आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
मुस्लिम राजनीति क्या अजीब खेल है, एक तरफ मुस्लिम समुदाय मोदी और भाजपा को बुरा-भला कहती है। वोट देने में किसी मक्खीचूस को भी पीछे छोड़ देते हैं, भाजपा उम्मीदवार हिन्दू क्षेत्रों से इतनी बढ़त लेता हुआ आता है, लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों में उसे जमानत बचाने के लाले पड़ जाते हैं, जैसा अभी दिल्ली में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में देखने को मिला। वहीँ उसी समुदाय की महिलाएं उसी मोदी से सहायता की गुहार लगाती हैं। पहले तीन तलाक़ पर और अब महिलाओं के खतने पर। अजीब विडंबना है। अगर नगर निगम चुनावों में केवल महिलाओं ने ही भाजपा को वोट दिया होता, वहाँ से भी भाजपा सीट निकाल सकती थी। प्रधानमन्त्री मोदी से महिलाएँ हर सुख पाने की लालसा तो रखती हैं, लेकिन वोट देने के लिए पुरुष वर्ग की बात का पालन किया जाता है।
दाऊदी बोहरा समुदाय से आने वाली कई महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लड़कियों के खतना (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) को गैरकानूनी करार देने के लिए मदद की गुहार लगाई है। इन महिलाओं ने खतना के खिलाफ एक कैंपेन लॉन्च किया है। 19 नवंबर को वर्ल्ड डे फॉर प्रीवेंशन ऑफ चाइल्ड अब्यूस के अवसर पर वीस्पीकआउट बैनर तले इस ऑनलाइन कैंपेन की शुरुआत की गई है। आपको बता दें कि देश में खतना के खिलाफ कोई कानून नहीं है। हालांकि अन्य देशों में भी लड़कियों का खतना होता है लेकिन वह केवल एक निवारण के तौर पर किया जाता है।
बोहरा समुदाय की महिलाओं द्वारा पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा गया है कि केंद्र सरकार को कम से कम राज्य सरकारों और बोहरा सय्यदनाओं को एक एडवाइजरी जारी कर खतना को आईपीसी और पोस्को एक्त के तहत अपराध घोषित करने के लिए कहना चाहिए। वहीं खतना भी पोस्को एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न को परिभाषित करती है। इस मुद्दे को महिला एंव बाल विकास मंत्रालय भी पहले उठा चुका है जिसमें यह वादा किया गया था कि देश में खतना प्रथा को बैन कर दिया जाएगा, लेकिन मंत्रालय के वादे केवल वादे रह गए जिसके कारण बोहरा समुदाय की महिलाओं ने इसके खिलाफ कैंपेन चलाया है।
हकीकत यह है कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने के बाद से सोशल मीडिया और समाचार वेब् साइट पर इस तरह के समाचार वीडियो सहित आने लगे थे, वीडियो देखकर लड़का अथवा लड़की का तरपना और अभद्र गालियाँ देने से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक मासूम के मुँह से तड़पन में ऐसी गालियाँ ही नहीं मासूमों की माँऔ के चेहरे पर तड़पन साफ छलकती दिखाई दे रही है। माँ भी इस्लामिक प्रथा के चलते मजबूर है। लेकिन उस समय लिखने का साहस नहीं जुटा पाया कि किसी के मजहब में दखलंदाजी उचित नहीं। परन्तु आज शायद ही कोई न्यूज़ पोर्टल होगा जहाँ इस समाचार को प्रमुखता से नहीं दिखाया जा रहा हो।
20 करोड़ से ज्यादा लड़कियों का हो चुका है खतना: जानिए Female Genital Mutilation क्या है और क्यों है विवाद
आठ मई को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के चार मंत्रालयों से “महिलाओं के खतना” पर उनकी राय मांगी। महिलाओं के जननांग के खतना (Female Genital Mutilation) की प्रथा एशिया और अफ्रीका के बहुत से देशों में व्याप्त है, खासकर बोहरा समुदाय में। भारत में करीब 20 लाख बोहरा हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंत्रालयों की राय मांगने से कुछ दिन पहले अमेरिका के डेट्रायट में एक डॉक्टर को एक महिला का खतना करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया। आम तौर पर महिलाओं का खतना करते समय उन्हें बेहोश या प्रभावित इलाके को सुन्न नहीं किया जाता और न ही कोई डॉक्टर निगरानी के लिए मौजूद होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अफ्रीका और एशिया के करीब 30 देशों में 20 करोड़ से ज्यादा लड़कियों का खतना हो चुका है। आइए जानते हैं, क्या है ‘महिलाओं का खतना’ और इस पर क्यों विवाद है?
