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क्या मन्नत में शिषिर कुंदर का फरहा खान से निकाह हुआ था?

Kamal Bakshi
ने दिसम्बर 10 को अपनी फेसबुक पर दो महत्वपूर्ण ज्ञानवर्धक समाचार प्रकाशित किए हैं। कमल साहब के तीन/चार समाचार पत्र भी प्रकाशित होते हैं। वह एक मृदुभाषी व्यक्ति हैं। इनके द्वारा प्रकाशित इन दोनों समाचारों में से एक शाहरुख़ खान और फरहा खान द्वारा किस तरह शिषिर कुंदर का इस्लामीकरण करवा गया, समाचार इनके निकाह/शादी होने से सुन रहा था, लेकिन किसी तरह पुष्टि नहीं हो रही थी। यही कारण है कि शिषिर कुंदर उर्फ़ समसुद्दीन खान कई बार हिन्दू विरोधी ट्वीट करते है। दूसरे अर्थों में यह कहा जाए कि भारत में असहिष्णुरिता, मुसलमानों के लिए असुरक्षित आदि समझने वालों की संख्या में वृद्धि। कुछ समय पूर्व आमिर खान ने कहा था कि “मेरी पत्नी/बीबी हिन्दू होगी, लेकिन बच्चे मुसलमान।” यानि आमिर हिन्दू लड़कियों को मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए प्रयोग करते है। मतलब स्पष्ट है, हिन्दुओं की जेबों पर ऐश और इतनी प्रसिद्धि पाने वाले हिन्दू को कितनी हीन भावना से देखते हैं, इससे बड़ा क्या और उदाहरण मिलेगा कि किस तरह अपने भोली शक्लों से हिन्दुओं का शोषण किया जा रहा है।

दूसरा समाचार साई बाबा का है, जिसमे वह बताते हैं कि किस तरह हिन्दू राजा-रानियों के विरुद्ध षड्यंत्र करने वालों को पूजवा कर हिन्दुओं के सिर पर बैठवाया गया। किसी पीर का कोई विशेष धर्म नहीं होता। जामा मस्जिद स्थित दो कब्रों में से एक लाल कब्र सरमद साहब की है। जो एक मुस्लिम होते हुए राम और सीता का गुणगान करते थे। नंगे रहते थे। जिनकी औरंगज़ेब ने सर कलम कर हत्या कर दी थी। लेकिन बक्शी साहब की इस बात से पूर्णरूप से सहमत हूँ कि साई एक मुसलमान है, लेकिन इनके अब्बा ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के विरुद्ध गद्दारी की थी, इसकी तनिक भी जानकारी नहीं। इस की पुष्टि तो कमल साहब ही कर सकते हैं। लेकिन है रहस्योघाटन।


प्रस्तुत है लेख:--      

Image result for साई*साई का इतिहास-* अवश्य पढ़ें
बीरगति को प्राप्त हुई रानी लक्ष्मी बाई को मरवाने वाले गद्दारो के बारे मे इतिहास लोगों मेंअब तक यही धारणा हे कि झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई अँगरेजों से लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुई थी और यह बात सत्य भी हे परंतु कितने लोगों को पता है कि इस विरांगन को पकड़ना अँगरेजों के लिए दुष्कर ही नहीं बल्कि असंभव था ।
सालों से अँगरेजों के नाकमें दम करने वाली रानी को पकड़ने के लिए जब अंग्रेजों को कुछ उपाय नहीं सुझा तब उन्होंने पुराने तरीके आजमाए । यानी कि किसी गद्दार सैनिक की खोज जो रानी की सेना में हो और रानी के बारे में काफी कुछ जानता हो गद्दारों का इतिहास देखें तो सिर्फ दो नाम ऐसे हें जिन्होंने भारत के इतिहास को बदल कर रख दिया था पहला गद्दार जयचंद था जो हिन्दू साम्राज्य के विनाश का कारण बना । पृथ्वी राज चौहान अंतिम हिन्दू राजा थे जिनके बादआठ सौ वर्षों तक मुस्लिमों ने शासन किया दूसरा गद्दार मीर जाफर हुआ जो बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला का सेनापति था। वह महत्वाकांक्षी एवं लालची था भारत में अंग्रेजी राज्य की नींव बंगाल से ही पड़ी थी जब प्लासी की लड़ाई में अँगरेजों(रॉबर्टक्लाइव) ने नवाब को हराया था और उसी लड़ाई में गद्दार मीर जाफर अँगरेजों से मिल गया था।
