गुजरात में मौजूदा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को ही फिर से सीएम की कुर्सी सौंप दे दी गई है. हालांकि, गुजरात चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बहुत बेहतर नहीं होने के कारण रूपाणी की जगह किसी और नेता को मुख्यमंत्री बनाने की चर्चाएं थी लेकिन विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से विजय रूपाणी के नाम पर मुहर लगाई गई. नितिन पटेल को डिप्टी सीएम चुना गया है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और सरोज पांडे पर्यवेक्षक के तौर पर गुजरात गए थे. भाजपा ने अपने नवनिर्वाचित विधायकों की गांधीनगर में आज बैठक बुलाई थी. इस दौरान प्रदेश भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव रहे.
जिसका राज उसकी दुहाई. यह कहावत गुजरात में चरितार्थ होती दिख रही है. राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उनके खेमे में विधायकों के जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. लुनावड़ा से निर्दलीय विधायक रतन सिंह ने अपना समर्थन बीजेपी को देने की घोषणा की है. इसके साथ ही कई अन्य विधायक भी बीजेपी में जाने के इच्छुक दिखायी दे रहे हैं.
99 के चक्कर से बाहर हुई बीजेपी
गुजरात चुनाव के बाद भाजपा गुजरात में 99 के आकड़े से अब तीन अंको के आकंड़ो पर पहुंच जायेगी. गुजरात के लुनावड़ा क्षेत्र के विधायक रतन सिंह ने भाजपा को समर्थन कर दिया है. विधायक ने राज्यपाल को पत्र लिखकर भाजपा को सनर्थन देने का दावा किया है. इसके साथ ही भाजपा 100 के आकंड़े पर पहुंच जायेगी.
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम की हो गयी घोषणा
पिछले कई दिनों से चल रहे मंथन के बाद आखिरकार गुजरात के मुख्यमंत्री के लिए विजय रूपाणी के नाम पर शुक्रवार की शाम को मुहर लग गई है. गांधीनगर में पार्टी कार्यालय में पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई बैठक में विजय रूपाणी के नाम पर सहमति बनी है. वहीं उपमुख्यमंत्री के रूप में नितिन पटेल को चुना गया है. इससे पहले तक कयास लगाये जा रहे थे कि भाजपा गुजरात में भी यूपी का फॉर्मूला लागू करने पर विचार कर रही है. दो उपमुख्यमंत्री होने की संभावना जताई जा रही थी. गांधीनगर स्थित पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में पर्यवेक्षक अरुण जेटली और सरोज पांडे के साथ विजय रूपाणी भी मौजूद थे. गौरतलब है कि दो उप मुख्यमंत्रियों में एक चेहरा गणपत वसावा का माना जा रहा था. गणपत वसावा आदिवासी नेता हैं और पार्टी के लिये लंबे समय से काम करते रहे हैं.
यूपी में हैं दो उप मुख्यमंत्री
मालूम हो कि यूपी विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के साथ दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या के रूप में दो उप मुख्यमंत्री बनाये हैं. पार्टी की रणनीति ओबीसी समुदाय के साथ ब्राह्मण समुदाय को भी संतुष्ट करने की रही.
मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा के बाद प्रतिक्रिया देते हुए रूपाणी ने कहा, "गुजरात ले लोगों ने हमें जनादेश दिया है. यह बहुत बड़ी जीत है. हम पर 27 वर्षों तक भरोसा बनाए रखा." उधर,
उपमुख्यमंत्री बनने वाले नितिन पटेल ने कहा, "मैं गुजरात की जनता को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं और विजय भाई अपने पार्टी के सदस्यों के सहयोग से गुजरात के लोगों की मदद पहले की तरह करते रहेंगे."
इससे पहले उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और अन्य मंत्रियों के साथ रुपाणी ने गांधीनगर में राज्यपाल से मिलकर मंत्रिमंडल का इस्तीफा सौंप दिया था. हालांकि नई सरकार के गठन तक वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. हाल में हुए 182 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 99, कांग्रेस को 77 और छह सीटें अन्य ने जीतीं.
