
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
नरेन्द्र मोदी के लिए अपशब्द बोलना कोई नई बात नहीं। पता नहीं किस मिट्टी का बना है मोदी। इतनी गालियाँ पड़ रही है, फिर भी न गुजरात मुख्यमंत्री पद छोड़ा, और प्रधानमंत्री बना बैठा है। भारत के हर कोने से गालियां ही गालियाँ मिल रही है। लेकिन फिर लोग प्रशंसा कर रहे हैं। क्यों?
ये गुजरात मुख्यमंत्री से लेकर भारत का प्रधानमन्त्री बना नरेन्द्र मोदी जो गालियाँ खा रहा है, इसकी कुण्डली में लिखा है। जिसे 1555 में ही फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस ने बता दिया था। जिस व्यक्ति ने भी इस ज्योतिष को गम्भीरता से पढ़ा होगा, उन्हें अच्छी तरह ज्ञात होगा। उस महान ज्योतिष ने लिखा था, "2014 में भारत में चुनाव समुद्र तट से अधेड़ आयु के सख्त प्रशासक के नेतृत्व में नयी पार्टी सत्ता में आएगी। लोग उसके लिए अनेक अपशब्दों का प्रयोग करने वालों की कमी नहीं होगी, विपरीत इसके इस आदमी के चाहने वालों की भी कमी नहीं होगी। भारत को नयी ऊचाइयों पर लेकर जाएगा। विश्व में हिंदुत्व फैलाएगा। ...." आदि आदि। और जो राहुल गाँधी या प्रियंका के प्रधानमंत्री बनने के स्वप्न देख रहे हैं, उसे मुंगेरी लाल के सपने ही कहा जाएगा, क्योकि इस ज्योतिष ने राजीव गाँधी को इस परिवार से आखरी शासक बताया है। अब यही "मौत का सौदागर" और "नीच" 2025 तक प्रधानमंत्री रहने वाला है। नॉस्त्रेदमस पढ़ लो भाई ! सब समझ में आ जाएगा। भारत को विश्व गुरु बनाना है, तो मोदी को अपशब्द कहने की बजाए देश निर्माण में साथ दो।
देश में 1947 के विभाजन के पूर्व की परिस्थितियाँ बन चुकी हैं, देश को अनेक टुकड़ों में बाँटने का राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र चरम पर है ---
नरेंद्र मोदी और बीजेपी को दिया जाने वाला एक एक वोट, देश की एकता-अखण्डता को बनाये रखने का अंतिम प्रयास है।
नरेंद्र मोदी, बीजेपी के खिलाफ जाति, वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय को प्राथमिकता देते हुए, विरोधी एक एक वोट भारत माता के सीने में एक एक कील ठोकने के समान है।
अपने आस पास कौन भारत माता के सीने में कील ठोक रहा है ? और कौन मातृ भूमि के घावों पर मरहम लगा रहा है इसकी पहचान राष्ट्रवादी, सनातनी हिंदुओं को होनी ही चाहिए क्योंकि वो कील आपके सीने में ठोकी जा रही है।
कोई चुनाव जो अब हो रहा है वो विपक्षी दलों के अस्तित्व की लड़ाई है।
बीजेपी के लिए भी ये इस देश में हिंदुओं के अस्तित्व की लड़ाई है ।
गुजरात के चुनाव का परिणाम 2019 के लोकसभा चुनावों की दशा और दिशा तय करेगा।
अतः ग्राम पंचायत, शहरी निकाय, विधान सभा, या फिर लोक सभा का कोई चुनाव सभी मे, पूरी ताकत से संघर्ष करना, बीजेपी , राष्ट्रवादी, सनातनी हिंदुओं के लिए अनिवार्य आवश्यकता है।
क्योंकि 1947 के विभाजन के पूर्व की परिस्थितियां सम्पूर्ण भारत में बन चुकी हैं।धर्म,जाति, वर्ग, भाषा, प्रांत, के नाम पर राजनैतिक-- सामाजिक विद्वेष का जहर जन जन के मन मे गहराई तक प्रवेश कर चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीच कहने पर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ना सिर्फ विरोधियों के निशाने पर आ गए बल्कि कांग्रेस ने भी उन पर बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की। पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया। इससे पहले पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था लेकिन देर रात होते-होते पार्टी ने बड़ी कार्रवाई कर दी। दरअसल मणिशंकर अय्यर ने गुरुवार (07 दिसंबर) को पीएम मोदी को नीच कहा था। अय्यर ने पीएम मोदी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देने के दौरान यह टिप्पणी की थी जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बाबा अंबेडकर को नहीं जानते हैं, बाबा भोले को जानते हैं।
ऐसा दूसरी बार हुआ है जब कांग्रेस के नेताओं ने देश के प्रधानमंत्री के सम्मान पर हमला किया है। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी को नीच कहकर अपने लिए शामत बुला ली है। यही वजह है कि विरोधियों के निशाने पर आए मणिशंकर अय्यर पर उनकी ही पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है।
प्रियंका गांधी ने भी किया था आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल
बता दें कि इससे पहले पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था लेकिन देर रात होते-होते पार्टी ने बड़ी कार्रवाई कर दी। दरअसल मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को नीच कहा था। अय्यर ने पीएम मोदी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देने के दौरान यह टिप्पणी की थी जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बाबा अंबेडकर को नहीं जानते हैं, बाबा भोले को जानते हैं। हालांकि नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल प्रियंका गांधी भी कर चुकी हैं।
मोदी-प्रियंका की कॉन्ट्रोवर्सी का 2014 के चुनाव पर क्या असर पड़ा था?