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बाद में यानी 1757 में अँगरेजों ने उसे बंगाल का नवाब बनाया अब आते हे तीसरे गद्दार पर जो रानी लक्ष्मीबाई की मौत का कारण बना वह था बहरूद्दीन यानी कि चाँद मियाँ ( साँईंबाबा) का बाप बहरूद्दीन एक अफगानी पिंडारी मुसलमान था रानी लक्ष्मीबाई की सेना में लगभग 500 पिंडारी सैनिक थे जिसमें साँईं के पिता का स्थान रानी के निकटतम एवं विश्वस्त सैनिको में था अब अँगरेजों ने बहरूद्दीन को लालच देकर रानी से गद्दारी करने को तैयार कर लिया इसी के निशान देही पर अँगरेजों ने रानी को घेरा रानी अपने इकलौते बेटे को पीठ पर बाँधे भागती रही अंग्रेज पीछा करते रहे रानी हाथ नहीं लगी अब रानी का पीछा करने का जिम्मा पाँच पिंडारियों को दिया गया जिसमें एक शिर्डी वाले चाँद मिया उर्फ़ साईँ का पिता भी था उसे रानी के छिपने के स्थानों का पता था अन्ततः रानी को घेर लिया गया।
रानी रणचण्डी की तरह माँ भारती की शान को ना झुकने का प्रण लिए अपनी तलवार से कत्लेआम मचाती रही अंग्रेज सेनापति हैरान था कि कैसे एक अकेली महिला उसके सैनिकों को काट रही है ।रानी गिरती फिर उठती फिर गिरती फिर उठकर लड़ती कईयों की गर्दनें उड़ा देने के पश्चात अंत में वो गिरी तलवार उसके हाथों से दूर जा गिरा हार फिर भी ना मानी वो अपनी तलवार लेने के लिए अंतिम बार उठी , निहत्था पाकर पिंडारी सैनिकों ने रानी पर जोरदार वार किया , रानी फिर कभी नहीं उठी। रानी वीर गति को प्राप्त कर चुकी थी भारत की इस बेटी ने अपनी अंतिम साँस तक अपनी मातृभूमि की , अपने देश की रक्षा की इस महान विरांगना के चरणों में मैं शीष नवाता हूँ------------------------------
यह रहा साईं बाबा का कच्चा चिट्ठा
साईं का जन्म 1838 में हुआ था, पर कैसे हुआ और उसके बाद की पूरी कथा बहुत ही रोचक है, साईं के पिता का असली नाम था बहरुद्दीन, जो कि अफगानिस्तान का एक पिंडारी था, वैसे इस पर एक फिल्म भी आई थी जिसमे पिंडारियो को देशभक्त बताया गया है, ठीक वैसे ही जैसे गाँधी ने मोपला और नो आखली में हिन्दुओ के हत्यारों को स्वतंत्रता सेनानी कहा था.औरंगजेब की मौत के बाद मुग़ल साम्राज्य ख़तम सा हो गया था केवल दिल्ली उनके अधीन थी, मराठा के वीर सपूतो ने एक तरह से हिन्दू साम्राज्य की नीव रख ही दी थी, ऐसे समय में मराठाओ को बदनाम करके उनके इलाको में लूटपाट करने का काम ये पिंडारी करते थे, इनका एक ही काम था लूटपाट करके जो औरत मिलती उसका बलात्कार करना, आज एक का बलात्कार कल दूसरी का, इस तरह से ये मराठाओ को तंग किया करते थे, पर समय के साथ साथ देश में अंग्रेज आये और उन्होंने इन पिंडारियो को मार मार कर ख़तम करना शुरू किया.
