| सोमनाथ मन्दिर में राहुल गाँधी |
जो बात लंबे समय से अटकलबाजियों की शक्ल में रही उस पर मुहर लग गई है। पहली बार राहुल गांधी ने माना है कि वो हिंदू नहीं, बल्कि किसी और धर्म को मानने वाले हैं। गुजरात के चुनावी दौरे पर सोमनाथ मंदिर में गए राहुल गांधी ने वहां पर खुद को ‘गैर हिंदू’ के रूप में दर्ज कराया है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि वो किस धर्म को मानने वाले हैं। सोमनाथ मंदिर हिंदुओं के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। मंदिर की परंपरा है कि जब वहां कोई गैर-हिंदू दर्शन के लिए आता है तो उसे रोका नहीं जाता। इसके बजाय उसे मंदिर में रखे एक अलग रजिस्टर में अपनी एंट्री कर देनी होती है। गुजरात दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने भी उस रजिस्टर में बाकायदा अपनी एंट्री करवाई है। चुनाव प्रचार के चक्कर में राहुल गांधी आजकल गुजरात के मंदिर-मंदिर चक्कर लगा रहे हैं।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधबार (29 नवंबर) को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में पहुंचकर माथा टेका और जलाभिषेक किया। पिछले तीन महीने में राहुल गांधी ने 19वीं बार मंदिर में पूजा-अर्चना की है। इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने उन पर सियासी हमला बोला है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का नाम लिए बिना उन्होंने तंज कसा कि सोमनाथ मंदिर तुम्हारे परनाना ने नहीं बनवाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”आज सोमनाथ की पताका पूरे विश्व में फहरा रही है। आज जिन लोगों को सोमनाथ याद आ रहे हैं, इनसे पूछिए कि क्या तुम्हें इतिहास पता है? तुम्हारे परनाना, तुम्हारे पिता जी के नाना, तुम्हारी दादी मां के पिता जी, जो इस देश के पहले प्रधानमंत्री थे, जब सरदार पटेल सोमनाथ का उद्धार करवा रहे थे तब उनकी भौहें क्यों तन गईं थीं।”
पीएम मोदी इतने पर भी नहीं रुके। उन्होंने उस घटना को याद करते हुए कहा कि जब सरदार पटेल ने देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को मंदिर आने का निमंत्रण दिया था, तब तुम्हारे परनाना ने राष्ट्रपति को खत लिखकर इस बात के लिए नाराजगी जाहिर की थी कि वो वहां क्यों जा रहे हैं। बता दें कि सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगो में एक है। हिन्दू धर्म के लोगों की इस मंदिर से जुड़ी आस्था बड़ी गहरी हैं।
अब मस्जिद और दरगाह सब भूल गए
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पिछले दो-तीन महीनों से जब-जब गुजरात दौरे पर आ रहे हैं वो अक्सर किसी न किसी मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते नजर आते हैं। इस दौरान उन्हें इस बार किसी खास मुस्लिम बहुल इलाके में चुनाव प्रचार करते हुए नहीं देखा जा सका है। 22 सालों से गुजरात की सत्ता से दूर रही कांग्रेस नहीं चाहती है कि मुस्लिमों के नाम पर हिन्दू पार्टी से बिदके या बीजेपी उन्हें भड़काए। इसलिए पार्टी के रणनीतिकारों ने गुजरात फतह की योजना बनाते समय इन बातों पर काफी मंथन किया और हिन्दुओं को लामबंद करने के उद्देश्य से राहुल के हर दौरे पर मंदिर जाने का कार्यक्रम तय किया गया। शायद यह पहला ऐसा चुनाव है, कि कांग्रेस को न गोधरा याद आ रहा है और न "मौत का सौदागर" या "खून का दलाल" आदि जुमलों से मोदी पर वार किया जा रहा है। जो पार्टी केन्द्र में सत्ता में रहते हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध करने बेगुनाह साधु, संत और साध्वियों को आतंकवाद के झूठे आरोपों में जेल में डाला जा रहा था, राम को काल्पनिक बताया जा रहा था, आज वही कांग्रेस किसी मस्जिद या दरगाह में मत्था टेकने की बजाए मन्दिरों के चक्कर काट हिन्दुओं को भ्रमित किया जा रहा है। आखिर कांग्रेस की इस दोगली नीति से मुस्लिम समाज अपनी आँखे खोलेगा?
गुजरात चुनाव में बीजेपी को कांग्रेस कड़ी टक्कर दे रही है। लिहाजा, बीजेपी के फार्मूले पर चलते हुए कांग्रेस भी अपने स्टार प्रचारक राहुल गांधी को हिन्दू वोटरों को अपने पाले में करने के लिए मंदिर कार्ड खेला है। बता दें कि ऐसा पहली बार है जब कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण का रास्ता छोड़कर विराट हिन्दूवादी समुदायों के समूहों यानी ओबीसी, दलित, आदिवासी, पटेल समुदाय को अपने पाले में करने की कोशिशों में जुटी है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के गुजरात के सोमनाथ मंदिर में जाने पर विवाद शुरू हो गया है। विवाद की वजह यह है कि राहुल गांधी यहां गैर हिंदू की हैसियत से पहुंचे थे। हालांकि इस मामले में कांग्रेस की सफाई आई है। कांग्रेस के प्रवक्ता आरएस सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी न केवल हिंदू हैं, बल्कि वे 'जनेऊ धारी' हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और राहुल गांधी सोमनाथ मंदिर प्रशासन के दफ्तर पहुंचे और मंदिर में प्रवेश और पूजा अर्चना की इजाजत माँगी। सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी ने माना, मैं हिंदू नहीं हूं!