क्या है महिलाओं का खतना- महिलाओं का खतना करते समय उनकी योनि के बाहरी हिस्से (क्लाइटॉरिस) को आंशिक या पूरी तरह काट दिया जाता है। इस प्रथा का पालन करने वाले समुदायों का मानना है कि इससे महिलाओं की कामेच्छा नियंत्रित रहती है। अलग-अलग देशों में महिलाओं का भिन्न-भिन्न तरीके से खतना किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने महिलाओं के चार तरह के खतने को चिह्नित किया है।
क्या है महिलाओं का खतना- महिलाओं का खतना करते समय उनकी योनि के बाहरी हिस्से (क्लाइटॉरिस) को आंशिक या पूरी तरह काट दिया जाता है। इस प्रथा का पालन करने वाले समुदायों का मानना है कि इससे महिलाओं की कामेच्छा नियंत्रित रहती है। अलग-अलग देशों में महिलाओं का भिन्न-भिन्न तरीके से खतना किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने महिलाओं के चार तरह के खतने को चिह्नित किया है।
अभी प्राप्त जनसत्ता(नवम्बर 21, नेट एडिशन, समय1.33 ) के अनुसार "एेसे होता है महिलाओं का खतना: इस प्रक्रिया में महिला योनि के एक हिस्से क्लिटोरिस को रेजर ब्लेड से काट दिया जाता है। या कुछ जगहों पर क्लिटोरिस और योनि की अंदरूनी त्वचा को भी आंशिक रूप से हटा दिया जाता है। इस परंपरा को लेकर विश्वास है कि महिला यौनिकता पितृसत्ता के लिए खतरनाक है और महिलाओं को सेक्स का लुत्फ उठाने का कोई अधिकार नहीं है। माना जाता है कि जिस महिला का खतना हो चुका है, वह अपने पति के प्रति ज्यादा वफादार होगी और घर से बाहर नहीं जाएगी। संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक खतना चार तरह का हो सकता है-पूरी क्लिटोरिस को काट देना, कुछ हिस्सा काटना, योनी की सिलाई, छेदना या बींधना।
"ये हैं नुकसान: एक ही रेजर से कई महिलाओं का खतना होने से उन्हें योनी संक्रमण के अलावा बांझपन जैसी बीमारियां हो जाती हैं। खतने के दौरान ज्यादा खून बहने से बच्ची की मौत भी हो जाती है। दर्द सहन न कर पाने और शॉक के कारण कई बच्चियां कोम में भी चली जाती हैं।"
"ये हैं नुकसान: एक ही रेजर से कई महिलाओं का खतना होने से उन्हें योनी संक्रमण के अलावा बांझपन जैसी बीमारियां हो जाती हैं। खतने के दौरान ज्यादा खून बहने से बच्ची की मौत भी हो जाती है। दर्द सहन न कर पाने और शॉक के कारण कई बच्चियां कोम में भी चली जाती हैं।"
पहला प्रकार- इसे क्लाइटॉरिडेक्टॉमी कहते हैं। इसमें महिलाओं के क्लाइटॉरिस को आंशिक या पूरी तरह निकाल दिया जाता है। कुछेक अपवाद मामलों में क्लाइटॉरिस को ढंकने वाले त्वचा को हटाया जाता है।
दूसरा प्रकार- इसे एक्सीजन कहते हैं। इसमें क्लाइटॉरिस और लेबिआ माइनोरा (योनि की अंदरूनी त्वचा) को आंशिक या पूरी तरह हटा दिया जाता है लेकिन इसमें लेबिआ मेजोरा (योनि की बाहरी त्वचा) नहीं हटायी जातीं।
तीसरा प्रकार- इसे इनफिबुलेशन कहते हैं। इसमें योनिमुख को संकरा बनाया जाता है। इसके लिए लेबिए माइनोरा या लेबिअ मेजोरा को काटकर दोबारा लगा दिया जाता है या कई बार योनिमुख को आंशिक रूप से सिल दिया जाता है। इनफिबुलेशन में क्लाइटॉरिडेक्टॉमी नहीं होती।
चौथा प्रकार- गैर-चिकत्सकीय कारणों से महिलाओं के जननांग में छेद करना, काटना, जलाना इत्यादि अन्य प्रकार से विकृत करने को चौथे प्रकार में रखा जाता है।