साईं का बाप जो एक पिंडारी ही था, उसका मुख्यकाम था अफगानिस्तान से भारत के राज्यों में लूटपाट करना, एक बार लूटपाट करते करते वह महाराष्ट्र के अहमदनगर पहुचा, जहा वह एक वेश्या के घर रुक गया, उम्र भी जवाब दे रही थी, सो वो उसी के पास रहने लग गया, कुछ समय बाद उस वेश्या से उसे एक लड़का और एक लड़की पैदा हुआ, लड़के का नाम उसने चाँद मियां रखा और उसे लेकर लूटपाट करना सिखाने के लिए उसे अफगानिस्तान ले गया.उस समय अंग्रेज पिंडारियो की ज़बरदस्त धर पकड़ कर रहे थे, इसलिए बहरुद्दीन भेष बदल कर लूटपाट करता था. उसने अपने सन्देश वाहक के लिए चाँद मिया को रख लिया, चाँद मिया आज कल के उन मुसलमान भिखारियों की तरह था जो चादर फैला कर भीख मांगते थे, जिन्हें अँगरेज़ Blanket Begger कहते थे, चाँद मिया का काम था लूट के लिए सही वक़्त देखना और सन्देश अपने बाप को देना, वह उस सन्देश को लिख कर उसे चादर के नीचे सिल कर हैदराबाद से अफगानिस्तान तक ले जाता था, पर एक दिन ये चाँद मियां अग्रेजो के हत्थे लग गया और उसे पकडवाने में झाँसी के लोगो ने अंग्रेजो की मदद की जो अपने इलाके में हो रही लूटपाट से तंग थे.
उसी समय देश में पहली आजादी की क्रांति हुई और पूरा देश क्रांति से गूंज उठा, अंग्रेजो के लिए विकट समय था और इसके लिए उन्हें खूंखार लोगो की जरुरत थी, बहर्दुद्दीन तो था ही धन का लालची, सो उसने अंग्रेजो से हाथ मिला लिया और झाँसी चला गया. उसने लोगो से घुलमिल कर झाँसी के किले में प्रवेश किया और समय आने पर पीछे से दरवाजा खोल कर रानी लक्ष्मी बाई को हराने में अहम् भूमिका अदा की, यही चाँद मिया आठ साल बाद जेल से छुटकर कुछ दिन बाद शिर्डी पंहुचा और वहके सुलेमानी लोगो से मिला जिनका असली काम था गैर-मुसलमानों के बीच रह कर चुपचाप इस्लाम को बढ़ाना.
चाँद मियां ने वही से अलतकिया का ज्ञान लिया और हिन्दुओ को फ़साने के लिए साईं नाम रख कर शिर्डी में आसन जमा कर बैठ गया, मस्जिद को जानबूझ कर एक हिन्दू नाम दिया और उसके वहा ठहराने का पूरा प्रबंध सुलेमानी मुसलमानों ने किया, एक षड्यंत्र के तहत साईं को भगवान का रूप दिखाया गया और पीछे से ही हिन्दू मुस्लिम एकता की बाते करके स्वाभिमानी मराठाओ को मुर्दा बनाने के लिए उन्हें उनके ही असली दुश्मनों से एकता निभाने का पाठ पढाया गया. पर पीछे ही पीछे साईं काअसली मकसद था लोगो में इस्लाम को बढ़ाना, इसका एक उदाहरण साईं सत्चरित्र में है कि साईं के पास एक पुलिस वाला आता है जिसे साईं मार मार भगाने की बात कहता है, अब असल में हुआ ये की एक पंडित जी ने अपने पुत्र को शिक्षा दिलवाने के लिए साईं को सोंप दिया, पर साईं ने उसका खतना कर दिया.