मंदिर में एंट्री के लिए राहुल गांधी का मंदिर प्रशासन से इजाजत लेने के साथ ही विवाद शुरू हो गया।दरअसल, सोमनाथ मंदिर में हिंदुओं के प्रवेश की कोई रोकटोक नहीं है। सिर्फ गैर हिंदुओं को ही प्रवेश की इजाजत लेनी होती है। ऐसे में अहमद पटेल के साथ राहुल गांधी का भी मंदिर में प्रवेश के लिए इजाजत लेना चौंकाने वाली बात है। दर्शन के लिए जिस रजिस्टर पर राहुल और अहमद पटेल का नाम है वहां कांग्रेस के मीडिया कॉर्डिनेटर के हस्ताक्षर है।पहली बार सामने आई सच्चाई
| गैर-हिंदुओं के लिए बने रजिस्टर में आप राहुल गांधी की एंट्री देख सकते हैं। |
सोमनाथ मंदिर में दर्शन के लिए राहुल गांधी कांग्रेस नेता अहमद पटेल के साथ पहुंचे थे। मंदिर के नियमों के मुताबिक दोनों ने गैर-हिंदू श्रेणी के तहत प्रवेश किया। मंदिर के रजिस्टर पर पहले राहुल गांधी ने अपनी एंट्री की और इसके नीचे अहमद पटेल ने अपना नाम लिखा। ये दोनों इसके बाद साथ-साथ दर्शन के लिए गए। जहां पर उन्होंने तय विधि के मुताबिक भगवान सोमनाथ की पूजा-अर्चना की। आम तौर पर यूरोप और अमेरिका जैसे देशों से आने वाले पर्यटक इस श्रेणी में दर्शन करते हैं। राहुल गांधी के गैर-हिंदू श्रेणी में एंट्री करने के साथ ही यह बात सही साबित हो गई है कि वो और उनका परिवार शुरू से ही हिंदू धर्म से दूर जा चुका था।
नेहरू के बाद हिंदू धर्म छोड़ा!
जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था कि मैं दुर्घटनावश हिंदू हूं। उन्होंने खुद को संस्कारों से मुसलमान बताया था। लेकिन भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्होंने अपने नाम के आगे अपनी कश्मीरी पहचान ‘पंडित’ को चिपकाए रखा। इसका उन्हें फायदा भी हुआ। कहते हैं कि नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी को हिंदू कर्मकांडों और तंत्र-मंत्र की परंपरा में रुचि थी। लेकिन वो अपनी सत्ता को बचाए रखने के लिए ऐसा करती थीं। इंदिरा ने भी फिरोज से शादी की, जो गांधी जी के स्वघोषित दत्तक पुत्र थे। कई लोग उन्हें पारसी और कई लोग मुसलमान बताते हैं। इसके बाद राजीव गांधी ने भी किसी हिंदू लड़की से शादी करने के बजाय कैथोलिक ईसाई सोनिया गांधी को चुना। इस दौरान गांधी परिवार के सदस्यों को कभी कोई हिंदू रीति-रिवाज मानते या त्यौहार मनाते नहीं देखा गया।
| कांग्रेस की ओर से पेश की गई रजिस्टर की कॉपी. |
यह मामला मीडिया में आने के बाद कांग्रेस के प्रवक्ता दीपेंद्र सिं हुड्डा ने सफाई दी है. उन्होंने सोमनाथ मंदिर के दूसरे रजिस्टर की तस्वीर मीडिया के सामने रखते हुए कहा कि ये सही है, मीडिया में चल रही रजिस्टर की तस्वीर गलत है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने विजिटर बुक में मंदिर की तारीफ लिखी थी, न कि गैर हिंदुओं के रजिस्टर में एंट्री की थी.
राहुल गांधी बोले- गुजरात मांगे हिसाब
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपना हमला तेज करते हुए प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की पिछले चुनाव में किए गए उसके वादों पर बुधवार को उससे जवाब मांगे. राहुल ने साथ ही गुजरात में भाजपा के 22 साल के शासन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोग उससे जवाब मांग रहे हैं.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, '22 सालों का हिसाब, गुजरात मांगे जवाब.' कांग्रेस नेता ने आवास के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या गुजरातियों को नये घर देने में और 45 साल लगेंगे.
राहुल ने अपनी दलील के समर्थन में आंकड़ा पेश करते हुए कहा, 'गुजरात के हालात पर प्रधानमंत्रीजी से पहला सवाल : 2012 में वादा किया कि 50 लाख नये घर देंगे.पांच साल में बनाए 4.72 लाख घर. प्रधानमंत्रीजी बताइए कि क्या ये वादा पूरा होने में 45 साल और लगेंगे?'
प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता नौ एवं 14 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपने अपने दल के प्रचार के लिए बुधवार को गुजरात में हैं. राहुल दो दिन चुनाव प्रचार करेंगे और इस दौरान प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर भी जाएंगे. कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पार्टी उपाध्यक्ष आज और कल कम से कम तीन जिलों में जनसभाएं भी करेंगे.
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