बलूच एक्टिविस्ट कदीर बलोच का दावा है कि कुलभूषण जाधव कभी बलूचिस्तान में घुसा ही नहीं। उसे ईरानी मौलवी मुल्ला उमर बलोची ईरानी ने किडनैप किया था और 40-50 मिलियन (करीब 5 करोड़) में बेच दिया। कुलभूषण जाधव फिलहाल पाक की जेल में बंद है। पाक ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि इस पर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने रोक लगा दी थी। 25 दिसंबर को कुलभूषण से उनकी मां और पत्नी मिलने पहुंचे थे। इसको लेकर पाक अफसरों ने उनके बीच कांच की दीवार बना दी थी। सक्रिय बलूच कार्यकर्ता मामा कदीर का दावा है कि पाकिस्तान में कारावास की यातना झेल रहे भारतीय कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की खुफिया संस्था आईएसआई के इशारे पर ईरान के चाबहार से अगवा किया था. एक निजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कदीर ने दावा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) के लिए काम करने वाले मुल्ला उमर बलूच ईरानी ने जाधव को ईरान के चाबहार से अगवा किया था.
कदीर बलूच को वॉइस फॉर मिसिंग बलूच्स नामक संगठन से इसकी जानकारी मिली. कदीर इस संगठन के उपाध्यक्ष हैं. कदीर ने कहा, “हमारे संयोजक वहां मौजूद थे. जाधव का अपहरण करने के लिए आईएसआई की ओर से मुल्ला उमर को करोड़ों रुपये दिए गए थे.”
कदीर ने कहा कि मुल्ला उमर ईरानी बलूचिस्तान में कुख्यात आईएसआई एजेंट के रूप में मशहूर है और उसे पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ वहां आवाज उठाने वालों को अगवा करने के लिए जाना जाता है.
उन्होंने बताया कि जाधव के दोनों हाथ बांध दिए गए थे. उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी और उन्हें डबल डोर की एक कार में बैठाकर ले जाया गया था. उन्होंने कहा, जाधव को पहले चाहबहार से ईरान और बलूचिस्तान सीमा स्थित शहर मशकेल ले जाया गया, जहां से उनको बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा लाया गया और वहां से इस्मालाबाद.
कदीर ने कहा, “हम जानते थे कि कुलभूषण जाधव ईरान में एक व्यवसायी थे. आईएसआई ने घोषणा की थी कि उन्होंने बलूचिस्तान में जाधव को पकड़ा है. दरअसल, जाधव कभी अलूचिस्तान आए ही नहीं थे.”जाधव को पाकिस्तान की एक अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई हुई है. भारत ने यह मामला अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में उठाया जहां फिलहाल जाधव की मौत की सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया गया.
- 25 दिसंबर को जाधव की मां अवंतिका और पत्नी चेतना उनसे मिलने इस्लामाबाद गई थीं।
- जब जाधव की मां अवंतिका और पत्नी चेतना जाधव से मुलाकात के बाद बाहर आईं तो वहां की फॉरेन मिनिस्ट्री के अफसरों ने जानबूझकर उनको गाड़ी का इंतजार कराया।
- साजिश ये थी कि वो वहां की मीडिया की बातें सुनें। जाधव की मां से पूछा गया- कातिल बेटे से मिलने के बाद क्या कहेंगी? मीडिया के लोग अवंतिका और चेतना से चीख-चीखकर सवाल कर रहे थे। उन्हें मालूम था कि जवाब नहीं मिलेगा। लेकिन, मकसद सवाल पूछना नहीं, बल्कि बेइज्जती करना था।
कदीर बलूच को वॉइस फॉर मिसिंग बलूच्स नामक संगठन से इसकी जानकारी मिली. कदीर इस संगठन के उपाध्यक्ष हैं. कदीर ने कहा, “हमारे संयोजक वहां मौजूद थे. जाधव का अपहरण करने के लिए आईएसआई की ओर से मुल्ला उमर को करोड़ों रुपये दिए गए थे.”
कदीर ने कहा कि मुल्ला उमर ईरानी बलूचिस्तान में कुख्यात आईएसआई एजेंट के रूप में मशहूर है और उसे पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ वहां आवाज उठाने वालों को अगवा करने के लिए जाना जाता है.
उन्होंने बताया कि जाधव के दोनों हाथ बांध दिए गए थे. उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी और उन्हें डबल डोर की एक कार में बैठाकर ले जाया गया था. उन्होंने कहा, जाधव को पहले चाहबहार से ईरान और बलूचिस्तान सीमा स्थित शहर मशकेल ले जाया गया, जहां से उनको बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा लाया गया और वहां से इस्मालाबाद.
कदीर ने कहा, “हम जानते थे कि कुलभूषण जाधव ईरान में एक व्यवसायी थे. आईएसआई ने घोषणा की थी कि उन्होंने बलूचिस्तान में जाधव को पकड़ा है. दरअसल, जाधव कभी अलूचिस्तान आए ही नहीं थे.”जाधव को पाकिस्तान की एक अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई हुई है. भारत ने यह मामला अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में उठाया जहां फिलहाल जाधव की मौत की सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया गया.
