विकास प्राधिकरण से नगर के मास्टर प्लान 2021 में बदलाव करने के उसके प्रस्तावों पर सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण किसी तरह के दबाव के आगे झुक रहा है न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘दिल्ली में हर कोई अपनी आंखें मूंदे है और कोई हादसा होने का इंतजार कर रहा है। आपने (नगर निकाय) उपहार सिनेमा अग्निकाण्ड त्रासदी और बवाना तथा कमला मिल्स जैसी घटनाओं से भी कुछ नहीं सीखा है।’’
पीठ ने प्राधिकरण से सवाल किया, ‘‘दिल्ली में रहने वाली जनता के बारे में क्या कहना है?’’ पीठ ने कहा, ‘‘आपको जनता का पक्ष भी सुनना होगा. आप सिर्फ कुछ लोगों को ही नहीं सुन सकते.’’ पीठ ने दिल्ली में हो रहे अनधिकृत निर्माणों का जिक्र किया और कहा, ‘‘आप दिल्ली की जनता के हितों का ध्यान रख रहे हैं या नहीं?’’ पीठ ने कानून का शासन बनाये रखने पर जोर देते हुये कहा कि दिल्ली कचरा प्रबंधन, प्रदूषण और पार्किंग जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है.
पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित 20 शहरों में से 13 भारत में है. दिल्ली उनमें संभवत: सबसे अधिक प्रदूषित है. मैं नहीं जानता कि दिल्ली में निकाय प्राधिकारी क्या कर रहे हैं.’’ न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें मास्टर प्लान 2021 में प्रस्तावित बदलावों का जिक्र हो.
31 जनवरी को हुए थी सुनवाई
31 जनवरी को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डीडीए और अन्य पार्टियों से दिल्ली का मास्टर प्लान लाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा कि अगर एक बार यह मान लिया जाए कि मॉनिटरिंग कमेटी को भंग कर दें तो क्या निगम ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं कर सकता? अदालत छतरपुर रोड स्थित मारबल की दुकानों की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
मास्टर प्लान पर चर्चा
पिछले दिनों दिल्ली सरकार और बीजेपी के बीच जमकर तकरार हुई थी। इस हंगामें के बाद दिल्ली के मास्टर प्लान में बदलाव को लेकर केंद्र ने सहमति जताई और केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय के आला अधिकारियों कीमीटिंग हुई, जिसमे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी व दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, निगम आयुक्त के सचिव डीएस मिश्रा व एनडीएमसी के प्रमुख नरेश कुमार व डीडीए के उपाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने हिस्सा लिया था. बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार जल्द ही इस पूरी समस्या को खत्म करने के लिए जल्द ही अहम कदम उठाएगी।
जहाँ तक मास्टर प्लान की बात है, पुरानी दिल्ली में मास्टर प्लान के किर्याविन्त होते देखने की लालसा में, लगभग एक पीढ़ी तो स्वर्ग सिधार चुकी है और दूसरी तैयार बैठी है। लेकिन तुष्टिकरण के चलते शायद ही पुरानी दिल्ली में मास्टर प्लान पर काम हो पाए? जो एक गंभीर समस्या है, जिसका भ्रष्टाचारी भरपूर लाभ उठा रहे हैं, और नेता मालपुए खाने में व्यस्त हैं। दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है कि तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार का चोली दामन का साथ है। जबकि रिश्वत लेना और देना दोनों ही अपराध है, फिर भी भ्रष्टाचार फलफूल रहा है। अब बिजली विभाग को ही लें, जबसे इस विभाग का निजीकरण हुआ है, भ्रष्टाचार का बोल बाला है। मीटर बदलने पर नोट, पीली तार डालने पर नोट, मीटर घर से बाहर लगाने पर नोट, बिजली में कोई खराबी है, तार ठीक करने पर नोट,आदि आदि, कहाँ तक गिनवाया जाए। हाँ, यदि संजय गाँधी असमय मृत्यु नहीं हुई होती, निश्चित रूप से मास्टर प्लान लागू हो गया होता और शायद ये सीलिंग समस्या भी नहीं होती।
डीडीए की बैठक में अहम फैसले
राजधानी में सीलिंग को लेकर हुई डीडीए की बैठक में तीन प्रस्ताव पास किए गए. इस बैठक में पास किए गए प्रस्तावों पर जनता की भी राय ली जाएगी. इस मीटिंग में दुकान और घर के FAR को बढ़ाकर 350 किया गया. FAR बढ़ने से बेसमेंट भी सीलिंग के दायरे से बाहर होंगे. 12 मीटर की सड़कों पर बने गोदाम रेगुलराइज किए जाएंगे. फ्लोर एरिया रेशो को 180 से बढ़ाकर 350 किया गया. अलग-अलग कैटगरी के लिए अलग-अलग कनवर्जन चार्ज होगा. कनवर्जन चार्ज पर पैनल्टी 10 गुना से घटाकर 2 की गई.
