आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार
जिस तरह से एक के बाद एक घोटाले से कांग्रेस बरी हो रही है, लगता है, इतने वर्षों से चारा घोटाले का आरोप झेल रहे, लालू यादव भी दिसम्बर 23 को दोष मुक्त हो ही जाएंगे।
2जी घोटाले पर फैसले के बाद कांग्रेस के लिए एक और राहत भरी खबर आई है। मुंबई के हाईप्रोफाइल आदर्श सोसाइटी मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को भी राहत मिल गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन पर मुकदमा चलाने के आदेश को रद कर दिया है।हाईकोर्ट के फैसले के बाद चव्हाण ने कहा कि राज्यपाल का आदेश पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और पक्षपातपूर्ण था. उन्होंने एक बार फिर खुद को निर्दोष बताया। चव्हाण ने कहा कि कोर्ट का विस्तृत आदेश पढ़ने के बाद ही वह इस मामले में आगे कोई टिप्पणी करेंगे.
कोलाबा में बनाई गई थी सोसायटी
महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के कोलाबा में आदर्श हाउसिंग सोसायटी बनाई थी। इसको लेकर विवाद होने पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर राज्यपाल सी विद्यासागर ने मुकदमा चलाने का आदेश दिया था।
सैनिकों की विधवाओं व रक्षा कर्मियों के लिए बनी
आदर्श हाउसिंग सोसायटी 31 मंजिला इमारत है। इसे युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवाओं और भारतीय रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए बनाया गया था।
आरटीआई से हुआ था घोटाले का खुलासा
बाद में आरटीआई से यह खुलासा हुआ कि नियमों को ताक पर रख सोसायटी के फ्लैट ब्यूरोक्रैट्स, राजनेताओं और सेना के अफसरों को बेहद कम दामों में बेच दिए गए। इसका पर्दाफाश 2010 में हुआ। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था।
हाईकोर्ट ने धोखेबाजी का मामला माना
21 दिसंबर 2010 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि यह सीधे-सीधे धोखेबाजी का मामला है। इसके बाद कोर्ट ने सोसायटी को अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। पर्यावरण नियम को दरकिनार करने से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इमारत को तीन माह में गिराने की सिफारिश की थी।
2013 में न्यायिक कमिशन ने दी रिपोर्ट
सोसायटी मामले की जांच के लिए 2011 में महाराष्ट्र सरकार ने दो सदस्यीय न्यायिक कमिशन बनाया था। इसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस जेए पाटिल ने की। इस समिति ने 182 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की और अप्रैल 2013 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
चार मुख्यमंत्रियों के नाम आए थे सामने
इस रिपोर्ट में था कि 25 फ्लैट गैरकानूनी तौर पर आवंटित किए गए थे। इनमें से 22 फ्लैट फर्जी नाम से खरीदे गए थे। इसमें महाराष्ट्र के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के भी नाम आए थे। इनमें अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे व शिवाजीराव निलंगेकर पाटिल थे।
यह मंजूरी महाराष्ट्र के राज्यपाल ने सीबीआई को 2016 में दी थी. चव्हाण के वकील ने कोर्ट में कहा था कि फरवरी 2016 में राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने सबूतों के आधार पर नहीं, बल्कि बदले हुए राजनीतिक माहौल के कारण मंजूरी दी थी.
चव्हाण पर आदर्श सोसायटी में अपने रिश्तेदारों को दो फ्लैट देने की एवज में सोसायटी को अतिरिक्त एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) देने का आरोप था.
उनपर यह भी आरोप था कि जब वह राजस्व मंत्री थे, उन्होंने गैरकानूनी रूप से गैर सैनिकों को 40 प्रतिशत ज्यादा फ्लैट देने की मंजूरी दी थी. सीबीआई की एफआईआर में उनका नाम भी शामिल था, लेकिन दिसंबर 2013 में उस समय के राज्यपाल के शंकरनारायण ने चव्हाण पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था.
