आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
यूपी के निकाय चुनाव के प्रचार के दौरान सपा नेता आजम खान ने रामपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है। आपने तीखे तेवरों में आजम खान ने कहा कि “मुसलमान कसाई नहीं है, कसाई एक कारोबार है। मोदी जी मुसलमान कसाई नहीं है। हिंदुस्तान का पहला कसाई वो था जिसने माहत्मा गांधी को मारा था। पहला कसाई वो नाथूराम गोडसे था और अगर इश्तेमाई किस्म का कसाई कोई था तो मोदी जी आपका सूबा गुजरात था जहां पर बेगुनाहों को काट कर फेंक दिया गया था। लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था। जहां मासूम बच्चो को अपने तेज़ाब के टैंक में गला दिया था जहां उनकी हड्डिया गल गयी थी। पानी बन गयी थी वो था कसाई।”
आजम ने कहा कि कसाई वो था जिसने फ्रिज में गोश्त निकाल गृह स्वामी को मार दिया था। कसाई वो था जिसने ट्रेन से उतारकर ये पूछा था कि क्या खाया है उसे मार दिया था कसाई वो था। कसाई वो नहीं था जो पाकिस्तान से जंग के दौरान टैंक के नीचे लेट गया जिसके चीथड़े उड़ गए थे वो कसाई नहीं था..वो अब्दुल हमीद था।
आज़म साहब लगता है, आपका सामान्य ज्ञान कुछ कमजोर है। नम्बर एक, अब्दुल हमीद से पूर्व स्वतन्त्रता संग्राम में अशफ़ाक़ उल्ला को भी फाँसी हुई थी, उसका नाम क्यों भूल गए? क्या वह मुसलमान नहीं था?
नम्बर दो, नाथूराम गोडसे को आप जैसी मानसिकता वाले लोग ही कातिल कह सकते हैं, और आप जैसे लोगों ने ही गोडसे के कोर्ट में दिए 150 बयानों को सार्वजनिक नहीं होने दिया। इस विषय में निम्न लेख पढ़ राष्ट्र को जवाब दें।
नम्बर तीन, फिर आपकी अपनी पार्टी के राज में मारे गए निर्दोष रामभक्तों को मरवा दिया गया, उस नरसंहार पर क्यों चुप्पी साधे हुए हो? उस पर मुलायम सिंह का यह कहना कि "मुसलमानों का विश्वास पाने के लिए अगर और रामभक्तों को मरवाना होता, तो मरवा देता।
नम्बर चार, जिस गुजरात में मारे गए जिन्दा बेगुनाहों पर आपने स्वयं अप्रत्याक्षित रूप से दबे शब्दों में सच्चाई कबूल ली है, उसके लिए आप प्रशंसा के पात्र हैं। बस एक अहसान और कर दीजिए कि अब तक उस काण्ड में कितने लोग पकडे गए हैं, वह सब के सब किस धर्म से हैं और किस पार्टी से?
नम्बर पांच, तीन दशक पूर्व ईद की नमाज़ के वक्त हुए दंगे में कितने मुसलमानों की जानें गयीं थी, उस समय उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमन्त्री थे नारायण दत्त तिवारी। आज तक उन भयानक दंगे के बारे में किसी ने बोलने का साहस किया? फिर भी मालपुए खाने कांग्रेस की गोदी में बैठ जाते हो, क्यों? और गोधरा गोधरा रोते रहते हैं सब, यह कौन सा दोगलापन है?
नम्बर छः. कुछ समय पूर्व ही हुए मुज़्ज़फरनगर दंगे याद ही होंगे, तब तो आप भी सरकार में थे, क्या साम्प्रदायिकता का नंगा नाच खेला गया था, भूल गए क्या? मुस्लिम पुलिस अधिकारी से जब दंगाइयों पर कार्यवाही के लिए बोला जाता है तो वह कहता है "पहले मै मुसलमान हूँ, बाद में पुलिस अधिकारी" और मुलायम सिंह ऐसे पुलिस वाले को दण्डित करने की बजाए उसकी पीठ थप थपाते हैं। शर्म आनी चाहिए। साम्प्रदायिकता खुद खेलो, और ईंट का जवाब पत्थर से मिलने पर चीखते हो हमारे पर जुर्म हो रहे हैं?