सीलिंग के खिलाफ दिल्ली बंद
देश की राजधानी में हो रही सीलिंग के खिलाफ व्यापारियों ने पिछले शुक्रवार को दिल्ली बंद का ऐलान किया था. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने दो दिन दिल्ली बंद का अह्वान किया था वहीं चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (CTI) ने तीन दिन के बंद की घोषणा की थी. इस बंद के चलते 8 लाख दुकानों और 1.5 लाख फैक्ट्रियों के पूरी तरह बंद रहीं. माना जा रहा है कि इसमें राजधानी के 7 लाख कारोबारी संस्थानों का शटर गिरा रहेगा और 5 हजार जगहों पर प्रदर्शन की भी योजना है.
राजधानी में चल रही सीलिंग को लेकर व्यापारियों के ऐलान के मुताबिक 2 फरवरी और 3 फरवरी को दिल्ली के ज्यादातर बाजारों में दुकानों का शटर गिरा रहेगा. दिल्ली में 5 हजार जगहों पर सीलिंग विरोधी प्रदर्शन किया जाएगा. ऑल इंडिया कारोबारी संघ ने 48 घंटे के बंद का एलान किया है.
माना जा रहा है कि इस महाबंद में दिल्ली के करीब 2 हजार व्यापार समितियां हिस्सा लेंगी और 7 लाख से भी ज्यादा कारोबारी संस्थान इस दौरान बंद रहेंगे. दिल्ली बंद में बड़े बाजार कनॉट प्लेस, करोल बाग, हौजखास, चांदनी चौक समेत तमाम अहम मार्केट भी नहीं खुलेंगे. इस संबंध में व्यापारी सीलिंग की मॉनिटरिंग कमिटी से भी मिलेंगे. सीलिंग बंद ना होने पर जनप्रतिनिधियों के घरों के घेराव की भी योजना है.
सीलिंग के खिलाफ व्यापारी कहीं कैंडल मार्च निकाल रहे हैं तो कहीं सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. दिल्ली के व्यापारियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में दिल्ली नगर निगम कानून 1957 के मूलभूत प्रावधानों को ताक पर रखकर सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है
राजधानी में सीलिंग के खिलाफ कारोबार जगत के विरोध को सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के समर्थन का अतिरिक्त हथियार भी मिल गया है. आप भी बंद के साथ है. कांग्रेस भी सीलिंग के खिलाफ है. व्यापारी संघ केन्द्र सरकार से मांग कर रहा है कि तुरंत एक अध्यादेश या कानून लाकर सीलिंग को रोका जाए और मास्टर प्लान के एक्ट में भी बदलाव किया जाए.
सरकार, एमसीडी या अदालत जो करेंगी, सो करेगी, लेकिन उससे पहले दिल्ली में लाखों दुकानों का बंद होना आम लोगों के लिए परेशानी का पहाड़ जरुर बन सकता है.
इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रशासन किसी अनहोनी घटना के घटित होने उपरान्त कुछ दिनों बाद ही फाइलों को ठंठे बस्ते में डाल देती है। जहाँ तक अवैध निर्माण की बात है, जितना अधिक अवैध निर्माण पुरानी दिल्ली की चार दीवारी में हो रहा है, शायद ही चार दीवारी से बाहर हो रहा हो। लेकिन प्रशासन केवल चार दीवारी के बाहर कार्यवाही कर कानून को धोखा दे रहे हैं। पुरानी दिल्ली में कई स्थानों पर देखा जा सकता है कि पुराने मकानों में आगे निकली बालकनी(छज्जा) को मकान में सम्मिलित कर होटल अथवा दुकान बना ली गयी है। आखिर कौन है इसका ज़िम्मेदार?
