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ऑफिस ऑफ प्रॉफिट: बैकफुट पर AAP के 20 विधायक, चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका वापस ली

 ऑफिस ऑफ प्रॉफिट: बैकफुट पर AAP के 20 विधायक, चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका वापस लीलाभ का पद रखने के लिए चुनाव आयोग की सिफारिश पर विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराए गए आप के 20 सदस्यों ने पूर्व में चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गयी अपनी याचिका वापस ले ली. आम आदमी पार्टी के विधायकों ने लाभ का पद रखने के लिए अपने खिलाफ की गई शिकायत पर सुनवाई जारी रखने के चुनाव आयोग के फैसले को पिछले साल अगस्त में चुनौती दी थी. विधायकों ने कहा था कि जब उच्च न्यायालय संसदीय सचिवों के तौर पर उनकी नियुक्तियां रद्द कर चुका है तो चुनाव आयोग के मामले में सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है.
उन्होंने न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष कहा कि वे पूर्व में दायर अपनी याचका वापस लेने जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने उच्च न्यायालय की एक वृहद पीठ के सामने अपनी अयोग्यता को चुनौती दी है दूसरे पक्ष से किसी तरह का विरोध ना होने पर अदालत ने चुनाव आयोग के 23 जून, 2017 के फैसले को चुनौती देने वाली विधायकों की याचिका ‘वापस ली हुई मानकर खारिज’ कर दी. प्रशांत पटेल नाम के एक व्यक्ति ने आप के 21 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में लाभ के पद से जुड़ी याचिका दायर की थी.
चुनाव आयोग ने की थी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की सिफारिश
दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) को एक बड़ा झटका देते हुए निर्वाचन आयोग ने बीते 19 जनवरी को को संसदीय सचिव के रूप में लाभ के पद धारण करने के लिए आप के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने की सिफारिश की थी. कांग्रेस द्वारा जून 2016 में की गई एक शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति को अपनी राय दी थी. कांग्रेस के आवेदन में कहा गया था कि जरनैल सिंह (राजौरी गार्डन) सहित आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को दिल्ली सरकार के मंत्रियों का संसदीय सचिव नियुक्त किया गया है. जरनैल सिंह ने पिछले साल पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.
ये विधायक अयोग्य करार दिए गए थे 
निर्वाचन आयोग द्वारा आप विधायकों को अयोग्य ठहराने की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से की गई अनुशंसा के बाद कानून व न्याय मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर दी थी कि राष्ट्रपति ने आप के 20 विधायकों को अयोग्य करार देने को मंजूरी दे दी थी. अयोग्य करार दिए गए विधायकों में अलका लांबा, आदर्श शास्त्री, संजीव झा, राजेश गुप्ता, कैलाश गहलोत, विजेंद्र गर्ग, प्रवीन कुमार, शरद कुमार, मदन लाल खुफिया, शिव चरण गोयल, सरिता सिंह, नरेश यादव, राजेश ऋषि, अनिल कुमार, सोम दत्त, अवतार सिंह, सुखवीर सिंह डाला, मनोज कुमार, नीतिन त्यागी और जरनैल सिंह शामिल हैं.
चुनाव आयोग ने खारिज की थी AAP की याचिका
उल्लेखनीय है कि पिछले साल (2017) अक्टूबर में निर्वाचन आयोग ने आप विधायकों की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लाभ के पद का मामला खत्म करने का आग्रह किया था. आयोग ने आप विधायकों को नोटिस जारी कर इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा था. आप सरकार ने मार्च 2015 में दिल्ली विधानसभा सदस्य (अयोग्यता हटाने) अधिनियम, 1997 में एक संशोधन पारित किया था, जिसमें संसदीय सचिव के पदों को लाभ के पद की परिभाषा से मुक्त करने का प्रावधान था.
लेकिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उस संशोधन को स्वीकृति देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सितंबर 2016 में सभी नियुक्तियों को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया. न्यायालय ने कहा कि था कि संसदीय सचित नियुक्त करने के आदेश उपराज्यपाल की मंजूरी के बगैर जारी किए गए थे.
(इनपुट एजेंसी से भी)

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