मोदी-प्रियंका गांधी के बीच हुई इस कॉन्ट्रोवर्सी के बाद देश में 43 ऐसी सीटों पर वोट डाले गए थे, जिन पर जाति के बयान का असर साफ नजर आया। इनमें से 31 बीजेपी ने जीत लीं।
2014 में जुमलेबाजी के बाद कहां, कितना असर
| राज्य/कितनी सीटें | कितनी सीटों पर वोटिंग | BJP को कितनी मिलीं | 2009 में कितनी मिली थीं |
| उत्तरप्रदेश/80 | 24 | 22 | 2 |
| बिहार/40 | 8 | 6 | 0 |
| प. बंगाल/42 | 9 | 1 | 0 |
| उत्तराखंड/5 | 2 | 2 | 0 |
| टोटल | 43 | 31 | 2 |
मामला साल 2014 का है, जब अमेठी में प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी ने मोदी पर अपने पिता का अपमान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने नरेंद्र मोदी पर निचले स्तर की राजनीति करने का आरोप लगाया था। इसपर उनके खिलाफ भाजपा नेताओं ने शिकायत दर्ज कराई थी। बता दें कि इसका जवाब तब मोदी ने भी दिया था। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि सामाजिक रूप से निचले वर्ग से आया हूं इसलिए मेरी राजनीति उन लोगों के लिए ‘नीच राजनीति’ ही होगी।
राहुल गांधी ने लगाई अपने ही नेता को लताड़
गौरतलब है कि बाद में राहुल गांधी से लताड़ मिलने पर मणिशंकर अय्यर ने माफी मांग ली। अपनी सफाई में दलील दी कि हिंदी उनकी भाषा नहीं है। अंग्रेजी में लॉ शब्द सोचकर हिंदी में नीच शब्द का इस्तेमाल किया था।
मणिशंकर के मुताबिक, अगर हिंदी में लो का मतलब ‘लो बॉर्न’ (नीची जाति में जन्म लेने वाला) होता है तो वह माफी मांगते हैं। अय्यर ने यह भी कहा कि उन्होंने काफी वक्त में हिंदी सीखी है और इसी नासमझी में एक बार उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के लिए नालायक शब्द का इस्तेमाल कर दिया था।
मणिशंकर अय्यर पार्टी से सस्पेंड
दरअसल, दिल्ली में अंबेडकर प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित एक भवन के उद्घाटन समारोह में पीएम ने जवाहर लाल नेहरू पर भी डा. भीमराव अंबेडकर के साथ पक्षपात करने और उनकी भूमिका को कम करके दिखाने का आरोप लगाया था। इस पर जब पत्रकारों ने अय्यर से प्रतिक्रिया चाही तो उन्होंने अपनी बात में प्रधानमंत्री मोदी का नाम लिए बिना उन्हें नीच कहा। चुनावी माहौल में मौका पाते ही बीजेपी ने इस बयान को हाथों हाथ ले लिया और चौतरफा कांग्रेस और मणिशंकर अय्यर पर हमला बोल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इसे गुजराती अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि हां वो नीच जाति में पैदा हुए हैं मगर ऊंचे काम किए हैं।
हालांकि, बाद में राहुल गांधी से लताड़ मिलने पर मणिशंकर अय्यर ने माफी मांग ली। उन्होंने अपनी सफाई में दलील दी कि हिंदी उनकी भाषा नहीं है। अंग्रेजी में Low शब्द सोचकर हिंदी में नीच शब्द का इस्तेमाल किया था। मणिशंकर के मुताबिक, अगर हिंदी में लो का मतलब ‘लो बॉर्न’ (नीची जाति में जन्म लेने वाला) होता है तो वह माफी मांगते हैं। अय्यर ने यह भी कहा कि उन्होंने काफी वक्त में हिंदी सीखी है और इसी नासमझी में एक बार उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के लिए नालायक शब्द का इस्तेमाल कर दिया था।
मोदी के विरुद्ध विवादित टिप्णियाँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मणिशंकर अय्यर के विवादित बयान की चर्चा पूरे सियासी गलियारे में है. अय्यर के बयान से कांग्रेस को भी किनारा करते हुए उन्हें पार्टी से निलंबित करना पड़ा. निलंबन से पहले राहुल गांधी ने ट्वीट के ज़रिये अय्यर से माफी मांगने को कहा. अय्यर ने माफ़ी तो मांगी लेकिन वे अपना कांग्रेस से निलंबन नहीं बचा पाए.
