
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
चारा घोटाले में आरोपी साबित होंने के बाद अब बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव जेल की सलाखों के बीच में बंद हो चुके हैं। इसके बाद उनके नए -नए खुलासे सामने आते जा रहें हैं जिसमें पता चला है कि लालू के साथ-साथ इनके परिवार वाले भी शामिल है। इनके बड़े दामाद शैलेश कुमार भी बेनामी संपत्ति की दलदल में फंसते हुए नजर आ रहे है।
इनके 9 बच्चे जिनमें दो बेटे तेजस्वी यादव, व तेज प्रताप यादव है और 7 बेंटियां – मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, चंदा, रागिनी , धन्नू , हेमा और राज लक्ष्मी हैं.दिखनें में तो इनकी सभी बेटियां बेहद खूबसूरत है।
लालू ने अपनी बड़ी बेटी का नाम मीसा भारती उसी एक्ट पर रखा तब वह 1970 में पहली बार के दशक में जेल गए थे। इनकी बड़ी बेटी ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर शैलेश कुमार से शादी की है। मीसा के पति शैलेस पैकर्स एंड प्रिंटर्स नाम की खुद की कंपनी चलाते है। हैरानी की बात तो यह है कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने 8 हजार करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू व उनके दामाद शैलेस के घर पर भी रेड डाली थी। जिसकी वजह से दिसंबर 2017 में लालू की बड़ी बेटी व साथ में उसके पति शैलेश भी बेनामी संपत्ति के मामले में फंस चुके है। सन् 1999 के दौरान मीसा यादव ने एमबीबीएस एग्जाम टॉप किया था, परंतु जिस अधिकारी ने उनको डिग्री दी तो उसने इनको कभी इंसानों का इलाज न करने की सलाह दी थी।
लगता है, कानून को तोडना ही लालू की फितरत है। जो नेता स्वयं देश के कानून का पालन नहीं कर सकता, देश की क्या रक्षा करेगा? 70 के दशक में मनोज कुमार और नूतन अभिनीत फिल्म "यादगार" आयी थी, जिसका एक गीत "एक तारा बोले तुन तुन तुन... हर साल कैलेंडर छाप दिया, परिवार नियोजन साफ किया, फिर उसके बाद..." आज भी चर्चित है, लालू यादव पर चरितार्थ होता है।
देश की राजनीति में तीन दशक से अपनी अलग पहचान रखने वाले लालू प्रसाद यादव की एक विशेषता उनका बेहद पारिवारिक होना भी है. अपने परिवार की खुशियों का ख्याल रखने वाले लालू देश के उन चुनिंदा राजनीतिज्ञों में शुमार हैं जिनके लिए परिवार बहुत मायने रखता है. लालू पर लोग परिवारवाद का आरोप भले ही लगाते हों लेकिन लालू यादव को इससे खास फर्क नहीं पड़ता.
देश की राजनीति में तीन दशक से अपनी अलग पहचान रखने वाले लालू प्रसाद यादव की एक विशेषता उनका बेहद पारिवारिक होना भी है. अपने परिवार की खुशियों का ख्याल रखने वाले लालू देश के उन चुनिंदा राजनीतिज्ञों में शुमार हैं जिनके लिए परिवार बहुत मायने रखता है. लालू पर लोग परिवारवाद का आरोप भले ही लगाते हों लेकिन लालू यादव को इससे खास फर्क नहीं पड़ता.
अवलोकन करें :--
लालू की बाकी बेटियों ने भी अच्छे शाही घरानों में शादी की है। इनमें से किसी का पति पायलट है तो किसी का राजनेता, तो कोई बेटी रहती हैं सिंगापुर। आइये लालू की बाकी बेटियों के बारे में, साथ में देखें उनकी खूबसूरत तस्वीरें….
बड़ी बेटी मीसा यादव

दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य

तीसरी बेटी चंदा यादव

चौथी बेटी रागिनी यादव

पांचवी बेटी हेमा यादव

छठवी बेटी अनुष्का राव

सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी

भिन्न दलों में अपनी बेटियाँ ब्याने के कारण, अपने समधियों के दबाव में इन सब के हाथों की कठपुतली बन शेर की तरह अपनी नेतागिरी करते रहे और उसी प्रभाव में उनके पुत्र कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाते नज़र आते हैं।
लेकिन एक बात जरूर स्पष्ट हो गयी कि नेता बनने पर संविधान की कसम तो खाते हैं, लेकिन न उसको मानते हैं और न ही उसका पालन करते हैं। संविधान में चाणक्य नीति का उल्लेख है, शायद उस कारण सोनिया गाँधी तो क्या राहुल या प्रियंका तक प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यानि विदेशी विदेशी ही रहेगा या दूसरे अर्थों में कहा जाए कि एक घोटालेबाज़ घोटालेबाज़ का साथ देगा, ईमानदार का नहीं।
क्या आज का नेता समाज शास्त्रीजी और मोदीजी के जीवन से प्रेरणा लेगा?
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| ताशकंत में शास्त्री जी |
नहीं भर पाए अपनी धर्मपत्नी के दोनों हाथ चूडियों से;
विपरीत इसके हाथों में पहनी चूड़ियाँ भी साथ ले गए |
आज के समस्त नेता समाज को मोदी और शास्त्री के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए। जिन्होंने देश समर्पण को ही उद्देश्य माना, परिवार को नहीं। तत्कालीन प्रधानमन्त्री की धर्मपत्नी श्रीमति ललिता शास्त्री जो कनॉट प्लेस में एलआईसी ग्राउंड, -- जहाँ आज एलआईसी बिल्डिंग है, वहाँ उन दिनों प्रदर्शनी में सेल लगा करती थी। -- में सेल लगी थी। दिन में प्रधानमन्त्री आवास में कार्यरत कर्मचारियों ने श्रीमति शास्त्री से कहा, "अम्मा सेल में बहुत अच्छी चूड़ियां और धोतियाँ( उन दिनों अधिकतर लोग साड़ियों को भी धोती ही कहते थे) मिल रही हैं। शाम को पतिदेव के घर लौटने पर पूछतीं है, "कहो तो वहां से चूड़ियाँ खरीद लाऊँ।" उत्तर मिला "भगवन, ये पाकिस्तान ने बहुत दुखी कर रखा है, पहले इससे निपट लूँ, फिर दोनों हाथ चूड़ियों से भर दूंगा।" बेचारे ताशकंत क्या गए, श्रीमति ललिता जी जो चूड़ियाँ पहने थीं, सब खंडित करनी पड़ी। एक और किस्सा देश के प्रति समर्पण का, एक बार शास्त्री जी की प्रधानमन्त्री गाड़ी घर पर ही थी, शाम को घर आने पर, गाड़ी गायब देखते ही पूछने पर मालूम हुआ कि बच्चे घूमने के लिए ले गए हैं। तुरन्त अपनी धर्मपत्नी कहा : "जब आ जाएँ जो पैट्रोल खर्च हुआ है, गाड़ी में डलवा देना और उसके पैसे दोनों को जो महीना देती हो, उसमे से काट लेना।" क्या आज है कोई ऐसा नेता?
| क्या इस बूढ़ी माँ को अपने बेटे के आवास में रहने का अधिकार नहीं? लेकिन अपने दूध को कलंकित नहीं करने के डर से बेटे से दूर रहती है। धन्य है ऐसी माँ, धन्य है ! |
मोदीजी चाहें तो अपनी माताश्री को अपने आवास में रख सकते हैं, माँ है, लेकिन नहीं। क्योकि डरते हैं, उनका जीवन आरोपित न हो जाए।
आज संसद ठप की जाती है, किसी मुस्लिम के मारे जाने पर, ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर, जातिवाद पर और भगवाकरण करने पर,लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नहीं, क्यों? कारण जनता के सम्मुख है। क्योकि वर्तमान में विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा ही नहीं रहा। देश को बाँटो जाति के नाम पर।
शायद यही कारण था कि चारा एवं अन्य घोटालों, जिनके कारण अब इनको जेल जाना पड़ा है, कांग्रेस के कार्यकाल में खूब मौज करते दिख रहे थे और जनता इनके घोटालों को महज एक राजनीतिक मुद्दा मान आरजेडी को अपना वोट और समर्थन देते रहे। अब लालू प्रसाद को जमानत मिलती है या नहीं, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि घोटाला हुआ है और भाजपा के विरुद्ध तीसरा मोर्चा बनाये जाने के लिए अन्य दलों को समर्थन देते रहे। ताकि इन घोटालों पर पर्दा पड़ा रहे और कोर्ट तारीख पर तारीख देकर केस को लंबित करती रहे। आखिर बकरे की माँ भी कितने दिन खैर मानती, एक दिन तो आना ही था छुरी के नीचे।
अब देखना यह है कि लालू ने जो घोटाला कर पूंजी अर्जित की थी, उसकी वसूली होगी या नहीं। होगी तो कैसे और नहीं होती है, फिर सज़ा का क्या लाभ? क्योकि केवल जेल भेजने से क्या उस धन की वसूली हो पायेगी? जो जनता का या सरकारी खजाने की लूट की गयी थी, उसकी भरपाई कैसे होगी और कौन करेगा?

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