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कासगंज दंगा: अपराधियों पर लग सकती है रासुका

रासुकाजनवरी 28 सुबह में हिंसा और लूटपाट के बाद फिलहाल कासगंज में शांति का माहौल है. 60 लोगों की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने मुख्य आरोपी के घर से पिस्टल बरामद कर लिया है. वहीं हालात का सामान्य करने के लिए सूब के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मोर्चा संभाले हुए हैं. उन्होंने आज कासगंज के मुद्दे को लेकर डीजीपी और मुख्य सचिव के बैठक की. वहीं आरोपियों रासुका पर लग सकता है.
इससे पहले कासगंज में शांति बहाली के लिए पीस मीटिंग बुलाई गई. मीटिंग में डीएम आरपी सिंह ने सबसे लॉ एंड ऑर्डर का पालन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मीटिंग में मौजूद लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी तरह की हिंसा में शामिल न हो. न ही किसी दुकान को जलाएं और बस में आग लगाएं.
सिंह ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शांति स्थापित करने में लोगों ने सहयोग नहीं किया, तो उपद्रवियों की पहचान करके सख्त एक्शन लिया जाएगा.

एक ही समुदाय के लोगों के साथ पीस मीटिंग

हालांकि पीस मीटिंग में समाज के सभी वर्गों की हिस्सेदारी नजर नहीं आई. मीटिंग के लिए केवल हिंदू समुदाय के लोग ही पहुंचे थे. गौर करने वाली बात है कि फायरिंग की घटना के अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के वाहनों और गाड़ियों को उपद्रवियों ने आग के हवाले किया और तोड़ फोड़ की.
माना जा रहा है कि टकराव की आशंका के चलते प्रशासन ने केवल हिंदू समुदाय के लोगों को ही पीस मीटिंग के बुलाया. पीस कमेटी की बैठक में एडीजी आगरा जोन और कमिश्वर ने बैठक में हिस्सा लिया.

हालात काबू में, ड्रोन से निगरानीः डीजीपी

बता दें कि कासगंज में पिछले तीन दिनों से हिंसा जारी है. दूसरी ओर डीजीपी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंसा काबू में है और स्थिति पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है. हालांकि तीसरे दिन भी आगजनी की छिटपुट घटनाएं अभी भी जारी है.
डीजीपी ने कहा कि घटना के बाद आरोपी राशिद के घर से तलाशी मे देशी बम मिले है. पुलिस ने कई देशी बम बरामद किए हैं. हालांकि हालात नियंत्रण में हैं और पिछले 10 घंटे से किसी तरह की हिंसा की कोई खबर नहीं है.
मुख्य अभियुक्त के घर से पिस्तौल बरामद
उत्तर प्रदेश से प्राप्त समाचार के अनुसार आज(जनवरी 28) को तलाशी के दौरान मुख्य आरोपी के घर से पिस्तौल बरामद की है। घरों में जमा पत्थरों से स्पष्ट है कि मुस्लिम उपद्रवी पहले ही से पूरी तैयारी किये बैठे थे। अब पकडे गए लोगों से इस बात की जानकारी लेनी चाहिए कि उनके पीछे किस-किस राजनीतिक दल का संरक्षण है। क्योकि बिना राजनैतिक संरक्षण के कोई ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता?

जब मुलायम सिंह ने पुलिस अधिकारी की पीठ थपथपाई

मुज़फ्फरनगर दंगा भी राजनीतिक संरक्षण में हुआ था। वर्तमान भाजपा सरकार को उस दंगे का भी संज्ञान में  

रखना होगा। भाजपा को सत्ता में आए अभी कुछ ही समय हुआ है, और पुलिस प्रशासन वही है। ज्ञात हो

कुछ हिन्दू पुलिस कर्मियों ने दंगा मचाते कुछ दोषियों को पकड़ा, तो एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी ने थाने से 

उन्हें बाहर निकाल देने पर हिन्दू पुलिस कर्मियों द्वारा विरोध करने पर उसने कहा था, "पहले में मुसलमान हूँ, 

बाद पुलिस अधिकारी।" और तत्कालीन समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायमसिंह यादव ने उस मुस्लिम 

पुलिस  अधिकारी की पीठ थपथपाई थी। हिन्दुओं द्वारा उग्र रूप धारण करने पर, तत्कालीन मुख्यमन्त्री 

अखिलेश यादव द्वारा आर्मी की सहायता लेने पर,  आर्मी द्वारा तलाशी अभियान चालू करते ही, भारी संख्या 

में असला पकड़ में आता देख, और अपने वोट-बैंक की खातिर केन्द्र से आग्रह कर, आर्मी वापस भेज दी थी। 

