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| भोपाल में आयोजित लाठी रैली में मंच पर एक-दूसरे का हाथ थामे पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव, पूर्व सांसद और डॉ. अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर। (फोटो- पीटीआई) |
अंबेडकर ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर पुलिस ने दोषियों की बजाय उलटे पीड़ितों पर कार्रवाई की। यह सब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “अगर महाराष्ट्र में दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो हिंदुओं में भी हाफिज सईद पैदा होंगे। इसे रोकना है, तो दोषियों पर कार्रवाई हो।” अंबेडकर ने देश में सामाजिक लोकतंत्र लाने की पैरवी करते हुए कहा कि छोटी समझी जाने वाली जातियों को अपने मान-सम्मान के लिए एकजुट होना होगा।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव पिछड़ी जाति से हैं, अब कांग्रेस को तय करना है कि वह विधानसभा चुनाव में जीत के बाद किसे मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। गुजरात में अगर कांग्रेस आदिवासियों को अपने से जोड़ने में सफल हो जाती, तो उसकी सरकार बननी तय थी। शरद यादव ने कहा कि देश में हालात भयावह होते जा रहे हैं। छोटी जातियों को एकजुट होकर कट्टरपंथियों का मुकाबला करना होगा। उन्होंने कहा, “पेशवाई के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी गई थी, वह छोटी जातियों ने लड़ी थी। वहां के कोरेगांव के स्तंभ पर उनके नाम दर्ज हैं। सवाल उठता है कि छोटी जाति के लोग हिंदू नहीं हैं क्या? इन पर हिंदूवादियों को हमला क्यों करना चाहिए?”
शरद ने कहा, “सवाल यह है कि जब सरकार दोषियों का साथ देगी, तो इन पर लगाम कौन लगाएगा? इसलिए कह रहा हूं कि देश में हालात भयावह हैं, और भयावह हो जाएंगे।” लाठी रैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव जुबेर अहमद, सत्यशोधक समाज के संयोजक सरदार सिंह, अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद के अध्यक्ष सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा, अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक गुलजार सिंह मरकाम, जदयू (शरद) के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद यादव और कांग्रेस की विधायक हिना कांवरे खास तौर पर मौजूद रहीं।
भिड़े और एकबोटे की गिरफ्तारी के बाद ही शांत होगा दलितों का गुस्सा--प्रकाश आंबेडकर
भीमा-कोरेगांव हिंसा का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। दलितों के नेता और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने सरकार के समक्ष नई मांग रखी है। उन्होंने कहा कि शंभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे की गिरफ्तारी तक दलितों का गुस्सा शांत नहीं होगा। प्रकाश ने पुलिस द्वारा दलित युवा प्रदर्शनकारियों की तलाश भी बंद करने की मांग की है। भीमा-कोरेगांव हिंसा को लेकर प्रकाश आंबेडकर ने बुधवार (3 जनवरी) को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया था। इस बीच, हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और टकराव के कारण चरमराई यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है।भारतीय रिपब्लिकन पार्टी बहुजन महासंघ के नेता प्रकाश आंबेडकर एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गुरुवार (4 जनवरी) को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा, ‘हिंसा को लेकर लोग गुस्से में हैं। हमलोग बंद के दौरान किसी तरह उनके गुसे को रोकने में समर्थ रहे थे, लेकिन लंबे समय तक ऐसा नहीं किया जा सकता है। हमने शुरुआत में ही आरोपियों का नाम स्पष्ट करते हुए भिड़े और एकबोटे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। हिंसा भड़काने को लेकर उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई की भी मांग की गई थी। अब मुख्यमंत्री ने उन्हें गिरफ्तार करने का भरोसा दिलाया है। भिड़े को गिरफ्तार किया जाता है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।’ प्रकाश आंबेडकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब शंभाजी भिड़े के समर्थन में सांगली में मोर्चा निकाला गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि सीएम फडणवीस किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले न्यायिक जांच की रिपोर्ट के इंतजार में हैं। मालूम हो कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सांगली की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भिड़े द्वारा किए जाने वाले कार्यों के प्रति सम्मान जताया था। मुख्यमंत्री फडणवीस और भिड़े की एक तस्वीर भी वायरल हो रही है।
प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी: प्रकाश आंबेडकर ने पुलिस की भी कड़ी आलोचना की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, ‘बंद (महाराष्ट्र) की घोषणा को वापस लेने के बाद भी पुलिस ने प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले दलित युवाओं की गिरफ्तारी के लिए राज्यव्यापी तलाशी अभियान चलाया हुआ है। हम इस अभियान को अविलंब बंद करने की मांग करते हैं। ये युवा आतंकवादी या नक्सली नहीं हैं जो उनके साथ इस तरह का बर्ताव किया जाए। मुख्यमंत्री ने इसे रोकने का आश्वासन दिया है।’ प्रकाश ने नक्सलियों का हाथ होने के आरोपों को भी खारिज किया है।
ऐसे शुरू हुआ था बवाल? NCP नेता ने ट्वीट किया वीडियो
भीमा कोरेगांव से शुरु हुआ बवाल पूरे महाराष्ट्र में हिंसा की वजह बन गया है। बवाल के बदले में शुरू हुए बवाल में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर भी असर पड़ा। महाराष्ट्र में कई शहर में बंद का एलान हुआ। कोरेगांव से भड़के बवाल और हिंसा से महाराष्ट्र के लोग बिलबिला उठे हैं। लेकिन इस बवाल की शुरुआत कैसे हुई उसका एक वीडियो एनसीपी लीडर ने ट्वीट किया है। एनसीपी लीडर डॉ. जितेन्द्र अवहाद का दावा है कि ये वीडियो भीमा कोरेगांव में बवाल शुरु से पहले का है जहां भिड़े और एकबोटे समर्थक जुट रहे हैं और नारेबाजी कर रहे हैं। आपको बता दें कि जनसत्ता.कॉम इस वीडियो की सच्चाई का दावा नहीं करता है। डॉ. जितेन्द्र अवहाद ने वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है कि ये वीडियो अपने आप में सबकुछ बयां कर दे रहा है। भीड़े और एकबोटे के समर्थक भीमा कोरेगांव में उस जगह इकट्ठा हुए थे जहां से हिंसा शुरू हुई। इस वीडियो को 1 जनवरी का बताया जा रहा है। एनसीपी नेता ने लिखा है कि ये सब पक रहा था और हैरान करने वाली बात ये है कि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
इस हिंसा को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में प्रस्तावित दलित नेता जिग्नेश मेवानी और जेएनयू के छात्र उमर खालिद के कार्यक्रम को रद्द कर दिया है। गुरुवार (4 जनवरी) को मुंबई के भाईदास हॉल में छात्र भारती नाम के संगठन ने जिग्नेश और उमर को कार्यक्रम में बुलाया था। छात्र भारती के उपाध्यक्ष सागर भालेराव ने बताया कि उन्होंने भाईदास हॉल को अपने संगठन के ऑल इंडिया समिट के लिए रिजर्व किया था। लेकिन पुलिस अब इस कार्यक्रम में किसी को जाने नहीं दे रही है। सागर भालेराव का कहना है कि मुंबई पुलिस ने पिछले दो तीन दिनों की हिंसा का हवाला देकर कार्यक्रम रद्द कर दिया है।
गौरतलब है कि सोमवार को कोरेगांव-भीमा में आंग्ल-मराठा युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर एक जनवरी को आयोजित समारोह में हुए दंगे में एक युवक की मौत के विरोध में महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया गया था। इस समारोह में अंग्रेजों द्वारा सानसवाडी गांव में बनाये गए विजय स्तंभ के पास भारी तादाद में दलित समुदाय के लोग इकट्ठा हुए थे,जहां पत्थरबाजी की घटना के बाद हिंसा भड़क उठी जिसमें 28 वर्षीय राहुल फटंगले की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि प्रदेशभर में हुई हिंसा के सभी वारदात की जांच करवाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।




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