आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
बकाये का भुगतान न होने से परेशान दिल्ली जल बोर्ड ने सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। बोर्ड ने कहा कि 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया नहीं चुकाने पर सरकारी दफ्तरों को की जा रही पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद बोर्ड के प्रमुख हैं। ऐसे में जल बोर्ड का बयान सामने आते ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि बकाएदारों को नोटिस भेजने की योजना बनाई जा रही है।
बकाये का भुगतान न होने से परेशान दिल्ली जल बोर्ड ने सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। बोर्ड ने कहा कि 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया नहीं चुकाने पर सरकारी दफ्तरों को की जा रही पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद बोर्ड के प्रमुख हैं। ऐसे में जल बोर्ड का बयान सामने आते ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि बकाएदारों को नोटिस भेजने की योजना बनाई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक सात विभिन्न सरकारी विभागों पर कुल 3,220.12 करोड़ रुपये का बकाया है। जल बोर्ड के इस अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेलवे पर कुल मिलाकर 1,577.32 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा तीन नगर निगमों पर कुल मिलाकर 1,100.26 करोड़ रुपये का बकाया है।दिल्ली पुलिस पर 284 करोड़ और डीडीए पर तकरीबन 72 करोड़ रुपये का बकाया है। जल बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि मूल बकाया 737.77 करोड़ रुपये है। वर्षों से भुगतान नहीं करने के चलते यह रकम तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का हो चुका है। इस अधिकारी ने बताया कि इनमें से कई विभागों ने तो कई वर्षों से बकाए का भुगतान नहीं किया है। लेट फीस लगाने पर यह राशि लगातार बढ़ती जा रही है। जल बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि संबंधित विभागों द्वारा बकाए का भुगतान नहीं करने की स्थिति में पानी का कनेक्शन काटा जा सकता है। इनमें दिल्ली पुलिस और दिल्ली विकास प्राधिकरण जैसे विभाग शामिल हैं।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि पानी बिल का भुगतान समय पर किया जा रहा है। जिस बकाए राशि की बात की जा रही है वह कुछ वर्ष पहले की है। उन्होंने जल बोर्ड के कदम को राजनीति से प्रेरित बताया है। इस अधिकारी ने आरोप लगाया कि जल बोर्ड सोशल सेक्टर से जुड़े प्रतिष्ठानों से भी कमर्शियल दरों पर शुल्क ले रहा है। उन्होंने इस बाबत हिंदू राव अस्पताल का उदाहरण दिया। निगम अधिकारी ने भुगतान न होने की दिशा में इसे बड़े कारणों में से एक बताया है। उन्होंने बताया कि इसका हल निकाला जा रहा है। जल बोर्ड के अधिकारी ने इसमें किसी भी तरह की राजनीति होने से इंकार किया है।
यदि वास्तव में अरविन्द केजरीवाल जल विभाग अपने हाथ में लेने का मन माना रहे हैं, सर्वप्रथम, हर घर/फ्लैट को पानी का मीटर लगवाइए। सरकारी लाइन तो घर/फ्लैट में है,लेकिन कोई मीटर नहीं, और न ही कोई बिल। जब 2000 लीटर मुफ्त करने पर भी लोग पानी का मीटर न लगवाएं, बेईमान कौन? इस मुद्दे पर केजरीवाल को सख्त होना पड़ेगा, नरमाई नहीं। पुरानी दिल्ली की एक गली में बोरिंग की लाइन में 72 कनेक्शन हैं, आप नहीं जानते पुरे मौहल्ले में मीटर हैं, कुल 29, क्या यह पानी की खुलेआम चोरी नहीं? क्या यह आपकी सुविधा का दुरूपयोग नहीं? केजरीवाल जी यदि जामा मस्जिद क्षेत्र से बिजली और पानी चोरी को रोकने में सफल हो गए, दोनों विभागों में हर महीने करोड़ों की बढ़ोतरी होगी। अतिक्रमण, बिजली और पानी चोरी रोकने के लिए हिन्दू क्षेत्रों की बजाए मुस्लिम क्षेत्रों में सख्ती करिये। अल्पसंख्यक के नाम पर जितनी चोरी इनके क्षेत्रों में होती है, कहीं और नहीं। हिन्दू क्षेत्रों में कार्यवाही कर अपने कर्तव्य की खानापूर्ति ही कहा जाएगा। इस विषय पर गम्भीरता से चिन्ता करने की जरुरत है।
जल विभाग की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेंगे केजरीवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अब तक कोई भी विभाग अपने पास नहीं रखा था, लेकिन जल्द ही वे जल आपूर्ति विभाग की बागडोर अपने हाथों में लेने वाले हैं। फिलहाल यह विभाग राजेंद्र पाल गौतम के पास है, जिन्हें तीन महीने पहले केजरीवाल मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। गौतम के मुताबिक, जल बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के उनके साथ असहयोगात्मक रवैये के कारण केजरीवाल ने यह फैसला किया है। गौतम ने जल बोर्ड में फैले भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा किया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार शाम जल आपूर्ति मंत्री राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात कर जल बोर्ड में अधिकारियों की मनमानी पर चर्चा की और विभाग का कार्यभार खुद संभालने का संकेत दिया। हालांकि, अभी अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि होनी बाकी है। राजेंद्र पाल गौतम ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, ‘जल बोर्ड की समस्याएं कम करने में लगा हूं तेजी से, लेकिन वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों का जो सहयोग मिलना चाहिए वो नहीं मिल रहा है। उनका ध्यान लोगों की पानी की समस्या खत्म हो इस पर कम और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट पास हो जाएं, इस पर ज्यादा रहता है।
मुख्यमंत्री को लग रहा है कि शायद उनसे वह नियंत्रित हो जाएंगे। यही एकमात्र कारण है और मैं भी इससे सहमत हूं। मुझे खुशी है कि सुधार की जो प्रक्रिया शुरू हुई थी उसे अरविंद केजरीवाल अंजाम तक पहुंचाएंगे’। दिल्ली मंत्रिमंडल में प्रभारों का यह बदलाव इसी हफ्ते होने की उम्मीद है। केजरीवाल का कोई प्रभार संभालना आप की रणनीति में एक बड़ा बदलाव होगा। सरकार के एक प्रवक्ता के अनौपचारिक बयान के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल जल और सीवर के मामलों की निगरानी व्यक्तिगत रूप से करना चाह रहे हैं क्योंकि यह अब स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ सरकार के प्राथमिकता वाले मुद्दों में से एक है। इस बदलाव के पीछे का कारण कहीं न कहीं केजरीवाल का दिल्ली पर बढ़ता फोकस और बवाना चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन है।
जल विभाग का प्रभार जाने के बाद राजेंद्र पाल गौतम के पास सामाजिक कल्याण, एससी-एसटी, रजिस्ट्रार आॅफ कॉपरेटिव और गुरुद्वारा चुनाव के चार विभाग हैं। गौतम को कोई अन्य विभाग सौंपे जाने का अभी कोई संकेत नहीं है। सरकार की प्राथमिकताओं में बदलाव पर राजेंद्र गौतम ने कहा कि हर घर को साफ व शुद्ध पानी पहुंचाना पहले से सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन जल बोर्ड ऐसी जगह है जहां अगर आप बेईमान हैं तो अधिकारी आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन मैं अपना जमीर नहीं बेच सकता।


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