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| ऋषि कपिल मुनि आश्रम में संध्या आरती |
ग्लोबल वार्मिंग के कारण बंगाल की खाड़ी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बंगाल की खाड़ी का दायरा गंगासागर क्षेत्र के कपिल मुनि मंदिर प्रांगण की ओर आगे बढ़ रहा है। गंगासागर क्षेत्र के आस पास धसान भी शुरू हो गयी है. आशंका जतायी जा रही है कि अगर इसे नहीं रोका गया तो, आने वाले दिनों में कपिल मुनि मंदिर बंगाल की खाड़ी में समा जाएगा। गंगासागर का विशाल मेला प्रांगण समुद्र में समा जायेगा. ऐसी जानकारी मिलने के बाद ही पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने गंगासागर के आस पास के क्षेत्रों में धसान रोकने के लिये बांध बनाने की योजना बनाई है। इसकी समीक्षा शुरू हो गयी है। सर्वेक्षण का परिणाम आने के बाद युद्ध स्तर पर गंगासागर क्षेत्र में बांध बनाने का काम शुरू होगा।
असली मंदिर चला गया है समुद्र में
इतिहासविदों के अनुसार वर्तमान समय में जिस स्थान पर अभी कपिल मुनि का आश्रम है, वह एक समय समुद्र के भीतर था। समुद्र के आगे बढ़ने के कारण असली मंदिर समुद्र के भीतर समा गया। उसके बाद भी कई बार कपिल मुनि का मंदिर समुद्री ग्रास का शिकार हुआ है। बाद में नये सिरे से इस मंदिर को बनाया गया है। लाखों रुपये खर्च कर कपिल मुनि के वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर के आस पास रास्ता, सड़क, निकासी, शौच जैसी सुविधाओं के लिये भी राज्य सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किये है। लेकिन जिस तरह समुद्र आगे बढ़ रहा है, आने वाले दिनों में इस मंदिर के भविष्य को लेकर सवाल खड़े होने लगे है। सरकारी सूत्रों के अनुसार कपिल मुनि मंदिर की रक्षा करने के लिये राज्य सरकार ने मैकिन्टोस बर्न कंपनी को परामर्शदाता के रूप में चुना है। राज्य सरकार के शहरी विकास और नगरपालिका विभाग इस मुद्दे पर गंभीर है। विभाग की ओर से चेन्नई आईआईटी के एक नदी विशेषज्ञ से संपर्क साध कर इस दिशा में आगे बढ़ने की योजना है। चेन्नई आईआईटी ने हाड्रडोलिक सर्वे का काम शुरू कर दिया है। गंगासागर मेला के कारण इन दिनों समीक्षा का काम स्थगित है।
23 जनवरी से फिर शुरू होगा समीक्षा का काम
आगामी 23 जनवरी से फिर से समीक्षा का काम शुरू कर दिया जाएगा।गंगासागर इलाके के आस पास के समुद्र का नजदीकी इलाके के भूगर्भस्थ जलस्तर, धारा की गति, वायु की गति और प्रकृति, मिट्टी की वहन क्षमता जैसे विषयों पर जांच जारी है। मंदिर की रक्षा को लेकर कलकत्ता बंदरगाह ने भी सहयोग का हाथ बढ़ा दिया है। प्राथमिक स्तर की समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जा रही है। शहरी विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक रिपोर्ट जमा होने के कई महीने के भीतर ही डीपीआर तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद ग्लोबल टेंडर बुलाकर बांध बनाने का काम शुरू किया जाएगा।
तीन किलोमीटर लंबा और मजबूत बांध बनायेगी राज्य सरकार
