नये साल के पहले दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर अपना रूख साफ कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर अब तक का सबसे बड़ा जुबानी हमला बोला है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि पिछले पंद्रह सालों में अमेरिका ने मूर्खतापूर्ण तरीके से पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर की मदद की है और उसके बदले में पाकिस्तान ने उसके साथ झूठ औऱ छल कपट दिया है. पाकिस्तान अमेरिका के नेताओं को मूर्ख समझता है. पाकिस्तान आंतकियों को सुरक्षित पनाह देता है जिसे अमेरिका अफगानिस्तान में ढ़ूंढता है. अब और मदद नहीं.
पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2017 माह में नई अमेरिकी नीति की घोषणा की थी, जिसमें पाकिस्तान में सक्रिय एक संबद्ध समूह, अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को हराने का जिक्र किया गया था. ट्रंप ने उस वक्त कहा था कि 'पाकिस्तान ने आतंक, हिंसा और अव्यवस्था के एजेंटों को अपने यहां शरण दे रखी है' और कसम खाई कि प्रशासन इस देश के खिलाफ और अधिक कठोरता दिखाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस महीने (दिसंबर, 2017) अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की घोषणा करते हुए पाकिस्तान की जमकर आलोचना की थी और कहा था कि हम पाकिस्तान को हर साल भारी भरकम रकम का अनुदान देते हैं. उसे हमारी मदद करनी होगी.
पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2017 माह में नई अमेरिकी नीति की घोषणा की थी, जिसमें पाकिस्तान में सक्रिय एक संबद्ध समूह, अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को हराने का जिक्र किया गया था. ट्रंप ने उस वक्त कहा था कि 'पाकिस्तान ने आतंक, हिंसा और अव्यवस्था के एजेंटों को अपने यहां शरण दे रखी है' और कसम खाई कि प्रशासन इस देश के खिलाफ और अधिक कठोरता दिखाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस महीने (दिसंबर, 2017) अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की घोषणा करते हुए पाकिस्तान की जमकर आलोचना की थी और कहा था कि हम पाकिस्तान को हर साल भारी भरकम रकम का अनुदान देते हैं. उसे हमारी मदद करनी होगी.
डोनाल्ड ट्रंप के इस ट्वीट को पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका के रूख में आये सबसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.
चार दिन पहले ही न्यूयार्क टाइम्स ने खबर छापी थी कि अमेरिकी सरकार पाकिस्तान को दी जाने वाली 25 करोड 50 लाख डॉलर की सहायता राशि रोक सकती है. ट्रंप प्रशासन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से नाराज है. न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के मुताबिक पाकिस्तान को सहायता राशि ना देकर ट्रंप उसे आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग करने में नाकाम रहने पर सजा की चेतावनी देंगे.
खबर में कहा गया था कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध तब से तनावपूर्ण बने हुए है जब राष्ट्रपति ने घोषणा की थी कि पाकिस्तान अराजकता, हिंसा और आतंकवाद फैलाने वाले लोगों का पनाहगाह बना हुआ है. पाकिस्तान को वर्ष 2002 से 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता मुहैया कराने वाले अमेरिका ने अगस्त में कहा था कि जब तक पाकिस्तान आतंकवादी समूहों के खिलाफ और अधिक कारर्वाई नहीं करता तब तक वह 25 करोड़ 50 लाख डॉलर की धनराशि रोक रहा है.
अखबार के अनुसार, इस महीने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस पर फैसला लेने के लिए बैठक भी कर चुके हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अंतिम निर्णय आगामी सप्ताह लिया जा सकता है. अखबार की यह रिपोर्ट अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइकल पेंस के काबुल में दिये उस बयान के कुछ दिन बाद आया. जिसमें उन्होंने कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को नोटिस पर रखा हुआ है. खबर के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका को अपहृत कनाडाई-अमेरिकी परिवार से संपर्क करने से मना कर दिया था. परिवार को इसी साल छुड़ाया गया था. न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर में कहा गया है, अब ट्रंप प्रशासन इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि क्या पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्कों के खिलाफ उसके कारर्वाई ना करने पर असंतोष के रुप में 25 करोड़ 50 लाख डॉलर की सहायता राशि रोकी जाये. पाकिस्तान की सेना ने बृहस्पतिवार को अमेरिका को उसकी सरजमीं पर सशस्त्र समूहों के खिलाफ एकतरफा कारर्वाई करने की संभावना के खिलाफ चेतावनी दी थी. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने इस बात को खारिज कर दिया कि पाकिस्तान सशस्त्र समूहों से लड़ने के लिए कुछ खास नहीं कर रहा है.
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