आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
गुजरात में छठी बार बीजेपी की सरकार बनने के बाद सीएम विजय रूपाणी और डिप्टी सीएम नितिन पटेल के बीच जारी आपसी गतिरोध साल के आखिरी दिन खत्म हो गया। गुजरात के सियासी संकट का अमित शाह के एक फोन ने सुखद अंत ला दिया। दिग्गज पाटीदार नेता नितिन पटेल ने उप मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण कर लिया और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से मिलने उनके बंगले पर पहुंचे। मालूम हो कि गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल इस बार की सरकार में वित्त, शहरी विकास और पेट्रोकेमिकल विभाग छिन जाने से नाराज चल रहे थे। आखिरकार उनको वित्त विभाग देकर मना लिया गया। राजभवन से नये मंत्रिमंडल की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इससे पहले वित्त विभाग सौरभ पटेल को दिया गया था, लेकिन राजनीतिक संकट के समाधान के लिये उनसे यह विभाग लेकर नितिन को दे दिया गया।
गुजरात में छठी बार बीजेपी की सरकार बनने के बाद सीएम विजय रूपाणी और डिप्टी सीएम नितिन पटेल के बीच जारी आपसी गतिरोध साल के आखिरी दिन खत्म हो गया। गुजरात के सियासी संकट का अमित शाह के एक फोन ने सुखद अंत ला दिया। दिग्गज पाटीदार नेता नितिन पटेल ने उप मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण कर लिया और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से मिलने उनके बंगले पर पहुंचे। मालूम हो कि गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल इस बार की सरकार में वित्त, शहरी विकास और पेट्रोकेमिकल विभाग छिन जाने से नाराज चल रहे थे। आखिरकार उनको वित्त विभाग देकर मना लिया गया। राजभवन से नये मंत्रिमंडल की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इससे पहले वित्त विभाग सौरभ पटेल को दिया गया था, लेकिन राजनीतिक संकट के समाधान के लिये उनसे यह विभाग लेकर नितिन को दे दिया गया।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का दबाव रंग लाया. अपने पसंदीदा विभाग न मिलने की वजह से उन्होंने कार्यभार संभालने से इंकार कर दिया था. नतीजा ये हुआ कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को झुकना पड़ा. और उन्हें उनका पसंदीदा वित्त विभाग भी लौटाना पड़ा. हालांकि इससे यह संकेत भी मिला कि गुजरात में भाजपा इन दिनों किस हाल से गुजर रही है.
ख़बरों के मुताबिक़ शाह और रूपाणी के मनाने और वित्त विभाग मिलने के बाद नितिन पटेल ने पदभार ग्रहण कर लिया. इससे पहले मुख्यमंत्री रूपाणी ने घोषणा की कि भाजपा नेतृत्व के फ़ैसले के अनुसार वित्त विभाग राज्य सरकार के एक अन्य वरिष्ठ मंत्री सौरभ पटेल से लेकर नितिन पटेल को सौंप दिया गया है. इस बाबत राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली को भी सूचना भिजवा दी गई है.
ग़ौरतलब है कि इससे पहले की सरकार में नितिन के पास वित्त, शहरी विकास और पेट्रोकैमिकल्स जैसे विभाग थे. लेकिन इस बार मुख्यमंत्री रूपाणी ने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर वित्त और पेट्रोकैमिकल्स विभाग सौरभ पटेल को सौंप दिए. जबकि शहरी विकास विभाग अपने पास रखा. दूसरी तरफ़ नितिन पटेल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सड़क निर्माण, नर्मदा जैसे विभाग सौंप दिए थे.
इससे नितिन नाराज़ हो गए. उन्होंने दो दिन तक अपना पदभार नहीं संभाला. बल्कि पटेल समुदाय के तमाम नेताओं से मेल-मुलाक़ात करते रहे. इनमें भाजपा के साथ विपक्षी कांग्रेस के नेता भी शामिल थे. पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक ने तो उन्हें यहां तक पेशकश कर दी थी कि वे ‘भाजपा के 10 विधायक तोड़ लाएं. उन्हें कांग्रेस से उचित सम्मान दिलाया जाएगा.’ इससे भाजपा दबाव में आ गई.
