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फिल्म जगत के खूबसूरत नायक शशि कपूर

ShashiKapoor
आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक 
अभी अभी बॉलीवुड इंडस्ट्री से एक बड़ी ख़बर सामने आई है। बॉलीवुड के  मशहुर 79 वर्षीयअभिनेता शशि कपूर का आज दिल का दौरा पर से निधन हो गया।  जिसको लेकर देश में शोक की लहर है। शशि कपूर  निधन से कपूर वंश के एक युग का अंत हो गया है। 
हिंदी सिनेमा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले शशि कपूर पृथ्वीराज कपूर के खानदान में 18 मार्च 1938 को जन्मे थे. आज चार दिसंबर 2017 को उनके निधन ने भारतीय फिल्म जगत शोक लहर में डूब गया है. शशि पृथ्वीराज कपूर के चारों बच्चों में सबसे छोटे थे. उनकी मां का नाम रामशरणी कपूर था.
अपने बीमारी के कारण पिछले 3 हफ्ते से अस्‍पताल में भर्ती थे।  अभिनेता शशि कपूर का जन्‍म 1938 में हुआ था। दरअसल, अभिनेता शशि कपूर को 2014 में चेस्‍ट इंफेक्‍शन हुआ था और उनकी बायपास सर्जरी भी की गई थी। बॉलीवुड में 160 से भी ज्‍यादा फिल्‍मों में नजर आ चके हैं और साथ ही उन्हें 3 बार राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार दिया जा चुका है। 
शशि कपूर का निधन
उनके भतीजे ऋषि कपूर दिल्ली से फिल्म की शूटिंग छोड़कर मुंबई रवाना हो गए हैं। बाकी पूरा परिवार भी एक साथ जुट रहा है। शशि के निधन की खबर ट्विटर पर उनके भतीजे और एक्टर मोहित मारवाह ने शेयर की। उन्होंने लिखा, ‘मेरे सबसे पसंदीदा एक्टर शशि कपूर नहीं रहे।’
शशि कपूर को उनके दिनों में बॉलीवुड का सबसे खूबसूरत एक्टर कहा जाता था। फिल्मफेयर अवॉर्ड के दौरान कई बार उनके लिए यह शब्द इस्तेमाल किए जाते थे। 
शशि कपूर के बच्चेशशि कपूर को दादा सा‍हब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वह अपने दौर के उन चुनिंदा स्टार्स में हैं, जिन्होंने हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी फिल्में भी की थीं। पृथ्‍वीराज कपूर के छोटे बेटे शशि को साल 2011 में भारत सरकार ने पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा था। शशि अपने पीछे तीन बच्चों कुणाल कपूर, संजना कपूर और करण कपूर का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
एक्टिंग की बात करें, तो शशि कपूर के बच्चे उनकी विरासत को आगे नहीं ले जा सके, लेकिन कला के क्षेत्र में नए कीर्तिमान जरूर रचे।
शशि कपूर के बेटे करण कपूर भले ही स्टार किड थे, लेकिन उन्हें शशि कपूर जैसा स्टारडम कभी नसीब नहीं हुआ। दर्शकों ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया। श्‍याम बेनेगल जैसे निर्देशक की फिल्म जुनून में काम करने के बावजूद करण कपूर को कामयाबी नहीं मिली।
फिर सल्तनत और लोहा जैसी मसाला और फाइटिंग फिल्मों में भी करण ने काम किया। इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर ठीक कमाई की। लेकिन करण को किसी ने नहीं पूछा। उनकी एक्टिंग लोगों का ध्‍यान आकर्षित नहीं कर सकी।
आखिरकार करण ने फिल्मी दुनिया छोड़ी और अपने शौक को जिन्दगी बना लिया। उन्होंने फोटोग्राफी की दुनिया में कदम रखा। धीरे-धीरे करके उन्हें सफलता मिलने लगी। आज करण दुनिया के चुनिंदा फोटोग्राफर्स में एक हैं। करण की खींची हुई तस्वीरें दुनियाभर की प्रदर्शनियों में लगाई जाती हैं।
