आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहने वाले आजम खान ने फिल्म ‘पद्मावती’ पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। आज़म खां ने कहा फिल्में मजा लेने के लिए होती हैं और हमने “नौ लखा” गाने वाली एक अदाकारा को दो बार रामपुर से सांसद बनाया।
आज़म साहब भारत में पहले लोकसभा चुनाव में लोकतंत्र की निर्मम हत्या भी रामपुर में ही हुई थी, जब जवाहर लाल के लाडले मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को हिन्दू महासभा के बिशन सेठ ने 6000 वोटों से हराया था, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री थे, गोबिंद बल्लब पन्त, और नेहरू के एक फ़ोन "मुझे आज़ाद लोकसभा में चाहिए", ने पन्त की हालत ख़राब कर दी थी। और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और कलेक्टर ने बिशन सेठ को उनके विजयी जलूस में से अगवा कर, गिनती केन्द्र ले जाकर उन्ही के सामने उनकी वोटों को आज़ाद की वोटों में मिलाकर आज़ाद को लगभग 3000 वोटों से विजयी घोषित कर, सबने अपनी नौकरी बचाई थी। अन्यथा नेहरू जी का कौन शिकार होता भगवान ही जानता है।
आजम ने कहा हम पिछले 40 साल से कह रहे हैं कि हिन्दुस्तान के तमाम नवाब और राजा अंग्रेजों के एजेन्ट थे। आज़म साहब यह बताना भूल गए कि मुग़लों ने कितनी आतताई कर रही थी। शायद यही कारण है कि भारत को छोड़ विश्व में कोई किसी मुग़ल का नाम तक नहीं लेता।
नवाबों की नवाबी चली गई और राजाओं की राजाईयत चली गई और जो कभी अंग्रेजों के बस्ते उठाया करते थे, वो अब फिल्म का विरोध कर रहे हैं. मुगल ए आजम” फिल्म की मिसाल देते हुए आजम खान ने कहा अनारकली को सलीम की महबूबा बताया गया, जबकि इतिहास से इसका कोई वास्ता नहीं है.
बाप से बेटे का मैदान ए जंग में मुकाबला हुआ इसका भी इतिहास से कोई लेना-देना नहीं. इस फिल्म पर किसी मुसलमान ने ऐतराज नहीं किया क्योंकि मुसलमान का दिल इतना छोटा नहीं है की उनके इतिहास को एक फिल्म खराब कर सके।
अवलोकन करें:--
अवलोकन करें:--
लगता है, आज़म साहब को नफरत की राजनीति करते-करते शायद भूल गए कि मुग़ल-ए-आज़म बनने के बाद संगीतकार नौशाद साहब और निर्माता-निर्देशक के. आसिफ के बीच कितना बड़ा विवाद हो गया था। कर्जे में डूबे आसिफ द्वारा फिल्म का सुखद अंत देने पर, नौशाद ने तवारीख को छेड़ने और बदनाम करने पर फिल्म से अपना नाम वापस और फिल्म में संगीत देने के लिए लिया सारा पैसा वापस करने तक की बात बोल दी थी। लेकिन जब आसिफ ने कहा कि फिल्म का तवारीख से दूर तक का वास्ता नहीं, यह तो इम्तिआज़ अली ताज के ड्रामा पर आधारित है। और नौशाद साहब ने जब असलियत जानने के बाद, खुद आसिफ के पास जाकर माफ़ी माँगी। दरअसल, लाहौर के कब्रिस्तान में ताज ने एक कब्र के पत्थर पर अनारकली नाम की लड़की का हिन्दुस्तान की मल्लिका बनने के स्वप्न की बात पर ड्रामा लिख दिया। और जब इस फिल्म का या अनारकली फिल्म का इतिहास से दूर तक का वास्ता नहीं, कोई पागल है, जो बोलेगा। इस विषय पर मैंने अंग्रेजी में "Was Anarkali a myth?" जो साप्ताहिक Screen में, और हिन्दी में "अनारकली कौन थी?" लिखा जिसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब आदि में समाचार पत्र/पत्रिकाओं में बड़ी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
पीएम मोदी और सीएम योगी को राजा साहब बताते हुए उन्होंने कहा राजा साहब फिल्म में डांस करने वाली नचनियां से इतना डर गये. बड़ी-बड़ी पगडियां लगाकर लोग फिल्म का विरोध कर रहे हैं.
भाजपा सरकार पर हमला
पूर्व मंत्री आजम खां ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है. नगर निकाय चुनाव के लिए रामपुर में सपा समर्थित कैंडिडेट के लिए प्रचार करते हुए कहा सुई की नोक की बराबर भी उनमें कमी होती तो बीजेपी से अल्लाह के अलावा उन्हें कोई नहीं बचा सकता था. हर सुबह और रात एक जांच का पैगाम लेकर आती थी न जाने कब सीबीआई का छापा घर पर पड़ जाता.
उन्होंने कहा आज तक नई मोटर तक नहीं खरीदी. इस दौरान पूर्व चेयरमैन और सपा को छोड़कर नगर पालिका चेयरमैन की दावेदारी ठोंकने वाली रेशमा अफरोज को मेहमान बताते हुए कह,”हुकूमत चली गई तो मेहमान भी चलते चले गये.
सीएम योगी पर हमला
नगर निकाय चुनाव में सीएम योगी के प्रचार करने पर आजम खान ने कहा “इसका मतलब यह है कि योगी जी आप बहुत घबराये हुए हैं. आपने राम के नाम को चुनाव का प्रतीक बना लिया है. नफरत की बुनियाद पर हुकूमत बनाई तो जा सकती लेकिन चलाई नहीं जा सकती. उन्होंने पिछले चुनाव को मुसलमानों के खिलाफ नफरत का एजेन्डा बताया.” नाथू राम गोडसे और पीएम मोदी पर भी उन्होंने तंज कंसा. आजम खां ने कहा- “कश्मीर, अरुणाचल, असम जैसे राज्यों में शाम 4 बजे से कर्फ्यू लग जाता है.
Comments