उधर, शानदार बहुमत के साथ हिमाचल प्रदेश में सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा में राज्य के मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर माथापच्ची जारी है. केंद्रीय पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमण और नरेन्द्र सिंह तोमर आरएसएस नेताओं के साथ शिमला बैठक कर रहे हैं, ताकि एक नाम पर सहमति बन सके. बैठक के बाहर धूमल और जयराम ठाकुर के समर्थकों के बीच नारेबाजी भी हुई.
सूत्रों के अनुसार, पांच बार के विधायक जयराम ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है. हालांकि पार्टी के सामने विकट स्थिति यह है कि धूमल गुट जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाए जाने से सहमत नहीं है. ऐसे में पार्टी धूमल को मनाने में जुटी हुई है. सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी धूमल को राज्यसभा भेज सकती है या उन्हें राज्यपाल भी बनाया जा सकता है. इसी बीच जयराम ठाकुर के धूमल से भी मुलाकात की बात सामने आ रही है.
हिमाचल की कमान मिली जयराम ठाकुर को
इससे पहले खबर आई थी कि गुजरात में मुख्यमंत्री रूपाणी दौड़ में सबसे आगे हैं. उन्हें केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया से टक्कर मिल रही है. वहीं हिमाचल में तस्वीर थोड़ी साफ होती जा रही है. सूत्रों के मुताबिक जयराम ठाकुर को अब धूमल का भी आशीर्वाद मिल गया.
वाजपेयी के जन्म दिन पर हो सकता है शपथ ग्रहण समारोह
सूत्रों के मुताबिक गुजरात के नये मुख्यमंत्री का शपथ-ग्रहण 25 दिसंबर को हो सकता है, क्योंकि इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है. साल 2012 के चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी ने चौथी बार 25 दिसंबर को ही शपथ ग्रहण किया था. शपथ ग्रहण समारोह के लिये मुख्य सचिव ने सरदार पटेल स्टेडियम का निरीक्षण भी किया, लेकिन समारोह के लिए महात्मा मंदिर और साबरमती रिवरफ्रंट के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है.
एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता प्रेम कुमार धूमल के समर्थक उन्हें फिर से सत्ता की बागडोर देने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमण और नरेंद्र तोमर ने शीर्ष नेतृत्व को हिमाचल प्रदेश के नए सीएम के नए सीएम के लिए जयराम ठाकुर का नाम सुझाया है।
इधर, जयराम का नाम सामने आने के बाद प्रेम कुमार धूमल के समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया है। इसके बावजूद भाजपा पर्यवेक्षक और शीर्ष नेतृत्व टस से मस होता दिखाई नहीं दे रहा है। दोनों केंद्रीय मंत्री व हिमाचल प्रभारी मंगल पांडय दिल्ली रवाना हो गए हैं और अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय नेतृत्व को भेज दी है। हिमाचल प्रदेश के नए सीएम की आधिकारिक घोषणा दिल्ली से की जाएगी। हालांकि, भाजपा दिग्गज धूमल के होते हुए भी जयराम को क्यों चुन रही है, यह समझा जाना महत्वपूर्ण है।
जयराम ठाकुर का जन्म 6 जनवरी 1965 में मंडी जिला के थुनाग में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय जेठू राम व माता बृक्मू देवी हैं।
जयराम ठाकुर की शुरुआती पढ़ाई प्राथमिक पाठशाला कुराणी और माध्यमिक शिक्षा थुनाग से हुई। उन्होंने बड़स्याड़ से हाईस्कूल की तालीम ली। इस दौरान उन्हें स्कूल आने-जाने के लिए रोजाना 14 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। दस साल संघर्घ के बाद 90 के दशक में जयराम को मंडी के सिराज विधानसभा क्षेत्र से युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। 1993 में वह युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रहे। उन्होंने सबसे पहले 1998 में चुनाव लड़ा। इस बार पांचवी बार विधायक चुने गए हैं। वह भाजपा सरकार में मंत्री व प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं।
भाजपा ने पहले प्रेम कुमार धूमल को सीएम उम्मीदवार घोषित किया था। लेकिन चुनाव में कर धूमल अपनी सीट भी नहीं बचा सके। इस वजह से उनकी दावेदारी खत्म मानी जा रही है। दूसरी तरफ पार्टी के नेता चाहते हैं कि इस बार जीते उम्मीदवारों में से मुख्यमंत्री को चुना जाए। विधायक दल ने जयराम ठाकुर का नया नेता चुना है।

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