हर कोई अपनी आंखें मूंदे है
कोर्ट ने दिल्ली के स्थानीय निकाय को अपनी आंखे मूंदने और कोई हादसा होने का इंतजार करने के लिए आड़े हाथ लिया और दिल्ली विकास प्राधिकरण से नगर के मास्टर प्लान 2021 में बदलाव करने के उसके प्रस्तावों पर सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण किसी तरह के दबाव के आगे झुक रहा है न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘दिल्ली में हर कोई अपनी आंखें मूंदे है और कोई हादसा होने का इंतजार कर रहा है। आपने (नगर निकाय) उपहार सिनेमा अग्निकाण्ड त्रासदी और बवाना तथा कमला मिल्स जैसी घटनाओं से भी कुछ नहीं सीखा है।’’
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने हाल ही में दुकान-रिहाइशी भूखण्डों और परिसरों का एफएआर और रिहाइशी भूखण्डों के बराबर करने का प्रस्ताव किया है. प्राधिकरण के इस कदम से सीलिंग के खतरे का सामना कर रहे कारोबारियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी.
दो सप्ताह में दें हलफनामापीठ ने प्राधिकरण से सवाल किया, ‘‘दिल्ली में रहने वाली जनता के बारे में क्या कहना है?’’ पीठ ने कहा, ‘‘आपको जनता का पक्ष भी सुनना होगा. आप सिर्फ कुछ लोगों को ही नहीं सुन सकते.’’ पीठ ने दिल्ली में हो रहे अनधिकृत निर्माणों का जिक्र किया और कहा, ‘‘आप दिल्ली की जनता के हितों का ध्यान रख रहे हैं या नहीं?’’ पीठ ने कानून का शासन बनाये रखने पर जोर देते हुये कहा कि दिल्ली कचरा प्रबंधन, प्रदूषण और पार्किंग जैसी अनेक समस्याओं से जूझ रही है.
पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित 20 शहरों में से 13 भारत में है. दिल्ली उनमें संभवत: सबसे अधिक प्रदूषित है. मैं नहीं जानता कि दिल्ली में निकाय प्राधिकारी क्या कर रहे हैं.’’ न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें मास्टर प्लान 2021 में प्रस्तावित बदलावों का जिक्र हो.
31 जनवरी को हुए थी सुनवाई
31 जनवरी को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डीडीए और अन्य पार्टियों से दिल्ली का मास्टर प्लान लाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा कि अगर एक बार यह मान लिया जाए कि मॉनिटरिंग कमेटी को भंग कर दें तो क्या निगम ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं कर सकता? अदालत छतरपुर रोड स्थित मारबल की दुकानों की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
मास्टर प्लान पर चर्चा
पिछले दिनों दिल्ली सरकार और बीजेपी के बीच जमकर तकरार हुई थी। इस हंगामें के बाद दिल्ली के मास्टर प्लान में बदलाव को लेकर केंद्र ने सहमति जताई और केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय के आला अधिकारियों कीमीटिंग हुई, जिसमे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी व दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, निगम आयुक्त के सचिव डीएस मिश्रा व एनडीएमसी के प्रमुख नरेश कुमार व डीडीए के उपाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने हिस्सा लिया था. बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार जल्द ही इस पूरी समस्या को खत्म करने के लिए जल्द ही अहम कदम उठाएगी।
