सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एम बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायिक प्रशासन पर सवाल उठाए थे. इनमें से किसी का भी नाम पांच जजों की संवैधानिक पीठ में नहीं है.
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पांच न्यायाधीशों की पीठ में सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं. यह संविधान पीठ 17 जनवरी से कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई शुरू करेगी.
हालांकि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि चीफ जस्टिस ने उन चार न्यायाधीशों से मुलाकात की या नहीं जिन्होंने 12 जनवरी को संवाददाता सम्मेलन में सीजेआई के खिलाफ आरोप लगाए थे.
कार्यसूची के अनुसार पांच न्यायाधीशों की ये पीठ आधार कार्ड कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामले और सहमति से वयस्क समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों को अपराध को श्रेणी से बाहर रखने के फैसले को चुनौती देने से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करेगी.
इन्हीं जजों ने पिछले साल 10 अक्तूबर से विभिन्न मामलों में सुनवाई की थी. इनमें प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच टकराव का मामला भी है.
अवलोकन करें:--
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ये पीठ केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओें के प्रवेश पर रोक के विवादास्पद मुद्दे पर भी सुनवाई करेगी और इस कानूनी सवाल पर सुनवाई फिर शुरू करेगी कि क्या कोई पारसी महिला दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी के बाद अपनी धार्मिक पहचान खो देगी.
संविधान पीठ अन्य जिन मामलों को देखेगी उनमें आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे किसी जनप्रतिनिधि के अयोग्य होने से संबंधित सवाल पर याचिकाएं भी हैं.
इन सभी मामलों को पहले शीर्ष अदालत की बड़ी पीठों को भेजा गया था. वहीं इसके अलावा जस्टिस लोया की मौत के मामले में जांच की दो जनहित याचिकाएं जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हैं जिनके खिलाफ एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने सार्वजनिक रूप से आक्षेप लगाए थे.
क्यों हुआ मुख्य न्यायधीश का विरोध?
क्यों हुआ मुख्य न्यायधीश का विरोध?
46 मेडिकल कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दी गयी थी और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कुछ जस्टिस की दखलंदाजी मानी जाती है।
अब इसके पीछे क्या खेल है ... :
दरअसल जस्टिस चमेलश्वर की हैसियत सुप्रीम कोर्ट में नम्बर 2 है, जस्टिस मिश्रा के बाद। अब कॉलेजियम के अनुसार चीफ जस्टिस के नियंत्रण में कुल 5 जस्टिस अगला चीफ जस्टिस नियुक्त करते हैं, तो जस्टिस चमलेश्वर को अपना पत्ता कटता नजर आ रहा है। इसीलिए वो मीडिया में आकर लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं, और जस्टिस मिश्रा पर मनमानी का आरोप लगा रहे हैं। मगर बात इतनी भी नही है।
जिस मेडिकल फर्जीवाड़े का केस जस्टिस मिश्रा ने पलटा, दरअसल उसके पीछे कई षड्यंत्र है। इस केस को प्रशांत भूषण देख रहा है। इस प्रशांत भीषण ने चुपचाप जस्टिस चमलेश्वर के पास जाके इस केस को अपने पसंदीदा जजों की बेंच पे भिजवा दिया। अब चूंकि ये मेंशनिंग का अधिकार सिर्फ चीफ जस्टिस का होता है तो मिश्रा ने इसे पलट दिया। इस पर भूषण चिल्लाता हुआ मिश्र के कोर्ट में जब पहुंचा तो वहां पहले से ही बार कौंसिल मौजूद थी। भूषण ने इतनी बदतमीजी की कि बार काँसिल के सचिव ने भूषण का लाइसेंस रद्द करने की मांग कर दी।
इस पर जस्टिस मिश्र को कहना पड़ा कि, "यहां पहले तुम जैसे वकील ही केस के जज तय करते थे? इसलिए अब भी करना चाह रहे हो?"
जस्टिस मिश्र ही वो हैं, जिन्होंने आतंकी याकूब मेनन को फांसी लगवाई। तब ये भूषण, ग्रोवर, सिब्बल आदि कई NGO के साथ आतंकी याकूब से माफी मांग रहे थे। यहां तक कि कई जज भी। ये लोग तब देर रात को पहुंच गए थे और वहां अपनी बेईजत्ती करवा आये। तब से जस्टिस मिश्रा इन्हें खटक रहे हैं।
अब राम मंदिर का केस भी फाइनल होने वाला है जो जस्टिस मिश्र के अधीन होगा, जिस पर इन लोगों का पूरा जोर है कि ये इस जस्टिस के रहते पूरा ना हो बल्कि इनके किसी चहेते के अधीन आये, ताकि ये उसे पहले तो अपने पक्ष, नहीं तो कम से कम अगले लोकसभा के बाद खींच पाएं। इस मामले में भी धवन और सिब्बल जस्टिस मिश्र को कोर्ट में ही धमकी दे आये थे और बेंच के जज की संख्या भी ज्यादा चाहते थे, जिसे जस्टिस मिश्रा ने मना कर दिया था।
जिन राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक है, वो केस भी मिश्रा की अदालत में चल रहा है जिस पर पूरी उम्मीद है कि वहां हिन्दू को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलेगा। चिंदम्बरम का मैक्सिस केस भी जस्टिस मिश्रा के पास है जिसपर नियमित सुनवाई चलेगी।
ट्रिपल तलाक़ पर मुह की खाये ये कांग्रेस पोषित गिरोह जानते है कि उपरोक्त केस में इनका क्या होगा और फिर आगे इनकी राजनीति का क्या होगा।
ये कांग्रेस द्वारा पहली बार नही है। पिछले कितने जजों के उदाहरण है जिन्होंने कांग्रेस के भले के लिए काम किया और फिर मलाई खाई। उन पर लिखने में ये पहले से बड़ी पोस्ट पूरी किताब बन जाएगी।
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