आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक
बॉलीवुड में हर साल काफी फिल्में बनाई जाती हैं। कुछ फिल्में रिलीज़ होती हैं और लोगों को कुछ पसंद आती हैं तो कुछ नहीं आती। इसी बीच कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जो बनाई तो ज़रूर जाती हैं लेकिन उसके कंटेंट की वजह से उन्हें रिलीज़ नहीं किया जा सकता। कई बार होता है, कि जब किसी प्रतिबंदित फिल्म से प्रतिबन्ध हटता है, चर्चित भी खूब होती हैं। बी.के. आदर्श की सेक्स शिक्षा पर आधारित भारत की प्रथम फिल्म "गुप्त ज्ञान", इस फिल्म को पारित करवाने लगभग सभी राजनीतिक दलों का योगदान रहा।
जब टीवी पर कंडोम के विज्ञापन आ सकते हैं, एड्स आदि के प्रचार पर इतना धन खर्च किया जाता है, यदि इस फिल्म का पुनः प्रसारण किया जाता है, लगता है, कुछ समय के लिए तो कंडोम निर्मित कंपनियों के उत्पादन में बहुत गिरावट आ जाएगी। सर्वश्री अटल बिहारी वाजपेयी और चंद्रशेखर आदि अनेको नेताओं (निर्माता ने सभी नेताओं का आभार व्यक्त करते फिल्म के प्रारम्भ में नाम दिए हैं) के अथक प्रयासों के कारण इस फिल्म के प्रदर्शन ने धूम मचा दी थी। जब तक दर्शकों के दिमाग में यह फिल्म बसी रही, वैश्यवृति बाज़ारों में, प्रेम लीला के बुद्धा गार्डन, नेहरू पार्क, कॉलेजों के निकट बाग़, शांतिवन, राजघाट, सब जगह सन्नाटा छा गया था। यहाँ तक कि पति-पत्नी तक ने दूरी बना ली थी। दिल्ली की भाँति भारत के अन्य राज्यों में महिला कॉलेज में स्पेशल शो के अलावा सिनेमा हॉलों में दोपहर का 12 बजे वाला शो केवल महिलाओं के लिए आरक्षित रहा। बसों और सडकों पर कोई किसी महिला की तरफ आंख उठाकर देखने का साहस तक नहीं कर पाता था। इसके बाद इस विषय पर प्रदर्शित हुई अन्य फिल्में पूर्णरूप से प्रभावहीन ही रही।फिर राजकुमार कोहली की संजीव कुमार, जितेन्द्र और सुनील दत्त अभिनीत जानी दुश्मन भी प्रतिबन्धित कर दी गयी थी, लेकिन जब इसका प्रतिबन्ध हटा, आज तक लोग फिल्म ही नहीं, इसके मधुर गीतों का भी आनन्द लेते हैं। फिल्म इतनी अधिक डरावनी थी कि फिल्म जब ट्रिब्यूनल द्वारा एक न्यायधीश को दिखाई गयी थी, न्यायधीश का पहले तो हाथ निर्मात्री निशि की जांघों पर गया, डर के मारे जांघों को इतनी कस के पकड़ा कि बेचारी निशि की जांघों पर नाख़ून गढ़ने पर जो हाथ हटाया, फिर जज साहब का कोट फटने से अपने आपको नहीं बचा पाया। देखिए फिल्म कितनी अधिक डरावनी थी।
इस फिल्म से भी अधिक डरावनी एक अंग्रेजी फिल्म The Exorcist सेंसर बोर्ड ने पास कर दी। निर्माता ने तो पूरी फिल्म देखने वाले को पुरस्कार के रूप में सिनेमा हॉल के बाहर एक कार तक खड़ी कर दी थी। दिल्ली में फिल्म वसंत विहार स्थित प्रिया सिनेमा में प्रदर्शित हुई थी, जहाँ कार फिल्म उतरने के कई सप्ताह बाद तक अपनी आँखों से खड़ी देखी। फिल्म समाप्त होने से पूर्व ही सारा हॉल खाली हो जाता था।