जहाँ तक मास्टर प्लान की बात है, पुरानी दिल्ली में मास्टर प्लान के किर्याविन्त होते देखने की लालसा में, लगभग एक पीढ़ी तो स्वर्ग सिधार चुकी है और दूसरी तैयार बैठी है। लेकिन तुष्टिकरण के चलते शायद ही पुरानी दिल्ली में मास्टर प्लान पर काम हो पाए? जो एक गंभीर समस्या है, जिसका भ्रष्टाचारी भरपूर लाभ उठा रहे हैं, और नेता मालपुए खाने में व्यस्त हैं। दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है कि तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार का चोली दामन का साथ है। जबकि रिश्वत लेना और देना दोनों ही अपराध है, फिर भी भ्रष्टाचार फलफूल रहा है। अब बिजली विभाग को ही लें, जबसे इस विभाग का निजीकरण हुआ है, भ्रष्टाचार का बोल बाला है। मीटर बदलने पर नोट, पीली तार डालने पर नोट, मीटर घर से बाहर लगाने पर नोट, बिजली में कोई खराबी है, तार ठीक करने पर नोट,आदि आदि, कहाँ तक गिनवाया जाए। हाँ, यदि संजय गाँधी असमय मृत्यु नहीं हुई होती, निश्चित रूप से मास्टर प्लान लागू हो गया होता और शायद ये सीलिंग समस्या भी नहीं होती।
डीडीए की बैठक में अहम फैसले
राजधानी में सीलिंग को लेकर हुई डीडीए की बैठक में तीन प्रस्ताव पास किए गए. इस बैठक में पास किए गए प्रस्तावों पर जनता की भी राय ली जाएगी. इस मीटिंग में दुकान और घर के FAR को बढ़ाकर 350 किया गया. FAR बढ़ने से बेसमेंट भी सीलिंग के दायरे से बाहर होंगे. 12 मीटर की सड़कों पर बने गोदाम रेगुलराइज किए जाएंगे. फ्लोर एरिया रेशो को 180 से बढ़ाकर 350 किया गया. अलग-अलग कैटगरी के लिए अलग-अलग कनवर्जन चार्ज होगा. कनवर्जन चार्ज पर पैनल्टी 10 गुना से घटाकर 2 की गई.
सीलिंग के खिलाफ दिल्ली बंद
देश की राजधानी में हो रही सीलिंग के खिलाफ व्यापारियों ने पिछले शुक्रवार को दिल्ली बंद का ऐलान किया था. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने दो दिन दिल्ली बंद का अह्वान किया था वहीं चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (CTI) ने तीन दिन के बंद की घोषणा की थी. इस बंद के चलते 8 लाख दुकानों और 1.5 लाख फैक्ट्रियों के पूरी तरह बंद रहीं. माना जा रहा है कि इसमें राजधानी के 7 लाख कारोबारी संस्थानों का शटर गिरा रहेगा और 5 हजार जगहों पर प्रदर्शन की भी योजना है.
राजधानी में चल रही सीलिंग को लेकर व्यापारियों के ऐलान के मुताबिक 2 फरवरी और 3 फरवरी को दिल्ली के ज्यादातर बाजारों में दुकानों का शटर गिरा रहेगा. दिल्ली में 5 हजार जगहों पर सीलिंग विरोधी प्रदर्शन किया जाएगा. ऑल इंडिया कारोबारी संघ ने 48 घंटे के बंद का एलान किया है.
माना जा रहा है कि इस महाबंद में दिल्ली के करीब 2 हजार व्यापार समितियां हिस्सा लेंगी और 7 लाख से भी ज्यादा कारोबारी संस्थान इस दौरान बंद रहेंगे. दिल्ली बंद में बड़े बाजार कनॉट प्लेस, करोल बाग, हौजखास, चांदनी चौक समेत तमाम अहम मार्केट भी नहीं खुलेंगे. इस संबंध में व्यापारी सीलिंग की मॉनिटरिंग कमिटी से भी मिलेंगे. सीलिंग बंद ना होने पर जनप्रतिनिधियों के घरों के घेराव की भी योजना है.
राजधानी में सीलिंग के खिलाफ कारोबार जगत के विरोध को सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के समर्थन का अतिरिक्त हथियार भी मिल गया है. आप भी बंद के साथ है. कांग्रेस भी सीलिंग के खिलाफ है. व्यापारी संघ केन्द्र सरकार से मांग कर रहा है कि तुरंत एक अध्यादेश या कानून लाकर सीलिंग को रोका जाए और मास्टर प्लान के एक्ट में भी बदलाव किया जाए.
सरकार, एमसीडी या अदालत जो करेंगी, सो करेगी, लेकिन उससे पहले दिल्ली में लाखों दुकानों का बंद होना आम लोगों के लिए परेशानी का पहाड़ जरुर बन सकता है.

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