जाधव को बिना सबूतों के दोषी करार दिया गया
- कदीर के एक चैनल को दिए इंटरव्यू के हवाले से पाक अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने कहा, "जाधव को ईरान से किडनैप किया गया और उसे बिना किसी सबूतों को दोषी करार दिया गया। जाधव कभी बलूचिस्तान में घुसा ही नहीं।''
- चैनल का दावा है कि जाधव को जैश-उल-अद्ल ग्रुप ने ईरान के सरबाज की गोल्डश्मिट बॉर्डर के पास से किडनैप किया था। ये बॉर्डर चाबहार से 52 किमी है। जैश-उल-अद्ल को पाक आर्मी पैसा देती है।
- रिपोर्ट के मुताबिक, "जाधव को सरबाज एक बिजनेस ग्रुप ने बुलाया था। ये बिजनेस ग्रुप जैश-उल-अद्ल के लिए काम करता है। मुल्ला उमर ईरानी भी जैश का ही हिस्सा है।''
- चैनल ने ये भी कहा कि भारत के विदेश मंत्रालय ने कदीर बलोच के इंटरव्यू को मांगा है।
- बता दें कि जाधव इंडियन नेवी का अफसर था जिसे 2016 में बलूचिस्तान से पकड़ा गया था।
- चैनल का दावा है कि जाधव को जैश-उल-अद्ल ग्रुप ने ईरान के सरबाज की गोल्डश्मिट बॉर्डर के पास से किडनैप किया था। ये बॉर्डर चाबहार से 52 किमी है। जैश-उल-अद्ल को पाक आर्मी पैसा देती है।
- रिपोर्ट के मुताबिक, "जाधव को सरबाज एक बिजनेस ग्रुप ने बुलाया था। ये बिजनेस ग्रुप जैश-उल-अद्ल के लिए काम करता है। मुल्ला उमर ईरानी भी जैश का ही हिस्सा है।''
- चैनल ने ये भी कहा कि भारत के विदेश मंत्रालय ने कदीर बलोच के इंटरव्यू को मांगा है।
- बता दें कि जाधव इंडियन नेवी का अफसर था जिसे 2016 में बलूचिस्तान से पकड़ा गया था।
जाधव की मां-पत्नी से पाक मीडिया ने पूछे थे बेइज्जती भरे सवाल
- जब जाधव की मां अवंतिका और पत्नी चेतना जाधव से मुलाकात के बाद बाहर आईं तो वहां की फॉरेन मिनिस्ट्री के अफसरों ने जानबूझकर उनको गाड़ी का इंतजार कराया।
- साजिश ये थी कि वो वहां की मीडिया की बातें सुनें। जाधव की मां से पूछा गया- कातिल बेटे से मिलने के बाद क्या कहेंगी? मीडिया के लोग अवंतिका और चेतना से चीख-चीखकर सवाल कर रहे थे। उन्हें मालूम था कि जवाब नहीं मिलेगा। लेकिन, मकसद सवाल पूछना नहीं, बल्कि बेइज्जती करना था।
मंगलसूत्र और जूतियां उतरवाईं
- भारत ने इस्लामाबाद में कुलभूषण जाधव से उनकी मां और पत्नी की मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के रवैये पर सख्त एतराज जताया था।
- विदेश मंत्रालय ने 26 दिसंबर को साफ किया कि इस मुलाकात में यकीन करने लायक जैसा कुछ नहीं है। दोनों देशों के बीच जो एग्रीमेंट हुआ था, उसके उलट पाकिस्तान का तरीका बेहद खराब था। मुलाकात के पहले जाधव की पत्नी चेतना से पाकिस्तान की फॉरेन मिनिस्ट्री में मंगलसूत्र और जूतियां उतरवा ली गईं।
- 25 दिसंबर को पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की सोमवार को मां और पत्नी से मुलाकात हुई थी। यह मीटिंग 47 मिनट चली। पाकिस्तान की फॉरेन मिनिस्ट्री में मुलाकात के वक्त सब कुछ ठीक नहीं था। जाधव और उनकी पत्नी चेतना-मां अवंतिका के बीच एक ग्लास पार्टिशन (कांच की दीवार) थी। जाधव के सामने एक फोन था। इसका स्पीकर ऑन करके बातचीत कराई गई।
- विदेश मंत्रालय ने 26 दिसंबर को साफ किया कि इस मुलाकात में यकीन करने लायक जैसा कुछ नहीं है। दोनों देशों के बीच जो एग्रीमेंट हुआ था, उसके उलट पाकिस्तान का तरीका बेहद खराब था। मुलाकात के पहले जाधव की पत्नी चेतना से पाकिस्तान की फॉरेन मिनिस्ट्री में मंगलसूत्र और जूतियां उतरवा ली गईं।
- 25 दिसंबर को पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की सोमवार को मां और पत्नी से मुलाकात हुई थी। यह मीटिंग 47 मिनट चली। पाकिस्तान की फॉरेन मिनिस्ट्री में मुलाकात के वक्त सब कुछ ठीक नहीं था। जाधव और उनकी पत्नी चेतना-मां अवंतिका के बीच एक ग्लास पार्टिशन (कांच की दीवार) थी। जाधव के सामने एक फोन था। इसका स्पीकर ऑन करके बातचीत कराई गई।
क्या है मामला?
- पाक आर्मी का दावा है कि जाधव इंडियन एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के लिए जासूसी कर रहे थे। उन्हें बलूचिस्तान प्रांत से पकड़ा गया। इसके बाद पाक आर्मी के फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल (FGCM) ने अप्रैल में फांसी की सजा सुनाई थी।
- इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने 18 मई, 2017 को फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी। पाकिस्तान को कुछ और शर्तें पूरी करने को कहा।
- इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने 18 मई, 2017 को फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी। पाकिस्तान को कुछ और शर्तें पूरी करने को कहा।
भारत का क्या कहना है?
- भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था। इंडियन नेवी से रिटायरमेंट के बाद वे ईरान में बिजनेस कर रहे थे। हालांकि, पाक का दावा है कि जाधव को बलूचिस्तान से 3 मार्च 2016 को अरेस्ट किया गया था। पाकिस्तान ने जाधव पर बलूचिस्तान में अशांति फैलाने और जासूसी का आरोप लगाया है।
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