पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव और उनके परिवार की मुलाकात में हुई बातचीत की जानकारी धीरे-धीरे सामने आ रही है। जो सबसे अहम बात सामने आई है वो ये कि पाकिस्तान ने इस मुलाकात के बहाने कुलभूषण के खिलाफ सबूत जुटाने की तैयारी की थी। लेकिन उनकी मां अवंती जाधव की सूझबूझ के कारण उसका सारा प्लान फेल हो गया। बातचीत शुरू होने पर कुलभूषण ने अपनी मां अवंती और पत्नी चेतना जाधव से कहना शुरू किया कि “मैं तो भारत का जासूस हूं और इन लोगों ने मुझे पकड़ लिया। अब ये तो होना ही था।” यह बात सुनकर कुलभूषण की मां ने कहा कि “लेकिन तुम ऐसी बात क्यों बोल रहे हो? तुम तो बिजनेस के सिलसिले में ईरान गए थे। हमें पता है कि तुम्हें वहीं से किडनैप किया गया।” मां की ये बात सुनते ही वहां मौजूद पाकिस्तानी अधिकारी बौखला गए थे।
पाकिस्तान ने रचा था पूरा जाल
दरअसल कुलभूषण जाधव के भारतीय जासूस होने का कोई सबूत अब तक पाकिस्तान नहीं दे पाया है। इंटरनेशनल कोर्ट ने भी इसी आधार पर कुलभूषण की फांसी की सज़ा पर रोक लगाई है। वहां की एजेंसियों ने तैयारी की थी कि मां और पत्नी अपनी बातचीत में कुछ न कुछ ऐसी बात जरूर बोल देंगी, जिसे वो अंतरराष्ट्रीय अदालत में पेश करके साबित कर सकेगा कि कुलभूषण वाकई में जासूस ही है। इसी खातिर पाकिस्तानी एजेंसियों ने संभवत: कुलभूषण को डरा-धमकाकर वही बोलने को कह रखा था जो उसे बताया जाए। पूरी बातचीत के दौरान पाकिस्तानी खुफिया अफसर लगातार नजर रखे हुए थे। कुलभूषण ने वही बोला जो बोलने की उसे इजाज़त थी, लेकिन मां ने जो जवाब दिया उससे पाकिस्तान का पूरा खेल नाकाम हो गया। मां ने कुलभूषण की बात को काटते हुए लगभग गुस्से में जवाब दिया कि तुम इस तरह की बात कैसे कर सकते हो।
दुष्प्रचार की कोशिश करेगा पाक
भारत यह मानकर चल रहा है कि मां-पत्नी से कुलभूषण की बातचीत की रिकॉर्डिंग को पाकिस्तान जरूर प्रोपोगेंडा के लिए इस्तेमाल करेगा। यह भी शक है कि इसके लिए रिकॉर्डिंग में काट-छांट भी की जा सकती है। हालांकि यह तय है कि जो बातचीत हुई है उसे वो इंटरनेशनल कोर्ट में पेश करके कुछ भी साबित नहीं कर सकेगा। यह जानकारी भी सामने आई है कि पाकिस्तान चाहता था कि सिर्फ पत्नी को कुलभूषण से मिलने दिया जाए क्योंकि वो बेहद भावुक थीं, जबकि मां ने कलेजा कड़ा कर रखा था और वो अधिकारियों से बातचीत में भी बहुत सूझबूझ से पेश आ रही थीं। लेकिन भारतीय अधिकारियों के दबाव के बाद पाकिस्तान को दोनों से मुलाकात कराने को मजबूर होना पड़ा। मां ने बेटे से एक बार मराठी मां बात करनी चाही, लेकिन पाकिस्तानी अफसरों ने इंटरकाम काट दिया।
मुलाकात के बाद निकली बौखलाहट
कुलभूषण से 40 मिनट की मुलाकात के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट खुलकर सामने आ गई। सारे अधिकारी इतने बौखलाए हुए थे मानो उनके हाथ से कोई बड़ा मौका चूक गया है। अवंती और चेतना जाधव जब पाकिस्तानी विदेश विभाग के दफ्तर से बाहर निकलीं तो पाकिस्तानी पत्रकारों ने उन पर चिल्लाना शुरू कर दिया। जबकि यह बात पहले से तय थी कि पत्रकारों से कोई मुलाकात नहीं होगी। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि पत्रकारों के उकसावे वाले सवालों पर मां या पत्नी अपना आपा खो बैठेंगे और कोई ऐसी बात कह देंगे जिसे वो अपने पक्ष में इस्तेमाल कर लेगा। इस दौरान इस्लामाबाद में भारत के उप उच्चायुक्त जेपी सिंह भी साथ में मौजूद थे। वो पाकिस्तान की इस चाल को समझ गए थे और उन्होंने कार आने में देरी पर नाराजगी भी जताई।
कुलभूषण को कुछ नहीं होगा, कैद में है पाक कर्नल!