हालांकि मार्च 2015 में हाई कोर्ट ने चव्हाण की यह मांग मानने से इनकार कर दिया था कि उनका नाम इस केस से निकाल दिया जाए क्योंकि राज्यपाल ने भी मंजूरी देने से मना कर दिया है.
क्या लालू भी बाइज्जत बरी होंगे?
दिसम्बर 23 को चारा घोटाले के एक और मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सह राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव समेत बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई राजनेताओं और अधिकारियों के भाग्य का फ़ैसला करेगी। जिस पर अभी बिहार में संशय की स्थिति बनी हुई है. वहीँ सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष पर कल होने वाले फैसले को लेकर तंज कास रहा है। इंतजार कर लीजिए, 2जी मामले की तरह ही लालू यादव भी चारा घोटाले से बरी हो जाएंगे। उधर लालू यादव ने एक चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि अगर हमने बीजेपी के सामने सरेंडर कर दिया होता तो हम पर केस ही नहीं होता। तब तो सारा केस खत्म कर देते और ये ही तो उनकी चाल है। केस करके रखो ताकि अगला पकड़कर में रहे। हम डरने वाले हैं और चुप रहने वाले हैं क्या। हम फेस कर रहे हैं और फेस करेंगे।
भाजपा के कई कद्दावर नेता के साथ ही साथ जदयू के भी प्रवक्ता भी लालू यादव पर लगातार हमला कर रहे हैं. इसी बीच राजद के कद्दावर नेता शिवानन्द तिवारी ने चारा घोटाला पर आने वाले फैसले को लेकर कहा कि हमें और हमारी पार्टी को न्यायपालिका पर है पूरा भरोसा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चारा घोटाले मामले में लालू यादव को एक साजिश के तहत फंसाया गया है.जब विपक्ष आरोप सिद्ध नहीं कर पाता, फिर क्यों अपने विरोधियों पर घोटाले आदि आरोप लगाकर, जनता को मूर्ख बनाया जाता है। और इस तरह के मुद्दों पर पहले सदन में शोर-शराबा कर सदन की कार्यवाही को रोक, जो धन की बर्बादी की जाती है, उसकी भरपाई कौन करेगा? उसका बोझा नए-नए कर लगाकर जनता से ही वसूले जाएंगे। और नेता अपनी नाकामियों से ध्यान भटकने के लिए जनता को पागल बनाते रहते हैं।
भाजपा के कई कद्दावर नेता के साथ ही साथ जदयू के भी प्रवक्ता भी लालू यादव पर लगातार हमला कर रहे हैं. इसी बीच राजद के कद्दावर नेता शिवानन्द तिवारी ने चारा घोटाला पर आने वाले फैसले को लेकर कहा कि हमें और हमारी पार्टी को न्यायपालिका पर है पूरा भरोसा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चारा घोटाले मामले में लालू यादव को एक साजिश के तहत फंसाया गया है.जब विपक्ष आरोप सिद्ध नहीं कर पाता, फिर क्यों अपने विरोधियों पर घोटाले आदि आरोप लगाकर, जनता को मूर्ख बनाया जाता है। और इस तरह के मुद्दों पर पहले सदन में शोर-शराबा कर सदन की कार्यवाही को रोक, जो धन की बर्बादी की जाती है, उसकी भरपाई कौन करेगा? उसका बोझा नए-नए कर लगाकर जनता से ही वसूले जाएंगे। और नेता अपनी नाकामियों से ध्यान भटकने के लिए जनता को पागल बनाते रहते हैं।
ये रहे टॉप ट्विटर ट्रेंड में
यूजर कमेंट करते हैं कि 2जी घोटाला किसी ने नहीं किया। आरुषि को किसी ने नहीं मारा। पहले ही कहा था कि पटाखे मत फोड़ो, वरना स्मॉग में सबूत ही नहीं दिखेंगे।
ज्ञात हो,1.76 लाख करोड़ के इस घोटाले के चलते ही यूपीए सरकार को अपनी गद्दी गंवानी पड़ी थी। साथ ही तमिलनाडु में डीएमके दो चुनाव हारी। इस घोटाले में नाम जुड़ने के चलते 8 कंपनियों के 122 लाइसेंस रद्द हुए थे। 7 ने टेलीकाम कारोबार समेट लिया। फिलहाल मार्केट में सिर्फ आइडिया कंपनी अपनी सेवा दे रही है।
ऐसे खींचा मामला कि समझना ही मुश्किल हो गया