गंगासागर से एक नंबर से पांच नंबर लाट तक पक्का मजबूत बांध बनाने की योजना है। यह बांध लगभग तीन किलोमीटर का होगा। दीघा पर्यटन केंद्र में समुद्र की धसान रोकने के लिये ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाया गया है। गंगासागर में इस तरह का ऊंचा बांध बनाने में कुछ परेशानी है। क्योंकि मकर संक्राति के पावन अवसर पर लाखों की संख्या में तीर्थयात्री यहा पुण्य स्नान करते है। ऊंचा बांध बना देने से पुण्य स्नान में समस्या होगी. इसलिये गंगासागर में दूसरे तरह से बांध बनाने की योजना बनाई जा रही है।
2013 में सीएम ने बनाया था गंगासागर बकखाली उन्नयन परिषद्
देश के बड़े तीर्थों में से एक गंगासागर के सर्वांगीण विकास के लिये साल 2013 में राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने गंगासागर बकखाली उन्नयन परिषद् का गठन किया है। गंगासागर क्षेत्र के विधायक बंकिम हाजरा को चेयरमैन बनाया गया है। गंगासागर में धसान की समस्या को देखते हुये सबसे पहले परिषद् की ओर से ही सरकार को लिखित रूप से जानकारी देकर बांध बनाने की बात कही गयी। सीएम ममात बनर्ज को इस समस्या की जानकारी विस्तार से दी गयी है। सीएम ममता बनर्जी के निर्देश से ही शहरी व नगर विकास विभाग बांध बनाने की पूरी परियोजना पर होने वाले खर्च का वहन करने का निर्णय लिया है। गंगासागर परिषद् को सीएम ने अपने अधीनस्थ रखा हुआ है।
स्थानीय विधायक बंकिम हाजरा ने कहा है कि गंगासागर में पुण्य स्नान के लिये हरेक वर्ष यहां देश के कोने कोने से लाखों की संख्या में लोग आकर पुण्य के भागी बनते है। इस साल लगभग 30 लाख लोगों ने मकर संक्राति पर स्नान किया। लेकिन गंगासागर के विकास के लिये हमें क्रेद्र सरकार की ओर से कोई आर्थिक अनुदान नहीं मिलता है। धसान रोकने के विषय में हो या कपिल मुनि मंदिर की रक्षा हो केंद्र पूरी तरह से उदासीन है। गंगासागर में जो कुछ भी विकास हो रहा है वह राज्य सरकार कर रही है।
ऋषि कपिल मुनि
भगवान विष्णु का पांचवां अवतार माने जाते है। इनके पिता कर्दम ऋषि थे। इनकी माता देवहूती ने विष्णु के समान पुत्र चाहा था। इसलिए भगवान विष्णु खुद उनके गर्भ से पैदा हुए। कपिल मुनि 'सांख्य दर्शन' के प्रवर्तक माने जाते है। इससे जुड़ा प्रसंग है कि जब उनके पिता कर्दम संन्यासी बन जंगल में जाने लगे तो देवहूती ने खुद अकेले रह जाने की स्थिति पर दुःख जताया। इस पर ऋषि कर्दम देवहूती को इस बारे में पुत्र से ज्ञान मिलने की बात कही। वक्त आने पर कपिल मुनि ने जो ज्ञान माता को दिया, वही 'सांख्य दर्शन' कहलाता है।
इसी तरह पावन गंगा के स्वर्ग से धरती पर उतरने के पीछे भी कपिल मुनि का शाप भी संसार के लिए कल्याणकारी बना. इससे जुड़ा प्रसंग है कि भगवान राम के पूर्वज राजा सगर ने द्वारा किए गए यज्ञ का घोड़ा इंद्र ने चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के करीब छोड़ दिया. तब घोड़े को खोजते हुआ वहां पहुंचे राजा सगर के साठ हजार पुत्रों ने कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगाया. इससे कुपित होकर मुनि ने राजा सगर के सभी पुत्रों को शाप देकर भस्म कर दिया. बाद के कालों में राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर स्वर्ग से गंगा को जमीन पर उतारा और पूर्वजों को श्राप मुक्त किया।
