आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार
तीसरा साल शुरू होने के साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार अपने पुरे जोश में है। बीते लंबे समय से देश को लूटने और बेवकूफ बनाने वालों का हिसाब-किताब शुरू हो चुका है। चौथे साल के पहले महीने में ही मोदी सरकार ने कई ऐसे बड़े फैसले लिए हैं जिनसे अंदर ही अंदर खलबली मची हुई है। बीते 10 साल में देश को लूटने वाली कांग्रेस सरकार और उसके कुछ कृपापात्रों की पोलपट्टी धीरे-धीरे सामने आ रही है। ये पांचों वो मामले हैं जिनके कारण बीते कुछ साल में देश और यहां रहने वाले हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश की गई थी।
एक छठा काम जो छद्दम धर्म-निरपेक्षों की नींद हराम करने को है, वह अयोध्या में राममन्दिर का मुद्दा है। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट से निवेदन कर उन लोगों को, जो अपनी रोज़ी-रोटी और कुर्सी की खातिर खुदाई में मिले मंदिर के अवशेषों को प्रस्तुत न कर गुमराह किया, को भी दण्डित करने के लिए कहें। राममंदिर बनने में किस तरह कांग्रेस और वामपंथी अदालतों को गुमराह करते रहे; और किन लोगों के कहने पर राम और रामसेतु काल्पनिक कहा था। किस तरह आम मुसलमान को सच्चाई से गुमराह कर पुरुषोत्तम श्रीराम का इतने वर्षों से अपमान किया जा रहा है। जैसाकि फरवरी 8 को श्री श्री रविशंकर के साथ वार्ता में मुस्लिम मौलाना वहां से मस्जिद हटाने को तैयार हो रहे हैं, अप्रत्यक्ष रूप से सच्चाई को स्वीकार कर रहे हैं कि यह पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मस्थान है।
भगवा आतंक का सच सामने आया
यह बात अब पूरी तरह साफ हो गई है कि पाकिस्तान जाने वाली समझौता एक्सप्रेस में 2007 में हुए धमाके में शामिल 2 संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादियों को कांग्रेस सरकार ने देश से भगाने में मदद की थी। इसके बाद पूरी साजिश के तहत हिंदू आतंकवाद की कहानी रची गई और इसमें स्वामी असीमानंद समेत कुल 5 लोगों को आरोपी बनाया गया। केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद से कांग्रेस सरकार ने इस साजिश को अंजाम दिया, ताकि हिंदुओं को आतंकवादी साबित किया जा सके। मामले की जांच करने वाली एसआईटी के पूर्व अधिकारी गुरदीप सिंह ने कोर्ट के आगे बयान दिया है कि इस केस में 2 आरोपियों को जबरन छुड़वा दिया गया था और भारी दबाव में 15 दिन के अंदर जांच पूरी करनी पड़ी थी। अब यह सवाल उठ रहा है कि वो कौन से बड़े अधिकारी थे, जिन्होंने दबाव बनाया था और इन अधिकारियों ने ऐसा किसके कहने पर किया था। शक की सुई सीधे तौर पर उस वक्त की कांग्रेस सरकार के नेताओं पर है। जांच में जल्द ही इनके नाम भी सामने आने की उम्मीद है।
पैसे लेकर प्रदर्शन की पोल खुली
मोदी सरकार आने के बाद से समाजसेवा के नाम पर देश को तोड़ने की साजिश में जुटे एनजीओ का हुक्का-पानी बंद करने का काम चल रहा है। बीते हफ्ते रिपब्लिक टीवी के स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि देश के कई फाइवस्टार समाजसेवी और एनजीओ इटली, जर्मनी और अमेरिका से पैसा लेकर भारत के अंदर देशविरोधी धरने-प्रदर्शन का धंधा चला रहे हैं। इसमें अरविंद केजरीवाल की पार्टी के नेता उदय कुमार का स्टिंग किया गया, जिसमें उसने खुद अपने मुंह से अपने कारनामों को कबूला है। यह बात सामने आई कि कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर स्टेशन के खिलाफ प्रदर्शन के लिए उदय कुमार ने विदेशों से पैसे लेकर प्रदर्शन किए थे। इस काम में उसे कई ईसाई मिशनरियां करोड़ों रुपये दे रही थीं। यह भी शक है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा केजरीवाल तक भी पहुंचा।3. लालू के घर कुर्की और नीलामी
अपने तीसरे साल के खत्म होते ही मोदी सरकार के फोकस पर लालू यादव और उनकी करप्ट फैमिली है। नए बेनामी कानून के तहत लालू और उनके बेटे-बेटियों की सारी अवैध संपत्ति जब्त कर ली गई है। इस पूरी जायदाद की कीमत 180 करोड़ रुपये से ज्यादा होने के आसार हैं। फिलहाल आयकर विभाग जांच की प्रक्रिया पूरी कर रहा है और बहुत जल्द जनता से लूटी गई लालू की संपत्ति नीलाम कर दी जाएगी। साथ ही लालू के मंत्री बेटे के नाम पर एक पेट्रोल पंप का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है। इससे पहले लालू यादव पर ऐसी कार्रवाई की कल्पना करना भी मुश्किल था।
4. हुर्रियत के गद्दारों के चेहरे बेनकाब
कश्मीर समस्या के इतने सालों में पहली बार हुआ है जब दिल्ली, गुड़गांव और सोनीपत जैसे शहरों में बैठकर आतंकवादी फंडिंग करने वालों तक कानून के हाथ पहुंचे हैं। जून के महीने में ही ऐसे कई हवाला कारोबारियों पर पुलिस ने दबिश दी और पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया। ये खुलासा इतना अहम बताया जा रहा है कि इसके चलते कश्मीर में हुर्रियत के अलागववादी नेता बहुत बुरी तरह से बौखलाए हुए हैं।
5. एनडीटीवी के घोटाले का भंडाफोड़
एनडीटीवी की जालसाजी की बातें तो काफी पहले से जनता के बीच थीं, लेकिन तीन साल पूरे होने के ही मौके पर एनडीटीवी के खिलाफ सीबीआई ने छापा मारा। चैनल का दावा है कि ये छापा उसकी आवाज को कुचलने के लिए मारा गया। लेकिन हमारी जानकारी के मुताबिक छापेमारी में एनडीटीवी की चोरबाजारी के कई अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। एनडीटीवी पर हमेशा से आरोप लगते रहे हैं कि वो पाकिस्तान और आतंकवादियों को फायदा पहुंचाने के अपने छुपे एजेंडे के तहत काम करता है। इस छापे ने एनडीटीवी और उसकी तरह के तमाम बिचौलिए पत्रकारों की हालत पतली कर रखी है। उन्हें लग रहा है कि आज नहीं कल उनकी कमाई और कामों का हिसाब भी जरूर होगा।
6.तीन तलाक
कई वर्षों से मुस्लिम महिलाएँ तीन तलाक से निजात पाने के लिए जूझ रही थी, इस मुद्दे पर भी पहल कर एक नयी क्रांति की जोत जलाकर मुस्लिम महिलाओं को राहत देने में प्रयत्नशील है। जिस दिन राज्यसभा में महिला हित का स्वांग रचने वाले इस बिल को पारित कर देंगे, निश्चित रूप से मुस्लिम महिलाओं को बहुत सकून मिलेगा।
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