ऐसी बहुत सी फिल्में हैं जो अपने बोल्ड कंटेंट के कारण रिलीज़ नहीं हो पाई हैं। हम आपको उन फिल्मों की लिस्ट दिखाने जा रहे हैं जिन्हें सेंसर बोर्ड तक पास नहीं कर सका।
आमतौर पर आप कई बार फिल्मों में कुछ सीन्स पर सेंसर बोर्ड की कैंची चलने की बातें सुनते रहते होंगे। इन फिल्मों में कैंची क्यों चलाई जाती है इसके बारे में शायद आपको बताने की जरूरत नहीं है लेकिन कई बार ऐसी भी न्यूज आती हैं जब फिल्म को ही बैन कर दिया जाता है।
किसी भी फिल्म के बैन होने के पीछे सबसे बड़ा कारण या तो कंटेंट होता है या फिर वलगेरिटी। आज हम अपने इस लेख में ऐसी ही 5 फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें वलगेरिटी की वजह से बैन कर दिया गया है।
हालांकि ये फिल्में अब भी कई इंटरनेट मीडियम और यू-ट्यूब पर उपलब्ध हैं। इन फिल्मों के बारे में जानने के लिए अगले पेज से क्लिक करें—
अनफ्रीडम’
बैन की गई फिल्मों की पहली सूची में पहला नाम साल 2015 में आई फिल्म ‘अनफ्रीडम’ है। आपको बता दें कि इस फिल्म की कहानी समलैंगिक संबंधों पर आधारित है। इसलिए फिल्म में दिखाए गए नग्न सीन्स के कारण सेंसर बोर्ड ने इसे बैन कर दिया।
सिन्स
भारतीय सिनेमाघरों में बैन की गई सबसे बहुचर्चित फिल्म का नाम ‘सिन्स’ है। यह फिल्म साल 2005 में आई थी और इसकी कहानी एक पादरी और एक महिला के यौन संबंधों पर आधारित थी। हालांकि यह अब भी यू-ट्यूब पर उपलब्ध है।
कामसूत्र
इस सूची में तीसरी फिल्म का नाम कामसूत्र है जिसे कि साल 1996 में मीरा नायर ने बनाया था। इस फिल्म को भी सेंसर ने बैन कर दिया था। लेकिन यह अब इंटरनेट पर उपलब्ध है। इस फिल्म में 16वीं शताब्दी के चार प्रेमियों की कहानी बताई गई थी।
बैंडिट क्वीन
चंबल घाटी की डकैत फूलन देवी के जीवन पर आधारित इस फिल्म को भारतीय सिनेमाघरों में इसलिए बैन कर दिया गया क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा सेक्स सीन दिखाए गए थे। इसमें रेप के सीन को भी खुलेआम दर्शाया गया था।
पांच
साल 2003 में आई अनुराग कश्यप की फिल्म पांच को भी सेंसर बोर्ड ने बैन कर दिया था। क्योंकि इस फिल्म में बहुत ज्यादा हिंसा, और नशाखोरी के अलावा यौन उत्तेजना से भरपूर ऐसे कई सीन थे। हालांकि यह फिल्म अब भी यू-ट्यूब पर उपलब्ध है। अनुराग कश्यप और सेंसर बोर्ड की दुश्मनी मानों काफी पुरानी है। उनकी फ़िल्म 'पांच' जोशी अभ्यंकर के सीरियल मर्डर पर बेस्ड थी। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को इसलिए पास नहीं किया क्योंकि इसमें हिंसा, अश्लील लैंग्वेज और ड्रग्स की लत को दिखाया गया था।
उर्फ़ प्रोफेसर एक और फ़िल्म जो सेंसर बोर्ड के चंगुल से नहीं निकल पायी थी निखिल आडवाणी की उर्फ़ प्रोफेसर। इसमें मनोज पाहवा, अंतरा माली और शरमन जोशी जैसे सितारे थे। लेकिन अश्लील दृश्य और भाषा होने के कारण सेंसर बोर्ड ने इसे पास नहीं किया।
द पिंक मिरर



Comments