आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
अभी कुछ पूर्व देर रात यूपी विधानसभा के सामने आलू फेंकने के पांच दिन बाद पुलिस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। यूपी पुलिस के एसएसपी दीपक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पूरे मामले की जानकारी दी। एसएसपी ने बताया कि बीते शुक्रवार को लखनऊ में विधानसभा, सीएम आवास और राजभवन के बाहर आलू फेंके गए थे। इसमें पुलिस ने दो लोगों को कन्नौज से गिरफ्तार किया है।
ये दोनों एसपी कार्यकर्ता अंकित चौहान और गाड़ी का ड्राइवर संतोष पाल हैं।एसएसपी ने बताया, ‘हमने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तारी की और मामले का पता लगाया। इसके बाद करीब 10 हजार फोन कॉल्स डिटेल्स की जांच की गई और सामने आया कि आलू फेंकने की साजिश कन्नौज में रची गई थी।
इसमें 6 लोग शामिल थे। ये सभी समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं।’ यूपी पुलिस के अनुसार कन्नौज में समाजवादी पार्टी नेता कक्कू चौहान और एक महिला नेता के पति ने ये पूरी प्लानिंग की थी।
एसएसपी ने बताया कि गिरफ्त में लिए गए आरोपियों ने बताया कि उन्हें सरकार को बदनाम करने के लिए कहा था। साथ ही फेंके गए आलू ठठिया के कोल्ड स्टोरेज से लाए गए थे जिनके मालिकों की भूमिका की जांच भी की जाएगी। एसएसपी ने यह भी बताया कि सभी आरोपी समाजवादी पार्टी के टिकट से पंचायती चुनाव लड़ चुके हैं।
मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार करने के अलावा 10 लोगों के खिलाफ हुकुम तहरीरी की गई है। साथ ही पुलिस ने साफ किया कि किसान यूनियन का पूरे मामले में कोई लेना-देना नहीं था।
पिछले हफ्ते शुक्रवार की रात 3 से 4 बजे के करीब विधानसभा के बाहर आलू फेंके गए थे। एसएसपी ने कहा कि यह एक आपराधिक कृत्य था जिस पर हमने आरोपियों के खिलाफ धारा 431 के तहत मामला दर्ज किया है।
धन्य है योगी सरकार
इससे पूर्व, जब सडकों पर टमाटर, दूध आदि को फेंका जा रहा था, तब भी यही शंका व्यक्त करते लिखा था, कि एक तरफ किसान कर्ज माफ़ी की माँग करता है, ऋण में डूबा होने के कारण आत्महत्या कर रहा है, वह दूध और टमाटर क्यों फेंक रहा है, यह कोई षड्यंत्र है। इनके खातों की जाँच होनी चाहिए। भूखा मरता व्यक्ति चाहे किसान ही क्यों न हो, जेब में कुछ राशि आने की बजाए ऐसे बर्बाद नहीं करेगा?
और जिस काम को कोई और सरकार करने में असमर्थ रही, योगी सरकार ने उस साज़िश को बेनकाब कर दिया। यही कारण है कि अब मोदी से ज्यादा योगी का डर सता रहा है। उत्तर प्रदेश में इस तरह की साज़िश कर ऐसी घिनौनी राजनीति खेलने वाले यह भूल कर रहे हैं कि उनका वास्ता किसी सियासतखोर से नहीं, एक योगी है। और आदित्य नाथ रिश्वत देकर योगी नहीं बने हैं। उन्होंने तप किया है, हिन्दू शास्त्रों का अध्ययन किया है और तुष्टिकरण के कारण हिन्दू का विरोध करने वाले क्या जाने कि हिन्दुओं के चारों शास्त्र और उपनिषदों में क्या लिखा है। इन धार्मिक पुस्तकों में धर्म से लेकर राजनीति की शिक्षा का ज्ञान का भण्डार है। यही कारण है कि धर्म से राजनीति अलग नहीं हो सकती। क्योकि धर्म और राजनीति का चोली दामन का साथ है।
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