जैसाकि जनवरी 28 को एक चैनल पर चर्चा के दौरान, एंकर ने बताया कि पुलिस को तलाशी के दौरान रस्सी गोले, कारतूस आदि असला बरामद हुआ है और मुख्य आरोपी फरार है। योगी सरकार को चाहिए कि केवल कासगंज ही नहीं, आसपास के भी क्षेत्रों की सघन्न तलाशी ली जाए। यह जानलेवा हमला अचानक नहीं बल्कि पूर्वनियोजित साज़िश थी। क्योकि कुछ दिन पूर्व वहाँ एक माता के मन्दिर में किसी कार्यक्रम के चलते, जब हिन्दू वहाँ जब द्वार बना रहे थे, तब इन्ही मुस्लिमों ने विरोध किया था, लेकिन हिन्दुओं ने किसी अनहोनी से बचने के लिए पंडाल का द्वार नहीं बनाया। यदि हिन्दुओं की मंशा गलत होती, और द्वार बना लेते, निश्चित रूप से दंगा हो गया होता और सारा आरोप हिन्दुओं पर मंढने पर कोई छद्दम धर्म-निरपेक्ष नहीं चूकता। 
योगी सरकार को चाहिए कि जिन-जिन घरों से पत्थर, और असला बरामद हुए हैं, उन पर सख्त कार्यवाही होने के अलावा, उनसे यह भी पूछा जाए कि "इस असले को किसकी शै पर जमा किया गया था? किसने धन दिया? कहाँ से आया?" आदि आदि। अन्यथा पिछली सरकारों के चलते इन असामाजिक तत्वों को प्रोत्साहन मिला और मिल रहा है, वह दिन दूर नहीं, जब एक योगी के मुख्यमंत्री होते, कोई राष्ट्रीय पर्व तो क्या हिन्दू अपना कोई त्यौहार मना पाएं। 
अभी ताज़ी सूचना के अनुसार, योगी सरकार की सख्ती के चलते पुलिस ने इस मामले में अब तक 112 लोगों को गिरफ्तार किया है. हिंसा के मामले में अब तक 5 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इनमें से 3 कासगंज के कोतवाल की तहरीर पर पंजीकृत हुए हैं. हिंसा भड़कने के तीसरे दिन रविवार को अराजक तत्वों ने एक दुकान में आग लगा दी. हालांकि, स्थिति पर जल्द ही काबू पा लिया गया. पुलिस का दावा है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है लिहाजा अब कर्फ्यू हटा लिया गया है. इलाके पर ड्रोन कैमरों की मदद से नजर रखी जा रही है.
पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जाएगा. घर-घर में तलाशी ली जा रही है. कुछ जगहों पर विस्फोटक बरामद हो रहे हैं. इस बीच, हालात के मद्देनजर कासगंज में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई.
डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि कासगंज में हालात काबू में है. कानून व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है, ड्रोन से नजर रखी जा रही है. घटना को लेकर डीजीपी मुख्यालय ने सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है. इस रिपोर्ट में एसपी सुनील सिंह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. इन पर आरोप है कि वे घटना की सूचना मिलने के बाद घंटों देर से मौके पर पहुंचे, जिससे स्थित काबू से बाहर हो गई.
आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक अजय आनन्द ने बैठक के बाद बातचीत में दावा किया कि शहर में डर का माहौल नहीं है. पुलिस ने वारदात पर रोक लगाई है और घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा. ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. जब तक ऐसा आखिरी व्यक्ति नहीं पकड़ लिया जाता, तब तक हमारा अभियान जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि शांति समिति की बैठक में शहर के गणमान्य लोग शामिल थे और बैठक में तय किया गया कि सभी दुकानदार अपनी-अपनी दुकानें खोलेंगे.
बैठक में हिस्सा लेने वाले आगरा के मण्डलायुक्त सुभाष चन्द्र शर्मा ने कहा कि बैठक के दौरान सभी पक्षों ने अपना-अपना नजरिया पेश किया और मौजूदा हालात को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. प्रशासन ने उनकी हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया है. बैठक में शामिल लोगों से अपने-अपने इलाकों में निगरानी रखने को कहा गया है.
शर्मा ने कहा कि दुकानदारों से कहा गया है कि वे अपने-अपने प्रतिष्ठान खोलें. प्रशासन सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. दुकानें खुलेंगी तो हालात धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगे. जिला प्रशासन वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों को चिह्नित कर रहा है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