जब पंडितजी को पता चला तो उन्होंने कोतवाली में रिपोर्ट कर दी, साईं को पकड़ने के लिए एक पुलिस वाला भी आया जिसे साईं ने मार कर भगाने की बात कही थी, ये तभी की फोटो है जब पुलिस वाला साईं को पकड़ने गया था और साईं बुरका पहन कर भागा था.मेरी साई बाबा से कोई निजी दुस्मनी नही है, परतुं हिन्दू धर्म को नाश होरहा है, इसलिए मै कुछ सवाल करना चाहता हूँ. हिन्दू धर्म एक सनातन धर्म है, लेकिन आज कल लोग इस बात से परिचित नही है क्या? जब भारत मे अंग्रेजी सरकार अत्याचार और सबको मौत के घाट उतार रहे थे तब साई बाबा ने कौन से ब्रिटिश अंग्रेजो के साथ आंदोलन किया ? जिदंगी भीख मांगने मे कट गई? मस्जिदमे रह कर कुरान पढना जरूरी था. बकरे हलाल करना क्या जरूरी था ? सब पाखंड है, लोगो को मुर्ख बना कर पैसा कमाने का जरिया है।
ऐसा कौन सा दुख है कि उसे भगवान दूर नही कर सकते है.श्रीमद भगवत गीता मे लिखा है कि श्मशान और समाधि की पुजा करने वाले मनुष्य राक्षस योनी को प्राप्त होते हैं.साई जैसे पाखंडी की आज इतनी ज्यादा सेल्स मार्केटिंग हो गयी है कि हमारे हिन्दू भाई बहिन आज अपने मूल धर्म से अलग होकर साई मुल्ले कि पूजा करने लगे है। आज लगभग हर मंदिर में इस जिहादी ने कब्जा कर लिया है।हनुमान जी ने हमेशा सीता राम कहा और आज के मूर्ख हिन्दू हुनमान जी का अपमान करते हुए सीता राम कि जगह साई राम कहने लग गए । बड़ी शर्म कि बात है। आज जिसकी मार्केटिंग ज्यादा उसी कि पूजा हो रही है। इसी लिए कृष्ण भगवान ने कहा था कि कलयुग में इंसान पथ और धर्म दोनों से भ्रष्ट हो जाएगा।100 मे से 99 को नहीं पता साई कौन था, इसने कौन सी किताब लिखी, क्या उपदेश दिये पर फिर भी भगवान बनाकर बैठे है !
साई के माँ बाप का सही सही पता नहीं ,पर मूर्खो को ये पता है कि ये किस किस के अवतार है ! अंग्रेज़ो के जमाने मे मूर्खो के साई भगवान पैदा होकर मर गए पर किसी भी एक महामारी भुखमरी मे मदद नहीं की। इनके रहते भारत गुलाम बना रहा पर इन महाशय को कोई खबर नहीं रही। शिर्डी से कभी बाहर नहीं निकले पर पूरे देश मे अचानक इनकी मौत के 90-100 साल बाद इनके मंदिर कुकुरमुत्ते की तरह बनने लगे।चालीसा हनुमान जी की हुआ करती थी, आज साई की हो गयी ! राम सीता के हुआ करते थे,आज साई ही राम हो गए ! श्याम राधा के थे, आज वो भी साई बना दिये गए ! बृहस्पति दिन विष्णु भगवान का होता था, आज साई का मनाया जाने लगा!भगवान की मूर्ति मंदिरो में छोटी हो गयी और साई विशाल मूर्ति मे हो गए ! प्राचीन हनुमान मंदिर दान को तरस गए और साई मंदिरो के तहखाने तक भर गए!मूर्ख हिन्दुओ अगर दुनिया मे सच मे कलयुग के बाद भगवान ने इंसाफ किया तो याद रखना मुह छुपाने के लिए और अपनी मूर्ख बुद्धि पर तरस खाने के लिए कही शरण भी न मिलेगी ! इसलिए भागवानो की तुलना मुल्ले साई से करके पाप मत करो।इस लेख को पढ़ने के बाद भीन समझ मे आए तो अपना खतना करवा के मुसलमान बन जाओ !क्या करोगे शेयर करके...------------
साईं की मृत्यु के बाद --**दशकों तक सांई का कहीं कोई नाम लेवा नहीं था। हो सकता है कि मात्र थोड़ी दूर तक के लोग जानते होंगे। पर अब कुछ तीस या चालीस वर्षों में उनकी उपस्थिति आम हो गई है और लोगों की आस्था का पारा अचानक से उबाल करने लगा है।अच्छा मैं एक बात पूछता हूँ... आप किसी भी साठ या सत्तर साल के व्यक्ति से पूछ लें कि वे साईं बाबा का नाम पहली बार अपने जीवन में कब सुना था?.. निश्चित ही वो कहेगा कि वो पहले नहीं सुना था... कोई नब्बे या कोई अस्सीे के दशक में हीं सुना हुआ कहेगा।इत्ती जल्दी ये इत्ता बड़ा भगवान कैसे बन गया ?एक बात और... हिन्दुओं के भगवान बनाने के पहले इनके चेले चपाटों ने इन्हें कुछ इस प्रकार से पेश किया था जैसे कि सभी धर्मों के यही एक मात्र नियंता हों। हिन्दू , मुस्लिम, सिक्ख ईसाई...सभी के इष्ट यही थे।और इन्हें पेश किया कौन?..