टाइम एंड टाइड के नाम से करन ने पिछले साल मुंबई में प्रदर्शनी लगाई। इस साल ये प्रदर्शनी बंगलुरु, नई दिल्ली, अहमदाबाद और जयपुर में लगाई जाएगी।
शशि कपूर की बेटी संजना कपूर ने भी फिल्मी दुनिया में दस्तक दी। हालांकि वहां उनका मन नहीं रमा। लेकिन थिएटर उनके दिल में बस गया। उन्होंने थिएटर को ही अपना टशन बना लिया। संजना की मां जेनिफर केंडेल ब्रिटिश मूल की थीं। संजना ने मुंबई में साल 1993 से साल 2012 तक पृथ्वी थिएटर की जिम्मेदारी भी संभाली। यह थिएटर उनके दादा पृथ्‍वीराज कपूर की याद में बनाया गया था।
20 साल की उम्र में ही कर ली थी शादी
आकर्षक व्यक्तित्व वाले शशि कपूर के बचपन का नाम बलबीर राज कपूर था. बचपन से ही अभिनय के शौकीन शशि स्कूल में नाटकों में हिस्सा लेना चाहते थे. उनकी यह इच्छा वहां तो कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उन्हें यह मौका अपने पिता के पृथ्वी थियेटर्स में मिला. शशि ने एक्टिंग में अपना करियर 1944 में अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर के नाटक शकुंतला से शुरू किया था. उन्होंने फिल्मों में भी अपने एक्टिंग की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में ही की थी.  शादी के मामले में भी वह अलग ही निकले. पृथ्वी थिएटर में काम करने के दौरान वह भारत यात्रा पर आये गोदफ्रे कैंडल के थिएटर ग्रुप शेक्सपियेराना  में शामिल हो गये. थियेटर ग्रुप के साथ काम करते हुये उन्होंने दुनियाभर की यात्राएं कीं और गोदफ्रे की बेटी जेनिफर के साथ कई नाटकों में काम किया. इसी बीच उनका और जेनिफर का प्यार परवान चढ़ा और 20 साल की उम्र में ही उन्होंने खुद से तीन साल बड़ी जेनिफर से शादी कर ली. कपूर खानदान में इस तरह की यह पहली शादी थी.
अमेरिकी और ब्रिटिश फिल्मों में काम करने वाले पहले नेता
शशि कपूर ने श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, गोविंद निहलानी, गिरीश कर्नाड जैसे देश के दिग्गज फिल्मकारों के निर्देशन में जूनून,  कलयुग, 36 चौरंगी लेन,  उत्सव जैसी फिल्मों बनायी लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर तो सफल नहीं हुईं, लेकिन इन्हें आलोचकों ने काफी सराहा और ये फिल्में आज भी मील का पत्थर मानी जाती हैं.  शशि कपूर भारत के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में भी काम किया. इनमें हाउसहोल्डर, शेक्सपियर वाला, बॉम्बे टॉकीज  तथा हीट एंड डस्ट जैसी फिल्में शामिल हैं.
2011 में मिला था पद्मभूषण
अपनी फिल्म जुनून के लिए शशि कपूर को बतौर निर्माता राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. न्यू डेल्ही टाइम्स में अभिनय के लिये उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2011 में उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया. इसके अलावा शशि कपूर को फिल्म जब जब फूल खिले के लिये बेस्ट एक्टर,  बांबे जर्नलिस्ट एशोसिएशन अवॉर्ड और फिल्म मुहाफिज  के लिये स्पेशल ज्यूरी का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था.  बॉलीवुड से वह लगभग संन्यास ले चुके थे. वर्ष 1998  में उनकी फिल्म जिन्ना को उनके सिने करियर की आखिरी फिल्म मानी जाती है.