भागवत के अनुसार भगवान कपिलदेव विष्णु के अन्यतम अवतार थे। कर्दम प्रजापति के औरस एवं मनुकन्या देवहुति के गर्भ से इनका जन्म हुआ था। नौ कन्याओं के बाद भगवान् कपिल मुनि का जन्म हुआ । ये आजन्म ब्रह्मचारी रहे। कपिल के आविर्भाव के समय ब्रह्मा ने कर्दम से कहा था हे मुनि! आपका यह पुत्र साक्षात ईश्वर के स्वरूप हैं। स्वयं भगवान माया का रूप धारण कर कपिल के रूप में आपके यहां अवतरित हुए हैं।
पद्मपुराण के अनुसार महामुनि कपिल को सांख्ययोग का प्रणेता माना जाता है। श्रीमद्भागवत में भी इस आशय का उल्लेख है। उनका जन्म बिन्दु सरोवर आश्रम में हुआ था जो गुजरात में स्थित है। ऐसा कहा गया है कि स्वयं ब्रह्मा ने कहा था, सांख्यज्ञान का उपदेश देने के लिए परब्रह्म ने स्वयं भगवान के सत्त्वअंश से जन्म लिया है। गीता (1016) में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं -
सिद्धानां कपिलो मुनिः।
अर्थात सिद्धगणों के बीच प्रधान। श्वेताश्वतर (5/2) उपनिषद में भी कपिल का नाम मिलता है। श्वेताश्वर श्रुति में कपिल को वासुदेव का अवतार कहा गया है।
ग्रंथों में यह वर्णित है कि महर्षि कर्दम ने मनुकन्या देवहुति को भविष्यवाणी करते हुए बताया कि मैं जब तपस्या में लीन रहूँगा तब तुम भगवान विष्णु को पुत्ररूप में प्राप्त करोगी। वो तुम्हें परब्रह्म के तत्व को समझाएंगे और तुम्हें मुक्ति (मोक्ष) का पथ बतलाएंगे। कपिल के जन्म के पश्चात कर्दम मुनि चले गए और देवहूति को बताकर गए कि उनका पुत्र कपिल ही देवहूति का उद्धार करेगा। सांख्ययोज्ञाचार्य कपिल ने अपनी माता देवहुति को सिद्धपुर में सांख्ययोग की शिक्षा दी थी। यह स्थान गुजरात के पाटन के नज़दीक है। संसार की सृष्टि व जीवात्मा का गूढ़ रहस्य का तत्व सांख्यदर्शन में दिया है।
महर्षि कपिल ने अपनी मां को अहं का भाव, अहंकार त्याग करने की दीक्षा दी। साथ ही भक्तिमार्ग पर अनुगमन करने को कहा और मंत्र प्रदान किया। भक्ति से शरीर और ज्ञान से मन की शुद्धि होती है। इससे आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। जब आत्मज्ञान प्राप्त हो जाए तो लक्ष्य यानी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
देवहुति भगवान विष्णु को पुत्र रत्न के रूप में पाकर धन्य हुई। उनके द्वारा बताए गए विधि अनुसार पूजा-पाठ, जप-तप, ध्यान-योग में रम गईं। इस प्रकार अपनी मां को योग, मीमांसा, तत्व आदि की व्याख्या करने के पश्चात कपिल मुनि ने आश्रम का त्याग किया और एकाग्रचित्त होकर तपस्या करने के उद्देश्य से पाताललोक (सागरद्वीप) चले आये। यहां पर अपना आश्रम बनाया।
अतः कपिल एवं उनके द्वारा प्रतिपादित सांख्यदर्शन की प्राचीनता के विषय में कोई संदेह होना उपयुक्त नहीं है। सांख्यवादियों का मानना है कि कपिलमुनि ही विश्व के आदि विद्वान और उपदेशक हैं। वे स्वयंभु ज्ञानी थे। उनका कोई गुरू अथवा उपदेशक नहीं था। सत्त्वज्ञान लेकर ही उनका आविर्भाव हुआ था।