भाजपा का दबाव में आना लाज़िमी भी था. क्योंकि हाल में ही हुए विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूरा जोर लगाने के बावजूद पार्टी राज्य में सिर्फ़ 99 सीटें ही जीत सकी. जबकि पिछली बार उसकी 115 सीटें थीं और इस बार उसने अपने लिए 150 सीटों का लक्ष्य रखा था. लेकिन कांग्रेस की घेराबंदी से उसका मंसूबा ध्वस्त हो गया.अब यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि "आखिर नितिन को वित्त विभाग में ऐसी क्या दिलजस्पी है?" दूसरे यह समाज सेवा के लिए है या धन अर्जित करने? तीसरे, आखिर पाटीदार होने पर पार्टी को ब्लैकमेल क्यों किया? क्या इसी का नाम समाजसेवा है? चार, अगर वित्त विभाग नहीं मिलता, फिर उस स्थिति में भी क्या भाजपा में बने रहते? क्यों पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को हस्तक्षेप करना पड़ा? जिस भावना से नितिन ने वित्त विभाग लिया है, कांग्रेस तो क्या हर पार्टी की निगाह वित्त विभाग के कार्यकलापों पर रहेगी। एक ही घोटाला पार्टी और सरकार को संकट में डाल देगा।अवलोकन करें :--
आखिर कब तक देश जातियों के नाम इन नेताओं के हाथों ब्लैकमेल होता रहेगा? ऐसे नेता समाजसेवा के लिए राजनीति में आते हैं या अपनी जाति के नाम पर पार्टी और देश को ब्लैकमेल करने? यह आरोप नहीं, नितिन द्वारा प्रमाणित हुई घटना है। जिन कामों के लिए लोग कांग्रेस की आलोचना करते थे, वही काम आज भाजपा में भी खुलकर होने लगे हैं। पता नहीं देश को इन जाति के नाम पर राजनीति करने वालों से कब मुक्ति मिलेगी?
हार्दिक ने पटेल को कांग्रेस में शामिल होने का दिया था न्योता
नाराज चल रहे नितिन पटेल को पार्टीदार नेता हार्दिक पटेल ने यह आफर दिया था कि वे भाजपा से 10 विधायक लेकर कांग्रेस में शामिल हो जाये, वह उन्हें कांग्रेस में अच्छा पद और सम्मान दिलायेंगे. लेकिन वित्त विभाग मिल जाने के बाद नितिन पटेल ने बीते 48 घंटे में मिले तमाम ऑफर नकारते हुये कहा है कि वे भाजपा से अलग होने की बात सोच भी नहीं सकते हैं. उन्होंने कांग्रेस पर सियासी संकट का लाभ उठाने का भी आरोप लगाया उन्होंने कहा कि कांग्रेस का ऑफर राजनीति से प्रेरित था. गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि खराब से खराब हालात में भी वे भाजपा से अलग होने की बात नहीं सोच सकते हैं. उन्होंने कहा कि आज तक जितने मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया पूरी लगन और निष्ठा के साथ किया है. नितिन ने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी तथा अन्य किसी मंत्री से कोई मतभेद होने से साफ इन्कार किया. उन्होंने कहा कि यह नाराजगी सत्ता के लिये नहीं, आत्मसम्मान की थी।
अगर वित्त नहीं मिला था तो कौन सा आत्मसम्मान गिर रहा था? जब सरकारें और पार्टियाँ इस नेताओं के हाथ ब्लैकमेल होता रहेगा, वह सरकारें और पार्टियाँ मात्र एक खिलौना ही सिद्ध होंगी, जिस कारण देश का विकास हो या न हो इन जैसों का विकास जरूर होकर रहेगा। ऐसे नेता 56x2 इंच सीना रखने वालों का सीना भी 12 इंच का करने में संकोच नहीं करेंगे। बात करते हैं, आत्मसम्मान की। बिना चिंगारी के धुआँ नहीं निकलता।