किन देशों में है ज्यादा प्रचलन- महिलाओं के खतना का सर्वाधिक प्रचलन अफ्रीकी देशों में है। अफ्रीकी देशों में इसके प्रचलन से विश्व समुदाय और विश्व स्वास्थ्य संगठन का इस पर ध्यान गया। भारत में दाऊदी बोहरा समेत अन्य बोहरा समुदायों में इसका प्रचलन है। बोहरा समुदाय की कितनी लड़कियों का खतना हुआ है इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि करीब 80-90 प्रतिशत बोहरा लड़कियों का खतना होता है। भारत में बोहरा लड़कियों का केवल पहले और चौथे प्रकार का खतना होता है।
खतना से होने वाले नुकसान- खतना से महिलाओं को दो तरह के दुष्परिणाम का सामना करना होता है। एक तुरंत होने वाले नुकसान और दूसरा लंबे समय तक बने रहने वाला नुकसान। इससे महिलाओं को रक्तस्राव, बुखार, संक्रमण, सदमा जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में उनकी मृत्यु भी हो जाती है। माना जाता है कि महिलाओं का खतन करने से उन्हें पेशाब, संभोग या प्रजनन के समय दिक्कतें होती हैं। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिलाओं के लैंगिक आधार पर भेदभाव कहा है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस पर कानूनन रोक है।
अमेरिका: भारतीय मूल के डॉक्टर पर लगा लड़कियों के खतना करने का आरोप, पत्नी समेत अरेस्ट
| लिवोनिया के क्लिनिक में नाबालिग लड़कियों का खतना करने की साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है। (PTI) |
भारत में जन्मे एक डॉक्टर और उसकी पत्नी को खतना करने के मामले में भारतीय मूल की एक अन्य डॉक्टर की कथित तौर पर मदद करने को लेकर गिरफ्तार किया गया है और उन पर मामला दर्ज किया गया है। यह प्रक्रिया अमेरिका में अपराध की श्रेणी में आती है।
मिशिगन में रहने वाले फखरूद्दीन अत्तार (53) और उनकी पत्नी फरीदा अत्तार (50) पर लिवोनिया के क्लिनिक में नाबालिग लड़कियों का खतना करने की साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है।
अत्तार दंपति को शनिवार (22 अप्रैल) को सुबह गिरफ्तार किया गया। नाबालिग लड़कियों के खतना के मामले में मिशिगन की 44 वर्षीय जुमाना नागरवाला की गिरफ्तारी के एक सप्ताह बाद ये गिरफ्तारी हुई है।
तंजानिया में रोक के बावजूद एक महीने में 800 लड़कियों का खतना, 12 संदिग्ध महिला गिरफ्तार
अफ्रीकी देश तंजानिया में सरकारी रोक के बावजूद पिछले एक महीने के अंदर 800 से ज्यादा लड़कियों का खतना किया गया है। पुलिस के अधिकारी देश के उत्तरी हिस्से में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं बावजूद अब तक लाखों लड़कियां इससे प्रभावित हो चुकी हैं। पुलिस ने इस तरह का काम करने वाली 12 संदिग्ध महिलाओं को गिरफ्तार किया है। ये लोग लड़कियों के जननांग को पूर्णत: या आंशिक तौर पर बाहर निकालने का काम कर रहे थे। पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है। एक अधिकारी ने बताया, “पुलिस की छानबीन अभी भी जारी है। जब तक कि इस धंधे में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती है या उसे आरोपी नहीं बना दिया जाता है तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे।”
यूनिसेफ के आंकड़े कहते हैं कि दुनिया भर के 30 देशों में हर साल करीब 20 करोड़ बच्चियों या लड़कियों को खतना की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