भारत के पूर्व नौसैनिक कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने के मामले में अंदर की कहानी सामने आ रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने ये कदम बौखलाहट में उठाया है। उसका इरादा कुलभूषण जाधव को मारने का नहीं, बल्कि भारत की कैद में अपने जासूसों को छुड़ाने का है। इनमें पाकिस्तानी सेना का एक बड़ा अफसर भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना ने कुछ दिन पहले नेपाल बॉर्डर के पास से पाकिस्तानी फौज के लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद हबीब ज़हीर को उठा लिया था। ये पाकिस्तानी फौजी अफसर नेपाल में अपने कुछ जासूसों से मिलने आया था। भारतीय खुफिया एजेंसियों को समय रहते इसकी भनक लग गई और उन्होंने नेपाल बॉर्डर के पास एक जगह से इस पाकिस्तानी फौजी अफसर को धर-दबोचा। अपने टॉप जासूसी अफसर के पकड़े जाने से पाकिस्तानी फौज अंदर तक हिल गई। आनन-फानन में उन्होंने अपने कब्जे में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को सज़ा ए मौत का एलान कर डाला। ताकि बैकडोर से दोनों देशों के बीच सौदेबाजी हो सके और कुलभूषण जाधव के बदले में पाकिस्तान अपने फौजी अफसर को छुड़वा ले। यहां हम आपको बता दें कि भारत ने अभी तक इस बात की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है कि उसके कब्जे में कोई पाकिस्तानी अफसर है।
ब्लैकमेल करना चाहता है पाक
कुछ वक्त पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज ने बयान दिया था कि उनके पास कुलभूषण जाधव के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। पाकिस्तान उन्हें रॉ का जासूस बताता रहा है, जबकि भारत का कहना है कि कुलभूषण भारतीय नौसेना का जवान जरूर था। लेकिन वो नौकरी छोड़कर कारोबार करने लगा था। वो काम के सिलसिले में ही ईरान में था, जहां से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने उसे किडनैप कर लिया और यह दिखाया कि कुलदीप जाधव को उन्होंने बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया है। पाकिस्तान के मुताबिक जाधव को 3 मार्च 2016 को पकड़ा गया। पाकिस्तान को भरोसा हो चुका था कि कुलभूषण को सबूतों के अभाव में कोर्ट से सजा दिलाना लगभग नामुमकिन था, ऐसे में उसे सेना के कोर्ट मार्शल के जरिए फांसी की सजा सुना दी गई। जबकि जासूसों के ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में शिकायत करनी होती है। पाकिस्तान के पास कोई सबूत नहीं हैं, इसलिए वो अब तक कुलभूषण जाधव मामले की शिकायत करने से डरता रहा है। इस्लामाबाद में पीटीआई के संवाददाता रज़ा-उल-लश्कर ने ट्वीट करके यह शक जताया था कि कहीं कुलभूषण जाधव को अचानक फांसी की सजा सुनाने का ताल्लुक पाकिस्तानी फौजी अफसर की गुमशुदगी से तो नहीं है। नीचे आप वो ट्वीट
पाक फौजी अफसर किडनैप!
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के कई पत्रकार ये खुलकर लिख रहे हैं कि 6 अप्रैल को नेपाल के लुंबिनी से गायब हुए लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद हबीब भारतीय एजेंसियों के कब्जे में हैं। पाक सेना के रिटायर्ड अफसरों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में हबीब की गुमशुदगी की चर्चा हुई है। इसी के बाद यह बात मीडिया में सामने आ गई। लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब के परिवार वाले दावा कर रहे हैं कि वो कारोबार के सिलसिले में नेपाल गए थे। उनके मुताबिक नेपाल पहुंचने के बाद हबीब ने एक सेल्फी भेजी थी। साथ ही कहा था कि मैं सेफ हूं। हबीब ने लाहौर से काठमांडू के लिए उड़ान भरी थी। इसके बाद वो भारत से लगी बुद्ध जन्मस्थली लुबंनी गए। इसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है। पाकिस्तान और भारत में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय ने एक ट्वीट करके इस बात की पुष्टि की है कि लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद हबीब का अपहरण हो चुका है।
Indian RAW kidnaps retired Pakistan Army officer from Nepal. – https://t.co/Cr7rJ1rRyfpic.twitter.com/aI4OIqP8BR— Pakistan Defence (@defencepk) April 8, 2017
ये है पाकिस्तानी सेना का दावा
पाक सेना का दावा है कि लेफ्टनेंट कर्नल हबीब अक्टूबर 2014 को सेना की आर्टिलरी डिवीजन से रिटायर हुए थे और बाद में उन्होंने अपनी इंप्लायमेंट सर्च की फर्म खोल ली थी। पिछले हफ्ते गुरुवार को वो ओमान एयर की फ्लाइट से काठमांडू पहुंचे थे। वहां पर उन्हें जावेद अंसारी नाम के शख्स ने रिसीव किया और दोनों साथ में लुंबिनी चले गए। दावा किया जा रहा है कि लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब को लुंबिनी में यूएन की किसी जॉब का ऑफर था। इसके लिए उन्हें लंदन में रहने वाले मार्क थॉमसन नाम के किसी शख्स का फोन आया था। बाद की जांच में लंदन का वो नंबर भी फर्जी निकला। काठमांडू में पाकिस्तानी दूतावास के मुताबिक हबीब ने इस नौकरी के लिए वेबसाइट के जरिए अप्लाई किया था। उनके गायब होने के बाद वो वेबसाइट और उसका ट्विटर हैंडल भी बंद हो चुके हैं। जिन-जिन नंबरों से हबीब की बात हुई वो सारे बंद हैं। लेकिन यहां हम आपको बता दें कि कोई भी खुफिया एजेंसी आम तौर पर ऐसी कहानियां हर वक्त तैयार रखती है। हबीब किस मिशन पर थे और उन्हें किसने किडनैप किया, इस बारे में भारत की तरफ से अभी तक कुछ भी नहीं कहा गया है।
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