महाराष्ट्र मे कई जगह पर दक्षिणपंथी संगठन के हमले के बाद भीमा को रेगांव मे दलित संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। कई जगहों पर राज्य मे जनजीवन प्रभावित रहा। कई विपक्षी दलों के नेताओं के सहित राहुल गांधी ने मामले की निंदा की है। बुधवार को राज्य मे भी दलित संगठनों ने बंद बुलाया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए जांच के आदेश को ठुकराते हुए मामले की जांच हाईकोर्ट के जज से कराने की मांग की है।
जनवरी 1 को मुंबई पुणे के नजदीक भीमा कोरेगांव मे भगवा ब्रिगेड द्वारा किए गए हमले के बाद जनवरी 2 को महाराष्ट्र के कई इलाकों मे दलित संगठनों ने प्रदर्शन किया। डॉ. भीमराव आंबेडकर के पोते अथवा एक्टिविस्ट प्रकाश आंबेडकर सहित आठ संगठनों ने महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है। भारिप बहुजन महासंघ (BBM) नेता प्रकाश अंबेडकर ने जनवरी 3 को राज्यव्यापी बंद का आह्वान करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा न्यायिक जांच के जो आदेश दिए गए है, जो हमे मंजूर नहीं है। इस घटना की जांच के लिए सरकार को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश से अनुरोध करना चाहिए कि वे किसी सिटिंग जज से घटना की जांच कराएं। इसके साथ ही जिस जज को घटना की जांच की जिम्मेदारी मिले उनको सबूत इकट्ठा करने अथवा अपराधियों को दंडित करने की पॉवर मिलनी चाहिए।
कोरेगांव मे हुई हिंसा के विरोध मे दलितों के प्रदर्शन से मायानगरी मुंबई सहित कई इलाकों मे जनजीवन प्रभावित रहा ताजा मिल रही जानकारी के मुताबिक आठ दलित संगठनों ने बुधवार को भी महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया है. प्रदर्शनकारियों ने मुलुंड, चेंबूर, भांडुप, रमापाई आंबेडकरनगर और कुर्ला के नेहरूनगर में भी ‘रास्ता रोको’ के तहत जाम लगाने की प्रयास की। पुलिस ने जानकारी दी कि मुंबई के अलग-अलग स्थानों से 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत मे लिया है।
गौरतलब है कि, पुणे के नजदीक भीमा कोरेगांव मे दलित शौर्य दिवस मनाने जा रहे दलितों पर दक्षिणपंथी संगठन के लोगों ने पत्थरबाजी की थी। हिंसा के विरोध मे दलितों ने जनवरी 1 को ही महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया था जिसका असर राज्य के कई इलाकों मे नजर आ रहा है। मुंबई से शिरडी तक कई दलित संगठन सड़कों पर नजर आए। सोमवार की घटना के विरोध मे दलितों ने राज्य के कई इलाकों मे विरोध प्रदर्शन किया। इसके चलते मुंबई मे कई जगह दफ्तर बंद है। स्कूलों की छुट्टी कर दी गई अथवा रेल के भी कई रूट बंद कर दिए गए है।
पुणे हिंसा में भाजपा और आरएसएस ज़िम्मेदार -- मायावती
मायावती ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “भाजपा और आरएसएस के लोग नहीं चाहते कि दलित अपने इतिहास को याद रखें। वहां बीजेपी की सरकार है और उन्होंने हिंसा कराई। लगता है इसके पीछे बीजेपी, आरएसएस और जातिवादी ताकतों का हाथ है।”
पुणे हिंसा में भाजपा और आरएसएस ज़िम्मेदार -- मायावती
मायावती ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “भाजपा और आरएसएस के लोग नहीं चाहते कि दलित अपने इतिहास को याद रखें। वहां बीजेपी की सरकार है और उन्होंने हिंसा कराई। लगता है इसके पीछे बीजेपी, आरएसएस और जातिवादी ताकतों का हाथ है।”
इस घटना में मृतक युवक के परिवार के प्रति गहरा शोक व दु:ख व्यक्त करते हुए मायावती ने कहा कि मृतक परिवार की हर संभव मदद के साथ-साथ इस घटना में घायलों की भी समुचित सहायता सरकार को करनी चाहिए तथा दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी तत्काल करनी चाहिए ताकि जातिवादी लोग ऐसी दुस्साहस दोबारा नहीं कर सकें, लेकिन सरकार के रवैये को देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही नजर आती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के वर्तमान शासनकाल में दलितों पर बर्बर जातिवादी व्यवहार व जुल्म-ज्यादती की जितनी भी दर्दनाक घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का कारण बनी हैं उनमें से भी किसी मामले में दलितों को न्याय नहीं मिल पाया है और न ही दोषियों को सख्त सजा ही मिल पाई है, जिसका परिणाम है कि भाजपा के ऐसे जातिवादी तत्वों के हौसले काफी ज्यादा बुलंद हैं और वे लोग कानून-व्यवस्था को अपना बंधक बनाकर रखे हुए हैं।
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