जराये भी समझिए...सत्तर - अस्सी के दशक में जो फिल्में बनती थी या गाने होते थे उसमें या तो हिन्दूओं के भगवान या फिर मुस्लिमों के अल्लाह का जिक्र होता था। भगवान वाला सीन मुस्लिमों को स्वीकार नहीं थाऔर अल्लाह वाला हिन्दूओं को। पर नायक को अलौकिक शक्ति देने के लिए इनका सीन डालना भी जरूरी ही था।..किया क्या जाय?... तो....यह किसी निर्देशक की सोच रही होगी कि.. किसी ऐसे व्यक्ति को अलौकिक शक्ति से लैस करके दिखाया जाय ताकि किसी भी धर्म के लोगो का विरोध ना झेलनी पड़े और वे अपनी फिल्म को सफल बना लें। ऐसा ही कुछ उनके दिमाग में आया होगा... और अचानक से उनके दिमाग की बत्ती जल गई होगी जब किसी ने साईं का नाम सुझाया होगा।Eurekkka....Eurekkka कहते हुए वे उछल पड़े होंगे। इस नये भगवान का सफल परीक्षण उस ऐतिहासिक दिन को किया गया जो साईं भक्तों के लिए एक पवित्र दिन से कम नहीं है।7 जनवरी 1977 को रूपहले पर्दे पर एक फिल्म आई ""अमर अकबर एंथोनी""इस फिल्म में एक गाना बजा "शिर्डी वाले साई बाबा आया हूँ तेरे दर पे सवाली"??बस क्या था.. संयोगवश फिल्म भी हिट... बाबा भी हिट....।
साई बाबा के चेले चपाटों के पैर अब तो जमीन पर पड़ ही नहीं रहे थे साई की स्वीकार्यता को देखकर। उससे पहले तक ना कहीं तस्वीर, ना कहीं मुर्ति और नाही कोई चर्चा।और उसके बाद तो हर जगह साई ही साई। फोटोशॉप करके आग से भी निकाले गए साई, जो कई भक्तों के घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। धीरे धीरे, चुपके चुपके हिन्दुओं के मंदिरों में मुर्तियां बैठने लगी... इनके अपने मंदिर भी बनने लगे। एक और मजे की बात कि किसी अन्य धर्मों के लोगों ने इन्हें स्वीकार किया ही नहीं सिवाय हिन्दुओं के। अब देखिए, हमारा सनातनी हिन्दू समाज अब धीरे धीरे उस मोड़ पर जा रहा है जहाँ से दो धड़े साफ साफ दिखेंगे... एक विधर्मी साईं को मानने वाले हिन्दू और दूसरे अपने सनातनी मार्ग पर चलने वाले हिन्दू। इनमें अब दूरियां बढ़ती जाएंगी और आने वाले समय में इस समाज में दो फाड़ होगा।
एक "सनातनी हिन्दू" और दूसरा "साईं पूजक हिन्दू"। सनातनी वाले साईं को मान्यता नहीं देंगे और साईं वाले साईं भक्ति नहीं छोड़ेंगे। बात और आगे जाएगी... ये दोनो एक दूसरे के मंदिरों में जाना बंद कर देंगे.... यदि नहीं तो फिर सनातनी उन्हें अपने मंदिरों में आने से रोकेंगे। कोई हार मानने को तैयार नहीं होगा। और यही वो समय होगा जब हिन्दू समाज दो खेमे में बँट जायेगा। बिल्कुल उसी तरह जैसे...मुस्लिम बंटकर शिया - सुन्नी हुए....ईसाई बंटकर कैथोलिक प्रोटेस्टेन्ट हुए.....जैन बंटे तो श्वेतांबर - दिगम्बर हुए.....बौद्ध बंटे तो हीनयान - महायान हुए।