एक अनुमान के मुताबिक अफ्रीका के स्वात और पूर्व-मध्य एशिया के कई इलाकों में मादा जननांग विकृति यानी खतना (एफएमजी) से करीब 14 करोड़ लड़कियां और महिलाएं प्रभावित हुई हैं। खतना को इन इलाकों में शादी से पहले लड़कियों की पवित्रता के लिए एक जरूरी रस्म माना जाता है। तंजानिया में ही करीब 80 लाख लड़कियों और महिलाओं को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है।
फीमेल जेनिटल कटिंग या फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन यानी खतना में महिलाओं के बाह्य जननांग के कुछ हिस्से को 12 से 17 साल की उम्र के बीच काट दिया जाता है। इसके तहत क्लिटोरिस के ऊपरी हिस्से को हटाने से लेकर बाहरी और भीतरी लाबिया को हटाना और कई समुदायों में लेबिया को सिलने की प्रथा तक शामिल है। एक सामाजिक रीति के रूप में इस प्रथा की जड़ें काफी गहरी हैं और इसे बेहद आवश्यक माना जाता है। तंजानिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को ही इस दर्दनीय और सहनीय पीड़ा को बंद करने का फरमान सुनाया है।
यूनिसेफ के आंकड़े कहते हैं कि दुनिया भर के 30 देशों में हर साल करीब 20 करोड़ बच्चियों या लड़कियों को खतना की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उनमें से करीब साढ़े चार करोड़ बच्चियां 14 साल से कम उम्र की होती हैं और इनमें से सबसे अधिक तीन देशों – गांबिया, मॉरितानिया और इंडोनेशिया की होती हैं।
गौरतलब है कि भारत में शिया मुस्लिम के बेहद संपन्न और शिक्षित समुदाय दाउदी बोहरा में इस प्रथा का रिवाज है। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह संस्थापक जाकिया सोमान का इस बारे में कहना है, ‘खतना जैसी प्रथाएं अमानवीय और गैर इस्लामी हैं। ये महिलाओं पर होने वाली हिंसा को बढ़ावा देती हैं, इन्हें तत्काल बंद किया जाना चाहिए।’
बच्चे का ‘अवैध’ खतना करने के आरोप में भारतीय मूल का बुजुर्ग डॉक्टर इंग्लैंड में गिरफ्तार
इंग्लैंड के ईस्ट मिडलैंड क्षेत्र में एक भारतवंशी चिकित्सक को एक बच्चे की बिना उसकी मां की मंजूरी के खतना करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मिरर की शुक्रवार की रपट के मुताबिक, 61 साल के डॉ. बलविंदर मेहता को जुलाई 2013 में एक बच्चे की बिना उसकी मां की मंजूरी के खतना करने का आरोपी बनाया गया। ऑपरेशन उस वक्त हुआ, जब बच्चे (लड़का) को उसके दादा के घर ले जाया गया था। बच्चे के माता-पिता अलग-अलग रहते हैं।
आरोप है कि चिकित्सक ने खतना की प्रक्रिया उसी दिन बाद में बच्चे के मां के पास लौटने से पहले की। बच्चे की 26 वर्षीय मां ने नॉटिंघमशायर पुलिस में शिकायत की, जहां उन्हें बताया गया कि यह आपराधिक मामला नहीं है और मामले को जनरल मेडिकल काउंसिल के पास भेज दिया गया। लेकिन, बच्चे की मां को एक खतना विरोधी समूह तथा एक मानवाधिकार वकील द्वारा सहयोग मिलने के बाद मामले को फिर से खोला गया।
नॉटिंघम के बेकर्सफील्ड मेडिकल सेंटर में चिकित्सक डॉ. मेहता को ‘शरीर को गंभीर हानि पहुंचाने की मंशा के संदेह’ में गिरफ्तार कर लिया गया और पूछताछ की गई। उनके अलावा, शरीर को गंभीर रूप से हानि पहुंचाने की साजिश रचने के संदेह में 44 वर्षीय एक व्यक्ति तथा 47 वर्षीय एक महिला को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने कहा कि माना जा रहा है कि दोनों बच्चे के दादा-दादी हैं। रपट के मुताबिक, तीनों लोगों को रिहा कर दिया गया, जबकि जांच जारी है। बच्चे की मां ने कहा कि खतना से बच्चे का गुप्तांग सूज गया और उसमें पस भर गया था।


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