अय्यर पहले भी मोदी के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर चुके हैं. तब उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के समय मोदी को ‘चायवाला’ कहा था. इस गेंद को नरेन्द्र मोदी ने ऐसा लपका कि सीधे पीएम की कुर्सी पर आसीन हो गए. हालांकि अय्यर पहले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ विवादित बयान दिया हो, बल्कि नरेन्द्र मोदी के खिलाफ हमले करने वालों की लंबी लिस्ट है.
2007 के गुजरात चुनाव में सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा था. इसके बाद 2014 में कर्नाटक के गुलबर्गा में एक सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था, ‘आप ऐसे लोगों को स्वीकार नहीं करें, जो जहर की खेती करते हैं.’
2. बीके हरिप्रसाद
साल 2009 में कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने नरेंद्र मोदी को गंदी नाली का कीड़ा कहा था. गुजरात की रैलियों में नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए इसका जिक्र किया.
3. सोमा पटेल
2012 में नरेंद्र मोदी पर गुजरात के सुरेंद्रनगर से कांग्रेस नेता सोमा पटेल ने जातिगत टिप्पणी की थी.
4. अर्जुन मोडवाडिया
अक्टूबर 2012 में गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोडवाडिया ने चुनावी रैली में मोदी की तुलना बंदर से की थी. मोडवाडिया ने कहा था, नरेंद्र मोदी रेबीज से पीड़ित हैं.
5. जयराम रमेश
साल 2013 में जयराम रमेश ने मोदी की तुलना भस्मासुर से की थी. रमेश ने कहा था कि मोदी ही आडवाणी को खा गये.
6. मणिशंकर अय्यर
मणिशंकर अय्यर ने 2014 के लोकसभा बाद से अहम मौकों पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ हमले किए हैं. उनके इन बयानों ने भाजपा को कांग्रेस के खिलाफ खुलकर खेलने का मौका दिया है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मणिशंकर ने मोदी को चायवाला कहा था. वहीँ इस बार उन्होंने मोदी को ‘नीच किस्म का आदमी’ बता डाला और फिर माफी मांगनी पड़ी. उन्होंने कहा था, "21वीं सदी में नरेंद्र मोदी कभी भी देश के प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे, नहीं बनेंगे, नहीं बनेंगे। यहां आकर चाय बांटना चाहें तो हम उनके लिए जगह दे सकते हैं।''
7. आनंद शर्मा
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने नरेंद्र मोदी को अस्वस्थ मानसिकता से पीड़ित व्यक्ति कहा था. शर्मा ने कहा था कि मोदी को लगता है, उनके आने से पहले गुजरात और देश में कुछ नहीं हुआ.
8. इमरान मसूद
साल 2014 में नरेंद्र मोदी के लिए सहारनपुर से कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने विवादित शब्दों का प्रयोग किया था.
9. दिग्विजय सिंह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट में विवादित शब्दों का प्रयोग किया था. मोदी की तस्वीर के साथ दिग्विजय ने तीन लाइनें लिखीं थी, जिनपर बवाल मच गया था.
10. प्रमोद तिवारी
नोटबंदी पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने नरेंद्र मोदी को तानाशाह कह डाला था. जिसके बाद उनके इस बयान पर बवाल हुआ था.
11. यूथ कांग्रेस का ट्वीट
यूथ कांग्रेस की ऑन लाइन मैगजीन के एक ट्वीट ने भूचाल ला दिया था. इस ट्वीट में मोदी के चाय बेचने को लेकर यूथ कांग्रेस ने तंज कसा था.
12. राहुल गांधी
यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोदी को लेकर विवादित बयान दिया था. उन्होंने ‘जवानों के खून की दलाली’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया था. जिसके बाद पूरे चुनाव भर ये मुद्दा हावी रहा था.
13. मनीष तिवारी
नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर इसी साल 2017 में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने विवादित ट्वीट किया था. ट्वीट में उन्होंने आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था.
14. राशिद अल्वी
अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार नरेंद्र मोदी को कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने ‘मोस्ट स्टुपिड पीएम’ बताया था.
15. रेणुका चौधरी
नरेंद्र मोदी को कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने वायरस बताया था.


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