उत्तर प्रदेश के कासगंज में बवाल की आंच अब धीमी पड़ रही है लेकिन सियासत सुलगने लगी है. डिप्टी सीएम ने तो यहां तक कह दिया है कि इसके पीछे बड़ी साजिश है. इस बीच, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कासगंज में हुई घटना को दुखद बताते हुए इसकी निन्दा की. उन्होंने कहा कि जो लोग भी इसके लिये दोषी हैं, उनमें से एक भी व्यक्ति नहीं बख्शा जाएगा.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद हालात की समीक्षा की है. अपराधी चाहे जितना बड़ा या प्रभावशाली हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अब हमारे पास कड़े कानून आ गए हैं. यह गड़बड़ी करने वालों के लिए चेतावनी भी है. कुछ लोग लूटपाट कराने और आपसी मतभेद कराने कोशिश कर रहे हैं. दंगे करने वालों के साथ-साथ फसाद की साजिश करने वाले भी दण्डित होंगे.
इस बीच, बसपा अध्यक्ष मायावती ने कासगंज में हुए उपद्रव का जिक्र करते हुए कहा कि सूबे में जंगलराज है. इसका ताजा उदाहरण कासगंज की घटना है जहां हिंसा की आग अब भी शांत नहीं हुई है. बसपा इसकी कड़ी निन्दा के साथ-साथ दोषियों को सख्त सजा देने की मांग करती है.
उन्होंने कहा कि खासकर भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान तथा महाराष्ट्र आदि में अपराध-नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के साथ-साथ जनहित तथा विकास का बुरा हाल है. इससे यह साबित होता है कि भाजपा एण्ड कम्पनी का हर स्तर पर घोर अपराधीकरण हो गया है.
पूर्व सीएम और सपा नेता अखिलेश यादव ने मृतक चंदन के परिवार के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है. उन्होंने कहा, ‘अगर हम कासगंज चले गए तो बीजेपी वाले हमारे ऊपर आरोप लगाने लगेंगे. माहौल सही हो जाने के बाद मृतक के घर जाऊंगा.’ सपा उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कासगंज की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि हमेशा चुनाव के पहले दंगा होता है. मुजफ्फरनगर में भी लोकसभा चुनाव से पहले दंगा हुआ था. कासगंज में भी दंगा हुआ. चुनाव से पहले ही क्यों दंगा होता है. इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए.
शुक्रवार को गणतंत्र दिवस पर VHP और ABVP के कार्यकर्ताओं ने तिरंगा यात्रा निकाली थी. तिरंगा यात्रा जब बिलमार गेट के पास अल्पसंख्यक समुदाय के मुहल्ले से गुजरने लगा तो तिरंगा यात्रा निकाल रहे युवकों ने भड़काऊ नारेबाजी की, जिससे दो गुटों में झड़प शुरू हो गई. झड़प इतनी बढ़ी की इसने हिंसा का रूप ले लिया.
दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई और गोलियां भी चलीं. फायरिंग में हिंदू समुदाय के एक युवक चंदन गुप्ता की मौत हो गई. युवक की मौत के बाद हिंसा ने उग्र रूप ले लिया. उपद्रवियों ने जमकर दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की. रात होते-होते इलाके में भारी पुलिस और सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा और कर्फ्यू लगा दिया गया.
रात भर माहौल शांत लेकिन तनावपूर्ण बना रहा. वारदात के दूसरे दिन भी शहर में हिंसा जारी रही. उपद्रवियों ने तीन दुकानों, दो निजी बसों और एक कार को आग के हवाले कर दिया था. प्रशासन ने रविवार रात दस बजे तक इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया था ताकि सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अफवाहों को रोका जा सके. रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी के जवान लगातार चौकसी कर रहे हैं. जिले की सीमाएं सील कर दी गयी हैं ताकि शांति भंग करने का प्रयास करने वालों को शहर में प्रवेश से रोका जा सके.
आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक, अलीगढ के मंडलायुक्त, अलीगढ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक लगातार मौके पर हैं.
दोषियों पर सख्त कार्यवाही हो-- मायावती 
मायावती
कासगंज हिंसा पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। रविवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में कानून व्यवस्‍था का बुरा हाल है। कासंगज में गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा का जिक्र करते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्‍था की तुलना जंगलराज से की। उन्होंने कहा कि बीजेपी और इनके सहयोगी संगठनों के अपराधीकरण का दुष्परिणाम देश में हर जगह हिंसा के रूप में नजर आ रहा है।
मेरठ में मां-बेटे की हत्या पर भी उन्होंने योगी सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकारी गवाहों की रक्षा करने में सरकार विफल साबित हो रही है। इसके चलते देश की न्यायपालिका दोषियों को सजा देने में अपंग महसूस कर रही है।















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