कुवैत ने पाकिस्तान समेत पांच इस्लामी देशों के नागरिकों के अपने यहां घुसने पर पाबंदी लगा दी है। पाकिस्तान के अलावा बाकी देश हैं- सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और ईरान। पिछले दिनों अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जब सात देशों के नागरिकों के अपने यहां आने पर रोक लगाई थी तो दुनिया भर में काफी हंगामा हुआ था। लेकिन ये पहली बार है जब एक इस्लामी आबादी वाला देश ही बाकी इस्लामी देशों से खतरा महसूस कर रहा है। उधर पाकिस्तान सरकार सफाई दे रही है कि उसके नागरिकों पर पाबंदी नहीं है। लेकिन कुवैती सरकार के आदेश में साफ-साफ पाकिस्तान का नाम लिखा हुआ है। वहां हजारों की तादाद में पाकिस्तानी मजदूर काम करते हैं। इस आदेश का उन पर भी असर पड़ने के आसार हैं।
कुवैत सरकार द्वारा पाकिस्तान सहित 5 इस्लामी देशों के अपने देश में घुसने पर पाबन्दी लगने पर किसी भी विपक्षी पार्टी अथवा नेता ने विरोध करने का साहस नहीं किया, क्योकि वहाँ के नेता देश परस्ती को अपना धर्म यानि मजहब मानते हैं, जबकि भारत में स्थिति एकदम विपरीत है। समस्त भारतीय नेता समाज को राजधर्म विदेशों से सीखना चाहिए। जहाँ कुर्सी से पहले देश के कानून को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन तुष्टिकरण के पुजारी इन मूल बातों को देखने और समझने का साहस नहीं। यदि जिस दिन तुष्टिकरण के पुजारियों ने विदेशियों से राजधर्म सीख लिया, प्रगति में हमारा भारत विश्व में प्रथम स्थान पर होगा।
इस्लाम ही इस्लाम के लिए खतरा!
पाबंदी के बाद अब पाकिस्तान समेत सभी पांच देशों के नागरिक कुवैती वीजा के लिए अप्लाई भी नहीं कर सकेंगे। वहां की सरकार ने इस्लामी आतंकवादियों को अपने यहां घुसने से रोकने के लिए ये कदम उठाया है। कुछ दिन पहले ही डोनल्ड ट्रंप ने एक एग्जिक्यूटिव ऑर्डर के जरिए सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अपने यहां घुसने पर 120 दिन की पाबंदी लगाई थी। कुवैत ने जिन देशों पर पाबंदी लगाई है उसमें अफगानिस्तान को छोड़कर अमेरिकी लिस्ट के सारे नाम हैं। वैसे वहां पर सीरियाई नागरिकों के घुसने पर पहले से पाबंदी है। 2011 में ही कुवैत की सरकार ने एक आदेश के जरिए सीरिया के नागरिकों को वीजा देने पर रोक लगा दी थी।
जिहादी खतरे का शिकार है कुवैत
दरअसल ये छोटा सा खाड़ी देश लगातार इस्लामी हिंसा का शिकार होता रहा है। 2015 में वहां की एक शिया मस्जिद पर सुन्नी आतंकवादियों ने बम धमाका कराया था। जिसमें 27 कुवैती नागरिकों की जान चली गई थी। इसके अलावा कई छिटपुट हमले भी वहां होते रहे हैं। कुवैत दुनिया के कुछ उन देशों में से माना जाता है जहां सख्त इस्लामी नियम-कायदे लागू हैं। हालांकि खाड़ी के देशों में वो सबसे ज्यादा विकसित माना जाता है। लिहाजा कुवैत काफी समय से इस्लामी जिहादी ताकतों के टारगेट पर रहा है। इसके अलावा इराक की सरकार के साथ कुवैत का सीमा विवाद भी काफी समय से चलता रहा है। पहले खाड़ी युद्ध के वक्त सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला करके उसे अपने कब्जे में ले लिया था। जिसके बाद अमेरिका ने फौजी ऑपरेशन के जरिए कुवैत को आजाद करवाया था।
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