आर.बी.एल.निगम
चीन ने दक्षिण पूर्वी क्षेत्र में रह रहे ईसाइयों को तुगलकी फरमान सुनया है। चीन ने कहा कि अगर गरीबी दूर भगानी है तो क्राइस्ट की नहीं राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फोटो लगाओ। ईसाइयों को कहा गया है कि अगर गरीबी रेखा से ऊपर उठना है तो उन्हें जीसस क्राइस्ट नहीं बल्कि राष्ट्रपति शी जिन पिंग बचाएंगे, इसलिए जीसस के बजाए जनपिंग की पूजा करें।
चीन द्वारा पहले इस्लाम पर नकेल डाली गयी। मुसलमानों को सर्वप्रथम सड़क पर नमाज़ पढ़ना, फिर टोपी, बुर्का, रोज़ा आदि पर पाबन्दी लगाई। किसी की देश की सरकार के आदेश बोलने की जुर्रत तक नहीं हुई। भारत में जो कट्टरपंथी कहते हैं कि "हम संविधान में नहीं, कुरान को मानते हैं; इस्लाम पहले, देश बाद में ; वन्दे मातरम नहीं गाएंगे, सिर सिर्फ अल्लाह के आगे झुकता है, किसी और के आगे नहीं" आदि बातें टीवी पर लगती चौपालों पर अक्सर सुनने को मिल जाती हैं। परन्तु जब भारत से बाहर अन्य देशों में मुस्लिमों पर इतने प्रहार हो रहे हैं, और वहाँ का मुसलमान सरकार के आदेशों को मान रहा, यह सब देख आभास होता है, भारतीय मुसलमानों और भारत से बाहर मुसलमानों के इस्लाम में जरूर फर्क है। चीन द्वारा कुरान और नमाज़ सम्बन्धित किसी भी चीज़ को घर में रखने पर पाबन्दी लगा दी गयी, कोई नहीं बोला। चुपचाप सरकारी आदेश का अमल करना शुरू कर दिया। यानि नमाज़ पर पूर्णरूप से प्रतिबन्ध।
और अब चीन ने ईसाई धर्म पर नकेल डालनी शुरू कर दी। भारत में गरीब और अनपढ़ों को हिन्दू देवी-देवताओं को ढोंग बताकर ईसाई बनाने वाले देख लें, चीन में जीसस के विरुद्ध क्या कहा जा रहा है?
अवलोकन करें:--
एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर चीन में 10 लाख गरीब हैं तो उनमें से 11 फीसदी गरीबी रेखा के नीचे हैं और उसमें से 10 फीसदी ईसाई धर्म के लोग हैं।
जिनपिंग के फिर से चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके विचारों को देश के संविधान में जगह दी गई है, लेकिन अब खबर है कि उन्हें भगवान बनाने की कोशिश हो रही हैं. खबरों के अनुसार दक्षिण-पूर्व चीन में ईसाइयों को कहा जा रहा है कि अगर उन्हें सरकारी मदद चाहिए तो उन्हें यीशु की बजाय शी जिनपिंग की तस्वीर घर में लगानी होगी. चीन में पहले मुस्लिम सामग्री हटाने और फिर हिंदू प्रार्थना पर प्रतिबंध के बाद अब यह नया तुगलकी फरमान सामने आया है. दक्षिण-पूर्व चीन में ईसाई धर्म के लोगों को कथित रूप से कहा गया है कि अगर वे गरीबी से निजात के लिये सरकारी लाभ पाना चाहते हैं तो जीसस क्राइस्ट की तस्वीरें हटा लें और उनकी जगह राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीरें लगा लें. चीन में उन्हें जीसस क्राइस्ट से भी बड़ा बता कर भगवान बनाने की कवायद की जा रही है.
चीनी राष्ट्रपति की अच्छी तस्वीर लगानी होगी
मालूम हो कि युगान काउंटी में हजारों ईसाइयों से चीनी सरकार के स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि जीसस क्राइस्ट उनकी गरीबी या बीमारियां दूर नहीं करेंगे, बल्कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यह करेगी. इसलिए उन्हें जीसस क्राइस्ट की तस्वीरें हटाना होगा और जीसस के तस्वीर के स्थान पर राष्ट्रपति चिनफिंग की अच्छी सी तस्वीर लगा लेनी होगी. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार चीन की सबसे बड़ी झील पोयांग के किनारे स्थित यह काउंटी अपनी गरीबी के साथ बड़ी संख्या में बसे ईसाई समुदाय के लिये जानी जाती है. इसकी 10 लाख आबादी की 11 फीसदी गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने को मजबूर है. जबकि इनमें करीब 10 फीसदी ईसाई हैं.
624 तस्वीरें हटाई
वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार युगान काउंटी में एक सोशल मीडिया अकाउंट के हवाले से पता चला है कि ग्रामीणों ने स्वेच्छापूर्वक ईसाई धर्म से जुड़े 624 तस्वीरें हटा ली हैं और उनकी जगह राष्ट्रपति जिनपिंग की तस्वीरें लगा दी हैं. हालांकि अभी भी बेहद छोटे स्तर पर यह बदलाव हुआ है. गौरतलब है कि हाल ही में चीन की सत्तारू़ढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहले से कहीं और ज्यादा ताकतवर नेता के रूप में स्थापित हो गये हैं. उनका दर्जा बढ़ाकर पार्टी के संस्थापक माओ और उनके उत्तराधिकारी डेंग शियाओपिंग के बराबर कर गया दिया है.
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