आपराधिक लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अस्पताल को पहले भी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों का इलाज नहीं करने को लेकर तीन बार नोटिस भेजे गए थे। अस्पताल को आदतन अपराधी करार देते हुए स्वास्य मंत्री ने कहा कि यहां अब नए मरीज भर्ती नहीं किए जाएंगे, अस्पताल चाहे तो पुराने मरीजों का उपचार जारी रख सकता है या उन्हें और कहीं शिफ्ट कर सकता है। उधर दिल्ली पुलिस ने अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजकर तीन दिन में अपना पक्ष रखने को कहा है।
अरविंद केजरीवाल की सरकार ने दिसम्बर 8 को मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने मीडियाकर्मियों को इसकी जानकारी दी. मैक्स हॉस्पिटल के शालीमार इकाई का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से शुक्रवार को रद्द कर दिया गया. शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में दो नवजात शिशुओं को मृत घोषित कर दिया गया था. नवजात शिशु को मृत घोषित करने के बाद भी बच्चा जिन्दा था. गुरुवार को उसकी मृत्यु पीतमपुरा के एक नर्सिंग होम में हो गई थी.
दिल्ली सरकार ने गठित की थी जांच टीम
अरविंद केजरीवाल सरकार ने मैक्स अस्पताल के इस कारनामे के बाद जांच टीम का गठन किया था. दिल्ली सरकार द्वारा गठित जांच टीम ने अस्पताल प्रशासन को नवजात शिशु की देखभाल के पैमाने का पालन नहीं करने का दोषी पाया था. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि शालीमार बाग़ स्थित मैक्स अस्पताल के लाइसेंस को रद्द कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि नवजात शिशु की मृत्यु मामले में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई थी और इसे किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
30 नवंबर को हुई थी घटना
बीते 30 नवंबर को आशीष कुमार नाम के एक युवक की पत्नी ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था. एक लड़का और एक लड़की का जन्म मैक्स अस्पताल के शालीमार बाग स्थित इकाई में हुआ था. दोनों बच्चों को अस्पताल प्रशासन ने मृत घोषित करके पॉलिथीन बैग में सौंप दिया था. अस्पताल प्रशासन द्वारा पॉलिथीन बैग में बच्चों को ले जाने के बाद परिजनों ने बच्चों को अपने हाथों में लिया तो लगा कि बच्चा जीवित है. बच्चे को जब दाह संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था उसी वक्त परिजनों को बच्चे के जीवित होने का एहसास हुआ. तत्काल परिजनों ने पीतमपुरा के एक नर्सिंग होम में नवजात को भर्ती कराया. इस दौरान बच्चे की मां मैक्स अस्पताल में ही थी. पीतमपुरा के जिस नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था वहां के निदेशक डॉ संदीप गुप्ता ने बताया कि पहले दिन से ही वे हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे और लाख प्रयासों के बावजूद बच्चे को नहीं बचाया जा सका. उन्होंने कहा कि 30 नवंबर को जब उनके पास बच्चे को लाया गया था तो उसी वक्त बच्चे की स्थिति काफी खराब थी और बच्चे को किसी तरह जिंदा रखा गया था.
मैक्स अस्पताल की घोर लापरवाही
मामले में मैक्स अस्पताल की लापरवाही उजागर हुई. मैक्स अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों को दोषी मानने से इनकार कर दिया था और कर्मियों पर कार्रवाई की बजाए मैक्स अस्पताल शोक ने संदेश जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ ली थी. बच्चों के पिता ने मैक्स अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा था वे अपने बच्चे को तब तक नहीं लेंगे जब तक दोनों डाक्टरों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. आशीष कुमार ने अपनी पत्नी को भी न्याय मिलने तक अस्पताल से डिस्चार्ज करने से इंकार कर दिया है.
दिल्ली सरकार ने जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह कार्रवाई की. इससे पहले सत्येंद्र जैन ने कहा था कि प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ गलतियां पाई गईं थीं. दूसरी तरफ मैक्स अस्पताल में मृत घोषित नवजात के दम तोड़ने के बाद परिवार वाले अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए थे.इससे पहले जीवित बच्चे को मृत बताने वाले मामले में 3 सदस्यीय डॉक्टरों के पैनल ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. मैक्स हॉस्पिटल में हुई इस घटना के प्रारंभिक रिपोर्ट में पता चला कि शिशु जीवित था या नहीं इसकी जांच के लिए ईसीजी ट्रेसिंग नहीं की गई और नवजात के शरीर को लिखित निर्देश दिए बगैर परिवार वालों को सौंप दिया गया.
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