सुतंरा सांख्ययोग को विश्व का आदि उपदेश माना जाता है। प्राचीन सांख्यवादियों के बीच आसुरि पंचशिख आदि के नाम प्रसिद्ध है। रामायण में भी उल्लेख है कि कपिलमुनि पाताल लोक के क्षेत्र में तपस्यारत थे। वाल्मीकी रचित रामायण से साबित होता है कि गंगासागर क्षेत्र ही महर्षि कपिल का आश्रम था। अतः कलुषनाशिनी सुरेश्वरी गंगा का सागर में मिलन और नारायणावतार महायोगी, महातपस्वी, आदि महाज्ञानी कपिलमुनि के आश्रम वाले क्षेत्र
गंगासागर में सर्वत्र मोक्ष है – जल, थल और अंतरिक्ष में।
भगवान विष्णु व महादेव जी गंगा-सागर में नित्य निवास करते है उसका प्रमाण है
सारे तीर्थ बार बार गंगा सागर एक बार
आदिकाल से बहती आ रही हमारी पाप विमोचिनी गंगा अपने उद्गम गंगोत्री से भागीरथी रूप में आरंभ होती है। यह महाशक्तिशाली नदी देवप्रयाग में अलकनंदा से संगम के बाद गंगा के रूप में पहचानी जाती है। लगभग 300 किलोमीटर तक नटखट बालिका की तरह अठखलियां करती, गंगा तीर्थनगरी हरिद्वार पहुंचती है। तीर्थनगरी में कुंभस्नान तो हम पिछले महीने कर आए थे। अब घर के सदस्यों का विचार हुआ गंगा का सागर से संगम भी हो आया जाय। हर साल मकर सक्रांति पर्व पर महाकुंभ जैसा पर्व यहां लगता है। तीर्थस्थल गंगासागर श्रेष्ठ तीर्थ क्षेत्र है। पहले यहां आने जाने की सुविधा उतनी नहीं थी। अतः यह लोकोक्ति प्रचलित हो गई।
यह तीर्थ एक समय अत्यंत दुर्गम था। उस समय यंत्र चालित नाव नहीं थी। बिजली, पानी, आश्रम एवं परिवहन संवा का अभाव था। आज ऐसी बात नहीं है। पथ की वह दुर्गमता अब नहीं रही। यातायात के अनेक साधन का विकास हुआ है। जिससे यात्रा सहज हो गई है। इस जनविरल तीर्थ में अनेक आश्रम स्थापित हो चुके हैं पक्के रास्तों का निर्माण बसों का आवागमन आदि आंरभ हो चुका है।
अब तो यातायात के कई साधन हो चुके हैं। कोलकाता से गासागर जाने की सड़क भी काफी अच्छी और चौड़ी है। सरकारी व गैर सरकारी बस के द्वारा लट नम्बर 8 तक पहूँचा जा सकता है। हमने तो अपनी गाड़ी से ही यात्रा आरंभ की। कोलकाता से लट नं 8 तक की दूरी लगभग 100 किलोमीटर की है। बीच में लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय करने पर डायमंड हारबर आता है। यहां पर सड़के के किनारे गंगा का फैलाव एवं दृश्य बड़ा ही मनोरम है। गाड़ी से उतर कुछ देर यहां का आनंद लिया फिर आगे की यात्रा पर निकल पड़े।
कहते हैं कि पहले कोचुबेडि़या द्वीप और घोड़ामारा द्वीप एक था बाद में जल के कटाव से दोनों अलग हो गए।
बंगाल के सुदूर दक्षिणी छोर पर विश्वविख्यात सुंदरवन है। सागर द्वीप उसी सुन्दर वन का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह द्वीप 30 किलोमीटर लम्बा और औसत 10-12 किलोमीटर चौडा है। यह लगभग 5000 वर्ष पुराना है। यह दक्षिण 24 परगना जिले में आता है। कोचुबेडि़या से गंगासागर तट तक दूरी 30 किलोमीटर है और यहां बस, ट्रेकर अथवा प्राइवेट गाड़ी से जाया जा सकता है।

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