शशि के कारण अमिताभ को मिला था स्टारडम

अमिताभ आज जिस मुकाम पर हैं, उसमें शशि कपूर का योगदान अहम रहा है। अमिताभ ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती सात फिल्में फ्लॉप होने के बाद वह अपने माता-पिता के पास दिल्ली जा रहे थे, तभी मनोज कुमार ने उन्हें फिल्म रोटी कपड़ा और मकान में ले लिया। इसी दौरान उनकी मुलाकात शशि कपूर से हुई और यही से उनके जीवन में नया मोड़ आ गया।
अपने एक ब्लॉग में अमिताभ ने खुलासा किया था कि साल 1975 में दीवार के रिलीज होने के साथ के बाद से वह हर जन्मदिन पर शशि कपूर को फोन कर उन्हें बधाई देते हैं। यहां तक कि जब 1984 में शशि की पत्नी की मौत हो गई तो उन्होंने लोगों से घुलना-मिलना बिल्कुल बंद कर दिया था लेकिन फिर भी वह अमिताभ से बात जरूर करते थे।
उनके काफी प्रसिद्ध डयलोग मेरे पास माँ हैं को दुनिया भर में सराहना मिली थी. वे ‘धर्म पुत्र’ से बतौर हीरो बड़े पर्दे पर आए थे. फ़िल्म ‘चोरी मेरा काम’, ‘फांसी’, ‘शंकर दादा’, ‘दीवार’, ‘त्रिशूल’, ‘मुकद्दर’, ‘पाखंडी’, ‘कभी-कभी’ और ‘जब जब फूल खिले’ ऐसे  160 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है.
नाटक और फिल्मों की शुरुआत कब की?
- शशि कपूर ने पृथ्वी थियटर के नाटक 'शंकुतला' से अपने करियर की शुरुआत की। उनकी पहली फिल्म आग थी। इसे उनके बड़े भाई राज कपूर ने बनाई थी। आवारा फिल्म में शशि ने अपने बड़े भाई राज कपूर के बचपन का रोल किया था।
- फिल्मों में उनकी एंट्री यश चोपड़ा की फिल्म धर्मपुत्र से हुई थी। शशि ने करीब 160 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया था।
प्राण के साथ 9 तो अमिताभ बच्चन के साथ कींं 12 फिल्में
- 1970 से 1980 के बीच शशि कपूर ने प्राण के साथ 9 फिल्में (बिरादरी, चोरी मेरा काम, फांसी, शंकर दादा, चक्कर पे चक्कर, राहू केतु और मान गए उस्ताद) कीं।
- इसी तरह 1974 से 1991 के बीच अमिताभ बच्चन के साथ वे 12 फिल्मों (रोटी, कपड़ा और मकान, दीवार, कभी-कभी, ईमान धरम, त्रिशूल, काला पत्थर, सुहाग, दो और दो पांच, शान, सिलसिला, नमक हलाल, और अकेला) में बतौर को-स्टार काम किया।
मेरे पास मां है... डायलॉग से मिली शशि को नई पहचान
- यह डायलॉग सुपरहिट फिल्म दीवार का है। इस फिल्म वे रवि वर्मा के रोल में थे। एक सीन में विजय यानी अमिताभ बच्चन कहते हैं- "मेरे पास बैंक-बैलेंस है, बंगला है गाड़ी है, तु्म्हारे पास क्या है...? जवाब में रवि यानी शशि कहते हैं- "मेरे पास मां है।"
मोदी से सहवाग तक इन हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- शशि कपूर का हुनर फिल्मों और थिएटर दोनों में देखा गया। थिएटर को भी वो प्रमोट करते थे। आने वाली पीढ़ियां उनके शानदार अभिनय को याद रखेंगी। उनके निधन से दुखी हूं और शोक संतप्त परिवार के लिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।
- प्रेसिडेंट रामनाथ कोविंद ने शशि के निधन पर शोक जताते हुए कहा- भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों के लिए सुप्रसिद्ध, अभिनेता शशि कपूर के निधन के बारे में जान कर बहुत दुख हुआ। सार्थक सिनेमा को उनका योगदान और भारतीय रंगमंच को शक्ति देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हमेशा याद की जाएगी। उनके परिवार के प्रति मेरी शोक संवेदनाएं।
- कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल @INCIndia के जरिए शशि के निधन पर शोक जताया। कहा- उनके निधन से इंडियन सिनेमा में एक खाली स्थान आ गया है। उनके निधन से हम दुखी हैं।

- क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने कहा- उनके डायलॉग याद रहेंगे। आप आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। उनके दोस्तों और परिवार के प्रति संवेदनाएं। 
- पूनम ढिल्लन ने कहा- मुंबई पहुंचते ही अपने को-एक्टर और मेरी पहली फिल्म के हीरो के निधन की खबर सुनी। वो जेंटलमैन, हैंडसम और बहुत अच्छे इंसान थे। कुछ शब्दों में उनकी शख्सियत को बयान करना आसान नहीं है। उनकी कमी पूरी करना नामुमकिन है।

संजय खान ने क्या कहा?

- संजय खान- हम दोस्त थे। ‘दिल ने पुकारा’ में साथ काम किया। वो इंडस्ट्री के सबसे शरीफ लोगों में से एक थे। मैं उनके परिवार के प्रति संवेदना जताना चाहता हूं। वो इंडस्ट्री में एक मार्क छोड़कर गए। वो सेट पर हमेशा मजाक किया करते थे। वो पियानो भी बहुत अच्छा बजाते थे। उनका ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ गजब का था। खास बात ये है कि मेरे बड़े भाई फिरोज खान के भी शशि से बहुत अच्छे रिश्ते थे।

His contribution to this industry will be remembered. May his soul rest in peace. Shashi Kapoor ji you will be missed always. 🙏🏻




 ...the most charming and enigmatic actor ever...a gentleman movie star! His legacy in film and theatre is exceptional...thoughts and prayers with the family....his work will always live on...

Thank you for your body of work both as an actor and as a producer. Rest in peace, Sir. 




As the skies burst and it begins to rain in this part of Mumbai. My heart is filled with deep gratitude. Thank you Sir ! You touched our lives only the way you could have . 🙏🙏🙏

RIP Shashi Kapoor. The charming man, the brave producer, the lovely actor, my neighbour is no more.




One of my favourites passed away today. A handsome charming gentleman who entertained us for 40+ years. His endearing smile will be embedded in my memories.
RIP 

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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