हो सकता है ये सुनकर आपको अचम्भा लगे पर हिन्दू धर्म में पड़ रही यही दरार ही विभाजन का कारण बनेगी। "मेरा यह मानना है कि साईं बाबा को एक षडयंत्र की तरह हमारे बीच रोपा गया है और मैं प्राण प्रण से इसका विरोध करता रहूँगा।"शिरडी में सांई की कब्र यानि मजार पर मन्दिर बना दिया।"ना मैं पूर्वाग्रही हूँ.. ना ही दुराग्रही हूँ....और ना ही किसी से चिढ़ है। एक सनातनी हिन्दू होने के नाते अपने धर्म को दूषित और विभाजित होते नहीं देख सकता हूँ।""इसके गुनाहगार वे लोग भी होंगे जो सिर्फ़ तमाशा देख रहे हैं और आवाज नहीं उठा रहे हैं।
रिवर्स लव जेहाद :-
Image may contain: 6 people, people standingबॉलीवुड यानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में धर्म के नाम पर कैसे कैसे कुचक्र रचे गए , यह जानकर अब डर लगने लगा है । हिन्दू धर्म इस देश की आत्मा है । लेकिन आजादी के बाद उसे कितना छलनी किया गया इसका पता 2014 के बाद ही चल पा रहे ।
अभी मिली जानकारी के अनुसार 'रिवर्स लव जिहाद' भी एक महत्वपुर्ण आयाम रहा इस देश के विरोधियों का । रिवर्स लव जिहाद से तात्पर्य है वह हिंदू युवक जो मुस्लिम युवतियों शादी की इच्छा में इस्लाम धर्म अपना लेते है ।
बात करते है बॉलीवुड के लेखक-निर्देशक शिरीष कुंदर की । यह शिरीष जब जवानी में कदम रखा ही था तब उससे उम्र में काफी बड़ी प्रसिद्ध नृत्य निर्देशिका और फिल्मकार फराह खान ने उसे प्यार के जाल में फंसा लिया । इसके बाद जब शादी की बात आई तो बॉलीवुड पर काबिज माफिया ने शाहरुख खान की मार्फ़त शिरीष को समझाया कि तुम हिंदू धर्म छोड़कर ही फरहा से निकाह कर सकते हो। मजे की बात देखिए शिरीष कुंदर को मुसलमान कहीं और नहीं बल्कि शाहरुख खान के बंगले में ही बनवाया गया ।
शाहरुख खान ने एक मौलवी को बुलाकर अपने ही बंगले मन्नत में उसे कलमा पढ़ाकर मुस्लिम बनवाया और उसे समसुद्दीन खान नाम दिया गया । शाहरुख खान ने फिर अपने ही बंगले में फराह खान और शिरीष कुंदर का निकाह भी करवाया । इस पूरी प्रक्रिया में फराह खान के भाई , घटिया निर्देशक और कॉमेडियन भी मुख्य भूमिका में रहे ।
अब कुछ कहेंगे इसमें बुरा क्या है ? बुरा ये है के मुसलमान बनने के बाद शिरीष कुंदर की सोच विकृत हो गयी है । रिवर्स लव जिहाद का शिकार शिरीष ने कुछ समय पूर्व अपने ट्विटर एकाउंट पर हैप्पी भाईदूज लिखकर दाऊद इब्राहिम की फोटो लगाई थी। उसके बाद शिरीष खुफिया एजेंसीज के राडार पर भी आ गए थे । शिरीष उर्फ शमसुद्दीन खान नामक यह शख्स लगातार 'हिंदू विरोधी' ट्वीट करता रहता है और हिंदू विरोध में तो आजकल इसने मुस्लिमों को भी पीछे छोड़ दिया है ।
फिरकापरस्त ताकतों का यह कुटिल खेल जनता के सामने आना जरूरी है ।

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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