आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
गुजरात में राकांपा (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के नव- निर्वाचित विधायक कंधाल जडेजा को पोरबंदर जिले में कथित तौर पर दंगा करने और एक पुलिस अधिकारी की पिटाई करने को लेकर दिसम्बर 21 को गिरफ्तार कर लिया गया। हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में राकांपा (एनसीपी) से जीतने वाले जडेजा एकमात्र विधायक है। पुलिस अधीक्षक शोभा भुटादा ने कहा कि ‘गॉडमदर’ एवं दिवंगत संतोखबेन जडेजा के विधायक पुत्र और सात अन्य को पोरबंदर में रानावाव पुलिस थाने में दंगा करने, एक अधिकारी की पिटाई करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को लेकर गिरफ्तार किया गया है।
गुजरात में राकांपा (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के नव- निर्वाचित विधायक कंधाल जडेजा को पोरबंदर जिले में कथित तौर पर दंगा करने और एक पुलिस अधिकारी की पिटाई करने को लेकर दिसम्बर 21 को गिरफ्तार कर लिया गया। हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में राकांपा (एनसीपी) से जीतने वाले जडेजा एकमात्र विधायक है। पुलिस अधीक्षक शोभा भुटादा ने कहा कि ‘गॉडमदर’ एवं दिवंगत संतोखबेन जडेजा के विधायक पुत्र और सात अन्य को पोरबंदर में रानावाव पुलिस थाने में दंगा करने, एक अधिकारी की पिटाई करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को लेकर गिरफ्तार किया गया है।
कंधाल जडेजा, उनके दो भाई -करन जडेजा और कना जडेजा तथा करीब एक दर्जन अन्य लोग रानावाव पुलिस थाने में दिसम्बर 20 की सुबह करीब पांच बजे कथित तौर पर जबरन घुसे। उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सामत गोगान की पिटाई की, जो उनके और अन्य के हमले के डर से वहां पनाह लिए हुए थे।
रानावाव पुलिस थाना निरीक्षक एनडी परमार ने बताया, ‘‘आरोपी ने गोगान और वहां मौजूद पुलिस थाना अधिकारी की पिटाई की। इसके बाद उन्होंने हंगामा किया और पुलिस थाने में रखे एक टेलीफोन को क्षतिग्रस्त कर दिया।’’ परमार ने बताया कि जडेजा हालिया विधानसभा चुनाव से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर गोगान से नाराज थे और उनकी तलाश कर रहे थे। उस वक्त गोगान ने पुलिस थाने में पनाह ले रखी थी।
उन्होंने बताया कि गोगान ने कथित तौर पर जडेजा की इच्छा के खिलाफ बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। लेकिन बाद में अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया था। हालांकि, यह बात खत्म नहीं हुई, बल्कि हमले तक जा पहुंची। जडेजा और अन्य पर आईपीसी की धारा 143 ( गैरकानूनी रूप से एकत्र होना), 147 (दंगा करना), 504 ( इरादतन अपमान करना), 427 ( छोटी मोटी नुकसान पहुंचाना), 332 ( लोक सेवक को ड्यूटी से रोकने के लिए चोट पहुंचाना) और 186 ( लोकसेवक को रोकना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अब प्रश्न यह है कि "क्या ऐसी आपराधिक प्रवृत्ति के विधायक को चुनाव आयोग या गृह मंत्रालय विधायक स्वीकार करेगा या उसकी सदस्यता समाप्त करेगा? यदि नहीं फिर सामान्य नागरिक को किसी सरकारी या अर्धसरकारी नौकरी से क्यों वंचित रखा जाता है? क्योकि कोई पार्षद हो, विधायक हो या सांसद आखिर सरकार का ही भागीदार बनता है।" यदि ऐसे लोगों की सदस्यता जारी रखी जाती है तो यह स्पष्ट संकेत है कि देश में दो कानून है , एक नेता समाज के लिए और दूसरा आम नागरिक के लिए। नामांकन भरते वक़्त फॉर्म में सभी गतिविधियों का उल्लेख किया जाता है, फिर कोर्ट में लम्बित आपराधिक भी अगर उसमे दर्शाया गया है,फिर किस कारण से उसका फॉर्म स्वीकार कर, चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है। आखिर यह भेदभाव कब समाप्त होगा? बिल्ली के गले में कौन घंटी बांधेगा?
अब प्रश्न यह है कि "क्या ऐसी आपराधिक प्रवृत्ति के विधायक को चुनाव आयोग या गृह मंत्रालय विधायक स्वीकार करेगा या उसकी सदस्यता समाप्त करेगा? यदि नहीं फिर सामान्य नागरिक को किसी सरकारी या अर्धसरकारी नौकरी से क्यों वंचित रखा जाता है? क्योकि कोई पार्षद हो, विधायक हो या सांसद आखिर सरकार का ही भागीदार बनता है।" यदि ऐसे लोगों की सदस्यता जारी रखी जाती है तो यह स्पष्ट संकेत है कि देश में दो कानून है , एक नेता समाज के लिए और दूसरा आम नागरिक के लिए। नामांकन भरते वक़्त फॉर्म में सभी गतिविधियों का उल्लेख किया जाता है, फिर कोर्ट में लम्बित आपराधिक भी अगर उसमे दर्शाया गया है,फिर किस कारण से उसका फॉर्म स्वीकार कर, चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है। आखिर यह भेदभाव कब समाप्त होगा? बिल्ली के गले में कौन घंटी बांधेगा?
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