जज ने कहा कि टेलीकॉम मंत्रालय द्वारा पेश ज्यादातर दस्तावेज असंगठित थे और मंत्रालय के नीतिगत मुद्दे पूरे मामले को और पेचीदा कर रहे थे। मंत्रालय के अव्यवस्थित दस्तावेजों और नीतियों से संदेह पैदा होता है कि किसी ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले को घोटाले का स्वरूप देने के लिए कुछ अहम तथ्यों को खास तरह पेश किया और कई तथ्यों को ऐसे स्तर तक खींचा गया कि मामले को समझ पाना नामुमकिन हो गया।
2G स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले को लेकर शुरू हुआ केस अंत में किसी को भी दोषी साबित करने में नाकाम रहा। दरअसल, यह विवाद नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए के सरकार के राजस्व नुकसान के आंकलन के बाद शुरू हुआ था। हालांकि सीबीआई का मानना था कि इसमें करीब 31 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। दोनों संस्थाओं के अनुमान में इस अंतर का कारण टेलीकॉम कंपनियों की आय को अलग अलग नजरिए से देखना था।
कैग ने तैयार की थी 77 पेज की रिपोर्ट
कैग की 16 नवबंर 2010 को रिपोर्ट संसद में रखी गई थी। यह रिपोर्ट 77 पेज की थी, जिसमें 2G स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकार को 57 हजार करोड़ रुपए से लेकर 1.76 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की संभावना जताई गई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर नियम कायदों का पूरी तरह से पालन नहीं हुआ। ट्राई ने कई सुझाव दिए थे, जिनको पूरी तरह से नहीं माना गया। कैग ने संभावित रेवेन्यू का लॉस का फॉर्म्युला इस गणना के लिए लागू किया था।
कैग के नुकसान का आकलन
किस हेड में कितने नुकसान का आकलन
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कितने नुकसान का आकलन
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न्यू लाइसेंस
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102498 करोड़ रुपए
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ड्यूल टेक्नॉलाजी
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37154 करोड़ रुपए
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6.2 MHz से ज्यादा दिया स्पैक्ट्रम
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36993 करोड़ रुपए
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टोटल
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176645 करोड़ रुपए
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हालांकि सीबीआई ने पूरे मामले की जांच में अपने हिसाब से गणना की थी। सीबीआई की गणना का आधार एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू था। इस अाधार पर गणना करने पर सीबीआई का कहना था कि इस मामले में 30984 करोड़ रुपए का घपला हुआ है।
संक्षेप में केवल इतना ही कहना है : गुजरात चुनाव से समस्त नेता शिक्षा ले। जिस तेजी में वहाँ NOTA का प्रयोग हुआ है, वह समस्त नेता समाज पर थप्पड़ से कम नहीं। यदि इस तरह जनता को मूर्ख बनाने की नेतागिरी चलती रहेगी, वह चुनाव भी बहुत दूर नहीं होगा, जब उम्मीदवारों को मिले वोटों से अधिक वोट NOTA के खाते में होंगे।
संक्षेप में केवल इतना ही कहना है : गुजरात चुनाव से समस्त नेता शिक्षा ले। जिस तेजी में वहाँ NOTA का प्रयोग हुआ है, वह समस्त नेता समाज पर थप्पड़ से कम नहीं। यदि इस तरह जनता को मूर्ख बनाने की नेतागिरी चलती रहेगी, वह चुनाव भी बहुत दूर नहीं होगा, जब उम्मीदवारों को मिले वोटों से अधिक वोट NOTA के खाते में होंगे।

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