पीएम मोदी और अमित शाह ने सौंपी है जिम्मेदारी
गुजरात के डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी. लेकिन, उसकी गरिमा के अनुकूल उन्हें विभाग नहीं दिये गये. नितिन भाजपा में सामान्य विधायक के रूप में रहने को भी तैयार थे लेकिन, आलाकमान ने उनकी महत्ता को देखते हुये सियासी संकट का हल तुरंत निकालने के लिए तीन मंत्रियों भूपेंद्रसिंह चूड़ास्मा, कौशिक पटेल और प्रदीपसिंह जाडेजा को लगा दिया. बाकी रहा सहा काम रविवार सुबह साढ़े सात बजे शाह के फोन ने कर दिया. गांधीनगर में दिसंबर 31 को गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने पूजा-अर्चना करने के साथ पदभार संभाल लिया।
40 साल से भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में किया है काम
नितिन पटेल ने कहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मुझ पर भरोसा जताया है, इसलिए मैं पदभार संभाल रहा हूँ। कैबिनेट की मीटिंग हुई थी। मैंने सीएम के साथ इसमें हिस्सा लिया और अनुशासन बनाये रखा। मैंने आलाकमान से कहा था कि अगर मुझे महत्वपूर्ण मंत्रालय नहीं दिये गये तो एक मंत्री की जिम्मेदारी से मुझे मुक्त कर दिया जाए। मेरी इच्छा सत्ता या महत्वपूर्ण मंत्रालय लेने की नहीं थी। बस इतना चाह रहा था कि जिन मंत्रालयों को पहले मैं संभाल रहा था, उन्हें मुझे दोबारा दे दिये जाएँ। मैंने 40 साल से भाजपा कार्यकर्ता के रूप में काम किया है। मैं हमेशा से पार्टी के साथ खड़ा रहा हूँ। यह सभी जानते हैं मेरे योगदान को देखकर ही पार्टी ने मुझे उप मुख्यमंत्री बनाया।
गिरगिट भी इतनी जल्दी अपना रंग बदलती, जितनी जल्दी नितिन जैसे नेता बदल लेते हैं। पार्टी अनुशासन उस वक़्त माना जाता, जब जितनी ज़िम्मेदारी मिली थी, उसको सहर्ष स्वीकार कर, कार्यालय/मंत्रालय जाकर कार्य करते। चुनाव में जिस प्रकार से NOTA का प्रयोग हुआ है, वह नितिन जैसे सोंच रखने वाले नेताओं के लिए किसी शिक्षा से कम नहीं।
विरोधियों के मुंह में आ गया था पानी
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा है कि नितिन पटेल को लेकर पिछले दो दिनों तक पैदा हुये विवाद को देखकर विरोधियों के मुंह में पानी गया था. पर अब घी के वापस घी के कनस्तर में मिल जाने से उनके मंसूबे विफल हो गये हैं. मामला अब सुलझ गया है। उधर, नितिन पटेल ने अपने गृहनगर महेसाणा में कहा कि कांग्रेस ने भाजपा के इस अंदरूनी मामले को सत्ता हासिल करने के एक मौके के तौर पर देखा था। उसे शायद पता नहीं था कि नितिन पटेल भाजपा के एक कट्टर कार्यकर्ता हैं और वह कांग्रेस में जाने की बात की कल्पना तक नहीं कर सकते।
नितिन पार्टी के कितने वफादार और कट्टर कार्यकर्ता है, यह उन्होंने स्वयं सिद्ध कर दिया है, किसी को इनसे किसी प्रमाण की जरुरत भी नहीं। बस इन्हे अगले चुनाव तक प्रतीक्षा करनी होगी।




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