राष्ट्रीय जनता दल यूनाईटेड के सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार अभी मुश्किलों के दौर से गुजर रहा है. लालू प्रसाद देवघर कोषागार से जुड़े 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी मामले में शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई संपन्न हो गई है.
गौरतलब है कि लालू यादव को 120B, 420, 467, 468, 471, 477A, 13(1)C, 13(1)D और 13(2) के तहत दोषी पाया है. इधर पटना में राजद का राबड़ी आवास पर बैठक हुआ है. पार्टी के बड़े नेता इस बैठक में लगभग सभी बड़े नेता पहुँचे. राबड़ी आवास पर बैठक में प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे, जगदानंद सिंह, जयप्रकाश नारायण यादव, रघुवंश प्रसाद, तेजप्रताप राबड़ी देवी सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे.
चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी से जुड़े केस में शनिवार को लालू प्रसाद यादव समेत 16 दोषियों की सजा का एलान कुछ देर में हो सकता है। जज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सजा सुना सकते हैं। इससे पहले 2 बजे कोर्ट ने बाकी बचे 5 दोषियों की सजा पर सुनवाई की। लालू के सजा के बिंदुओं पर कल ही सुनवाई हो गई थी।
23 दिसंबर को बिरसा मुंडा जेल लाए गए थे लालू
-कोर्ट ने दोषी करार दिए गए आरोपियों को जेल भेजने को निर्देश दिया था। इसके बाद 23 दिसम्बर की शाम लालू को बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल लाया गया। चारा घोटाले के मामले में लालू को सातवीं बार जेल जाना पड़ा।
- कुल 55 मामलों में से यह 33वां है। लालू दूसरे मामले में दोषी करार दिए गए हैं। आरजेडी चीफ पर चारा घोटाले के 6 केस चल रहे हैं।
- चाईबासा कोषागार (ट्रेजरी) से 37.70 करोड़ रु. की फर्जी तरीके से निकासी के अन्य मामले में लालू को अक्टूबर 2013 में 5 साल की सजा सुनाई थी। उन्हें बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
- 5 अन्य केस में सुनवाई जारी है। इस मामले में सीबीआई ने 27 अक्टूबर 1997 को 38 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। इनमें से 11 की मौत हो चुकी है।
- कुल 55 मामलों में से यह 33वां है। लालू दूसरे मामले में दोषी करार दिए गए हैं। आरजेडी चीफ पर चारा घोटाले के 6 केस चल रहे हैं।
- चाईबासा कोषागार (ट्रेजरी) से 37.70 करोड़ रु. की फर्जी तरीके से निकासी के अन्य मामले में लालू को अक्टूबर 2013 में 5 साल की सजा सुनाई थी। उन्हें बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
- 5 अन्य केस में सुनवाई जारी है। इस मामले में सीबीआई ने 27 अक्टूबर 1997 को 38 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। इनमें से 11 की मौत हो चुकी है।
क्या है देवघर ट्रेजरी केस?
- बिहार सरकार ने 1991 से 1994 के बीच मवेशियों की दवा और चारा खरीदने के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए थे। जबकि इस दौरान देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए।
- बिहार सरकार ने 1991 से 1994 के बीच मवेशियों की दवा और चारा खरीदने के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए थे। जबकि इस दौरान देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए।
इन्हें सुनाई जाएगी सजा
- लालू प्रसाद यादव-बिहार के पूर्व सीएम, जगदीश शर्मा-पॉलिटिकल लीडर, आरके राणा-पॉलिटिकल लीडर, बेक जूलियस-आईएएस, फूलचंद सिंह-आईएएस, महेश प्रसाद-आईएएस, कृष्ण कुमार-गवर्नमेंट इम्प्लॉई, सुबीर भट्टाचार्य-ट्रेजरी ऑफिसर, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजा राम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी।
- लालू प्रसाद यादव-बिहार के पूर्व सीएम, जगदीश शर्मा-पॉलिटिकल लीडर, आरके राणा-पॉलिटिकल लीडर, बेक जूलियस-आईएएस, फूलचंद सिंह-आईएएस, महेश प्रसाद-आईएएस, कृष्ण कुमार-गवर्नमेंट इम्प्लॉई, सुबीर भट्टाचार्य-ट्रेजरी ऑफिसर, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजा राम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी।
ये हो चुके हैं बरी
- जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व सीएम
- ध्रुव भगत, पूर्व पीएसी चेयरमैन
- एसी चौधरी, पूर्व आईआरएस ऑफिसर
- सरस्वती चंद्रा, चारा सप्लायर
- सदानंद सिंह, चारा सप्लायर
- विद्या सागर निषाद, पूर्व मंत्री
- जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व सीएम
- ध्रुव भगत, पूर्व पीएसी चेयरमैन
- एसी चौधरी, पूर्व आईआरएस ऑफिसर
- सरस्वती चंद्रा, चारा सप्लायर
- सदानंद सिंह, चारा सप्लायर
- विद्या सागर निषाद, पूर्व मंत्री
कुल कितने आरोपी थे ?
- एक सीबीआई ऑफिशियल के मुताबिक, इस केस में 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। 3 सरकारी गवाह बन गए थे। दो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिन्हें 2006-07 में दोषी करार दिया गया था। बाकी बचे 22 आरोपियों पर केस चल रहा था।
- एक सीबीआई ऑफिशियल के मुताबिक, इस केस में 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। 3 सरकारी गवाह बन गए थे। दो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिन्हें 2006-07 में दोषी करार दिया गया था। बाकी बचे 22 आरोपियों पर केस चल रहा था।
लालू पर क्या आरोप?
- बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इन्क्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।
- बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इन्क्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।
बिहार के चारा घोटाले का काला चिट्ठा
बिहार पुलिस ने साल 1994 में गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए 900 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले दर्ज किए।
बिहार पुलिस ने साल 1994 में गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए 900 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले दर्ज किए।
विपक्षी दलों की मांग के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने इसकी कमान संयुक्त निदेशक यूएन विश्वास को सौंपी।
सीबीआई ने कहा कि चारा घोटाले के सभी बड़े आरोपियों के रिश्ते राष्ट्रीय जनता दल और अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं से हैं। एजेंसी ने दावा किया कि काली कमाई का बड़ा हिस्सा नेताओं के पास गया, इसके सबूत भी जुटा लिए गए हैं।
सीबीआई ने इसे सिर्फ चारा घोटाला नहीं, पशुपालन घोटाले के तौर पर देखा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के लिए करोड़ों रुपए के फ़र्जी बिल कोषागारों से वर्षों तक नियमित रूप से भुनाए। बिहार के मुख्य लेखा परीक्षक ने इसकी जानकारी राज्य सरकार को समय-समय पर भेजी, लेकिन बिहार सरकार ने इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
हाल ये हो गया कि बिहार में कई-कई वर्षों तक विधानसभा बजट पारित नहीं किया गया। राज्य का सारा काम लेखा अनुदान के सहारे चलता रहा।
सीबीआई ने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री को इस मामले की पूरी जानकारी थी। उन्होंने कई मौकों पर राज्य के वित्त मंत्रालय के प्रभारी के रूप में सभी निकासियों की अनुमति भी दी।
सीबीआई ने कहा कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, इसमें राज्य क कर्मचारी, नेता और व्यापारी सभी शामिल थे।
इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र को गिरफ्तार किया गया। फिर कई और मंत्री भी गिरफ्त में लिए गए।
सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल किया, जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा और बाद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने तक वे कई महीनों तक जेल में रहे।
इस बीच बिहार से अलग हुए झारखण्ड राज्य के मामलों की सुनवाई पटना हाईकोर्ट में होगी या रांची हाईकोर्ट में, इस पर भी कानूनी बहस चली।
तीन अक्तूबर 2013 को रांची स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह की अदालत ने कांड संख्या आरसी 20 ए/96 चाईबासा कोषागार से कथित तौर पर 37.7 करोड़ की अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाले के एक मामले में लालू यादव को पांच साल की सुनाई थी। साथ ही अदालत ने 25 लाख रुपए का जुर्माना भी अदा करने को कहा था।
चाईबासा तब अविभाजित बिहार का हिस्सा था. हालांकि उस मामले में लालू प्रसाद फिलहाल जमानत पर हैं। लेकिन सज़ायाफ्ता होने के बाद वे संसद की सदस्यता गंवा बैठे और चुनाव लड़ने के भी अयोग्य हो गए।
इसी मामले में तब लालू प्रसाद के अलावा डॉ जगन्नाथ मिश्र को चार साल कारावास तथा 21 लाख रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी। चारा घोटाले के इस मामले में 44 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया था।
मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील को मंजूर करने के साथ लालू प्रसाद के ख़िलाफ़ चारा घोटाले से संबंधित अलग-अलग मामलों में मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा था कि प्रत्येक अपराध के लिए पृथक सुनवाई होनी चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को इन मामलों में नौ महीने में सुनवाई पूरी करने को कहा है।
नवंबर 2014 में झारखंड हाइकोर्ट ने लालू प्रसाद को राहत देते हुए कहा था कि एक मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति के खिलाफ इन्ही धाराओं के तहत मिलते-जुलते अन्य मुकदमों में सुनवाई नहीं हो सकती।
रांची की अदालत में चारा घोटाले के जिस मामले की सुनवाई होनी है। उसमें लालू के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र समेत 22 लोग अभियुक्त हैं। कोर्ट ने सभी को पेश होने का आदेश दिया है।
देवघर कोषागार से 84.54 लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़े इस मुकदमे (आरसी 64ए/96) में 15 दिसंबर को दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई थी। इसी मामले में फैसला सुनाया जाना है।
लालू यादव की पैरवी कर रहे वकील प्रभात कुमार का कहना है कि इस मामले में दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और डॉ जगन्नाथ मिश्र के अलावा पूर्व मंत्री डॉ आरके राणा, विद्यासागर निषाद, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और लोकलेखा समिति के पूर्व अध्यक्ष ध्रुव भगत, वरिष्ठ अधिकारी रहे बेक जुलियस, महेश प्रसाद, फूलचंद्र सिंह आरोपी हैं। अभियु्क्तों के खिलाफ मुख्य रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120 बी, 467, 470 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण क़ानून की धाराएं लगाई गई हैं।
धारा 120 बी आपराधिक साजिश और 420 धोखा और बेइमानी के अपराध को साबित करती है। इसके तहत सात साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि वकील प्रभात कुमार को उम्मीद है कि इस मुकदमे में लालू यादव बरी हो जाएंगे।
लालू ने बिहार से रांची जाने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा था कि पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार और अब नरेंद्र मोदी की सरकार उनके पीछे पड़ी है। उनके परिवार वालों को भी परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा-एनडीए गठबंधन की सरकार 25-30 साल से उन्हें परेशान कर रही है, कोल्हू के बैल की तरह पेर रही है। हालांकि लालू ने यह दावा भी किया कि इस मामले में किसी भी फैसले से उनके परिवार और राष्ट्रीय जनता दल पर किसी तरह का असर नहीं आएगा।
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