![]() |
| इन हत्याओं पर किसी की आवाज़ नहीं निकलती, क्यों? |
नम्बर छः. कुछ समय पूर्व ही हुए मुज़्ज़फरनगर दंगे याद ही होंगे, तब तो आप भी सरकार में थे, क्या साम्प्रदायिकता का नंगा नाच खेला गया था, भूल गए क्या? मुस्लिम पुलिस अधिकारी से जब दंगाइयों पर कार्यवाही के लिए बोला जाता है तो वह कहता है "पहले मै मुसलमान हूँ, बाद में पुलिस अधिकारी" और मुलायम सिंह ऐसे पुलिस वाले को दण्डित करने की बजाए उसकी पीठ थप थपाते हैं। शर्म आनी चाहिए। साम्प्रदायिकता खुद खेलो, और ईंट का जवाब पत्थर से मिलने पर चीखते हो हमारे पर जुर्म हो रहे हैं?
अवलोकन करें:--
Kp Singh
अकबर की महानता का गुणगान तो कई इतिहासकारों ने किया है लेकिन.....
अकबर की औछी हरकतों का वर्णन बहुत कम इतिहासकारों ने किया है ........!
अकबर अपने गंदे इरादों से प्रतिवर्ष दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करवाता था......!
जिसमें पुरुषों का प्रवेश निषेध था ........!
अकबर इस मेले में महिला की वेष-भूषा में जाता था और जो महिला उसे मंत्र मुग्ध कर देती .....
उसे दासियाँ छल कपट से अकबर के सम्मुख ले जाती थी .........!
एक दिन नौरोज के मेले में #महाराणा #प्रताप #सिंह की भतीजी, छोटे भाई महाराज शक्तिसिंह की पुत्री, मेले की सजावट देखने के लिए आई .......
जिनका नाम बाईसा किरणदेवी था ........!
जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराज जी से हुआ।
बाईसा किरणदेवी की सुंदरता को देखकर अकबर अपने आप पर काबू नही रख पाया ......
और उसने बिना सोचे समझे दासियों के माध्यम से धोखे से जनाना महल में बुला लिया .......!
जैसे ही अकबर ने बाईसा किरणदेवी को स्पर्श करने की कोशिश की ........
किरणदेवी ने कमर से कटार निकाली और अकबर को ऩीचे पटकर छाती पर पैर रखकर कटार गर्दन पर लगा दी ........
और कहा नींच..... नराधम तुझे पता नहीं मैं उन #महाराणा प्रताप की भतीजी हुं ........!
जिनके नाम से तुझे नींद नहीं आती है ......!
बोल तेरी आखिरी इच्छा क्या है .............?
अकबर का खुन सुख गया .........!
कभी सोचा नहीं होगा कि सम्राट अकबर आज एक राजपूत बाईसा के चरणों में होगा .........!
अकबर बोला मुझे पहचानने में भूल हो गई ......
मुझे माफ कर दो देवी .......!
तो किरण देवी ने कहा कि .........
आज के बाद दिल्ली में नौरोज का मेला नहीं लगेगा ..........!
और किसी भी नारी को परेशान नहीं करेगा......!
*अकबर ने हाथ जोड़कर कहा आज के बाद कभी मेला नहीं लगेगा ..........!
उस दिन के बाद कभी मेला नहीं लगा.........!
इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रचित सगत रासो मे 632 पृष्ठ संख्या पर दिया गया है।
बीकानेर संग्रहालय में लगी एक पेटिंग मे भी इस घटना को एक दोहे के माध्यम से बताया गया है।
किरण सिंहणी सी चढी... उर पर खींच कटार..!
भीख मांगता प्राण की....अकबर हाथ पसार...!!
https://youtu.be/RV2ZeQ1pbc4
आजम खान ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर चल रहे विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि यह कैसी राजगिरी है, एक फिल्म में डांस करने वाली ‘नचनिया’ से डर गए। बड़ी-बड़ी पगड़ियां लगाकर फिल्मों का विरोध कर रहे हैं। फिल्मों की मुखालिफत नहीं की जाती है, मजे लिए जाते हैं। आजम खान ने ये भी कहा कि आज जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं जो वो कल तक अंग्रेजों के बस्ते उठाया करते थे। अंग्रेजों के सम्मान में झुककर 40 सलाम करते थे।




Comments